[संगीत] जीवन एक द्वंद नहीं एक महा संग्राम है जो जीवन भर चलता है और इस युद्ध में विजय वही प्राप्त करते हैं जो कठिनाइयों से लड़ते हैं जो गिरने के पश्चात भी उठने का साहस रखते हैं जब एक पक्षी अपने घोसले की नीव का पहला तिनका रखता है तो वह तिनका हवा से कई बार उड़ जाता है यदि वह पक्षी हवा से हार मान यदि वह पक्षी घोसले की नीव रखने का साहस छोड़ दे तो वह अपने जीवन में कभी भी नीव का निर्माण नहीं कर पाएगा यदि नई नीव का निर्माण करना है नई सृष्टि का आवाहन करना तो बार-बार प्रयत्न करने की आवश्यकता पड़ती है जब सूर्य ढलता है तो प्रकाश का अंत नहीं होता अगले दिन सूर्य फिर से जगता है और अंधकार पर विजय प्राप्त करता है जो थकते नहीं जो गिरने के पश्चात फिर से उठते हैं जो बार-बार प्रयत्न करते हैं विजय उन्हें ही मिलती है [संगीत] [संगीत] मेही बही भक्ति भी त्रा ना पूर्वे पतर पर राजना स्वध मदं यम प्यासी वरुण [संगीत] चव ये सब क्यों स शस्त्र काल के गाल में समा गए यह क्या हो रहा है केश तुम एक क्षत्रिय परिवार में जन्मी हो याज्ञ सेनी और युद्ध के परिणामों से भली भाति अवगत हो तुम स्वयं युद्ध कांक्षिणी केशव कि अपनों की मृत्यु इतनी पीड़ा दय नहीं होगी आज उत्तर वीर गति को प्राप्त हुए कल कल कोई और होगा मन बहुत विचलित हो रहा है सखा जब जब भी मैं अपने पुत्रों का या आरे पांडवों का मुख देखती हूं मुझे एक बह समा जाता है मन में कि कहीं तुम यह मत भूलो सखी कि यह युद्ध केवल तुम्हारे अपमान केवल पांडवों के साथ हुए अन्याय के प्रतिशोध के लिए नहीं हो रहा है यह युद्ध धर्म की पुनः स्थापना के लिए हो रहा है अधर्म के नाश के लिए हो रहा [संगीत] और धर्म की स्थापना के लिए वीरों को अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ती है [संगीत] सखी स्वयं को संभालो सखी यह तुम्हारी हम सबके अंतर भावनाओं की कड़ी परीक्षा है और इस युद्ध में हानि केवल हमें नहीं हुई है अभी तो इस युद्ध में अनेकों की आहुति देना शेष है [संगीत] सखी कोई और भी है जिसे अति शीघ्र इस पीड़ा का वहन करना [संगीत] शेष [संगीत] धन्यवाद पिता [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] श्री कहीं मेरे इस घाव को मेरी दुर्बलता तो नहीं समझ बैठे हैं ना आप पिताश्री [संगीत] मैं एक योद्धा हूं और युद्ध में योद्धा को घाव लगना गर्व की बात है इस महायुद्ध में यह घव मेरे लिए एक उपहार की भाति [संगीत] है [संगीत] आज तुमने अपने आप को एक सच्चा यद्ध सिद्ध किया [संगीत] है मुझे तुम पर गर्व है कल्याण हो तुम्हारा पुत्र अब तुम्हें विश्राम की आवश्यकता है विश्राम करोगे तो यह खाव जल्द ठीक हो [संगीत] जाएगा [संगीत] [संगीत] युद्ध भूमि में अपनी मृत्यु से अधिक अपनों की मृत्यु का भय कितना सताता है ना मित्र मात [संगीत] बाप प्रण [संगीत] पात परंतु आप यहां कैसे मैं तुम्हें यह बताने आया था कि तुम्हारा पुत आज इस युद्ध में बड़ी वीरता से लड़ा मित्र तुम्हारे पुत्र ने महा भारत के प्रथम दिन को अविस्मरणीय बना दिया वृष सेन के घायल होने के पश्चात भी उसने अर्जुन को युद्ध भूमि में तुम्हारी अनुपस्थिति का भान नहीं होने दिया परंतु गर्व के स्थान पर तुम्हारे मुख पर यह पीड़ा क्यों [संगीत] मित्र गर्भ है गर्भ है माधव परंतु ऐसा क्यों होता है कि मैं स्वयं के शरीर पर सहस्त्र बाण सह सकता हूं मैंने बिना संकोच किए अपने कवच और कुंडल दान करती है मैं यह सब पीड़ा सहने में सक्षम हूं एक योद्धा होने के नाते मैं युद्ध के सभी नियमों से अवगत हूं परंतु फन को लगे उसकी मृत्यु का मुझे खाया जा रहा [संगीत] है परंतु तुम यह कैसे कह सकते हो मित्र कि यह भय है पूर्वाभास नहीं पूर्वा पास आप क्या कहना चाहते हैं एक योद्धा को विजय की आशा अवश्य होती है परंतु उसे परिणाम का पूर्व आभास भी होना चाहिए आज युद्ध में जो हमारे साथ खड़ा था कल उसका स्थान कोई और ले लेगा और उसके पश्चात कोई और यह युद्ध है मित्र इसे बदला नहीं जा सकता बलिदान मांगना युद्ध की नियति है मित्र मैं समझता हूं जो आप कह रहे हैं परंतु मन में अपनों की रक्षा की चिंता है कैसे करेंगे अपनों की रक्षा यदि कारण महान हो तो उसका बलिदान भी महान देना होता है मित्र इस युद्ध में हो रहे बलिदान को स्वीकार करो एक योद्धा को युद्ध में जाने से पूर्व सभी प्रकार के मोह को त्यागना पड़ता है मोह बंधन में बंकर वो युद्ध नहीं कर सकता और ना ही अपनों की रक्षा कर सकता [संगीत] है इस महायुद्ध में अपनों की रक्षा के लिए जो हो सकेगा वो मैं करू चाहे वह युद्ध के नियति के विरुद्ध हो तब भी [संगीत] अंगराज उत्तर दो अंगराज क्या तुम ऐसा कर पाओगे यदि तुम चाहो तो अब भी इस युद्ध की नियति को बदल सकते हो क सहस्त्र के प्राण बचा सकते हो अपनों को खोने के भय से बच सकते हो तुम्हारे पास अब भी समय हमारे पक्ष में आकर इस युद्ध को एक दिन में समाप्त कर दो मित्र इस महा विनाश का मूल्य कम कर दो बोलो मित्र अपनी निष्ठा की नियति को बदलकर तुम इस युद्ध की नियति को बदलना चाहोगे महामहिम भीष्म ने तुम्हें इस युद्ध भूमि में प्रवेश करने से वर्जित किया है यही अवसर है मित्र अपने भ्राता के साथ मिलकर धर्म के लिए युद्ध करके इसे समाप्त कर दो यही अवसर है मित्र अपने भ्राता के साथ मिलकर धर्म के लिए युद्ध करके समाप्त कर आप मेरा उत्तर जानते हैं फिर क्यों बारबार यह प्रश्न करते हैं मुझसे मैं तुमसे प्रश्न नहीं पूछ रहा हूं तुम्हें तुम्हारे संदे हों का हल दे रहा हूं या तो परिवर्तन के लिए स्वयं को परिवर्तित करो या फिर प्रला बंद करो मित्र और जो हो रहा है उसे स्वीकारो तुम रे अंदर अपने मित्र के विरुद्ध जाने का समर्थ्य नहीं है मित्र जो पीड़ा आज तुम अनुभव कर रहे हो हो सकता है कि कल तुम्हें उससे अधिक पीड़ा अनुभव करनी पड़े मित्र इसलिए कहता हूं अंगराज या तो विरोध करने की शक्ति रखो या फिर पीड़ा सहने का सामर्थ्य [संगीत] [प्रशंसा] एक बात और थी मित्र सोचा कि तुम्हें उसका ज्ञात होना चाहिए आज मैंने अर्जुन को महा ज्ञान दिया उसे अपने विश्व रूप के दर्शन करवाए यह जानकर तुम्हें बुरा तो नहीं लगा ना कहीं तुम फिर से यह तो नहीं सोच रहे कि मैं पक्षपाती हूं आप पक्षपाती तब होते जब आप अर्जुन को अपना विराट रूप नहीं दिखाते आपने मुझे अपने विराट रूप का साक्षी बनने की अनुमति दी मुझे पूर्ण विश्वास था केश कि एक ना एक दिन आप अर्जुन को अपना विराट रूप अवश्य दिखाएंगे आपको लेकर किसी और के मन में शंका हो सकती है परंतु मेरे [संगीत] नहीं एक दिन आपने मुझे पाषाण और मोरपंख होने का अर्थ समझाया था हर पहेली का उत्तर हमारे च में होता है अंगराज इस पाषाण खंड की भाति जो ना अपना चुना हुआ मार्ग बदलता है और ना ही अपने विचार और दूसरा मार्ग वासुदेव जो इस मोर पंख की भाती होते हैं वे अपने आप को ईश्वर की इच्छा के हाथों ऐसे समर्पित कर देते हैं जैसे इसने स्वयं को वायु को समर्पित [संगीत] किया मैं आज भी पाषाण हूं और अर्जुन आज भी वही मोर पंख वो मोर पंख जिसे आपको अपने मस्तक पर धारण करना ही था ये मेरा प्रारब्ध है कि मैंने पाषाण होना चुना है सर करना भक्ति करना ण पा [संगीत] केश कल्याण वस्तु [संगीत] मित्र युद्ध का पहला दिन कौरवों के नाम रहा य पांडव सेना के युद्ध बंधी जेष्ठ हम इन्ह अपना दास बना लेते हैं और मुझे पूर्ण विश्वास है य अंतिम विजय भी हमारी ही होगी उत्सव का आनंद लो राजकुमार दुर्योधन की जय राजकुमार दुर्योधन की [संगीत] जय अरे मित्र आओ आओ मित्र हां यहां उत्सव चल रहा है तुम कहां रह गए थे किस बात का उत्सव उन पांडवों के विनाश का उत्सव उनकी पराजय का उत्सव मित्र उन पांडवों के विनाश का उत्सव जिसका श्रय जाता है तुम्हारे पुत्र को वीर महारथी रुष सेन को सेसे तुमने इतना सामर्थ्य वान [संगीत] बनाया यह तो अवश्य उत्सव बनाने की बात है आज तो मैं भी मधुरा पान करूंगा मामा श्री तुम भी मदिरा पान करोगे लो ये लो यह उत्सव पांडवों के विनाश के नाम विनाश के नाम मित्र मैं इस युद्ध में उपस्थित नहीं था क्या तुम मुझे बता सकते हो कि पांडवों की सेना में कितने हताहत हुए पूरी एक ऑनी सेना और साथ-साथ उस मूर्ख बालक उत्तर का भी अंत किया आज [संगीत] हमने विराट के छल का प्रतिशोध लिया हमने उत्तम अति उत्तम दुशासन एक औक्षण में 21 सहस्त्र 870 रात और उनके रथी और तने ही हाथी और उस पर सवार योद्धा 65 सहस्त्र 610 अश्वर एक लाखन सहस्त्र 350 पैदल सैनिक आज हमने युद्ध में इतने शत्रुओं का संघार किया उत्तम उत्तम उत्तम पर प्रतीत होता है कि हमारे ओर से कोई जान हानि नहीं हुई तभी तो यह उत्सव बनाया जा रहा है है ना मि नहीं मित्र हमारी र भी लगभग आधी अक्षण सेना की हानि हुई है अर्थात सहस्त्र सैनिक महारथी अश्वर हमारी ओर से भी मारे गए अब इनके परिवार का ध्यान रखने वाला कोई नहीं रहा इनके वृद्ध माता-पिता विद्वा स्त्रियों अनाथ बच्चों की रक्षा करने वाला कोई नहीं बचा यह तो अवश्य उत्तम बनाने की बात है [संगीत] उत् [संगीत] मानस र्म मानस रा सं क सं नबी कीना ना
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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti
[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...
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