Monday, 5 January 2026

श्री कृष्ण ने कर्ण को कौनसी सलाह दी Gautam Rode Suryaputra Karn Episode 212 Pen Bhakti

[संगीत] मनुष्य सदा भला बुरा खरा खोटा सत्य असत्य की बातें करता है सत्य को अच्छा मानता है और असत्य को बुरा परंतु क्या आपने कभी यह सोचा है प्रत्येक वस्तु प्रत्येक भाव का एक महत्व होता है दोनों ही एक दूसरे के पूरक होते हैं यदि काला रंग नहीं होगा तो क्या श्वेत रंग की आभा का अनुभव होगा यदि असत्य नहीं होगा तो क्या सत्य के महत्ता का ज्ञान होगा यदि बुरा नहीं होगा तो क्या भले पर आपको विश्वास होगा कुछ महत्त्वपूर्ण है तो दोनों के मध्य का संतुलन बुरी से बुरी वस्तु समय या भाव कोई ना कोई स्वयं में शुभ छिपाए रखती है कभी काले गरजते मेघों को देखा है उसके किनारे भी एक स्वर्णम आभा होती है उसी प्रकार यदि आपके जीवन में बुरा समय आए तो आपको अपने सच्चे मित्रों की पहचान हो जाती तो बुरे समय में निराश ना हो उसमें भी कुछ शुभ खोजने का प्रयास कर और धीरे-धीरे सब कुछ आपके जीवन में स्वतः शुभ हो जाएगा मैं वचन देता हूं कि अर्जुन के अतिरिक्त आपके किसी और पुत्र का वध नहीं करूंगा मैं वचन देता हूं मैं जाइए राजमाता गंगा में त्याग आगे गए इस राधे के पास अब आपको देने के लिए कुछ और शेष [संगीत] नहीं [संगीत] [संगीत] बात [संगीत] [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] सत्य कल्पना से अधिक सुंदर भी हो सकता है और अधिक कष्टकारी भी मैं जानता था क परंतु मैं यह कभी नहीं चाहता था कि तुम इस कष्ट को सहो अगर आप ऐसा नहीं चाहते तो ऐसा नहीं होता केश एक बात मैं समझ चुका हूं कि सृष्टि में सब आप ही की इच्छा से होता है आप ही के अनुसार होता है ठीक वैसे ही जैसा आप चाहते [संगीत] हैं पीड़ा केवल कष्ट नहीं देती मित्र पीड़ा कभी-कभी हमें उचित मार्ग चुनने में हमारी सहायता भी करती है एक पीड़ा कभी-कभी हमारे अन्य कष्टों का निवारण भी करती है कण इस सत्य का भान होना तुम्हारे लिए उचित था परंतु अब मैं तुमसे यह जानना चाहता हूं कि इस पीड़ा का तुम सकारात्मक प्रयोग कैसे करोगे जो सत्य ने मेरे जीवन को मेरे विश्वास को नकारात्मकता से भर दिया उसमें क्या सकारात्मकता खश उसमें क्या भलाई दिख रही है आपको क्यों क्या यह उचित नहीं कि अब तुम स्वयं को सूत समझने की पीड़ा से मुक्त हो गए हो कि तुम्हें अब अपना वंश क्या कि अब तुम पूरे मन से पूरे अधिकार से किसी भी क्षत्रिय के समक्ष जाकर अपना अधिकार मांग सकते हो क्या यह उचित नहीं कर कि अब तुम्हें ज्ञात हो गया है कि मैं क्यों तुम्हें पांडवों के पक्ष में आने के लिए सुझाव देता [संगीत] रहा एक सत्य संसार बदल सकता है और अब तुम्हारा संसार बदल चुका है मि तो क्या यह श्रेष्ठ नहीं कि तुम अपना पक्ष और निर्णय दोनों बदल दो तुम सबसे जेष्ठ कौन ते हो अर्जुन भीम युधिष्ठिर इन सबसे जेष्ठ और मुझे यह मानने में कोई संकोच नहीं कि तुम अर्जुन से अधिक श्रेष्ठ हो परंतु यह दो शक्ति यह दो भाई विपक्ष में क्यों मित्र यदि तुम और अर्जुन एक पक्ष में हो कोतुम दोनों के समक्ष छ प तुम्ह और अर्जुन को मेरी वासुदेव तक की आवश्यकता नहीं पड़ेगी युधिष्ठिर तुम्हारा अनुज हो और बाकी शेष पांडव भी नक सोचो जो परिवर्तन तुम अंगराज बनकर ना ला सके वो परिवर्तन तुम हस्तिनापुर के सम्राट बनकर ला पाओ सूर्य पुत्र कौन ते सम्राट कर जो संसार को एक प्रकाश मान युग की ओर ले जा सकता है मैं केवल तुम्हारे भविष्य की बात नहीं कर रहा हूं मैं उस उस भविष्य की बात कर रहा हूं जिसकी हस्तिनापुर को आवश्यकता है इस संसार को इस मानवता को आवश्यकता है और यही सबके हित में है मित्र ठीक है एक बार मैं आपकी बात मान भी लू हस्तिनापुर का सिंहासन जीत भी लू परंतु क्या मैं प्रजा के मन में सम्मान जीत पाऊंगा नहीं सूत पुत्र कलाकर जितना अपमान साहा सूर्य पुत्र बनकर उससे कहीं अधिक अपमान होगा मेरा जिस हस्तिनापुर जिस संसार की बात आप कर रहे हैं वोह मेरे विषय में सोचेंगे कि कितना अवसरवादी निकला मैं कि राज्य का लालच पाते ही मैंने अपना पक्ष बदल लाला मनुष्य का पक्ष उसका विश्वास उसका ईश्वर होता है मेरे जन्म का सत्य बदल जाने से क्या मैं अपने ईश्वर को बदल [संगीत] डालू और अर्जुन क्या यह उस महान धनुर्धारी का अपमान नहीं होगा और युधिष्ठिर जिसने 13 वर्ष बंद में काटे क्या यह उसके अधिकार का हनन नहीं होगा और दुर्योधन का क्या दुर्योधन की मित्रता ने वटवृक्ष बनकर मुझे संसार के ताप से बचाया मुझे छाया दी और जो वृक्ष छाया देता है उसे काटा नहीं जाता है उसकी रक्षा की जाती है िकार होगी मुझ पर यदि ऐसा विचार मेरे मन में भी आया मैंने आपसे पहले भी कहा है कि मैं जन्म नहीं कर्म में विश्वास रखता हूं मैं कुल वंश जाति में नहीं कौशल और पुरुषार्थ में विश्वास रखता हूं जब मेरी जन माता ने मुझे त्यागा तो एक सूत ने मुझे बाल पोस के बड़ा किया जब कुल और वं ने मुझे फेंक दिया तब मेरे कौशल ने मुझे उभारा जब मेरे संबंधियों ने मुझे पहचानने से अस्वीकार कर दिया तब दुर्योधन की मित्रता ने मुझे संभाला सच कह आज मैं पहले से भी कहीं अधिक दुर्योधन का ऋणी हो गया हूं और आप कह रहे हैं कि मैं अपना पक्ष बदल [संगीत] लू मैं अभिभूत हुआ तुम्हारे इन वचनों से परंतु मेरी इच्छा सदा यही है कि तुम मेरे साथ रहो और मैं तुम्हारे परंतु निर्णय लेना तुम पर निर्भर करता है [संगीत] मित्र तो बताओ कर तुम्हारा अंतिम निर्णय क्या है तुम्हारे नए परिचय का इस सत्य के भान का क्या निष्कर्ष है एक ही निष्कर्ष है और एक ही निर्णय या तो मेरे मित्र दुर्योधन के शीश पर राज मुकुट होगा ज इस कण के धड़ पर शीश ही नहीं होगा इसके अतिरिक्त और कुछ संभव नहीं है [संगीत] केशव आपसे एक विनती है केश मेरी जन्म कथा गुप्त रखिएगा यदि युधिष्ठिर को इसका ज्ञान हुआ तो वो सिंहासन को ठुकरा देगा और यदि उसने साम्राज्य मुझे सौंप दिया तो मैं उस दुर्योधन को सौप दूंगा और यदि समाज को इसका भान हो [संगीत] गया वो माता कुंती को ठुकरा देंगे इसलिए यह सत्य है हमारे मध्य ही रहे यही श्रेष करर [संगीत] है मैं चाहता हूं कि आप मेरी मृत्यु तक मुझे राधे कहकर पुकार कोनते ही नहीं [संगीत] [संगीत] यही तुम्हारा भविष्य है यही तुम्हारा प्रारब्ध यही अंत है कुरु ं [संगीत] का कौन कौन है आप य ये क्या कह रहे हो दुर्योधन मामा हूं मामा नहीं नहीं ये ये कौन है आप मुझसे ये ये ये प्रश्न करने वा उस छली उस उस मायावी ने य देखिए माया कर गया है मुझ पर एक भम जाल में फसा गया है मुझे दुर्योधन को मैं भी भत कर गया है वो और आप भी वहीं थे आपने क्या किया अब खड़े-खड़े मेरा मान देखते रहे देखो दुर्योधन तुम तुम भूल रहे हो वो मैं ही था जिसने उस वासुदेव को बंदी बनाने की योजना बनाई थी मैं ही था वो ही तू तही तू देखो क्रोध करने का समय नहीं है ये और तुम्हारा यह क्रोध मुझ पर बाद में करना समझ गए पहले इस बात से अवगत हो जाओ कि हस्तिनापुर में क्या घटित हो रहा है क्या क्या क्या घटित हो रहा है हस्तिनापुर में वही तो वही तो मैं तुम्हें कब से बताने का प्रयास कर रहा हूं परंतु तुम हो कि सुन ही नहीं रहे हो तुम्ह कदा अनुमान नहीं है कि तुम्हारा परम मित्र कर्ण तुम्हारे नाक के नीचे क्या कर रहा है क्या क्या कर रहा है मेरा मित्र जब तुम उस वासुदेव के माया के भ्रम के पश्चात स्वयं को संभालने का प्रयास कर रहे थे तब सभा से वासुदेव के साथ कण ने भी प्रस्थान किया था दोनों साथ थे दोनों साथ थे दोन दोनों साथ थे और केवल इतना ही नहीं दुधन तुम्हारे शत्रुओं की माता कुंती के साथ तुम्हारे परम मित्र कण ने बहुत समय व्यतीत किया बहुत कहीं ऐसा तो नहीं उस लिए वासुदेव की माया में फसक कण पांडवों के पक्ष में ऐसा हो सकता है ना दुर्योधन नहीं ऐसा नहीं हो सकता हो सकता है नहीं मैं मुझे े कंड से मिलना है इसी इसी इसी शर मिलना है [संगीत] से जीवन कितने खेल खेलती है ना हमारे साथ केशव जीवन भर जिसका वध करना चाहा जिसे युद्ध में हराना चाहा जिसका मान मर्दन करना चाहा आज क्या तुआ कि वो मेरा ही अनुज है मैं अपने ही अनुज पर आक्रमण कैसे कर पाऊंगा उस पर बाण संधान कैसे करूंगा और यदि ऐसा नहीं करता तो वो उस मित्र के साथ विश्वास घात होगा जो मेरे विश्वास पर यह युद्ध लड़ रहा है क्यों नियती हमारे साथ ऐसा खेल खेलती है क्यों वह दो भाइयों को शत्रु बनाकर सामने ले आती है क्यों वो उन्हें एक दूसरे के रक्त का प्यासा बना देती है जिनकी धमनियों में एक ही रक्त बहता है य कैसी नियती है [संगीत] केशर यह नियति नहीं मित्र यह चुनौती है यह एक परीक्षा है या यह कहो स्वयं को सिद्ध करने का अवसर है इतनी कठिन परीक्षा इतनी कठोर चुनौती इतना पीड़ादायक अफसर मनुष्य अपनी परीक्षा नहीं चुनता क यह परीक्षा है जो स्वयं अपना पात्र चुनती है यह चुनौती है जो परखने के लिए स्वयं अपना पात्र चुनती है कवच धारी वीर माटी के तट नदी की धीमी धारा के किनारे होते और कठोर पाषाण को नदी के वेग से लड़ना होता है एक सामान्य पाषाण को हथौड़ी और छेनी की मार सहनी होती परंतु जिसे हीरा बनना हो उसे धरती के भीतर गहन दबाव और ताप को सहना होता है माला बनने के लिए अपने हृदय को सुई से भदवा होता है प्रकाश देने के लिए स्वयं को जलाना होता है बास सब होते हैं क परंतु बांसुरी बनने के लिए तन पर घाव खाना पड़ता [संगीत] है जिनके उत्तरदायित्व बड़े हो उनके समक्ष सामान्य प्रश्न नहीं आते क जिन्हें युद्ध की हुंकार भरनी होती है उन्हें लाक्षा ग्रह की अग्नि से निकलना होता है जिन्हें युद्ध का परिणाम देना होता है उन्हें अपना कवच भिद वाना होता है मृत्युंजय बनने की चाह रखने वालों को प्रति क्ण मरना होता है यह तुम्हारे समक्ष आई सबसे बड़ी दुविधा नहीं है कण सबसे बड़ी चुनौती है सबसे बड़ा अवसर है अब इसका चयन करना तुम पर निर्भर करता है ण कि इसमें भाग लो या भाग जाओ तो यह सब पहले आपने क्यों नहीं बताया के यदि तब बता देता तो आज तुम्हारे समक्ष मृत्युंजय बनने का अवसर नहीं आता एक मित्र के रूप में आपने मुझे बताया कि मुझे क्या चुनना चाहिए परंतु आज मैंने सभा में उस कृष्ण को देखा जो भूत भविष्य वर्तमान सब है जिनसे परे कुछ नहीं जिन्ह सब कुछ ज्ञात है तो आपको यह भी अवश्य ज्ञात होगा केशव कि आपका यह मित्र कठिनाइयों से कभी नहीं भागता सदैव उनका सामना करता है अब [संगीत] कदाचित हमारी भेट युद्ध भूमि में [संगीत] होगी प्रणिपात [संगीत] केश मैं अत्यधिक प्रसन्न हूं कि तुम मेरे मित्र मैंने सदैव कहा है और आज पुनः कहता हूं तुम अद्भुत हो तुम महान तुम एक महान मित्र एक महान पुत्र और एक महान पिता हो तुम इस युग मानवता के महान न होक राधे [संगीत] [संगीत] कर [संगीत] तो ठीक है युद्ध को चुना है कोरो ने और आज पहली बार मैं उस दुर्योधन के कृतज्ञ क्योंकि उसने वो चुना है जो मैं स्वयं चाहता था अब अगला कदम क्या होगा वासुदेव निर्देश करें क्या करना है हमें कुरुक्षेत्र [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] शांति प्रस्ताव इस अग्नि में जलकर भस्म हो चुका है अब संपूर्ण भारत कुरुक्षेत्र की अग्नि में चला अब वार्ता करने का समय नहीं रहा अब समय है महासमर समय है महाभारत [संगीत] का अब जीवित रहना है तो विजय हो या फिर मृत्यु का कर अब समय आ गया याग सेनी के खुले केशों का प्रतिकार किया जाए समय आ गया आप पांचों अपनी प्रतिज्ञा [संगीत] पूरी अब समय आ गया कि संपूर्ण भारतवर्ष को पाप मुक्त किया जाए और युधिष्ठिर के नेतृत्व धर्म की स्थापना युद्ध का स्थान नियुक्त हो चुका है युध अब क्या करना है इसका निर्णय तुम्हें स्वयं करना होगा [संगीत] युध हमें शीघ्र यहां से प्रस्थान करना होगा उतरो युद्ध के लिए तत्पर हो जा हम सब तैयार है जश पिता श्री युद्ध की तिथि की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता भी नहीं हम युद्ध अभी करेंगे ठहरो हम सभी लोग यहां से एक साथ प्रस्थान नहीं कर सकते क्योंकि विराट राज्य की सुरक्षा के लिए हम में से किसी को यहां उपस्थित रहना होगा ऐसा पहले भी हो चुका है और हो सकता है कि हमारी अनुपस्थिति में दुर्योधन [संगीत] विराट राज्य पर आक्रमण कर दो इसीलिए हम में से किसी को भी यहां उपस्थित रहना होगा उसकी आवश्यकता नहीं यहां कोई नहीं रहेगा हम सभी एक साथ [संगीत] चलेंगे नहीं पांचाली कुरुक्षेत्र में स्त्रियों का कोई स्थान नहीं यदि तुम बाहर रहोगी तो मंद युद्ध में नहीं रक्षा करने में लगा रहे तुम्हारा कुरुक्षेत्र में जाना उचित नहीं उचित तो मेरा द्यूत क्रीड़ा भवन में जाना भी नहीं था आर्य परंतु यदि मुझे वहां ले जाया गया तो अपना प्रतिकार लेने में कुरुक्षेत्र भी जाऊंगी [संगीत] कल रात्र ही तो आए हो पुत अभी जा रहे कुछ दिन रुक जाओ नहीं माता मुझे हस्तिनापुर जाना [संगीत] होगा शवराज दुर्योधन को कुछ बताना आवश्यक है क्या करें वही जो वो नहीं जानते मेरा [संगीत] अतीत ऐसा मत करो पु इसकी क्या आवश्यकता [संगीत] है आवश्यकता है माता आवश्यकता है आपके लिए यह जानना आवश्यक है कि यह कर केवल आपका पुत्र है मैं सदा राधे था और सदा राधे ही रहूंगा और युवराज दुर्योधन के लिए यह जानना आवश्यक [संगीत] है जिस करण को उन्होंने पांडवों के विरुद्ध सबसे त अस्त्र समझा था वो कण पांडवों का ही जेष्ठ [संगीत] है जो कण रंगभूमि में उनके शत्रुओं का शत्रु बनकर आया [संगीत] था उनके शत्रुओं का बड़ा भाई है माता दुर्योधन ने कभी से कुछ नहीं छिपाया इसलिए यह मेरा कर्तव्य है कि मैं अपने मित्र को सब सच बता दुर्योधन को सत्य बताना आवश्यक है माता ऐसा क्या है जो युवराज के लिए जान लेना आवश्यक है [संगीत] मा कुछ नहीं बुश तुम्हारे पिता युवराज को यह बताना चाहते हैं कि इस युद्ध में तुम उनकी ओर से भाग [संगीत] लोगे शीघ्र मिलते हैं रुष [संगीत] से प्रणिपात माता [संगीत] चलो [संगीत] सार्थ सखी उचित कह रही है वि कोदर यदि हम सबको विजय पानी तो हम सबका वहां रहना अनिवार्य है परंतु वासुदेव पांचाली के सारे विचारों को सुनने के पश्चात ही निर्णय लेना विको परंतु यह उचित नहीं पांचाली तुम कुरुक्षेत्र क्यों जाना चाहती हो क्योंकि आर्य यदि हम सभी वहां उपस्थित होंगे तो एक दूसरे की सहायता कर सकते हैं मैं मानती हूं कि मैं युद्ध कला में सक्षम परंतु मैं यह नहीं कह रही हूं कि कि मैं युद्ध में भाग लू परंतु वहां उपस्थित रहकर आप सभी के दिए गए वचनों को पूर्ण होता हुआ देखना चाहती मैं वहा इसलिए जाना चाहती हूं कि जब उस दुशासन की छाती से रक्त बहे तो मैं अपने केशों को धोने के लिए सजन हू और जब दुर्योधन की मृत्यु निकट हो तो वो मेरी आंखों में देख सके और उसे हमेशा स्मरण रहे कि उसे दंड मिला है वीर गति [संगीत] नहीं क्या आप अब भी यही चाहते हैं कि मैं कुरुक्षेत्र ना जाऊं [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] कुरुक्षेत्र के लिए कूछ का आदेश दीजिए केशव अब कौरवों का सहार निश्चित [संगीत] [संगीत] है [संगीत] यह कैसा चक्रवात है मेरे मेरे मन में बुरे विचार आ रहे हैं अवश्य ही यह कोई अपशगुन है कुंती मैं वचन देता हूं कि अर्जुन के अतिरिक्त आपके किसी और पुत्र का वद नहीं करूंगा मैं अब और नहीं मुझे सत्य बताना ही होगा सत्य कैसा [संगीत] सत्य एक सत्य है दीदी जो मुझे आपके समक्ष स्वीकारना है एक ऐसा सत्य जो मैंने आप सबसे छुपाया है कैसा सत्य परंतु स्मरण है वह मंत्र जो मैंने दुर्वासा ऋषि से सीखा था हां मुझे स्मरण है परंतु आज अचानक उसकी बात क्यों ले बैठी आप सब जानते हैं आर्य पांडु के निर्देश पर मैंने और माधरी ने उस मंत्र का प्रयोग किया जिससे पांडव उत्पन्न हुए परंतु मैंने [संगीत] मैंने [संगीत] कनहा तुम्हारा परम मित्र कर्ण तुम्हारे नाक के नीचे क्या कर रहा है तुम्हारे शत्रुओं की माता कुंती के साथ तुम्हारे परम मित्र कण ने बहुत समय में किया [संगीत] बहुत धन दुर्योधन देखो देखो शांत हो जाओ अपने क्रोध को काबू में रखो दुर्योधन दुर्योधन ये क्या कर रहे हो तुम मैं प्रस्तुत हूं [संगीत] मैं तुमसे कुछ पूछना चाहता हूं मैं भी तुम्हे कुछ बताना चाहता हूं मेरी परिस्थितियां बदल गई है समीकरण बदल गए हैं पहचान बदल गई है ठीक कहा तुमने ठीक कहा त समीकरण बदलते देख सकता हूं [संगीत] मैं मैं तुम्हें यह बताना चाहता हूं कि मैं यही कि तुम कृतज्ञ [संगीत] निकले कायर निकले चलिए निकले [संगीत] ये क्या कर रहे हो तुम क्या कर डंड दे रहा हूं एक एक भगोड़ को एक कृष्ण को एक भगोड़े को जो युद्ध से बोल भाग रहा है शांत हो जा शांत हो जाओ दुरिया धन सब जानता हूं कि तुम उस चले के साथ क्यों गए थे और मता कुंती के पास भी तुम्हें क्या लगा मुझे ज्ञान नहीं होगा हां अब अब मुझे केवल इतना बता कि क्या तुम उस लिए के पक्ष में चले गए हो क्या क्या नया यंत्र ला रहा है वो लिया मेरे बताओ मुझे क क्या हो गया तुम्ह ऐसा कुछ नहीं है और ना कभी हो सकता [संगीत] है मैं अपने मित्र का साथ छोड़कर कभी नहीं जाऊंगा झूठ झूठ बोल रहा हैय दुर्योधन य झूठ बोल रहा है मैं झूठ नहीं बोल रहा हूं और आपने फिर से षडयंत्र रचना शुरू कर दिया धार राज हा तो तो बताओ मुझे क्या वार्ता करने गए थे तुम उन पांडवों की माता के साथ मैं बताती हूं दुर्योधन [संगीत] [संगीत] बा मैं मैं बताती हूं दुर्योधन अब तो माता कुंती भी यही तो बताओ मुझे का मेरी शत्रुओं की माता ने क्या योजना बनाई है क्या क्या क्या षड्यंत्र रचा है उस उस शली के साथ मिलकर बोलो बताओ मुझे क क्योंकि इतना तो निश्चित है कि मेरी शत्रु की माता ने जो भी योजना बनाई होगी वो मेरे लिए शुभ नहीं होगी बताओ मित्र [संगीत] बोलो आप बताइए काकी क्या ये ये ये चल क्या रहा है क्या क्या ल करने का किसी और का अधिकार को अपने नाम पर कर लेने का गुण आपने उन पांडवों से सीखा है या या फिर उन पांडवों को यह गुण आपसे विरासत में मिला है [संगीत] [हंसी] नहीं मैं भी कितना मूर्खता पूर्ण प्रश्न कर रहा हूं उन उन पांडवों ने ल करना तो आप ही से सीखा होगा आपने भी तो वही किया छल किया आपने अपने पति के साथ अपने कुल के साथ जिन्ह संसार पांडु पुत्र मानता है वो तो पांडु के पुत्र है ही नहीं एक पति के जीवित होते हुए तीन तीन तथा कथित देवताओं के साथ संबंध बनाया आपने बस करो ये मेरी माता है h

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...