माता कुमार कार्तिकी के नाम से ही देव सेना रोमांचित हो उती है इसके पीछे मात्र भक्ति भाव हो यह तो संभव नहीं क्योंकि देव सेना उन्हीं के विचारों में डूबी रहती है उन्हीं की ही भक्ति में लीन रहती है सदा उनकी ही कल्पना करती है मुझे पूर्ण विश्वास है माता कि इन दोनों के बीच कोई विशेष संबंध है देवी सची इसमें ना ही चिंता करने की कोई बात है और ना ही आश्चर्य की क्योंकि जब दोनों का विवाह संबंध स्थापित होने वाला है तो पुत्री देव सेना का कुमार कार्तिक के विचारों में ही रमा रहना तो स्वाभाविक विवाह हां देवी सची आपकी पुत्री देव सेना का विवाह मेरे पुत्र कार्तिकेय के साथ ही होगा मेरे पुत्र कार्तिके के साथ ही होगा वो मेरी ही पुत्र वधु बनेगी हम धन्य हो गए माता धन्य हो गए मैं आप दोनों को एक वचन देता हूं कि आपके अगले जन्म में जब सभी परिस्थितियां उचित होंगी मैं आप दोनों से विवाह अवश्य [संगीत] [संगीत] करूंगा मैं तो सब कुछ जैसे भूल च मुझे तो यहां सर्वत्र आप ही दिखाई दे रहे हैं स्वामी देव [संगीत] सेना [संगीत] आप यहां नहीं किंतु आपके पश्चिम तो है यह मैं क्या करने जा रही थी मैं ऐसा कदापि नहीं कर सकती मैं देवी मां की अनुमति के बिना कैलाश से नहीं जा सकती तुम्हारी प्रत्येक कथा का अंत केवल एक ही शब्द से होता है वे [संगीत] जब विवाह का नाम भर लेने से भ्राता कुपित होते हैं तो मैं उन्हें विवाह के लिए भला कैसे मनाऊंगा बोलो गणेश क्या उत्तर है तुम्हारे पास बोलो बोलो अनुज गणेश भ्राता कथा से विवाह की सीख प्राप्त हो रही थी तो मैंने किंतु छोड़िए ना इस बात को मैं आपको आगे की कथा सुनाता हूं कि आगे चलकर च परम कैसे पंचभूत स्थल बना भ्राता यह कथा भी प्रभु के आनंद नृत्यम से संबंधित है आनंद नृत्यम के अद्भुत अनुभव के बाद जब प्रभु श्री हरि नारायण माता लक्ष्मी के साथ वैकुंठ लौटे तो वह निरंतर आनंद नृत्यम का ही वर्णन करते रहे जिसका सीधा प्रभाव शेषनाग जी पर हुआ और अंत में जो महादेव ने अंतिम मुद्रा धारण की थी वो तो जैसे मेरे हदय में ही अंकित हो ग यह आप मुझे सहस्त्र बार बता चुके हैं प्रभु नहीं मां एक सहस्त्र नहीं एक सहस्त्र आठ बार और प्रभु के आनंद नृत्यम का इतना सुंदर वर्णन सुनकर मुझे अपने दुर्भाग्य का अनुमान हो रहा है कि मैं उस अद्भुत घटना का साक्षी ना बन सका प्रभु आपकी भक्ति से अधिक मैंने कभी कोई इच्छा नहीं की किंतु आज प्रथम बार प्रभु महादेव का आनंद नृत्यम देखने की प्रबल इच्छा हो रही है प्रभु शना यदि तुम वो दिव्य दृश्य देखना चाहते हो और महादेव के आनंदम नृत्य का साक्षी बनना चाहते हो तो उसके लिए तुम्हें दूसरा जन्म लेना होगा और उस जन्म तुम्हें महादेव का शिष्य बन उनकी कठोर तपस्या करनी होगी प्रभु जगत पिता महादेव के आनंद नृत्यम को देखने के लिए मुझे किसी भी रूप में जन्म लेना पड़े तो मेरा परम सौभाग्य हो मुझे आशीष दीजिए प्रभु एक और शेषनाथ प्रभु नारायण के आशीष की प्रतीक्षा कर रहे थे तो दूसरी ओर पृथ्वी पर गोनिका नाम की एक भक्त पुत्र प्राप्ति के लिए भगवान की प्रार्थना कर रही थी हे प्रभु मुझ गोनिका की प्रार्थना सुनिए और मुझे एक संतान देने की कृपा कीजिए ओम नमो भगवते वासुदेवाय ओम नमो भग महादेव के जिस आनंद नृत्य का गुणगान करते करते आप थकते ना थे बस उन्ह उसी मुद्रा में देखने का सुअवसर प्राप्त हो ऐसा आशीष दीजिए प्रभु शना जिस आश से तुम महादेव का भक्त बन दूसरा जन्म लेना चाहते हो उसका उचित समय आ गया है तो मुझे यह भी आशीष दीजिए प्रभु कि शिव भक्त बनकर जन्म लेने के पीछे मेरा क्या उद्देश्य है यह मैं कभी ना भूलू उनके आनंद नृत्यम को देखने का सौभाग्य प्राप्त कर सकूं प्रभु तथास्तु [संगीत] बाल स्वर में कोई मु मा कह कर पुकारी मुझे बस इसकी लालसा है हे प्रभु मुझे संतान देने की कृपा [संगीत] कर ओ नमो भगवते वासुदेवाय नमः ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः ओ नमो भगवते वासुदेवाय नम प्रभु नारायण मुझे ज्ञात था आप मुझे आशीष अवश्य [संगीत] देंगे प्रणाम [संगीत] मां मैं समय से यह संबोधन सुनने के लिए लालायित थी धन्यवाद पुत्र तुमने मेरी लालसा पूर्ण की किंतु माता आप मुझे पुत्र कहकर पु करेंगी अथवा कोई नाम भी [संगीत] देंगी पतंजलि पतंजलि पतंजलि हां पुत्र प्रभु के आशीर्वाद के रूप में पद अर्थात आकाश से गिरे और प्रसाद के रूप में मेरी अंजलि में आए इसलिए पतंजलि धन्यवाद माता तो इस प्रकार शेष नाग का नवीन जन्म हुआ और उनका नाम पतंजलि पड़ा किंतु उनका जन्म प्रभु महादेव के गुणगान सुनते सुनते हुआ था तो उन्हें बस एक बात का स्मरण रहा कि वह प्रभु के आनंद नृत्यम को देखने के इच्छुक थे इसलिए जन्मले के कुछ ही समय बाद पतंजलि ने अपनी माता से आज्ञा ली और वह प्रभु महादेव की तपस्या के लिए निकल गए कल्याण हो मुझे ज्ञात है पुत्री तुम जाना चाहती [संगीत] हो माता मुझे क्षमा कीजिए आपने मुझे शरण दी और मैं बेसुध होकर यहां से प्रस्थान कर रही थी किंतु माता मैं करूं तो क्या करूं उनका अनुसरण करने से स्वयं को रोकने में भी असमर्थ हूं मैं इतना तो ज्ञात हो गया है मुझे उनका मुझसे विवाह होने वाला है पुत्री मुझे तुम्हारा संकोच भी समझ में आ रहा है और तुम्हारे हृदय की दशा भी तुम्हारा भावी पति यात्रा पर है और तुम उससे भेंट करना चाहती हो तो मैं तुम्हें इसकी अनुमति देती हूं तो मैं तुमहे इसकी अनुमति देती [संगीत] हू किंतु माता अभी हमारा विवाह नहीं हुआ है क्या ऐसा करना उचित होगा पुत्री इतना सोच विचार करने की कोई आवश्यकता नहीं है तुम अपनी सहज प्रवृति और अपने हृदय की पुकार का पालन करो [संगीत] [प्रशंसा] पुत्री पुत्री देवसेना जब तुम्हे माता पार्वती की अनुमति है तो समझो मेरी [संगीत] भी उसके उपरांत तुम्हारा भावी पति यात्रा पर है और तुम उससे भेंट करना चाहती ह तो मैं तुम्हें इसकी अनुमति देती [संगीत] हूं मां ने उन्हें आने क्यों दिया भ्राता तो अभी भी विवाह के नाम से ही उत्तेजित हो रहे हैं यदि वह यहां आ गई तो भ्राता और भी क्रोधित हो जाएंगे फिर मैं उन्हें विवाह के लिए कैसे मना पाऊंगा वह तो केदारनाथ की ओर अग्रेसर है अब मैं क्या [संगीत] करूं गणेश अब कहां खो गए हो तुम किस विचार में डूबे हो भाभी मा की यात्रा प्रभु ये क्या कह रहे हैं आप प्रभु आप क्या कह रहे हैं मेरा अर्थ है [प्रशंसा] यात्रा ऋषि पतंजलि की आगे की यात्रा जिसके बारे में मैं आपको बताने जा रहा हूं भाभी मां भी यहां नहीं है फिर भी मैं उनके विषय में बोल उठा वो यहां आ गई तो क्या करूंगा मुझे अपना ध्यान नहीं बटने देना चाहिए भ्राता को महर्षि पतंजलि और चिदंबरम की कथा सुनाने में ध्यान लगाना चाहिए अन्यथा भ्राता समझ गए कि मेरे मन में क्या है तो वह पुनः क्रोधित हो जाएंगे ऋषि पतंजलि की कथा से ही चिदंबरम धाम का रहस्य जुड़ा है प्रभु महादेव के आकाश लिंगम का रहस्य कि वह सहजता से किसी को दिखाई क्यों नहीं देते और मात्र ऋषि पतंजलि ही नहीं इसके पीछे एक और महर्षि थे जिन्होंने बाल्यावस्था में महर्षि पतंजलि को उचित स्थान तक पहुंचने में सहायता की थी नटराज नम प्रभु नाम का शब्द मुझे उस दिशा की ओर आकर्षित कर रहा है मुझे उसी ओर जाना चाहिए [संगीत] नराज नमः ओ नटराजा नमः उन ऋषिवर का नाम था व्या ग्र पद व्या अर्थात बा उनके नाम का अथ था बाग पद हा उनके नाम के पीछे एक महान भक्त की भक्ति की कथा है बचपन से ही वह महादेव के प्रति समर्पित थे प्रत्येक भोर में वह कंकड़ और कांटों से भरे मार्ग से होकर प्रभु के लिए उत्तम कोटि के पुष्प और बेलपत्र चुनकर लाते [संगीत] थे वो महान प्रभु भक्त अपनी भक्ति में किसी कष्ट को नहीं देखते थे [संगीत] वर्षों ऐसी अपार भक्ति के बाद जब प्रभु उनसे प्रसन्न हुए और उनके सामने प्रकट होकर उ वरदान देने की इच्छा व्यक्त [संगीत] की प्रभु प्रभु प्रणाम प्रभु बस मैं तुम्हारे तब से प्रसन्न हुआ कहो क्या वरदान चाहते हो प्रभु मैं सदा आपकी भक्ति में डूबा रहू सदैव आपके लिए सुगंधित पुष्प और बेल पत्र चुनकर ला सकू बस यही तो एक इच्छा है मेरी किंतु कांटों भरे मार्ग पर मुझे मनुष्य के चरण सीमित कर देते इसलिए मुझ पर दया कर मुझे बाग के समान पांव और दृष्टि दीजिए जिससे भोर में कोई भ्रमर उन पुष्पों का स्पर्श कर सके उससे पहले ही मैं उन्हें तोड़ कर ला सकू तथास्तु [संगीत] [संगीत] अपने इस भक्त पर इस कृपा के लिए कोटि कोटि धन्यवाद प्रभु कोटि कोटि धन्यवाद इस प्रकार इस दिव्य घटना के उपरांत ऋषिवर का नाम पड़ा व्याघ्र पद कितने महान भक्त थे व भक्ति में सच्चा भक्त यदि भगवान से कुछ मांगता भी है तो वह केवल होता है प्रभु की भक्ति हां भ्राता इसलिए वह प्रभु महादेव के महानतम भक्तों में से एक है और ऐसे ही भक्तों से स्वयं भगवान की भी महिमा बढ़ती [संगीत] है [संगीत] आ [प्रशंसा] [संगीत] आ प्रभु भूख के कारण तो जैसे मेरे प्राण ही निकले जा रहे हैं तो फिर उस बालक की क्या अवस्था होगी वो तो अभी भी एक अबोध बालक ही है भूख तो मुझे सता रही है कि तू जितना भोजन का विचार करूंगा वो त नहीं सताएगी यहां तो चारों और व्यंजन ही व्यंजन [संगीत] है मैं तो ू ही [संगीत] खाऊंगी भोजन नहीं है यह तो मिट्टी पत्थर भर [संगीत] है भूख जब इतनी बढ़ जाती है तो वह भोजन का भ्रम उत्पन्न करती है वही मेरे साथ हो रहा है किंतु मैं क्या करूं अब तो यह भूख असहनीय हो गई है हावी हो रही है मुझ पर इससे कैसे संघर्ष करूं मेरे लिए तो प्रभु की भक्ति मेरा भजन और भोजन दोनों है मेरे लिए लड्डू खीर चूरमा सब कुछ उनके नाम में ही [प्रशंसा] [संगीत] प्रभु सत्य है प्रभु में विश्वास ही सर्वोच्च है भूख प्यास नहीं क्योंकि उनका नाम लेने से ही भूख प्यास दोनों मिट जाएंगे ओम सुब्रमण्यम कार्तिके स्वामी ओ सुब्रमण्यम कार्तिके स्वामी ओम सुब्रमण्यम कार्तिके स्वामी ओम सुब्रमण्यम कार्तिके स्वामी ओ सुब्रमण्यम कार्तिके स्वामी भूख क्या क्या नहीं कराती अभी तो आरंभ है इनकी भूख की तड़प से तड़प देवता भी [संगीत] ओम सुब्रमण्यम कार्तिके स्वामी ओम सुब्रमण्यम कार्तिके स्वामी ओम सुब्रमण्यम कार्तिके स्वामी ओम सुब्रमण्यम कार्तिके [संगीत] स्वामी ओ कार्तिके सुब्रमण्यम स्वामी ॐ कार्तिके सुब्रमण्यम स्वामी [संगीत] नमः मैं आपका आदेश समझ चुका हूं [प्रशंसा] [संगीत] मा [संगीत] जाओ सुनिश्चित करो के आज महेंद्रपुरी की रसोई घर में सपन भोग बनने चाहिए भूख मिटे या ना मिटे किंतु इनकी भक्ति अवश्य [संगीत] मिटेगी [संगीत] ओम सुब्रमण्यम कार्तिके स्वामी [संगीत] भोजन मैं भी देखता हूं कि भूखे पेट कैसे भक्ति करते हो तुम [संगीत] दोनों मेरी भूख तो बढ़ती ही जा रही है आपकी युक्ति सफल हो रही है असुर सम्राट एक भक्त तो अपनी भक्ति ही भूल रही है नहीं नहीं यह तारना सही नहीं जा रही है मुझसे भोजन चाहिए मुझे भोजन दीजिए मिलेगा अवश्य मिलेगा भोजन ही नहीं 56 भोग का आनंद मिलेगा पर इस सत्य को स्वीकार करो अपने जेष्ठ भगवान सुरा पद्मन को अपना भगवान [संगीत] मानो सच्चा भक्त भौतिक पदार्थों के प्रति आसक्ति से विरत हो प्रभु भक्ति को ही श्रेष्ठतम वरदान समझता है
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