Friday, 2 January 2026

मार्केंडय के प्राण हरने आये काल देव Triyug Ishant Mahabali Hanuman Episode 252 Pen Bhakti

[संगीत] आशुतोष महादेव यह क्या यह भोले बाबा का ही रूप है हनुमान तुम्हारे भोले बाबा आशुतोष है ढर दानी है आशुतोष का अर्थ है अति शीघ्र संतुष्ट होने वाले हां मेरी मां ने भी मुझे यह कहा था कि महादेव जी को मात्र बेलपत्र चढ़ा दिया जाए तो वे बहुत प्रसन्न हो जाते हैं किंतु धर दनी अर्थात ढर दानी का अर्थ है दोनों हाथों से सब कुछ प्रदान करने वाला अर्थात भगवान शिव अपने जिस भक्त पर प्रसन्न हो जाते हैं उसे समस्त ऐश्वर्य एवं शक्तियां प्रदान कर देते हैं किंतु ऋषिवर देवर्षी नारद जी ने जो मार्कंडेय मंत्र में ऐसा क्या है हनुमान मृत्युंजय का अर्थ ही है मृत्यु पर विजय दिलाने वाला इस मंत्र का स्मरण मात्र से ही अकाल मृत्यु का भय दूर हो जाता है इसलिए इसे मृत्युंजय मंत्र कहते हैं ओ त्र यजामहे सुगंधि पुष्टिवर्धनम उर्वारुकमिव बंधना मृत्यु मुय [संगीत] मामता मृत्यु पर विजय यह तो सर्वश्रेष्ठ मंत्र होगा ऋषिवर आप इस मंत्र के बारे में विस्तार से बताइए और हनुमान की जिज्ञासा शांत कीजिए अवश्य इस मंत्र में 35 अक्षर है 35 अक्षर हां बालको अक्षर को ब्रह्म माना गया है हां ऋषिवर मुझे स्मरण है मां ने मुझे बताया था अक्षर ब्रह्म के बारे में जब मुझे सर्वप्रथम ओम लिखना सिखाया था माने ओम ही ब्रह्माना है इसी से यह सारा संसार बना है बालको इस मंत्र के 33 अक्षर 33 ब्रह्म अर्थात 33 देवताओं के प्रतीक है मारुति उत्सुक शिव संग ज्ञान चाहे आशुतोष का ज्ञान शीघ्र तुष्ट जो आशुतोष वो अवढर दनी शिव नि दोष वो मुनि मतंग समझाते उनको ज्ञान समुद्र कहे जग जिनको महा मृत्युंजय महिमा न्यारी हनुमत मन सब संशय हारी ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली [संगीत] हनुमान किंतु ऋषिवर किंतु इससे मृत्यु पर विजय कैसे संभव होती है हनुमान इस मंत्र के उच्चारण के साथ ही उस समस्त 33 ब्रह्मा अदृश्य रूप में भक्त की रक्षा करने के लिए तत्पर हो उड़ते हैं यह तुम्हें आगे की कथा सुनने के पश्चात ज्ञात हो जाएगा बालकों अब आगे की कथा ध्यान से सुनो देवऋषि नारद के अंतर्ध्यान होते ही मारकंडे जा पहुंचा केदार क्षेत्र वहां उसने अपने हाथों से शिवलिंग का निर्माण करके उसने भगवान शिव की आराधना आरंभ कर दी ओम त्रयंबकम यजामहे सुगंधिम श्री वरदा नाम उवा भवना मृत्य मोक्षी य मामता किंतु ऋषिवर मारकंडे जी के तो जीवन का अंतिम दिवस था फिर उन्होंने कितने दिनों तक आराधना की हनुमान आराधना के लिए कोई समय सीमा नहीं होती है आराधना में भक्ति श्रद्धा एवं समर्पण की गहराई पर ही मंत्र की सफल निर्भर करती है मारकंडे ने अवलंब मंत्र का जाप आरंभ कर दिया ओ यमकम यजामहे सुगंधिम पुष्टि वनम उवाम वंदना मृत्य मोक्षी य मामता ॐ त्रयंबकम यजामहे सुगंधिम श्री वरदाना उवा ता तो क्या सत्य में मारकंडे जी की ओर भाग बढ़ रहा था हा हनुमान मारकंडे का जाप आरंभ हुआ ही था कि उसका अंत काल बाग का रूप लेकर बार कंडे की ओर पढ़ने लगा ओ त्र यजामहे सुगंवा त्रयंबकम यजामहे सुगंध नम ॐ त्रयंबकम यजामहे सुगंधिम पुष्टि वरदान उरवा कम वंदना मृत्य मोक्षी यमा मृता मृत्य मुक्षीय मामता ॐ त्रयंबकम यजामहे सुगंधिम पुष्टि वद उवा वंदना त्य मोक्षी य मामता ओम यजामहे सुगंधिम वदनम मोक्षी अ मामता ॐ त्रयंबकम यजामहे सुगंधिम श्रीना [प्रशंसा] [संगीत] त्र नम [संगीत] उवा देवी मां का वाहन है सिह उन्होंने ही रक्षा की होगी मारकंडे जी की जब भक्त पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ तप में लीन होता है तो प्रकृति भी उसकी रक्षा करने के लिए तत्पर हो उठती है प्रकृति को भी देवी मां का ही रूप माना जाता है कालवा ग्र के जाने से मार्ग जी की मृत्यु भी टल गई होगी ना ऋषिवर हनुमान काल का विधान अटल और कठोर है जो कभी परिवर्तित नहीं होता नियम तोड़ने का दंड हनुमान को मिलना ही चाहिए मैं हनुमान को दंड देकर ही रहूंगा नियम है तो यम है यदि कालदेव अपने नियम पर अटल रहे तो मार्कंडेय जीवन दान कैसे मिल सकता था बड़ी ही विकट स्थिति उत्पन्न हो गई होगी ना हां हनुमान विधान ही काल की पहचान है यम के नियम जितने कठोर है उतनी ही कठोरता से पालन करवाते हैं कालदेव इसलिए उन्होंने मारकंडे के पास स्वयं ही जाकर उसके प्राण हरने का निर्णय ले लिया कालदेव निरंतर प्रयास कर रहे थे और उधर मार्कंडेय की सु बुध नहीं थी यहां तक कि पतझड़ के सूखे पत्ते उसे ढकने लगे थे ओम यजामहे पुनम बालक मारकंडे तुम्हारे मृत्यु का समय आ गया है मेरा मृत्यु पाश इसी क्षण तुम्हारे प्राण हर [संगीत] लेगा यह तो उचित किया मारकंडे जी ने कि उन्होंने शिवलिंग को पकड़ लिया एक प्रकार से भोले बाबा के शरण में चले गए होंगे वो हा हनुमान उन्हे मंत्र की शक्ति और भगवान शिव पर पूर्ण विश्वास [संगीत] था सुग भावता का कोई अर्थ काल के समक्ष सर्वोपरि है काल के नियम नियम है तो यम [संगीत] है महादेव यह तो महादेव है अब तो मेरा महादेव है मेरे साथ ॐ त्रयंबकम यजामहे सु पुष्टिवर्धनम उम मारकंडे ओ महादेव भी नहीं बचा पाएंगे तुम्हारे प्राण आज [संगीत] मुझसे [संगीत] मामता प्रणाम [संगीत] महादेव [संगीत] महादेव आप तक मेरी करुण पुकार पहुंच ही गई कोटि कोटि प्रणाम [संगीत] शिवशंकर मारकंडे तुम्हारी निष्ठा और मात पितृ भक्ति ने प्रसन्न कर दिया है मुझे पुत्र मांगो क्या वर चाहिए तुम आपके दर्शन हो गए मेरा जीवन धन्य हो गया मुझे अपने लिए कुछ नहीं चाहिए बस मेरे माता पिता की सेवा कर सक इतना ही और जीवन चाहिए मुझे मेरी अल्पायु के बारे में सोच सोच कर वर्षों से दुख उठा रहे हैं बस उनका यह दुख दूर हो जाए इतनी ही अभिलाष है मेरी तो तुम मात्र अपने माता-पिता की सेवा के लिए और जीवन चाहते हो मेरा परम उपदेश तो मेरे माता पिता की सेवा है किंतु मैं लोक कल्याण के लिए भी अपना जीवन समर्पित करने के लिए तैयार हूं अच्छा तो यह बताओ तुम्हारी दृष्टि में लोक कल्याण क्या है समाज में सद्विचार सद्गुण सद धर्म सत्कर्म और सत्य वचन का प्रचार एवं प्रसार करना इनके प्रति जन साधारण को जागृत करना ही लोक कल्याण है वर कंडे तुम्हारी तेजस्विता ने तुम्हें इस युग दृष्टा मंत्र का नमक बना दिया मैं तुम्हें दीर्घायु होने का वरदान देता हूं चिरंजीवी भवन यह क्या किया आपने महादेव यह असंभव है इस बालक की आयु पूर्ण हो चुकी है के प्राण में अपने साथ ले जाने आया हूं लदेव यह संसार कर्म प्रधान है कर्म से मनुष्य अपने भाग्य को भी परिवर्तित कर सकता है मारकंडे ने भी अपने कर्म से अपनी मृत्यु को टाल दिया है इसलिए अब आप भी अपने धाम को लौट जाइए [संगीत] तेजस्विता की विजय हुई अंत में मारकंडे जी ने वरदान पा ही लिया फिर तो महादेव के कहने पर कालदेव अपने धाम को लौट गए होंगे ना नहीं हनुमान कालदेव नहीं [संगीत] लौटे आश्चर्य है सृष्टि के सूत्रधार त्रिदेव में से एक महादेव के कहने पर कालदेव नहीं माने फिर क्या किया कालदेव ने कालदेव अपने नियम से बधे हुए थे उन्होंने कहा क्षमा करें भगवन किंतु आप ही ने मुझे काल व्यवस्था सौंपी है आयु पूर्ण होने पर आत्मा को ले जाकर उसे कर्म फल प्रदान करना ही मेरा धर्म है इस बालक की आयु पूर्ण हो चुकी है अब मुझे उसकी आत्मा ले जानी होगी मुझे मेरा धर्म निभाने दे प्रभु कालदेव सत्कर्म सब धर्मों से ऊपर है जगत के हित के लिए सत्कर्म को प्रधानता देना मेरा ही नहीं आपका भी कर्तव्य है अ अब आप यह धर्म हर त्याग कर मारकंडे को आशीर्वाद प्रदान करें ओवा ओ नम किंतु इससे काल के नियम भंग हो जाएंगे महादेव तो आप निभाए अपना धर्म मैंने भी जगत हित का धर्म निभाते हुए इसे चिरंजीवी होने का वरदान दे दिया मैं आपके और इस बालक के मध्य खड़ा हूं आपको मेरा सामना करना पड़ेगा [संगीत] काल जैसी आपकी आज्ञा प्रभु मैं नियमों से बंधा हुआ हूं [संगीत] वायु के टकराने से पर्वत नहीं हिलते यह बोध है मुझे किंतु मैं अपना धर्म नहीं त्याग सकता चाहे मेरा नाश हो जाए मुझे क्षमा कीजिए महादेव यह विवशता है [संगीत] मेरी मारकंडे पुत्र मारकंडे राम महादेव नारायण [संगीत] नारायण मुझे भी इस बालक की भक्ति और तेजस्विता ने विवश कर दिया है कालदेव आप करिए प्रहार अर्थात कालदेव अपने धर्म पर अड़े रहे हा हनुमान मनुष्य को कभी धर्म के लिए हट नहीं करना चाहिए धर्म का हट विडंबना और विवादों को जन्म देता है इस महा टकराव की भीषण का आभास सबको था इसलिए इसे रोकने के लिए सभी देवता महादेव और कालदेव से गुहार लगाने के लिए पहुंच गए किंतु कालदेव नहीं मान रहे थे अतः मारकंडे स्वयं उनके बीच पहुंच गए महादेव क्षमा करें मैं तो माता-पिता की सेवा एवं जगत कल्याण के लिए आयु प्राप्त करना चाहता था किंतु यदि मेरी आयु जगत के विनाश का कारण बनने लगे तो मुझे ऐसी आयु नहीं चाहिए एक और महादेव दूसरी और कालदेव दोनों के विकराल शक्तियों के मध्य आकर कहीं मार्क जी ने कोई भूल तो नहीं करती

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...