[संगीत] यहां पूजा हो रही है किंतु प्रसाद कहां [संगीत] है रुक रुक [संगीत] रुक हरि हरि तो लिखा है यहां किंतु हरि भोजन तक कहां पहुंचा रहे हैं मुझे [संगीत] हमारे विश्वास की आज की डोर अब टूट रही है कैसे पालनहार है आप जो आहार भी नहीं दे सकते [संगीत] ब पुत्री अंधेरा होने वाला है और पुतरी कहां चली गई अभी तक लौट क्यों नहीं ी घर से बाहर है मुझे चिंता हो रही है किंतु मैं करू तो क्या करू क कई वो किसी किसी विता में तो नहीं [संगीत] है आज भी भूखे पेट ही सोना [संगीत] होगा नहीं भगवान नहीं है नारायण नहीं है सत्य नहीं है वो मिथ्या [संगीत] [संगीत] है [संगीत] प्र के प्रतिमा श्रीमन नारायण नारायण हरि [संगीत] हरि [संगीत] प्रभु यदि आप सचमुच परम सत्य है तो सत्य को उजागर कीजिए संकेत दीजिए मुझे प्रभु हमसे ऐसी क्या भूल हो गई है जिसके कारण हमें इतने कष्ट का सामना करना पड़ रहा है प्रभु मैं प्रण लेती हूं मैं उस भूल को अवश्य सुधारी बोलो श्री सत्यनारायण भगवान की [संगीत] जय बोलो श्री सत्यनारायण भगवान की जय बोलो श्री सत्यनारायण भगवान की [संगीत] जय प्रभु श्री नारायण नारायण [संगीत] हरि श्रीमन नारायण नारायण हरि हरि भजमन नारायण नारायण हरि हरि श्रीमन नारायण नारायण हरि हरि भजमन नारायण नारायण हरि हरि श्रीमन नारायण नारायण हरि हरि भजमन नारायण नारायण हरि [संगीत] [संगीत] हरि [संगीत] [संगीत] पुत्री लोक श्री सत्यनारायण भगवान के व्रत और पूजा का प्रसाद मैं सभी को प्रभु श्री सत्यनारायण पूजा के लिए आमंत्रित करने जा रही हूं कोई आवश्यकता नहीं है अन्य लोगों को यहां आमंत्रित करने की श्रीमन नारायण नारायण हरि हरि भजमन नारायण नारायण हरि [संगीत] हरि आपको ये जानकर अति प्रसन्नता होगी कि मैंने संकल्प लिया है कि मैं प्रभु श्री सत्यनारायण जी की पूजा भी करूंगा और उनका व्रत आप तो आज श्री सत्यनारायण जी का व्रत करने वाले हैं और मैंने तो सारी तैयारी भी कर दी है एक व्यापारी की धर्म पत्नी होकर आप ऐसे विचार ला रहे हैं मन मां पिताजी से सदा सत्य नारायण भगवान की पूजा के लिए कहती थी और पिताजी सदा अपना संकल्प टालते रहते थे [संगीत] प्रभु आपकी अपरंपार महिमा को स्वीकार नहीं किया स्वामी ने मेरे इतने कहने पर भी उन्होंने अपना संकल्प पूर्ण नहीं किया प्रभु किंतु प्रभु आपके इस भक्त को इस कष्ट से भरने की कृपा कीजिए प्रभु मुझे और मेरे स्वामी को क्षमा कीजिए प्रभु मेरे इस परिवार पर दया कीजिए प्रभु दया [संगीत] कीजिए सत्य है प्रभु श्री सत्यनारायण जिसका प्रमाण है यह व्रत जिससे सुख के द्वार खुल जाते हैं पुत्री तुम्हें भी यह व्रत करना चाहिए सभी दुख दूर होंगे अपार सुख की प्राप्ति होगी भगवान नहीं है नारायण नहीं है सत्य नहीं है वो मिथ्या [संगीत] है एक और दोष किया [संगीत] मैंने [संगीत] हे प्रभु आप दया निधान है आपने मेरी सुन ली मुझे संकेत दिए हे परम सत्य परम [संगीत] प्रभु हे सत्य नारायण भगवान आपको कोटि कोटि नमन तुम तारक हो जग के सुमिर किसे कर स्वामी मैं पूजा का पु बंद कर नित्य चढ़ू ओम जय नारायण हरे मा धीरे मां मैं कहां थी तुम पुत्री कहां थी मैंने तुमसे कहा था ना कि सूर्यस्त होने से पहले लौट आना तो फिर तुम आई क्यों नहीं मैं कितनी पीत हो गई थी मां मां हमसे भूल हो गई है बहुत बड़ी भूल भूल तो हुई है हमसे पुतरी भूल तो हुई है स्वामी ने अपना संकल्प पूर्ण नहीं किया प्रभु को दिए हुए शब्दों का मान नहीं रखा पर इसमें हम सभी दोषी है पिताजी का संकल्प हम भी तो पूर्ण कर सकते थे उन्होंने नहीं रखा किंतु हम तो व्रत रख सकते थे मां प्रभु प्रण मैं उस भूल को अवश्य सुधारी सत्य है प्रभु और उनकी सत्यता का प्रमाण आज मुझे मिल गया है मैंने प्रण लिया है मा श्री सत्यनारायण भगवान का ्र मैं अवश्य रखूंगी और मैं भी तुम्हारे साथ य व्रत अवश्य करूंगी पुत्री किंतु किंतु क्या मा किंतु जहा अन्न का एक दाना नहीं है वहा सभी सामग्री वो भी सवा शेर मात्र में कहां से लाएंगे हम पुत्री जो प्रभु सत्य है उन पर अविश्वास कैसा मां हमारा भय मिथ्या है हमारे प्रभु सत्य है आज उन्होंने हमें यह प्रसाद दिया है कल सामग्री भी देंगे आप निश्चिंत रहिए मां और वैसे भी प्रभु तो अपने भक्तों के भक्ति के भूखे हैं और हम हम उनकी कृपा दृष्टि [संगीत] के मां प्रसाद ग्रहण [संगीत] कीजिए [संगीत] भूल कितनी भी कैसी भी हो प्रभु अपने भक्तों का साथ कभी नहीं छोड़ते उनकी पुकार अवश्य सुनते हैं प्रभु श्री सत्यनारायण ने कलावती को अपने होने की सत्यता का विश्वास ही नहीं दिलाया बल्कि उसे अपनी भूल सुधारने का अवसर भी प्रदान किया फिर क्या हुआ राजन कलावती वृत की सामग्री जुटा सकी जब मैं समृद्ध था तब मैं किसी से कुछ भी नहीं बांटता था ना ही किसी प्रकार का दान पुण्य करता था जब कोई दीन दुखी मेरे पास आता था तब मैं उसे दुत्कार दिया करता था और जब मेरे स्वयं के परिवार ने दूसरों से दान मांगा तो सभी को मना कर देना चाहिए था किंतु प्रभु का चमत्कार देखिए उस दिन किसी ने भी ना नहीं [संगीत] किया [संगीत] धन्यवाद श्री सत्यनारायण जी की पूजा में अवश्य [संगीत] आइएगा श्री सत्यनारायण जी की पूज में आवश [संगीत] है आज श्री सत्यनारायण जी की पूजा में आप अवश्य धार [संगीत] एगा मैंने कहा था ना मां प्रभु अवश्य कृपा करेंगे हम पर कल जैसे उन्होंने प्रसाद दिया था वैसे ही आज हमारे संकल्प पूर्ति के लिए उन्होंने ही हमारी झोली भरी है मां धन्य हो प्रभु [संगीत] धन्य आप भी बड़े दयालु है स्वामी भक्त ने आपकी पूजा क्या आरंभ की और आप यहां फल देने के लिए व्याकुल होने लगे भगवान तो भक्त और उसकी भक्ति के अधीन होते प्र भक्त और भगवान तो वैसे भी एक दूसरे से विलग हो ही नहीं सकते भक्त भगवान को स्मरण करने का अवसर ढूंढता है तो मैं भक्त के साथ उसकी परछाई बन खड़ा होने [संगीत] का लो भोजन ग्रहण [संगीत] करो एक दिन तुम्हारे राजा को अपनी भूल का पता अवश्य चलेगा तब हम उसे बताएंगे कि यहां कारागार में तुम दोनों ने हमारे साथ कैसा व्यवहार किया है शांत हो जाओ पिताजी ये क्या कर रहे हो तुम बुरे कर्म कर हंसने वालों को आगे चलकर रोना ही पड़ता है अपने हर कर्म का दंड भोगना ही होता है हमने तो जो किया सो किया तुम्हें किन बुरे कर्मों का फल मिल रहा [संगीत] है यदि यह बुरे कर्म का फल है तो अच्छे कर्म का फल भी मिलेगा तुम्हारे महाराज को उनकी भूल का भान अवश्य [संगीत] होगा चंद्रकेतु के हाथ से आज तक कोई चूक नहीं हुई लेकिन आज यह कैसे हुआ चूक भी हुई और ये घाव भी लगा फिर प्रयास करता [संगीत] हूं अब तो मेरा धनुष ही टूट [संगीत] गया [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] मां पूजा के लिए सब कुछ तैयार [संगीत] है [संगीत] किंतु श्री सत्यनारायण जी की पूजा में अतिथियों का आना आवश्यक है पुत्री परंतु अभी तक कोई आया ही [संगीत] नहीं [संगीत] गौ माता लेकिन हमें तो अन्य अतिथियों की प्रतीक्षा थी [संगीत] ना मा मैंने कहा था ना पुत्री कि हमारे घर कोई नहीं [संगीत] आएगा मां तो क्या हो गया यह गौ माता ही हमारी अतिथि है पूजा के बाद हम इन्ह प्रसाद [प्रशंसा] देंगे हां पत्री तुम उत कह रही हो [संगीत] आ [संगीत] क्या हुआ है आज मैं बारबार आहत क्यों हुआ [संगीत] [संगीत] आ यह मुझे क्या हो रहा है मेरा संतुलन क्यों बिगड़ रहा है [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] [संगीत] मां [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] सावधान चंद्र केत अब कोई चूक नहीं होने [संगीत] देना सावधान रहने के बाद भी ऐसा क्यों हो रहा है मेरे [प्रशंसा] [संगीत] साथ अब कहीं सया भी ना टूट जाए [संगीत] किंतु ऐसा क्यों हो रहा है प्रभु मुझसे कोई भूल हुई हो तो मुझे संकेत दीजिए मैं उसे अवश्य सुधार मुझे संकेत दीजिए प्रभु मुझे संकेत दीजिए मैं उसे अवश्य [संगीत] सुधार [संगीत] [संगीत] रघु मैं बारबार क्यों आहत हो रहा हूं मैंने जानबूझकर तो कोई भूल नहीं की पूर्ण विश्वास है तुम्हे कि तुमने कोई भूल नहीं [संगीत] की प्रभु मेरा मार्ग दर्शन कीजिए मुझसे क्या भूल हुई है जो निर्णय करते हो उन पर कभी विचार करते हो तुम क्या वो सभी निर्णय उचित थे महाराज यही है वो दोनों चोर अरे नहीं नहीं क्या बोल रहे हैं आप देखिए महाराज हम लोग कोई चोर बोर नहीं है हम लोग तो दोनों व्यापारी है महाराज तुम्हारे सैनिकों ने जब साधु व्यापारी और उसके जमाई को दोषी ठहराया था तो क्या तुमने खुले मन से दोनों पक्षों की बात सुनी थी ये दोनों उसी नौका में चढ़ा रहे थे यदि हमें थोड़ा सा भी विलंब होता तो ये दोनों संदूक के साथ निकल जाते अरे नहीं नहीं महाराज य सत्य है तुमने अपना अंतिम अवसर भी गवा दिया है असत्य बोलने वाले दया के नहीं दंड के पात्र होते नहीं प्रभु जो मेरे सैनिकों ने कहा वह तो मैंने सुना लेकिन जिनको वो दोषी ठहरा रहे थे उनकी बातों को मैं अनसुना करता रहा उनके दोष का क्या तुम्हारे पास कोई ठोस प्रमाण था प्रमाण प्रभु मैंने तोस पर उचित विचार ही नहीं किया और बिना प्रमाण जांच के निर्णय सुना दिया उन्हे दंड दे दिया स्मरण है ना राजन एक निर्दोष को दंड देना अधर्म है और एक राजा की यह सबसे बड़ी भूल है तुम्हें न्याय करते समय साधु और उसके जमाई के पक्ष को भी सुनना चाहिए था प्रभु प्रभु मुझे क्या संकेत देने का प्रन कर अब वो समय आ गया था जब महाराज चंद्र केतु को उनके भूल का भान होने वाला था एवं परिस्थितियां सामान्य होने वाली थ मुझे बारंबार ऐसा क्यों प्रतीत हो रहा है जैसे हमसे कोई भूल हुई हो जगत कोरी मान [संगीत] सायोग एक पहर और [संगीत] बयाया मुझे निमंत्रण दे अब मैं स्वयं जाऊंगी और पूछूंगी क्या मैं उनकी पुत्री नहीं क्या मैं इस परिवार का अंक नहीं क्या इस पूजा में भाग लेना मेरा अधिकार नहीं यह कैसा बवंडर कैलाश की ओर बढ़ रहा है विवश होना पड़ा मुझे बिना निमंत्रण पाए कैलाश आने पर [संगीत] क्या है इस बवंडर का स्त्रोत जो भी हो मैं श्री सत्यनारायण पूजा मध्य में छोड़कर तो कहीं नहीं जा सकता पूजा संपन्न होने पर ही मैं कुछ कर सकूंगा पूजा संपन्न हो उससे पूर्व कैलाश को मेरा क्रोध सहना होगा एक पुत्र का क्रोध पुत्री का क्रोध पुत्री का क्रोध जब कोई व्यक्ति अपनी भूल को स्वीकार कर उसे सुधारने का प्रयास करता है तो ईश्वर सदैव उसकी सहायता करते हैं
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[संगीत] महाभारत प्रता श्री आपने सु शर्मा को ऐसा वचन क्यों दिया मेरे वचन पालन करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता अनुज तुम क्या समझते हो कि स...
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[संगीत] यहां पूजा हो रही है किंतु प्रसाद कहां [संगीत] है रुक रुक [संगीत] रुक हरि हरि तो लिखा है यहां किंतु हरि भोजन तक कहां पहुंचा रहे...
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महाभारत इच्छा है तुम्हारी बस इसने तो एक ही रट लगा रखी है केशव इसे तो आपको गुरु बनाना है वस इस देश में गुरुजनों की क्या कमी है तुम हमें ह...
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