माता आप निश्चित होकर तपस्या कीजिए मैं भैरू को आपके निकट नहीं पहुंचने दूंगा उससे तो मैं रॉक कर रखूंगा धन्यवाद [संगीत] जैसे ही वो आगे बाढ़ सके समझ जाइए की उसका अंत कल ए गया है [संगीत] ओम श्री ओम श्री नमः ओम श्री वैष्णवी नमः ओम श्री ओम [संगीत] भगवान अपने नियमों का पूर्ण आधार करते हैं निष्ठा से उनका पालनपुर करते सभी को आश्चर्य होता है कोई बड़ा आदमी धनी कैसे बन गया संसार में इतनी दूसरा क्यों है भगवान का कोई अपमान करता है तो उसे दंड क्यों नहीं मिलता क्योंकि उसका करण है अच्छे कर्मों के झुकना पर ही कोई दंड का भाग बंता है इसलिए भगवान के यहां डर है अंधेर नहीं उनकी दृष्टि से कुछ नहीं छिपा ना अच्छे कर्म और ना ही बुरे कर्म वो तो सदा न्याय ही करते हैं पुण्य आत्माओं का उधर और पपिया का नस करते हैं ओम श्री वैष्णवी नमः तक चला रहा [संगीत] [संगीत] [संगीत] वहां उसे दिव्या प्रकाश के निकट जाना है मुझे स्वीकार करने वालों में से नहीं मैं तुम्हें तब तक आगे नहीं जान दूंगा जब तक स्वयं माता की इच्छा नहीं होगी [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [संगीत] किंतु ऐसा अभी तक संभव है जब तक उसका विनाशकाल नहीं ए जाता जैसे ही वह आगे बाढ़ सकेगा समझ कर [संगीत] [संगीत] [संगीत] कुछ भी हो जाए और संभोग [संगीत] जय श्री राम [संगीत] [संगीत] तुम्हारे पापोन की गागर भरकर झलक रही है इसलिए अंतिम बार का रही थी अपना अंत नहीं चाहते तो अभी भी पीछे है जो माता के चरणों में अपना श्री सुखो आशीष कर सकता है झुक नहीं सकता [संगीत] [संगीत] [संगीत] संकेत मिल रहे हैं स्वामी की तपस्या तुमपे ने होने वाली है [संगीत] मेरा त्रिशूल ही पर्याप्त है तुम्हें अधीन करने के लिए [संगीत] [संगीत] दूर है [संगीत] छोडूंगा [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] खुदा [संगीत] और कहां जाएंगे [संगीत] माता के वास्तविक स्वरूप को पहचाना है [संगीत] अंततः आपने मेरी बात सुन ली अपने इस भक्ति को पूर्ण स्वरूप के दर्शन देकर आते हैं कृतज्ञ कर दिया मुझे [संगीत] [संगीत] आपके आगे झुका लेट तो मेरा शीश कट्टा नहीं सत्य तो यह है मां मेरी मृत्यु का मुझे कोई दुख कोई शौक नहीं अभी तो मुझे तो अपार सुख का अनुभव हो रहा है की मुझे आपके हाथों से मृत्यु प्राप्त हुई मां मेरे पापोन का प्रायश्चित हो गया मैं धन्य हो गया मां दुख है तो बस इस बात का [संगीत] शत्रु के रूप में पहचानेंगे मुझे मेरी दूसरा मेरी मूर्खता से पहचानेंगे अपने इस मूर्ख पुत्र को क्षमा कर दीजिए तुम्हारे अहंकार भरे शीश कोदित किया है मैंने तुम्हारे आप का अंत किया है किंतु तुमने मुझे मां पुकार करके स्वयं को मेरी क्षमा का और मेरे आशीर्वाद का पत्र बना लिया है और अपने ऊपर हुए कईयों के प्रभाव को मित दिया मैं तुम्हें क्षमा करती हूं मैं तुम्हारी भक्ति [संगीत] [संगीत] [संगीत] कलयुग के आगमन पर आपकी भक्ति में आप ही का एक भक्ति आपको पुकारेगारेगा तब आपका आविर्भाव होगा और वही भक्ति त्रिकूट पर्वत पर आपको आपका विशेष स्थान प्राप्त करने में सहायक बनेंगे मुझे जो वरदान दिया था वो तो तभी पूर्ण होगा जब मेरा भक्ति श्रीधर मुझे रुकेगा अन्य था जब प्रभु कलयुग में कल की अवतार धरण कर अवतरित होंगे तो मैं उनसे भेंट करने में समर्थ हो जाऊंगी जैसा कुछ नहीं नहीं जिसकी तुम्हें इच्छा हो तो तुम मुझे मांग सकते हो [संगीत] [संगीत] उचित है अब मुझे जाना चाहिए [संगीत] यहां रुकने की कृपा नहीं कर शक्ति [संगीत] आप मुझे मनचाहा वरदान देना चाहती है ना तो मुझे यह वरदान दीजिए की आपकी छत्रछाया सदा हम पर बनी रहे [संगीत] [संगीत] माता रानी ऐसे भक्ति और ऐसे पुत्र को [संगीत] [संगीत] उसकी भक्ति भगवान को आधार दिया [संगीत] आने वाले समय में मैं यही त्रिकूट पर्वत करूंगी [संगीत] वही मेरा मंदिर [संगीत] विकार रहित हो भगवान की शरण में जाते हैं तो भगवान भी उनकी इच्छा का सम्मान करते हैं
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