Monday, 5 January 2026

श्री कृष्ण शांतिदूत बनकर हस्तिनापुर पहुँचे SaurabhPandey Suryaputra Karn Episode 207 Pen Bhakti

[संगीत] मनुष्य सुंदरता से आकर्षित होता है उससे प्रेम करता है और असुंदर को दूर हटा देता है ऐसा होता है ना क्या आप ऐसा नहीं करते करते तो सुंदर और असुंदर की परिभाषा क्या है इस आकर्षण और विकर्ष का कारण क्या है कभी सोचा है कभी सोचा है कि जिससे आप प्रेम करते हैं जिसके प्रति आप आकर्षित होते हैं अचानक से उसके लिए मन में वितृष्णा आ जाती है और जिसके प्रति घृणा होती उसके लिए एकाएक आपके मन में प्रेम उमड़ आता है कारण है दृष्टिकोण क्योंकि सुंदरता आपके मन में होती है आपके सोच में होती है आपके दृष्टिकोण में होती है इसीलिए किसी को कीचड़ में खिला हुआ कमल सुंदर लगता है और किसी को निर्मल चंद्रमा में भी कलंक का धब्बा दिख जाता है यदि आपको सुंदरता करनी हर पल आनंद में रहना है तो अपने दृष्टिकोण को सुंदर बनाए और अपने आप सब कुछ सुंदर बन [संगीत] जाएगा यदा यदा ही धर्मस्या गला निर भवती [संगीत] भारत अभ्युत्थानम [संगीत] अधर्मस्य तदा आत्मानम श्रीज [संगीत] यदा यदा धर्मस्या भवति भारत अनम धर्मस्या सनम शम [संगीत] अना यथारा ना जाया जता [संगीत] [संगीत] प्रणिपात उस महान योद्धा को जो कुरुवंश के सबसे बड़े संबल जिन्ह संसार स्मरण करेगा तो इसलिए कि उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन अपना कर्म और अपना धर्म समस्त कुरुवंश को समर्पित कर दि जो गुरुकुल का गुरु वंश का मार्ग दर्शन करते उनको मार्ग दिखाते गुरु गौरव महामहिम भीष्म को प्रणिपात [संगीत] नारायण नमक उस महान राजा को जो कुरकल का सर्वे सर्वा जो राष्ट्र का निर्माता उस महाराज राष्ट्र को इस शांति दूत कृष्ण का प्रणिपात [संगीत] स्वस्ती अपने ज्ञान और शिक्षा के बल पर सामान्य कुरु कुमारों को भारतवर्ष का महान योद्धा बनाने वाले अर्जुन भीम दुर्योधन जैसे महान योद्धाओं के आचार्य श्री द्रोणाचार्य को मेरा प्रणिपात कल्याण हो वसदे पात महान हस्ती को जो अपने लक्ष्य संधान में प्रवीण है जिन्होंने अपनी बहन के पुत्रों के लिए अपना राज्य त्याग किया जो अपनी तीव्र बुद्धि और नीति से कुरु कुमारों का मार्ग दर्शन करते हैं उस गांधार नरेश को प्रणिपात [संगीत] प्रणिपात महा नीतिज्ञ महात्मा विदुर को प्रणिपात उन समस्त जनों को जो सभा में उपस्थित है जो शांति के समर्थक प्रणिपात का अर्थ है अपना शीश झुकाना हम सब अपनी संतानों को उन सबके समक्ष शीष झुकाना सिखाते हैं जिन्होंने अपने जीवन में महान कार्य किए परंतु मैं आप सबके समक्ष प्रणिपात इसलिए नहीं कर रहा कि आप सबने महान कार्य किए मैं प्रणिपात इसलिए कर रहा हूं कि आप सब अब भी एक महान कार्य को संपन्न करने के लिए सक्षम [संगीत] है वो महान कार्य जो कि एक महायुद्ध एक महाविनाश उससे मुक्ति पा जिसके पश्चात एक महान शांति की स्थापना होगी धर्म का उदय होगा मुझे विश्वास है कि आप सभी कल आने वाले महाभारत के महाविनाश को देख सकते हैं और यदि आप सब चाहे तो आर्यव्रत को इस विनाश से बचा भी सकते हैं मुझे अधिक प्रसन्नता होगी कि आप सबके सहयोग से भारतवर्ष में होने वाले इस महाभारत से सबको बचा सक और मेरे यहां उपस्थित होने का लक्ष्य पूर्ण कर सक मुझे पूर्ण विश्वास है कि आप सब में से कोई कोई भी यह युद्ध नहीं चाहेगा संसार का सबसे बड़ा कष्ट होता है परिवार में आया क्लेश परिवार का अर्थ है ऐसा समूह जो साथ रहे जो एक दूसरे के साथ जिए एक दूसरे का संबल बने यदि एक वृक्ष दूसरे वृक्ष की शाखाए काटने लगे तो वृक्ष का अस्तित्व समाप्त हो जाता है महाराज राष्ट जब परिवार साथ रहता है तभी उन्नति होती मेरी मंत्रणा यह है कि एक वंशज के अहंकार के लिए वंश को दाव पर लगाना उचित नहीं क्योंकि यदि वंशज का अहंकार जीत भी गया तो वंश अपना अस्तित्व हार जाएगा इसलिए मैं वासुदेव कृष्ण पांडवों की ओर से शांति दूत बन कर आया शांति प्रस्ताव लाया यह युद्ध केवल भाइयों के मध्य का संघर्ष नहीं होगा बल्कि इस युद्ध संपूर्ण भारतवर्ष भाग लेगा [संगीत] इसलिए विनाश भी सैकड़ों सहस्त्र और लाखों नहीं करोड़ों में [संगीत] होगा और इसीलिए मैं यह अंतिम प्रयास करने आया यह प्रस्ताव लाया कि आप सभी इस महाभारत को इस महायुद्ध को रोकने के लिए मेरी सहायता करें [संगीत] और इसीलिए मैं यह अंतिम प्रयास करने आया कि आप सभी इस महाभारत को इस महायुद्ध को रोकने के लिए मेरी सहायता [संगीत] करें साधु साधु वासुदेव आप तो आप तो सचमुच धन्य है मुझे मुझे स्मरण नहीं होता कितना समय हो गया ऐसे शांतिपूर्ण वचन सुने हुए मुझे तो ऐसा प्रतीत होता है वासुदेव कि आपके मुख से शब्द नहीं फूल झड़ रहे हैं फूल मैं अभिभूत हो गया वासुदेव और सच कहूं वासुदेव मैं भी आपसे [संगीत] सहमत मैं भी नहीं चाहता कि यह यह युद्ध हो श्रीय क्या कह रहे दुर्योधन वासुदेव बिल्कुल उचित कह रहे हैं हमें इस को रोकने का पूरा प्रयास करना चाहिए समझ गए हा हा वासुदेव सबसे श्रेष्ठ युद्ध व है जो कभी हो ही नहीं और युद्ध की परिस्थिति उत्पन्न ना होने देने का एक ही उपाय एक पक्ष दूसरे पक्ष पर आक्रमण ना [संगीत] करे चलिए ठीक है हम हम पांडवों पर आक्रमण नहीं परंतु वासुदेव द्वारकाधीश क्या आप यह आश्वासन दे सकते हैं कि पांडव भी हम पर कभी भी आक्रमण नहीं करेंगे कभी भी गांधार नरेश आप आक्रमण के संदर्भ में बात कर रहे हैं और मैं यहां युद्ध की आवश्यकता को ही समाप्त करने के विषय में बोल रहा हूं अच्छा अच्छा ऐसा है यदि ऐसा है वासुदेव तो तो हम आपका प्रस्ताव सुनना चाहेंगे हां आप आप शांतिदूत है तो संदेश तो लाए होंगे और हां ऊपर से आप शांति प्रस्थापित करना चाहते हैं तो वासुदेव शांति प्रस्थापित करने के लिए जिस समाधान की आवश्यकता होती है वो समाधान भी लाए होंगे आप है ना बताए क्या है इसका समाधान प्रत्येक युद्ध की नीव में अन्याय छिपा होता है गांधा और अन्याय का केवल एक ही समाधान है और वह समाधान है न्याय वो न्याय जिस पर केवल पांडवों का अधिकार उनसे किए गए वचनों को ना निभाने का न्याय उनसे किए गए वचनों को ना पूर्ण करने का नय इस भरी सभा में जो अधर्म हुआ जो अन्याय हुआ उसके प्रति न्याय महाराज त राष्ट्र मैं यहां पांडवों की ओर से उनके साथ जो अन्याय हुआ उसका न्याय मांगने आया कैसा अन्याय वासुदेव वो अन्याय जो एक धर्म सभा में एक अधर्म दूत माध्यम से हुआ था व अन्याय जो कुरकल के जेष्ठ जनों के समक्ष कुल वधु पांचाली के साथ [संगीत] हो यदि उस अन्याय का त्राण हो तो इस महायुद्ध को रोका जा सकता [प्रशंसा] है कुरकल श्रेष्ठ महाराज धत राष्ट्र महामहिम भीष्म मैं पांडवों की ओर से उस अन्याय के लिए न्याय मांगने आया ह स्मरण रहे महाराज यदि आपने पांडवों को न्याय नहीं दिया या तो उसे व पुण्य उसे अर्जित कर लेंगे या फिर उसे छीन लेंगे अब निर्णय आपका है वासुदेव आप आप यहां शांति प्रस्ताव लेकर आए हैं या या आप य हमें धमकाने आए हैं वो उस दूत में जो कुछ भी हुआ सबकी उपस्थिति में हुआ युधिष्ठिर की इच्छा से हुआ अरे वो वो हार गया अपना राज्य हार गया वो उसका प्रारब्ध था छल बध अन्याय को प्रारब्ध नहीं कहा जा सकता युवराज जिस प्रकार मंदिर में किया गया पाप पुण्य नहीं बन जाता उसी प्रकार धर्मवीर की उपस्थिति में में किया गया अधर्म धर्म नहीं बन जाता अ धर्म धर्म कौन सा धर्म कौन सा धर्म कोई अधर्म नहीं हुआ नारी नारायणी होती है युवराज और भरी सभा में एक नारी का एक कुल वधु का वस्त्र हरण अधर्म नहीं यदि तुम्हें विश्वास नहीं तो अपने जेष्ठ की झुकी दृष्टि से पूछो दुर्योधन उन वस्त्रों से पूछो जो आपको आपके मन की नग्नता अनुभव कराने के लिए आपके शरीर से दूर हो [संगीत] गए उन प्रतिज्ञा से पूछो जो पांडवों ने अपने भ्राता के विनाश के लिए मांग ये प्रतिज्ञा लेता हूं पर यही जंगल तोड़कर तुम्हारा प्राण लगा दरद उस श्राप से पूछ जो द्रौपदी ने समस्त कुरकल को द इस सभा में उपस्थित व हर व्यक्ति जिसने मौन रहकर यह अधर्म होते हुए देखा उन्हे उनके मौन रहने का दंड मिलेगा श्राप है यह अग्नि सुता द्रौपदी का परंतु यदि आप सब चाहे तो पांडव अपनी प्रतिज्ञा को त्याग देंगे द्रौपदी अपना श्राप वापस ले ले बस आप सबको अपनी भूल का अनुभव करके पांडवों को केवल उनका अधिकार देना है आप सबको अपनी भूल का अनुभव करके पांडवों को केवल उनका अधिकार देना यह कैसा न्याय है वासुदेव संधि और शांति वार्ता में बराबर की बात होती है एक और से बंधन और शर्तें नहीं ला दी जाती न्याय की मांग ना बंधन ना शर्त है महाराज केवल एक निवेदन है यदि ऐसा है तो मेरा निर्णय यह है कि दुर्योधन मन [संगीत] रहो निर्णय लेना महाराज के हाथ में है तुम्हारे नहीं तुम शांत रहो राजा होने के नाते मेरा कर्तव्य है कि मैं सबकी बातें सुनू तारी अपने मंत्रणा कारों का सम्मान करू दुर्योधन युवराज है हस्तिनापुर का भवी महाराज है इसलिए इस संदर्भ में मैं अपने पुत्र और हस्तिनापुर के युवराज दुर्योधन को अपना निर्णय प्रस्तुत करने की अनुमति देता हूं धन्यवाद पिता श्री हा तो सुनिए वासुदेव ऐसा है कि उस दूत में पांडव स्वयं अपना अधिकार हार बैठे थे अब ना तो व किसी भी राज्य का उनको अधिकार है और ना ही राजा होने का इसीलिए मैं दुर्योधन य घोषणा करता हूं के हस्तिनापुर आपका यह शांति प्रस्ताव ठुकरा [संगीत] है दुर्योधन क्या तुम्हें इस बात का अनुमान भी है कि शांति प्रस्ताव ठुकराने का अर्थ है युद्ध को निमंत्रण अपने निर्णय पर पुनः विचार कर लो बात बात पर विचार करना बंद कीजिए पिता मा बात बात पर विचार कार करते हैं योधा का जन्म ही युद्ध के लिए होता है और मैं इस युद्ध के लिए प्रस्तुत हूं [संगीत] मेरी दृष्टि में उन पांडवों को कुछ भी देने का प्रश्न ही नहीं होता बस मैंने यह सभा समझौते के लिए रखवा थी ना कि अपने अपने ही अधिकार के त्याग के लिए यह मेरा अंतिम निर्णय है मैं पांडवों को इंद्र ब्रस्त नहीं दूंगा तो नहीं [संगीत] दूंगा

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