माता मणि कर्णिका और बाबा विश्वनाथ समान रूप से एक दूसरे के प्रति निष्ठावान [संगीत] है और यही उनके अटूट जुड़ाव का संबंध है ऐसा संबंध जिसमें दोनों भागीदार एक दूसरे के प्रति सच्ची निष्ठा रखें और सदा एक दूसरे का ध्यान रखें ऐसा अनूठा संबंध विवाह का ही परिणाम होता है और यही है विवाह का दूसरा संकल्प जो माता अपने मणि कर्णिका रूप में और पिता श्री अपने बाबा विश्वनाथ रूप में समस्त संसार को समझाते हैं कितना अद्भुत कुंड है [संगीत] ये भ्राता तो इस कुंड को लेकर अत्यंत उत्सुक हो गए हैं इस अवसर का लाभ उठाते हुए मुझे उन्हें यह कथा सुना देनी चाहिए जिससे उन्हे विवाह के दूसरे संकल्प के विषय में और विस्तार से ज्ञात हो जाए एवं संभव है कि अपने विवाह के विषय में उनका विचार भी परिवर्तित हो जाए यह सत्य में वास्तव में एक विशेष कुंड है हां भ्राता जिस कुंड का निर्माण ही स्वयं श्री हरि नारायण द्वारा हुआ हो वह तो अद्भुत ही होगा मामा श्री हरि [संगीत] विष्णु गणेश अभी दिन का मध्य होने में समय शेष है तो उसका सदुपयोग कर मुझे इस कुंड की कथा क्यों नहीं सुनाते तुम अवश्य भ्राता अभी तक आपने मणि कणिका घाट की महिमा गाथा सुनी अब इस दिव्य मणि कणिका कुंड की कथा भी सुनिए वैसे तो प्रभु विष्णु और प्रभु महादेव एक ही तत्व है किंतु एक बार जगत कल्याण हेतु प्रभु नारायण ने अपनी अपार महानता का परिचय देते हुए प्रभु महादेव का भक्त बनकर काशी में उन्हें प्रसन्न करने के लिए एक बड़ा तप करने का निर्णय लिया और उन्होंने अपनी तपस्या के लिए इसी घाट का चुनाव किया फिर अपना तप आरंभ कर दिया ओम नमः शिवाय ओ नमय ओम नम शिवाय नम शिवाय ओम नमः शिवाय ओ नम शिवाय ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओ न और प्रभु श्री हरि नारायण की तपस्या 80 सहस्त्र वर्षों तक इसी प्रकार चलती रही जब तक की काशी का कण कण शिवलिंग में परिवर्तित नहीं हो [संगीत] गया श्री महादेव और माता पार्वती नारायण की तपस्या से प्रसन्न हुए और उन्होंने काशी आने का निर्णय [संगीत] लिया मेरे आराध्य महादेव और देवी पार्वती आ र अंतत व मुझे दर्शन देने आ रहे हैं किसी भी क्षण य आते ही हो किंतु किंतु उनका किस प्रकार स्वागत [संगीत] करू [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] स्वामी भ्राता श्री हरि नारायण ये क्या कर रहे हैं हरि की लीला हरि ही जाने ओ नमो भगवते वासुदेवाय नमः ओ नमो भगवते वासुदेवाय नम शांताकारम भुजग शनम पदमनाभम मुझे दर्शन देने आ गए लक्ष्मीकांतम कमल नयनम [संगीत] योगन वंदे विष्णु भ हरम सर्व [संगीत] लोक ॐ खट गम चक्र गदेश चाप परी घा शंख संध करे स्त्री नयम सर्वांग भूषा प्रणाम महादेव मेरा प्रणाम देवी पार्वती प्रणाम ता हे गौरी शंकर तपस्या सफल बनाने के लिए और मुझे दर्शन प्रदान करने के लिए आपको कोटि कोटि धन्यवाद धन्य तो आपने किया है मुझे नारायण मेरे आराध्य होकर भी सहस्त्र वर्षों तक आपने मेरी तपस्या की आपने अपने तप से काशी की भूमि को और पवित्र कर दिया है मेरी इस प्रिय काशी नगरी में प्रत्येक कंकड़ को शंकर जो बनाया है आपने नहीं प्रभु यह तो आप ही की कृपा है आप ही की लीला है मेरी तो एक मात्र इच्छा है कि काशी सदैव सुरक्षित रहे उस पर महाप्रलय का भी कोई प्रभाव ना हो और महादेव के इस पावन स्थान में मण करण का घाट पर स्थित य शक्ति पीठ ना केवल मनुष्य के लिए अ तो सभी देवताओं और ऋषियों के लिए भी तीर्थ बने आपकी इच्छा तो संसार के लिए आदेश के समान है इसलिए कुछ भी नष्ट हो जाए किंतु काशी सदैव सुरक्षित रहेगी और मण करणी का घाट शिव और विष्णु का संगम स्थान होने के कारण संसार के सर्वाधिक पावन स्थानों में से एक होगा आज के बा जो भी श्रद्धालु मण करण का घाट अथवा इस मणिकर्णिका कुंड के जल में डुबकी लगाएगा तो जल के भीतर उसे नारायण का नाम सुनाई देगा और बाहर शिव का और वह हम दोनों की कृपा का भागी [संगीत] बनेगा प्रभु नारायण की इच्छा पूर्ण करने के लिए पिता श्री और माता ने स्वयं इस कुंड में तीन दु लगाकर इस कुंड की महिमा में वृद्धि [संगीत] की [संगीत] श [संगीत] अब मनुष्य हो या ईश्वर जो भी इस कोंड में उतर करर तीन बार डुबकिया लगाएगा वह मेरे आशीष से अपने सभी पापों से मुक्ति पाएगा और मोक्ष का पात्र बन जाएगा मेरी इच्छा पूर्ण कर करने के लिए कोटि कोटि धन्यवाद प्रभु मैंने प्रभु से जो मांगा वो मैंने पा लिया अब मुझे वह कणिका देने की अनुमति दीजिए जो आपने कुंड में खोई थी भ्राता जो भी होता है उसके पीछे एक कारण होता है आप उस कणिका को वही रहने दीजिए अब जब व मणि कणिका इस गुण में गिरी जिसे आपने स्वयं अपने चक्र से बनाया है इसलिए आज से उसे चक्र पुश करनी मण करण का बुलाया जाएगा मण करण का बुलाया जाएगा और मैं स्वयं 12 वर्ष की आदि शक्ति मोक्ष की देवी मण कर्णिका के रूप में इस कुंड के निकट स्थित रहूंगी जिसे मैं यहां आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को सुख समृद्धि संतान आत्मिक और वैवाहिक सुख के साथ मोक्ष पाने में सहायक बनूंगी इसलिए आज के बाद से काशी मोक्ष थली भी रहेगी और चक्र पुष्प करणी मणि कणिका की महिमा अनंत काल तक [संगीत] रहेगी मैंने जितना मांगा था प्रभु ने उससे कहीं अधिक मुझे दिया है इसलिए केवल मैं ही नहीं सभी देवी देवता कृतार्थ यह चक्र पुष्कर्णी मणि करण का कुंड महानतम कुंड बन गया और उस दिन प्रभु और माता के उस कुंड में स्नान के बाद प्रतिदिन मध्यान में सभी देवता और सप्त ऋषि मणिकर्णिका घाट के इस पावन मणिकर्णिका कुंड में स्नान करने आते हैं और तब से लेकर अभी तक यह क्रम निरंतर सुचारू रूप से चल रहा है [संगीत] भ्राता मध्यान का समय हो चुका [संगीत] है [संगीत] दे अदभुत [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] मैं भी प्रत्येक मध्यान यहां आता हूं अपने ढूंढी राज स्वरूप में जिसमें मैंने काशी के राजा देवो दस को मोक्ष का पथ दिखाया [संगीत] [संगीत] था जब सभी देवताओं का आचमन पूर्ण होता है तो माता मणि करने का नित्य प्रतिदिन वहां उपस्थित होकर महादेव के माथे पर स्थित अर्ध चंद्र से उभरते प्रकाश पुंज को एकत्र कर स्वयं आचमन करती [संगीत] है [संगीत] ओ मम मण कणिका नमः ओम मम मण कणिका नमः ओम मम मणि कणिका नमः [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [प्रशंसा] [संगीत] हा [संगीत] कितना अद्भुत और अनोखा है माता मणि करण का और बाबा विश्वनाथ का यह संबंध एक और जहां माता संपूर्ण निष्ठा के साथ बाबा विश्वनाथ के दर्शन की प्रतीक्षा करती हैं वही दूसरी ओर बाबा विश्वनाथ भी बिना भूल प्रतिदिन दोपहर में माता के समक्ष आचमन कर उन्हें दर्शन प्रदान करते हैं ऐसा कर यह दोनों संसार को भक्ति और समर्पण की अनूठी सीख प्रदान करते हैं [संगीत] मा हमें तो अपूर्ण दर्शनों का ही लाभ हुआ गणेश भ्राता अभी भी मध्यान काल ही है हमें भी शीघ्र स्नान कर आचमन करना चाहिए तो मुझे पूर्ण विश्वास है माता हमें भी दर्शन अवश्य देंगी जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा माता ज की पार्वती पिता महादेवा देखे गणेश दे क्या कर रहे हैं य [संगीत] वहा दिखाई भी नहीं दे रहा काशी की औरत परिक्रमा लगाने के बाद भी व क्या रहा है वहा व्यर्थ चिंता ना करें आप अरे हम भजन कीर्तन कर रहे हैं गजानंद महाराज हमारे निकट अवश्य लौटेंगे जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा देवताओं पर तनिक भी विश्वास नहीं है मुझे अब आगे क्या करना है मैं जानता हूं [संगीत] मैं [प्रशंसा] भ्राता तीन दुपकी अनिवार्य है पूर्ण पुण्य फल पाने के लिए जय प्रभु विश्वनाथ जय माता मण [प्रशंसा] [संगीत] कर्णिका नारायण नारायण [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] नारायण [संगीत] [प्रशंसा] आज के बाद जो भी श्रद्धालु मण कणिका घाट अथवा इस मणिकर्णिका कुंड के जल में डुबकी लगाएगा तो जल के भीतर उसे नारायण का नाम सुनाई देगा और बाहर शिव [प्रशंसा] का नाय नारायण [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] नारायण हे माता मणि कणिका आपकी उपस्थिति काशी के लिए तो आशीष के समान है अब मुझे भी अपने दर्शन प्रदान करने की कृपा करें [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] मां यदि यहां आपके लिए सब कुछ कुशल रहा तो शीघ्र आपको देवी मण कणिका के दर्शन हो क्या मुझसे कोई त्रुटि हो गई है [संगीत] मां भ्राता आपको स्मरण है प्रभु विश्वनाथ ने मंत्र जाप को लेकर क्या कहा था यहां का एक व्रत करोड़ों व्रतों के समान है और एक मंत्र के जाप से करोड़ों मंत्रों के जाप का फल प्राप्त होता है [संगीत] [संगीत] ओम मम मण कण के नम नम ओ मम मण कणिका नमः ओ मम मण कणिका [संगीत] नमः ओम मण कणिका नमः ओम मम मण करण के नमः ओ मम मण कणिका नमः ओम मम मण कणिका नमः ओ मणिकर्णिका [प्रशंसा] नमः ओम मण कर्णिका नमः ॐ मण कर्णिका नमः [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] माता [संगीत] मां मां [संगीत] मां पुत्र [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] प्रणाम [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] प्रभु श्री राम श्री राम श्री राम राम [संगीत] राम प्रणाम माता विशाला प्रभु विश्वनाथ और प्रभु डूडी [संगीत] [संगीत] राज प्रणाम प्रभु [संगीत] महादेव [संगीत] अब आप समझे देव राजेंद्र माता मणि करण का मृत्यु की नहीं मोक्ष की देवी देवराज यही इनका वास्तविक तत्व है कदाचित वह इसकी ही प्रतीक्षा में थी कि हम इस सत्य को समझ जाए इसीलिए उन्होंने हमें अभी तक दर्शन नहीं दिए किंतु अब हमें अपने दर्शन सुख अवश्य प्रदान करेंगी माता ने तो हमें पुन दर्शन नहीं थ इस प्रकार हमारी हमारी यात्रा पूर्ण कैसे होगी सेनापति कुमार कार्तिक आप वो शक्ति कैसे प्राप्त कर सकेंगे जिससे आपको आपको पशुपतास्त्र प्राप्त होगा नहीं देवराज केवल इस यात्रा के लिए ही नहीं माता का आशीष तो मुझे अपने समस्त कार्यों के लिए चाहिए भ्राता प्रत्येक दिव्य घटना का समय निर्धारित है आप व्याकुल ना हो कुछ ही समय में ब्रह्म मुहूर्त में प्रभु विश्वनाथ के प्रथम दर्शन के लिए माता पुनः प्रकट होंगी कदाचित तब व हमें अपना आशीष देंगी हमें निराश नहीं होना [संगीत] चाहिए [संगीत] ईश्वर और भक्त के मध्य संदेह एक ऐसा आवरण है जो भक्त के ईश्वर तक पहुंचने में बाधक बनता है
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