Saturday, 3 January 2026

विष्णुदेव का असुर मधु - कैटभ से युद्ध Akanksha Puri Malkhan Singh Vighnaharta Ganesh Episode

श्री गण श्री गणे ब्रह्मदेव पर आक्रमण कर उन्हें आतंकित करने का दुस्साहस कैसे किया तुम दोनों ने स्वयं तुम ही हो नारायण तुम आ ही गए हमारे समक्ष उचित किया हमारा आदेश तो तुमसे युद्ध करना ही था सर्वथा उचित है ये उस वृद्ध देवता से तो हम बाद में निपट लेंगे सर्वप्रथम तुम्हें ही नष्ट करते हैं तुम्हे ही नष्ट करते हैं ही नष्ट करते हैं विष्णु अब हम पर वार करने का दंड देंगे तुम्हें अब तुम नहीं मात्र तुम्हारे अवशेष शेष रहेंगे [संगीत] इन दोनों दुष्टों ने तो विष्णु देव पर आक्रमण कर दिया भ्राता केटब विष्णु ने तो हमारी ऊर्जा हम पर ही लौटा दी हां भ्राता मधु हट जाओ अपने मार्ग से अपनी रक्षा करो यह ऊर्जा तो मुझ तक पहुंचने ही वाली है किंतु मैं रोक दूंगा इसे ह जो उचित था वही हुआ ये दोनों दुष्ट असुर नष्ट हो गए धन्यवाद नारायण इन असुरों के साथ इनके आतंक का भी अंत हुआ अब ब्रह्मदेव पुनः ध्यान मगन हो सकते हैं [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] वा [संगीत] [संगीत] यह कैसे संभव है इन दोनों का तो वध कर दिया था नारायण ने पुनर्जीवित हो गए ये तो मैं पुनः इन्ह नष्ट करूंगा क्या हुआ विदेव हमें पुनर्जीवित देखकर शक्ति में अब हम तुम्हारा अ [संगीत] करेंगे किंतु कैसा प्रहार करूं जिससे यह पुनः जीवित ना हो सके हमारे अंत के उपाय का विचार अवश्य करो हम पर वार भी करो किंतु हमारा क भी नहीं कर सकोगे तुम [संगीत] विष्णु य यह कैसे हुआ मां मामा जी के द्वारा मधु और कटप के वद करने पर भी वह पुनर्जीवित कैसे हो गए गणेश जी ने पुन महाकाली से प्रश्न कर दिया कहीं वो पुन गणेश जी से क्रोधित हो गई तो मैल तो आखिर मैल ही होती है कितनी बार भी हटा दो पुनः एकत्रित हो ही जाती है नारायण के कान के मैल से उत्पन्न हुए यह असुर कोई साधारण असुर नहीं थे और उनमें प्राण तो मैंने ही भूके तो उनका अंत इतनी सरलता से कैसे हो सकता था फिर फिर क्या हुआ माता फिर क्या हुआ फिर क्या हुआ यह कैसा प्रश्न है रे फिर वही हुआ जिसके लिए मैंने उन्हें उत्पन्न किया था जिसके लिए मैंने उन्ह प्राण दिए थे य भयंकर युद्ध युद्ध हुआ उन दोनों असर और मामा श्री हरि नारायण के मध्य हे नारायण देखो इधर हम तो पुना युद्ध करने आ गए कुछ नहीं तुम हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकते अपितु हम तुम्हारा अंत अवश्य करेंगे इन दोनों विकराल असरों से नारायण कैसे पार [संगीत] पाएंगे [संगीत] कहां देख रहे हो तुम दोनों मैं वहां नहीं मैं यहां हूं [संगीत] वहां नहीं यहां तुम तो मुझे ढूंढ नहीं पाए किंतु मेरे शस्त्र तुम्हें अब और समय नहीं देंगे अब मैं अपने पास से तुम दोनों का अंत करूंगा [संगीत] आ इस बार नारायण के प्रहार ने इतना कष्ट पहुंचाया है इन असरों को कि कदाचित यह पुन जीवित नहीं हो सकेंगे तुम्हारी दुष्टता का ऐसा ही अंत होना [संगीत] था कदाचित इस बार सागर की गहराई में विलीन हो गए हैं यह दोनों कृष्णाय [संगीत] गोविंदा गोपी ज वल यह कैसी ध्वनि है कहां जा रहे हो विष्णु हम तो अब भी यही है हमारा युद्ध अभी समाप्त नहीं हुआ है ये दोनों पुनः जीवित कैसे हो रहे हैं क्या सोचा था तुमने अंत हो गया हमारा तुम हमें नष्ट नहीं कर सकोगे किंतु अब हम करेंगे तुम्हारा अंत फिर वो युद्ध सहस्त्र दिव्य वर्षों तक चलता रहा कभी जल पर विष्णु देव लो अब संभालो हमारा [हंसी] प्रहार आ अरे ये कैसी ऊर्जा है इससे भी अपना बचाव करना होगा [संगीत] हमें बता कैट यह तो विचित्र कौतुक रचा है विष्णु ने हा बराता मधु जल को हिम में परिवर्तित कर दिया इसका क्या कारण है कारण अभी ज्ञात करना होगा विष्णु से ही पूछ लेते हैं यह क्या किया तुमने विष्णु देव चल को हिम बना दिया हि से वद करोगे हमारा से जड़ कर दूंगा तुम दोनों को म से जड़ कर देगा हमें भ्राता केटब हा भ्राता मधु यह तो छल है इसका इससे हमें अपनी रक्षा करनी ही होगी अब ये क्या करने वाला [संगीत] है का आ अब कदाचित पुनः गतिशील नहीं हो सकेंगे यह [संगीत] असुर अंततः इन असुरों का अंत हो ही गया और फिर कभी व युद्ध स्थल पर पहुंच गया जल के नीचे किंतु युद्ध निरंतर चलता ही रहा [संगीत] इस हिम से मुक्त होना होगा हा भ्राता मधु फिर उस विष्णु के प्राण मुक्त करेंगे हम अभी भी जीवन शेष है इनम इन दोनों के अंत का क्या उपाय है उत्तम क्रीड़ा थी यह विष्णु देव हमें आनंद आया किंतु यह क्रीड़ा तो तुम्हारे अंत के साथ ही समाप्त [हंसी] होगी इस बार किसी भी प्रकार इनका अंत अवश्य करूंगा मैं विष्णु देव अभी तक तो इस ब्रह्मदेव के सिंहासन पर हमारी दृष्टि थी किंतु अब हमें तुम्हारा आसन भी मोहित कर रहा है ये अनेक शीश वाला जीव जिस पर स्थित होकर तुम हम पर वार कर रहे हो तुम्हें पराजित कर मैं तुम्हारे इस आसन पर अवश्य स्थित होऊंगा और मेरा भ्राता कैटभ इस वृद्ध ब्रह्मदेव के आसन पर क्यों भ्राता कैटभ हां ब्रता मधु अब हमें यह शीघ्र करना चाहिए इनका दु साहस अब सभी सीमाएं लांग चुका है अब इनसे निर्णायक युद्ध करना होगा मुझे विष्णुदेव अब शीघ्र तुम्हारे प्राण तुम्हारे शरीर से विलक करूंगा मैं विष्णु के आसन अपने शीष झुकाओ हमारे समक्ष यह तो विष प्रहार कर रहा है हम [संगीत] पर [संगीत] इतने प्रचंड प्रहार के पश्चात भी यह दोनों जीवित कैसी [संगीत] है बस बहुत हुआ दोट अब तुम्हारे प्रहार का भी अंत करना ही होगा [संगीत] इसी प्रकार नारायण और मधु और कटप के मध्य भयंकर युद्ध चलता रहा नारायण ने उन दोनों हसर का सहस्त्र बार वध किया और उतनी ही बार वो ना केवल पुनर्जीवित हुए अ और शक्तिशाली और गतिशील और दुष्टता से परिपूर्ण होकर पुन युद्ध करने पहुंच [संगीत] गए यह कैसे असुर है जिनका वध नारायण भी नहीं कर पा रहे [हंसी] [संगीत] हैं बस बत हो गया माता का आदेश था कि तुमसे युद्ध करना है हो गया युद्ध अब सर्वनाश होगा तुम्हारा माता का आदेश था नारायण से युद्ध करना था [संगीत] इह फिर फिर क्या हुआ माता वही हुआ जो श्री महाकाली की इच्छा थी जो मेरी इच्छा थी क्या इच्छा थी मां आपकी तमसो मा ज्योतिर गमय अंधेरे पर प्रकाश की विजय अवश्य होती है किंतु प्रयास करते रहने और उचित समय आने पर ना पूर्व ना उसके पश्चात इसका प्रभाव हमेशा सृष्टि पर पड़ता है जिसका परिणाम हमेशा सकारात्मक होता है मनुष्य ही नहीं अपितु स्वयं ईश्वर को भी अपने कर्तव्य का पालन करना अनिवार्य होता है यही संदेश उनकी लीला से हम प्राणियों को मिलता है

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