Sunday, 28 December 2025

देवी छिन्नमस्ता पर असुर दंतक ने प्रहार कैसे किया AkankshaPuri Malkhan Vighnaharta Ganesh Episode

हता श्री गणेशा श्री गणेशा श्री कैसा भयंकर स्वर है ये कौन है [संगीत] मूर्ख असुर इतना भी नहीं समझता तू कि जिस पद पर आसीन होने की योग्यता ना हो उस पर सन होने का परिणाम होता है सर्वनाश तुम चाहे जो भी हो तुम्ह छोडूंगा [संगीत] [संगीत] नहीं मां छिन्नमस्ता मां के रूप में अपनी संतानों को ममता दे सकती हूं तो माता के ही रूप में उनकी रक्षा के लिए दुष्टों का संघार भी तो कर सकती हूं मां के रूप में अपनी संतानों को ममता दे सकती हूं तो माता के ही रूप में दुष्टों को दंडित भी तो कर स माता आप देवी छिन्नमस्ता के रूप में एकाक्ष से युद्ध करने चली गई युद्ध करने कहां मैं तो उसका काल बनकर गई थी वहां साक्षात आपके विकराल रूप में आपको अपने समक्ष पाकर आपकी चेतावनी सुनकर भया क्रांत तो अवश्य हुआ होगा वह दुष्ट एकाक्ष और अपने प्राणों की रक्षा हेतु वहां से भाग भी गया होगा है ना [संगीत] माता मेरे उस रूप में काल था उसके समक्ष किंतु वो मूर्ख मुझसे क्षमा याचना करने के स्थान पर मुझे और भी उत्तेजित कर रहा था क्या आपको उत्तेजित करने लगा किंतु क्यों माता विनाश काले विपरीत बुद्धि तो क्या इसका अर्थ है कि दुष्ट एकाक्ष ने अपना अहंकार अभी नहीं त्यागा था कौन है यह दुष्टा देवी जिसने मेरा असुर सम्राट एकाक्ष का अपमान करने का दसास किया है तुम चाहे जो भी हो तुम्हें तुम्हारी इस उद्दंडता का दंड अवश्य मिलेगा अभी इसी समय [संगीत] मिलेगा मुझे चुनौती देकर इस देवी ने कितनी बड़ी भूल की है यह इसे अभी ज्ञात होगा प्रणाम मातारा [संगीत] वाह उत्तम अति उत्तम आनंद आया तुम्हें अपने सम्मुख देखकर देवी या स्वर्ग में तो मैं बहुत आनंदित हो रहा हूं यह क्या कह रहे हैं अशो सम्राट आप यह देवी आप पर वार करने को तत्पर है आपको चुनौती दे रही है और आप क्रोधित होने के स्थान पर आनंदित हो रहे हैं उचित कहता है दंतकथा है अप्सरा है यह सब तो ज्ञात था मुझे किंतु यहां देवी भी है इसका भान नहीं था मुझे यह तो उन सबसे भी उ तम है बलशाली है ऐसी देवी से युद्ध हो तो आनंद का आभास स्वाभाविक [हंसी] है नीचता तो इन असरों का स्वभाव है तभी तो माता के प्रति इतने अपमानजनक शब्द बोल रहा ये [संगीत] दुष्ट सर्वथा उचित कहा सम्राट आपने हां ऐसी शक्तिशाली स्त्री और हमारी शत्रु तो उसका अंत करने में हमें आनंद होगा कहो देवी तुम अपने सभी राजाओं का स्वागत ऐसे ही करती हो या यह विशेष स्वागत है स्वर्ग लोक के नवीन राजा असुर सम्राट एकाक्ष के लिए ही है स्वर्ग का राजा है तू स्वयं को लेकर बहुत भ्रम पाल रखे हैं तूने किंतु चिंता मत कर एकाक्ष एक एक करके तेरे सारे भ्रम नष्ट कर दूंगी मैं शक्तिशाली है यह देवी किंतु दंड भी है ब्रम तो इस देवी को है अपनी शक्ति का जिसे शीघ्र मिटाए हम एक बार असुर सम्राट एकाक्ष हमें आदेश तो दे इस देवी का अंत करेंगे हम मैंने इंद्र और अन्य देवताओं को स्वर्ग लोक से भगा दिया तो उसने अपने स्थान पर तुम्हें यहां भेज दिया देवी किंतु कदाचित तुम्हें अपनी जिवा पर नियंत्रण करना नए सिखाया बहुत छूट प्राप्त है तुम देवियों को यहां स्वर्ग में जो अनुचित है किंतु अब मैं आ गया हूं सब उचित कर दूंगा सब मेरे राज्य में स्त्रियों को मैं ना ना ना ना दंतकथा लोक में असुर स्त्रियों राक्षस के साथ क्या किया था बताओ असुर स्त्रियां राक्षस असुर सम्राट हमारे रसातल लोक में तो स्त्रियां है ही [हंसी] नहीं अब इस अबोध देवी को यह भी बता दो कि हमारे लोक में स्त्रियां क्यों नहीं है असुर सम्राट आपके आदेश के अनुसार रसातल लोक की सारी स्त्रियां सारी राक्षसी को तो हम आहार बना चुके हैं इतनी निर्दयता अपनी स्त्रियों को हार बना लिया सुना तुमने देवी अब स्वर्ग लोक में भी अप्सरा और देवी की यही स्थिति होगी यही सर्वप्रथम मेरा सामना तो कर एक कक्ष तभी अन्य देवियों से भेंट कर सकेगा तू नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं मैं भला एक अबला देवी का वध क्यों करूं यह अनुचित है देवी तुम्हारे लिए तो मेरा योद्धा ही पर्याप्त है हां दंतकथा जाओ और अपनी शक्ति दिखाकर उचित पाठ पढ़ाओ इस दु साहसी देवी को अवश्य असुर सम्राट इस स्त्री से युद्ध करके मुझे असीमानंद की प्राप्ति [हंसी] होगी माता पर आक्रमण करेगा यह दुष्ट इससे जत नहीं इसका कितना परिणाम भकत ना हो [संगीत] कसे देवी अब दंडित होने के लिए तैयार हो जाओ [संगीत] तुम तुम्हारा अंत करूंगा मैं यह कैसे हो गया मेरा अस्त्र नट हो गया मेरा प्रहार असफल हो [संगीत] गया प्रणाम माता ये दूसरी देवी कहां से प्रकट हो गई तुझ असुर इतना दुस्साहस किया तूने तेरी मृत्यु तेरे समक्ष खड़ी है और उसे पहचानने के स्थान पर अपने अहंकार वश उसी पर आक्रमण करने लगा तू मूर्ख मृत्यु और दंत की इस देवी के हाथ यह कदापि संभव नहीं ए देवी तुमने मेरा अस्त्र नष्ट करने का अक्षम्य अपराध किया है जिसका दंड है तुम्हारी मृत्यु [संगीत] छोड़ दे मुझे हटा इसे मेरे मस्तक से दतक की शक्ति का सामना ही नहीं किया इसने अबे तो उसे ताड़ना भी दे रही है यह देवी ये पीड़ा मुझसे सहन नहीं होती अभी तो ये पीड़ा का आरंभ है दुष्ट [संगीत] स्वरूपा र शक्ति मेरा दंत मेरे मस्तक से फिलक कर दिया बस इतनी ही शक्ति है तेरे इस अनुचर दतक में इसके बल पर तू स्वर्ग पर राज करना चाहता था दंत अपनी पीड़ा को भूलकर वार करो एक स्त्री से पराजित मत होना दंत कदापि नहीं अब इस देवी को पराजित ही नहीं वरन इसका अंत करूंगा अंत करूंगा [संगीत] अ तंता [संगीत] सर्व शति ता या दे सर्व भूते बिता इस दुष्टा ने अंत कर दिया दंत का आप चिंता ना करें असुर सम्राट इस देवी के अपराध का मैं उचित दंड दूंगा जीवित नहीं छोडूंगा मैं उसे मेरे बंधु दंतकथा क्या इसी भह से लुप्त हो गई तुम आओ समक्ष मेरे कहां गई तुम तुम्हारे ही कारण यह सब हुआ तुम असु सम्राट का वध करने आई थी ना अब मैं तुम्हें छोडूंगा [संगीत] नहीं तुमने उस मायावी देवी को उत्पन्न किया यहां तो अब मैं दतक के वद का कठोर दंड दूंगा तुम्हें [संगीत] देवी अब तुम्हारी रक्षा कोई नहीं कर सकता मृत्यु होगी तुम्हारी मृत्यु क्योंकि तुम्हारा काल बा तुम्हारी ओर बढ़ा रहा है ये तुम्हे मसलकर तुम्हारे प्राणों को तुम्हारे शरीर से विलक कर देगा विलक यह राक्षस तो बहुत विकराल और बहुत विशाल है हा सूरी देव चिंता तो मुझे भी हो रही है तु माता की नहीं इस ससुर की इसे ज्ञात नहीं इसके दु साहस का कितना भीषण परिणाम हो सकता [संगीत] नहीं कोई नहीं है वहां जो है बस यही देवी है तक केवाद का प्रतिशोध इसी से लूंगा मैं इसी का अंत करूंगा क्या हुआ असर अपनी गति धीमी क्यों कर दी देवी नमस्ते मा नमस्ते [संगीत] नम क्या था कुछ तो था यहां या मात्र मेरी कल्पना [संगीत] थी जय काली जय काली जय काली जय काली जय काली जय काली [संगीत] और जो भी था अब कहां गया अब क्यों नहीं दिखाई देता मुझे यह किसका स्वर है किसे ढूंढ रहा है दुष्ट [संगीत] प्रणाम [संगीत] मकाली यह कैसी भयंकर देवी है जिसके दर्शन से ही आतंकित हो रहा हूं मैं [संगीत] [संगीत] क्यों रुक क्यों गया आगे बढ़ वार कर मुझ पर बाहु भज यही उत्तम अवसर है एक साथ दोनों का वध कर दो एक साथ रुको मत बाहु बुज तुमने तो इससे अधिक शक्तिशाली राक्षस हों का वध किया है भक्षण किया है उनका आगे बढ़ो बहुभुज तुम्ह अब किस बात का भ है आगे बढ़ो भक्षण भक्षण ही करना है इन दोनों का मुझे और यही करूंगा मैं जयती मंगला कारी पकारी समाज जयंती मंगला [संगीत] काही मेरे इतने विनाशक अस्त्र को ऐसे कुंदक के समान थाम लिया इस देवी ने विश्वास नहीं होता कैसे संभव है ये अवश्य ही ये भी कोई माया है इस देवी की बाहु भुज को आगे बढ़ना ही होगा वद करना होगा इसका ये है तेरा अस्त्र जिससे तू मेरा वद करना चाहता था जयंती [संगीत] [संगीत] मली [संगीत] क्यों झूक गई तेरी शक्ति अब कैसा लग रहा है तुझे ले तेरा यह अस्त्र अब हो गया यही कर रहा था ना तू देवताओं के साथ उनके लोग को छीन रहा था बोल तेरा अस्त्र मैंने छीन लिया तो अच्छा लगा तुझे ये तुम क्या कर रहे हो बाबु ये समय कड़ा का नहीं है अपनी संहारक शक्ति का प्रदर्शन करो यदि यह तुम्हारा आस्त्र नहीं लौटती तो अपना आस्त्र छीन लो इस देवी से छीन लो बोल तेरा अस्त्र चाहिए तुझे तो तू क्यों कष्ट करता है तू रुक जा वही मैं स्वयं आती हूं [संगीत] इतनी तीव्र गति है इस देवी की कि मुझे स्पष्ट दिखाई भी नहीं दे रही है कहां कहां है वह नहीं मेरा उधर हो गया यह तुम क्या कर रही हो देवी तुम बाहु बुज का हित नहीं कर सकते क भी [संगीत] नहीं पानी [प्रशंसा] ये क्या कर रही हो देवी नमस्ते सर्वशक्ति नमस्ते [संगीत] नारायण बाहु बुज को दंडित कर रही है देवी काली जिस बाहुबल का प्रयोग उसने निर्दोष असुर स्त्रियों और राक्षस के भक्षण के लिए प्रयोग किया था उसके वही बाहू उससे छीन रही है देवी [संगीत] काली म जय काली जय काली जय कालीली काली जय काली ज काली [संगीत] पापी तेरी मृत्यु हुई उचित दंड है तेरे अपराधों का बा कदापि नहीं मर सकता [संगीत] कदा देवी काली धनतक और बाहु बुज दोनों का अंत हो गया कालिका का का जयंती [संगीत] मला इस देवी की दृष्टि तो मुझ पर ही स्थिर है तो माता मां तारा और मां काली ने दंतकथा [संगीत] माता की शक्ति का प्रत्यक्ष प्रमाण देखकर तो एकाक्ष की बुद्धि आ ही गई होगी वह अवश्य अपने घुटनों पर गिरकर गिड़गिड़ा करर मां से क्षमा याचना कर रहा होगा अपने प्राणों की भिक्षा मांग रहा होगा है ना माता नहीं गणेश इसके पश्चात एकाक्ष और छिन मस्ता के मध्य एक भयंकर युद्ध आरंभ हुआ नारी शक्ति का स्वरूप है सृष्टि की प्रत्येक रचना की जननी नारी उसका अपमान करने वाले अवश्य दंड के भागी

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

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