Sunday, 28 December 2025

देवी तुलसी ने विष्णु देव को श्राप दिया Heena Hitanshu Vighnaharta Ganesh Episode 728 PenBhakti

शंखचूर तुमने आज मुझे अपना कवच लौटा करर बहुत बड़ा त्याग किया है इसलिए मैं तुम्हें अपार बल और सामर्थ्य का आशीष देता हूं सामर्थ्य का आशीष देता [संगीत] हूं [संगीत] आज मैंने तुमसे कृष्ण कवच लेकर जो किया है वह तुमसे कुछ चुराने के समान है इसीलिए मेरे अगले अवतार में मुझे माखन चोर पुकारा जाएगा जाएगा तभी मेरा प्रायश्चित होगा आपने कुछ अनुचित नहीं किया प्रभु यह कृष्ण कवच तो आप ही का था जो आपने ले लिया बस आप इतनी कृपा कीजिए मुझे आशीर्वाद देकर मुझे धन्य कीजिए कल्याण [प्रशंसा] [संगीत] हो स्वयं श्री हरि नारायण के दर्शन हुए हैं आज मुझे उन्होंने मुझे अपार बल और आज मेरे महान दिन होने का वरदान दिया अर्थात आज वो विजय मुझे अवश्य मिलेगी जिससे मेरा जन्म सार्थक होगा आज मुझे महादेव के विरुद्ध सफल होने से कोई नहीं रोक सकता कोई नहीं यह कैसा परिवर्तन है प्रभु अभी एक पल पहले यह भक्ति में ओत प्रोत था और अब अब अचानक इतना कुटिल भाव है इसके मुख में और एक ही विचार इसके मन में इस युद्ध में महादेव पर विजय देवर्ष कुछ समय पहले आप भक्त शं चूड़ को देख रहे थे जिसका हृदय मेरे सत्संग के कारण अपनी मलिन खो चुका था किंतु जब उसके आराध्य उसके सामने नहीं है वह भी भक्ति भाव से हृदय की निर्मलता से वंचित हो चुका है पुन असुर राज बन चुका है [संगीत] जब तक उसके पास देवी तुलसी के पति व्रत का दूसरा कवच शेष है मैं इस युद्ध को आगे नहीं बढ़ने दे सकता अब समय आ गया है हमारी योजना के दूसरे चरण को क्रियान्वित करने का ओम नमो भगवते वासु देवाय कृष्णाय नमो नमः ओम नमो भगवते वासुदेवाय कृष्णाय नमो नमः ओम नमो भगवते वासुदेवाय कृष्णाय नमो नमः ओम नमो भगव अब इस समस्या का एक ही समाधान है देवी तुलसी के पति व्रत के कवच का भंग होना ओम नमो भगवते वासुदेवाय कृष्णाय नमो नमः [संगीत] आज एक भक्त की नहीं अभी तो एक भगवान की परीक्षा है देवी तुलसी तुमने जन्म जन्मांतर मेरी ही भक्ति की है परम श्री कृष्ण रूप में मुझे ही अपना सर्वस्व माना है तो मैं तुम्हें कोई कष्ट कैसे पहुंचा सकता हूं किंतु आज वही मेरा कर्तव्य है और मेरी बड़ी दुविधा भी [संगीत] शंखचूड़ तो युद्ध के लिए आगे बढ़ भी चुका है किंतु प्रभु का आदेश है कल युद्ध आरंभ होने पर शंख चूर नारायण अस्त्र का प्रयोग करने का प्रयास करेगा किंतु तुम्हे उसे ऐसा करने से रोकना होगा जिससे नारायण को अपने कर्तव्य निभाने का समय प्राप्त हो यह कंकड़ ही इसका विघ्न [संगीत] [संगीत] बनेगा [संगीत] पुत्र [संगीत] [संगीत] में आया रवा स सव रथ गिरा तो क्या हुआ फिर भी युद्ध करूंगा मैं जब तक यह इस गिरे हुए रथ से बाहर आएगा और युद्ध भूमि में प्रवेश करेगा तब तक कदाचित प्रभु नारायण को पर्याप्त समय मिल [संगीत] जाएगा ओम नमो भगवते वासुदेवा कृष्णा नमो नम ओम नमो भगवते वासुदेवा इतनी अनिश्चय की स्थिति का सामना तो मैंने कभी नहीं किया आगे बढूं तो [संगीत] कैसे ऐसी घटनाओं से विचलित नहीं होगा शंखचूड़ सुरक्षित हूं मैं और सुरक्षित ही रहूंगा और सुरक्षित ही रहूंगा और सुरक्षित ही रहूंगा और सुरक्षित ही रहूंगा र प्रभु नारायण जब तक अपने कार्य में सफल नहीं होते मुझे इसे और विलंब करवाना [संगीत] होगा वहां शंख चूड़ के मार्ग में भूमि में एक दरार है उसी का लाभ उठाऊंगा [संगीत] मैं पुत्र श चूड़ [संगीत] देखो शंखचूड़ देखो तुम्हारा भविष्य भयंकर है और यह सारी अशुभ घटनाएं उसी का संकेत है यदि तुम अब भी अपनी सुरक्षा चाहते हो तो मेरी बात मानो क्षमा मांग लो और अपनी पराजय स्वीकार कर प्रभु की शरण में आ जाओ अभी भी समय है परा स्वीकार करो वो भी मैं कदापि नहीं जब तक मेरी देह में प्राण है असंभव है ये असंभव ओम नमो भगवते वासुदेवाय कृष्णाय नमो नमः श्री गणे श्री प्रभु महा गणाधीश के अनुसार अब तो प्रभु नारायण को समय प्राप्त हो ही [संगीत] [प्रशंसा] जाएगा ओम नमो भगवते वासुदेवाय कृष्णाय नमो नमः मेरी तुलसी और उसका पति व्रत अब भी मेरे साथ है जिसे कोई नहीं छीन सकता कोई नहीं एक पतिव्रता का पतिव्रत तो उसका आभूषण है उसे दूषित करने का कर्तव्य कोई कैसे निभा सकता है ओम नमो भगवते वासुदेवाय ओम नमो भगवते वासुदेवाय ओम नमो भगवते वासुदेवा [संगीत] कहीं विघ्न हरता गणेश ही तो मेरे विघ्न कर्ता नहीं बन रहे [संगीत] हैं ओम नमो भगवते वास और समय व्यर्थ करना उचित नहीं अब दुविधा के जाल से मुक्त होना ही होगा मुझे आपको उचित अवसर प्राप्त हो आपको पर्याप्त समय मिले इसमें गणेश आपकी सहायता करेगा किंतु इस कार्य का कठिन भाग तो आपको ही करना होगा ओम नमो भगवते वासुदेवाय कृष्णाय नमो नम विघ्न हरता यदि ये विघ्न उत्पन्न कर रहे हैं तो वही इन विघ्नों को दूर भी [संगीत] करेंगे सिंदूर वर्णम द्वि भुज गणेशम लम बदरम पद्म दले नि विषम ब्रह्मादेवी देवम सिंदूर वर्णम द भुम गणेशम लंबोदरम पदम दले विषम ब्रह्मा देव परि मानम सततम प्रम देव सिंदुर वर्णम गुजम प्रभु अब उसके द्वारा गने स्तुति करने के पश्चात प्रभु श्री गणेश कैसे कोई विघ्न उत्पन्न करेंगे तब तो शंख चूर द्वारा नारायण अस्त्र के प्रयोग करने में अधिक समय नहीं है अब प्रभु श्री नारायण को अपना निर्णय लेना ही [संगीत] होगा पदले निम ब्रहमान देव [संगीत] धन्यवाद [संगीत] प्रभु कभी भक्तों के उद्धार के लिए भगवान को अपना हृदय कठोर कर पाषाण बनना पड़ता है किंतु यही एक मात्र उपाय होता है भक्तों के जीवन को एक नवीन अर्थ देने का मैं तो अपने निर्णय पर अटक रहूंगा और आज महादेव पर नारायण अस्त्र का प्रयोग करूंगा प्रभु मेरे वार के लिए तैयार हो जाइए महादेव जो स्थिति कल थी वही स्थिति आज भी है नारायण अस्त्र का प्रयोग मेरा निर्णय है इसलिए आप आज भी कुछ नहीं कर [संगीत] [संगीत] [संगीत] सकेंगे [संगीत] [संगीत] ओम नमो भगवते वासुदेवाय कृष्णाय नमो नमः अर्थात अभी भी प्रभु नारायण देवी तुलसी को प्रभावित नहीं कर सके हैं प्रभु महादेव ने कहा था कल में युद्ध का धर्म अवश्य निभाऊंगा अस्त्र उठाऊंगा किंतु अपने वार से देवी तुलसी के पतिव्रत को भंग नहीं होने दूंगा प्रभु अब कुछ ही पलों में नारायणस्त्र आप पर ऐसा आघात करेगा कि आप पीछे हटने पर विवश हो जाएंगे तुलसी तुलसी तुलसी [संगीत] तुल [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] आप आ गए स्वामी आ गए स्वामी आपका इस प्रकार यहां लौट कर आना इस बात का संकेत है कि आप अपने विजय की पता लहरा कर आ रहे हैं और इसके साथ ही मेरा तप भी सफलता पूर्वक संपन्न हुआ मुझे आशीर्वाद दीजिए स्वामी ऐसे पति जो अपनी पत्नी के सुख के कुछ भी कर सके मुझे तो यह सब सुंदर लग रहे हैं यह फलों की डलिया भी यह सज्जा भी और उसे सज्जित करने वा यह हाथ भी नाम जपती हो प्रभु श्री परम कृष्ण का और मन में वास करती है चंचलता इसलिए मैं तुम्हे श्राप देती हूं तुम भूलो पर तुम मानव रूप में जन्म लो ज नहीं नहीं ये क्या देखा मैंने य कैसा विचार आ गया मेरे मन में अब शंख चूड़ अपना दूसरा कवच भी खो चुका है [संगीत] आप आप मेरी स्वामी [संगीत] नहीं कौन है आप जिसने इतना बड़ा चल करने का दु साहस किया मेरे साथ जब मेरे स्वामी युद्ध भूमि पर है उन्हें मेरे पति व्रत के कवच की आवश्यकता है तो इतना बड़ा चल करने का तो साहस कैसे किया आपने क्यों किया कौन हो तुम अपना वास्तविक रूप दिखाओ [प्रशंसा] [संगीत] मुझे [संगीत] प्रभु मेरे साथ ऐसा खो कर स्वयं प्रभु कैसे हो सकते हैं ये असंभव है आप मेरे आप मेरे प्रभु नहीं हो सकते ये ये भी आपका कोई कपट है कौन है आप जिसने एक पतिव्रता की मर्यादा उसके सम्मान को उसके पतिव्रत के मान को दल दसत कर दिया उसे बाप किया कौन है आप कौन है आप क आप क आप क आप महादेव महादेव महादेव महादेव महादेव महादेव महादेव महादेव महादेव महादेव महादेव महादेव महादे महादेव महादेव महादेव महादेव स्वामी स्वामी स्वामी स्वामी कहां है कहां है मेरे स्वामी कहां है मेरे स्वामी मुझे उनके निकट जाना है कहां है स्वामी स्वामी स्वामी [संगीत] [संगीत] ये क्या हो गया नहीं नहीं ये अनर्थ कैसे हो गया स्वामी ये ये क्या हो गया ये नहीं होना चाहिए था मेरा ताप असफल नहीं होना चाहिए था ये क्या हो गया आपको [संगीत] स्वामी [संगीत] स्वामी स्वामी [संगीत] कौन हो तुम नारायण मैं ही नारायण हूं देवी तुलसी नहीं ये भी तुम्हारा वास्तविक परिचय नहीं फिर से चल कर रहे हो तुम मेरे साथ मेरे प्रभ मेरे नारायण इतने निष्ठुर नहीं हो सकते [प्रशंसा] नहीं फरे प्रभु श्री परम इतने कठोर नहीं हो सकते और और यदि आप ही मेरे प्रभु श्री परम कृष्ण आप ही मेरे प्रभु श्री हरि [प्रशंसा] नारायण तो मुझे याद नहीं जिनके दर्शन के लिए मैं इतना तड़प वो मुझसे मेरा सब कुछ छीन लेगी मेरी अटूट भक्ति मेरे स्ने मेरे प्रेम के बदले में मुझे इस प्रकार दर्शन मेरे स्वामी को ही छीन [प्रशंसा] [संगीत] ले ये कैसी कठोरता दिखाई आपने प्रभु ये कैसे पाशा धे का परिचय दिया तो उचित है मैं आपको श्राप देती हूं आप पाषाण बन जाए आप पाषाण बन जाए आप पाण बन जाए आप पाण बन जाए मेरे प्रति आपका क्रोध उचित है देवी तुलसी आपने जो भी किया उचित किया मैंने जो व्यवहार आपके साथ किया उसके लिए मैं पाषाण बनने के ही योग्य हूं किंतु मैंने जो भी किया वो नियति के विधान के अनुसार ही किया क्योंकि निय के तो हम भी अछूते नहीं यति प्रभु अब आप मुझे इस पतिव्रता नारी को जिसके दोष रहित जीवन को आपने दोषपूर्ण बना दिया जिसके वरदान समान जीवन को आपने अभिशाप में बदल दिया उसे आप नियती की दुहाई दे रहे यह कैसी नियती है प्रभु जिसने शुभ को अशुभ बना दिया अटूट प्रेम और स्नेह को भंग किया मेरी निष्ठा पर आघात किया और वो आघात आपके भक्त के प्राण का आगात बन गया देवी तुलसी मैंने जो किया मैं वो करने के लिए विवश था क्योंकि यही एक मार्ग था जिससे शंख चूड़ के अधर्म अनीति भरे राज्य को समाप्त किया जा सकता था वो आपसे ही शक्तियां पाकर सुरक्षित था था देवी तुलसी ना ही आपका पति व्रत भंग हुआ है और ना ही शंखचूड़ की मृत्यु हुई [संगीत] है आज यहां जो भी हुआ है उसका आरंभ तो गोलोक में हुआ था सुदामा जी को राधा जी के श्राप से तो मैं आपको भी श्राप देती हूं भूलोक में एक असुर बन आपका जन्म भूलोक में एक असुर बनकर आपका [संगीत] जम तुम्हारे प्रभु वही तो है तुम्हारे सामने मुझे ही अपना प्रभु मान लो तुलसी तुमने मेरे प्रभु श्री परम कृष्ण को कहीं देखा है तुलसी सुदामा और जो दरिद्रता आज आपने अपने स्वभाव में दिखाई है वो उससे भी अगले जन्म में आपके साथ रहेगी महादेव ने शंख चूड़ को मृत्यु नहीं सुदामा जी को इस जन्म से मुक्ति दी है अब सुदामा जी अपने श्राप के दूसरे भाग दरिद्र ब्राह्मण का जन्म लेने तक गोलोक में प्रभु श्री परम कृष्ण के साथ रहने का सुख पा सकते हैं [संगीत] [संगीत] भीतर बाहर से जो सुंदरता का सागर हो जिसे बस निहारते जाने का ही मन करे और और जो इस फूलों की डलिया को सज्जित करने वाली है उस नेत्रों का तो बखान में क्या ही करूं जैसे ओस की बूंदे सीप के भीतर मोती बनकर अपनी चंचलता का परिचय दे रही [संगीत] हूं [संगीत] देवी तुलसी अब स्मरण कीजिए मैंने आपको क्या श्राप दिया था इस जन्म में आपका विवाह आपके आराध्य प्रभु से नहीं अपत एक असुर से होगा और अब जब आप एक असुर की पत्नी होने का श्राप पूर्ण कर चुकी है उसके प्रति निष्ठावान रही है पतिव्रत धर्म निभाया है तो अब समय आ गया है आपके वरदान के फलित होने का आपका पावन तुलसी पौधे के रूप में जन्म लेने [संगीत] का मैं आपको आशीर्वाद देता हूं जो पवित्रता आपके मन में बहती है और उसी का एक अंश गंडकी नदी के रूप में बहेगा और आप स्वयं पवित्रता का स्वरूप माना जाने वाला तुलसी पौधा बनेगी जो घर के आंगन में पूजा जाएगा वो पौधा जिसके कण कण में चमत्कारिक औषधिया होंगी अब आपको दिव्य पौधा बने जिसके होने से घर में अशुद्धियों का प्रवेश नहीं होता और वो अधा जो मेरी पूजा में मुझे सर्वाधिक प्रिय होगा और मेरी पूजा उस पौधे के पत्र के बिना अपूर्ण रहेगी मैं कोई भी भोग आपके पत्र के बिना स्वीकार नहीं करूंगा और वो पौधा जिसके पत्रों के सेवन से विसूचिका जैसी [प्रशंसा] [संगीत] महामारिचयादी [संगीत] [संगीत] मेरे पत्थर बनने के तुम्हारे श्राप को सत्य करने के लिए मैं शालिग्राम रूप में सदा तुम्हारे साथ रहूंगा और पत्थर के रूप में मैं तुम्हारे अंश से बनी गंडकी नदी में जाऊं प्रत्येक जन्म तुमने मुझे अपने पति के रूप में पाने का तप किया है तो अब उसका फल मिलने का भी समय आ गया है मैं आपको आशीर्वाद देता हूं मेरे शालिग्राम रूप में आपके तुलसी पौधे रूप से विवाह प्रत्येक ग्रह में जियोन के दिन मनाया जाएगा ओम जय नारायण हरि [संगीत] सम आ गया है दे आप अपने इस जीवन का त्याग कर पवित्र तुलसी पौधे और पवित्र गंडकी नदी के रूप में पुन [संगीत] जन्म ओम जय नारायण [संगीत] हरि तुम दया के सागर तुम रक्षक सबके स्वामी तुम रक्षक सबके हम मूरख अज्ञानी स्वामी तुम सबके ओम जय नारायण [संगीत] हरे सररर [संगीत] गमर [संगीत] परमात्मा सर्वेश्वर प्राण पति मेरे स्वामी प्राण पति मेरे अपने हस्त बढ़ाऊ आस में हूं तेरे ओम जय नारायण हरि संसार में होने वाली प्रत्येक घटना किसी की इच्छा या प्रयत्न द्वारा निर्धारित नहीं होती अपितु उसका निर्धारण व्यक्ति के अच्छे या बुरे कर्मों के आधार पर नियति द्वारा किया जाता है

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