[संगीत] स्वर्ण सज्जन पुरुष और परोपकारी मनुष्यों की गति एक समान होती है यदि स्वर्ण टूट जाए तो उसे गर्म करो ताप दो पिघल करर वह फिर से जुड़ जाता है ठीक उसी प्रकार मतभेद होने के पश्चात भी एक सज्जन पुरुष और महान पुरुष फिर से मित्र बन जाते हैं परंतु दुर्जन दुष्ट माटी से बने लोग उस पके हुए मटके के समान होते हैं कि जिनमें यदि एक बार दरार आ जाए तो वह स्वयं ही स्वयं का सर्वनाश कर लेते हैं इसलिए मित्रता केवल सज्जनों से ही करें ताकि मतभेद ना हो दुष्टों का समूह अपना नाश स्वयं ही कर लेता है यदि कोयले की खान में जाओ तो चाहे जितनी भी सावधानी बरतो अपने वस्त्रों पर कालिख लग ही जाती है इसलिए दुष्ट मित्रों से सावधान सज्जन शत्रु प्रत्येक परिस्थिति में श्रेष्ठ है कह दो मित्र जो कुछ भी तुम्हारे मन में आप ही पढ़ लीजिए ना के कि क्या है मेरे मन में मैं तुम्हारा मन पढ़ सकता हूं मित्र परंतु जैसे कि मैंने पहले भी कहा था मुझे तुम्हारे मुख से सुनना अच्छा लगता है अब कह भी दो मि क्या है तुम्हारे मन में इस समय जो मेरे मन में चल रहा है वो ये है कि आपने मुझे पांडवों के पक्ष आने का प्रस्ताव दिया था हा और तुमने उस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था हां परंतु मैंने कभी नहीं सोचा था मेरा यह निर्णय मुझे आपके विपक्ष में खड़ा कर देगा केश आपको तो युद्ध का परिणाम पता है ना केश किसी अनहोनी के होने से [संगीत] पहले उसका ज्ञात हो जाना क्या वो आपको पीड़ा नहीं देता केश मनुष्य संतोष से इसलिए जीता है क्योंकि वह नहीं जानता कि अगले पल क्या होने वाला है व नहीं जानता कि वो जीवित रहेगा या व मर जाएगा परंतु यदि उसे ज्ञात हो जाए या अगले पल क्या होगा या वो कब मर जाएगा तो आपको नहीं लगता कि उसके आने वाले पल भय और चिंता में [संगीत] बीत यह सोच पर निर्भर करता है अंगराज यदि मनुष्य को अपना अंत ज्ञात हो तो हर वो क्षण जिसे हम व्यर्थ करते हैं उन क्षणों को जिया भी जा सकता इस नदी को देख रहे हो इस बहती नदी को पता है कि अंतता इसे सागर में जाकर मिल जाना अधिक ज्ञान पीड़ा दई नहीं होता मित्र अधिक ज्ञान उचित निर्णय लेने में सहायता करता है यदि तुम्हें भी भूत और भविष्य का कुछ अधिक ज्ञान होता तो कदाचित तुम भी अधिक न्याय पूर्वक निर्णय कर पाते आपका मंतव्य यही है ना कि पांडव उचित है और दुर्योधन अनुचित क्षमा कीजिएगा परंतु मैं आपके इस बात से सहमत नहीं हूं मुझे लगता है केशव ये दोनों अपने अपने स्थान पर दोषी [संगीत] और इसी कारण से दोनों अपनी अपनी दृष्टि में निर्दोष और सही [संगीत] है यदि दोनों ही दोषी तो तुम निष्पक्ष क्यों नहीं हो जाते मित्र क्योंकि मुझे लगता है कि दुर्योधन युधिष्ठिर से कहीं अधिक सक्षम शासक सिद्ध होगा इतने अधर्म करने के पश्चात भी [संगीत] हा क्योंकि वह युधिष्ठिर की भाति धर्मराज होने का डोम नहीं करता आप ही बताइए केश जिसने स्वयं की पत्नी को दाव पर लगा दिया हो जिसने दू के कुचक्र से निकलकर स्वयं को दूत में फिर से फसा लिया हो वो कैसा धर्मराज युधिष्ठिर की असमर्थता के कारण राजकुमार यि मेरे मेरे श की रक्षा कर लीजिए मेरा अनु मृत्यु की भेट च गया जब मुझे सत्र कहक रंगू की भाग लेने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था राजकुमार के साथ की अनुमति एक स पुत्र को नहीं दी जा [प्रशंसा] सकती तब भी धर्मराज का धर्म मौन था ऐसे में दुर्योधन ने मेरा हाथ थामा जिसे आप अधर्मी कहते हैं आज मैं अंगराज हूं परिवर्तन के लिए खड़ा हूं वो केवल दुर्योधन के कारण केश मैंने कहा था यदि तुम्हें तनिक अधिक ज्ञान होता तो तुम उचित निर्णय ले पाते [संगीत] मित्र मैं समझा नहीं तुम सदा स्वयं को सूत पुत्र समझते आए हो का और यदि तुम्हारा यह ज्ञान मिथ्या हुआ तो मिथ्या हां कर क्योंकि तुम्हें तो पता ही नहीं कि तुम वास्तव में हो कौन मुझे क्या है कि मैं कौन हूं और मुझे गर्व है कि मैं अधिरथ पुत्र करण हूं राधे पुत्र करण हो सूत पुत्र करण तुम राधे नहीं हो अंगराज तुम अधिरथ पुत्र नहीं तुम सूद पुत्र नहीं तुमने कभी यह नहीं सोचा कर एक सूद पुत्र के शरीर दिव्य स्वर्ण से मड़ित कवज और कुंडल क्यों है तुम्हारे मन में यह प्रश्न कभी नहीं उठा कि एक साधारण से सारथी के पुत्र के पास यह कवज और कुंडल क्यों क्या तुम यह सोचकर कभी व्याकुल नहीं होते क कि तुम शेष से इतने भिन्न क्यों हो तुम सूर्य पुत्र कर्ण सूर्य पुत्र कर्ण सूर्य पुत्र कण सूर्य पुत्र स्वयं सूर्य नारायण के अंश हो तुम कण य सत्य है मेरे पिता अधिरथ है और और मेरी माता राधा सत्य से भागो मत कर और सत्य यही है अधिरथ तुम्हारे पालक पिता है तुम उन्हें गंगा किनारे मिले थे कभी सोचा नहीं क सूर्य का तेज तुम्हारे मुख मंडल पर रहता है कभी अनुभव नहीं किया मित्र कि क्यों सूर्य का ताप तुम्हारे शरीर पर स्निता का अनुभव कराता है तब भी समझ नहीं आया तुम्ह जब दिग विजय करते सम पांचाल युद्ध में क्यों शत्रु पक्ष पर सूर्य देव का ताप बरस रहा था क्योंकि तुम अधिरथ पुत्र नहीं तुम स देव का आशीर्वाद [संगीत] होक यद मैं प श्री को गगा किनारे मिला था मेरी माता कौन है क अपनी माता से बहुत पहले से भेंट करते आ रहे हो तुम क क्योंकि रक्त सदा रक्त का सम्मान करता है कभी सोचा है कि वह कौन है जिनके समक्ष आते ही तुम्हारी दृष्टि उनके पांव की ओर चली जाती है वह कौन है जिनसे हर युद्ध से पूर उनका आशीष लेने का तुम्हारा मन करता है कौन है कर जो सदा तुम्हें अपने पुत्रों के समान प्रेम करती है वो कौन है जिनकी आंखें तुम्हें देख ही भर आती है अर्जुन से द्वंद होने के पश्चात तुमने कभी पांडवों का अहित नहीं चाहा कभी उनकी रक्षा की कभी उन्हें चेतावनी दी क्यों कण इसलिए नहीं कि तुम न्याय चाहते थे अपितु इसलिए कि तुम्हारी धमनियों में बहता हुआ रक्त तुम्हें पुकार रहा था हा कर तुम राधे नहीं कुंती पुत्र हो पांडवों के जेष्ठ हाक बुआ कुंती ही तुम्हारी माता [संगीत] है और तुम उनके जेष्ठ [संगीत] पुत्र [संगीत] ये सत्य नहीं है कह दीजिए कह दीजिए केशव की य सत्य है आप चाहते हैं ना कि मैं पांडवों के पक्ष में हो जाऊ अपने मित्र का साथ छोड़ दो इसलिए इसलिए आप मेरे साथ ल कर रहे हैं आप छल कर रहे मेरे [संगीत] साथ यदि मेरा कथन तुम्हें छल लगता है मित्र तो जाओ स्वयं उनसे जाकर पूछो जिनके नाम से तुम संसार को अपना परिचय देते भद्र अधिरथ और देवी राधा से जाकर पूछ [संगीत] लो आ गए उचित समय पर पहुंच गए आओ भीतर आओ [संगीत] क्या हुआ [संगीत] पुत तुम राधे नहीं हो अंगराज तुम सूर्य पुत्र कर्ण हो [संगीत] एक बार फिर से पुत्र कहकर पुकार है ना [संगीत] पुत्र क्या हुआ पुत तुम इतने व्यतीत क्यों हो क्या हुआ मैं व्यथित था अब नहीं मात मैं समझ गया कि यह वासुदेव का खेल है वो मेरे साथ खेल खेल रहे हैं [संगीत] माता खेल कैसा [संगीत] खेल क्या विनोद किया केश बहुत भारी विरोध किया उन्होंने उनका कहना है कि आप दोनों मेरे बालक माता पिता है [संगीत] मैं पिता श्री को गंगा तट पर मिला था सूर्यदेव मेरे पिता है और माता कुंती मेरी माता परंतु मुझे विश्वास है यह सत्य [संगीत] है [संगीत] य असत्य है [संगीत] ना मैं आप ही का पुत्र [संगीत] हूं मैं आप ही का पुत्र हूं [संगीत] ना तु मेरे क्या हुआ [संगीत] माता क्या हुआ पिता आप दोनों मन क्यों है कहिए ना कि आप ही मेरी माता है कहिए ना कि मैं आपका पुत्र हूं कहिए ना कि आप मेरी माता है कहिए ना कि आप मैं तुम्हारी माता हूं परंतु जनता थी नहीं [संगीत] मैंने तुम्हे जन्म नहीं दिया नाना [संगीत] [संगीत] माना इतने वर्षों से हमने तुमसे यह सत्य छुपा कर रखा कि देवी कुंती तुम्हारी मा इसी कारण हम हम ना तुम्हें धनुर विद्या सीखने देना चाहते थे और ना रण भूमि में जाने देना चाहते थे क्योंकि देवी कुती तुम्हारी जन दात्री है केशव ने तुमसे कदाचित असत्य नहीं तुम मेरे पुत्र [संगीत] नहीं आ जय मैं तुम्हारी माता नहीं [संगीत] हूं आप असत्य कह रही हैं कि आप मेरी माता नहीं है यदि ऐसा होता तो क्यों बचपन में जब मुझे भूख लगती थी तब आपको स्वयं ज्ञात हो जाता था जब मुझे निद्रा आती थी तो कौन मुझे अपनी गोद में सुलाता था आप ही ना जब मैं शिक्षा पूर्ण कर घर वापस लौटा आपको बिना ज्ञात हुए कैसे पता चल गया कि मैं आ [संगीत] गया और आपने अधिक भोजन मनाए क्यों मेरे राज्य अभिषेक पर पिता श्री के शपथ देने के पश्चात भी आप मुझे छुपकर देखने आई थी जब मैं अंग जा रहा था तब क्यों मुझे परिवर्तन का आशीष [संगीत] दिया क्यों असत्य कह रही है आप मुझसे इसीलिए कि मैं इस जूत में भागना आल ठीक मैं इस जूत में भाग नहीं लेता मैं सदा ही आपके चरणों में बैठा रहूंगा मैं यहां से कहीं नहीं [संगीत] जाऊंगा बस इतना कह दीजिए कि आप ही मेरी माता कह [संगीत] दीज आपके अश्र ने और आपकी चुपी [संगीत] नहीं सत्य साने [संगीत] ला धन्य है आप किसी और के [संगीत] संत तना [संगीत] प्रेम कभ नहीं [संगीत] उतार अब मेरा सत्य भी सुन लीजिए मैं सदा राध करण ही कह [संगीत] लाऊंगा
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