[संगीत] महाभारत जरा संत की शक्ति का रहस्य क्या है जनार्दन यह बड़ी अद्भुत कथा है जरास के पिता राजा बृहद रथ ने काशी की दो राजकुमारियों से विवाह किया और उन्हें वचन दिया कि वो दोनों से बराबर प्रेम करेंगे वे बूढ़े हो गए परंतु कोई संतान नहीं हुई एक दिन उन्होंने सुना कि गौतम वंश के ऋषि चंड कौशिक एक आम के पेड़ के नीचे बैठे हुए हैं तो राजा बृहद्रथ ऋषि चं कौशिक की सेवा में उपस्थित हुए मुनिराज मेरे कोई संतान नहीं है मुझे कोई संतान दीजिए कृपा करके कोई उपाय कीजिए हा मुनिराज कोई उपाय कीजिए मुझे संतान दीजिए यह आम अपनी रानी को दे दो संतान अवश्य होगी धन्यवाद ऋषिवर को दया आ गई और उन्होंने राजा को एक आम दिया परंतु राजा ने उस आम के दो टुकड़े करके एक एक टुकड़ा अपनी दोनों रानियों को दिया तो दो पुत्र जन्म होंगे नहीं जब आम एक था तो दो पुत्र कैसे जन्म ले सकते थे दोनों रानियों के यहां आधे आधे बच्चे जन्मे सिर से पांव तक आधे रानिया भय से काप उठी और फिर निराश होकर उन्होने वो बच्चे फवा दिए उधर से जरा नाम की एक राक्षसी जा रही [हंसी] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] थी मास के दो टुकड़े देखकर उसने खाने के लिए उठा लिए जबक दोनों हाथ बज रहे थे तो उसने वह दोनों टुकड़े एक ही हाथ में रख लिए और वह जुड़ [संगीत] गए जुड़ते ही बच्चे ने अपनी मुट्ठी मुंह में रखकर गर्जना की गर्जना से डरकर जरा तो भाग गई परंतु राज भवन में रानियों के दूध उतर आया यह है जरास वह एक नहीं दो है इसलिए यम भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाते महाराज की जय हो महाराज आपके माथे पर चिंता की रेखाएं मुझे अच्छी नहीं लगती मैं क्या बताऊं चेदी नरेश मेरे हृदय में वासुदेव की फास खटक रही है राजाओं की बलि के पश्चात मैं अंतिम बार द्वारका पर चढ़ाई करूंगा या तो फिर वो नहीं या फिर मैं नहीं आपके ना होने का तो प्रश्न ही नहीं उठता महाराज प्रणा [संगीत] राजन ब्राह्मणों का स्वागत है एक गाय भेट करता हूं और हां यदि कोई और इच्छा है तो बताइए हे राजन मेरे दोनों मित्रों का मौन व्रत है आधी रात के उपरांत ही बोलेंगे ठीक है तो आधी रात के पश्चात ही भेंट होगी महामंत्री जी महाराज ब्राह्मणों के विश्राम का प्रबंध किया जाए जो आज्ञा महाराज आधी रात के पश्चात मैं स्वयं आपकी इच्छा पूरी करने आऊंगा [संगीत] आइए क्या वोह आएगा वासुदेव अवश्य आएगा वह जैसा भी हो परंतु ब्राह्मणों का आदर करता है और दानवीर भी है जो मांगोगे वही पाओगे परंतु आधी रात तो हो जाने दो भीम भैया महावीर के महावीर महारथियों के महारथी मगध सम्राट महाराज रासन पधार रहे हैं देख [संगीत] लिया स्थान ग्रहण कीजिए स्नातक ब्राह्मण चंदन का लेप नहीं लगाते तुम कहते तो हो कि तुम ब्राह्मण हो परंतु तुम क्षत्रिय हो कौन हो तुम लोग मेरे पास ब्राह्मण बनकर क्यों आए हो समझ लोग शत्रु के घर सामने के द्वार से नहीं आते क्योंकि सामने के द्वार से तो मित्र के घर जाया जाता है अर्थात मैं तुम्हारा मित्र नहीं पर मुझे तो याद नहीं आ रहा कि मैंने तुम तीनों को कभी किसी प्रकार की हानि पहुंचाई हो फिर तुम लोग मुझे अपना शत्रु क्यों समझते हो शत्रु कैसे नहीं समझे यदि अंधकार को अंधकार ना समझे तो और क्या समझे तो तुम धर्म की डगर से भटक गए हो इसलिए तुम हमारे शत्रु हो तुम अन्याय हो इसलिए शत्रु हो मैं धर्म की डगर से हट गया हूं मैं निसंदेह मैं अन्याय हूं निसंदेह उन 86 राजाओं ने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है राजन जिन्हें तुमने पशुओं की भांति बंद कर रखा है क्या उन्हें जीवन तुमने दिया है और यदि नहीं तो उनका जीवन लेने वाले तुम कौन तुम समझते हो कि रुद्र तुम्हारी यह बलि स्वीकार कर लेंगे कभी नहीं इसलिए हे राजन अधर्म की डगर छोड़ो और धर्म की डगर पर आ जाओ क्योंकि यही मोक्ष का मार्ग है यह ना भूलो कि जीवन में मृत्यु से बड़ी और अटल वास्तविकता और कोई है ही नहीं और यदि तुम यह सोचते हो कि तुमने मृत्यु को जीत लिया है तो तुम मूर्ख हो मूर्ख भाग्य भी व्यक्ति को उसके कर्मों की तुला पर तोलता है राजन क्षत्रिय के लिए युद्ध भी एक यज्ञ है और इस यज्ञ के हवन कुंड में वह अपने प्राणों की आहुति भी दे सकता है ब्राह्मण भिक्षा मांगो भिक्षा और इससे पहले कि मैं भूल जाऊं कि तुम ब्राह्मण हो यहां से चले जाओ क्या चाहते हो तुम ंद युद्ध धव युद्ध हां राजन हम तीनों में से किसी एक को चुन लो तुम दोनों तो बहुत सूखे हो तुमसे जूझना तो मेरा अपमान है फिर भी मैं तुम्हारे साहस की प्रशंसा करता हूं हां यह ठीक रहेगा फिर भी द्वंद युद्ध से पहले अपना परिचय दो क्योंकि तुम ब्राह्मण नहीं हो य कुंती पुत्र अर्जुन है य कुंती पुत्र भीमसेन और मैं देवकी नंदन [संगीत] कृष्ण यदि पहले से मुझे यह ज्ञान होता कि तुम कृष्ण हो तब भी मैं द्वंद युद्ध के लिए भीम को ही चुनता क्योंकि द्वंद तो बराबर वालों में ही होना [संगीत] चाहिए [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] आ [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] आ [संगीत] [संगीत] हो [संगीत] अ [संगीत] अ [संगीत] [संगीत] आ [प्रशंसा] आ [संगीत] [हंसी] [प्रशंसा] [हंसी] [संगीत] [संगीत] हा [संगीत] मैं वासुदेव कृष्ण और यह दोनों पांडु पुत्र भीमसेन और अर्जुन आप सभी को प्रणाम करते हैं और यह शुभ समाचार सुनाते हैं कि आज से आप सभी लोग धूप और चांदनी देखने के लिए मुक्त हैं जरास वध करने वाले भीमसेन आप सभी को अपने राज्य भी लौटते हैं वासुदेव कृष्ण गोपाल की जय कुंती नंदन भीम और अर्जुन की वासुदेव कृष्ण की वासुदेव कृष्ण की वासुदेव कृष्ण की वासुदेव कृष्ण की वासुदेव कृष्ण [प्रशंसा] [संगीत] की हे देवकी नंदन हे केशव हे जनार्दन मेरे पिता श्री मगध नरेश जरास ने जो भी अपराध किए हो मैं उन सबके लिए आपसे क्षमा चाह किंतु मुझे मेरे पिता श्री का अंतिम क्रिया कर्म करने की आज्ञा दीजिए माधव हे मगध नरेश सहदेव तुम्हें अपने पिताश्री के अंतिम संस्कार के लिए किसी की आज्ञा की आवश्यकता नहीं है हम अपने कर्तव्य का पालन करने आए थे तुम्हारे कर्तव्य के मार्ग में बाधा डालने नहीं आपने मुझे मगध नरेश कहा हां और क्यों ना कहता तुम योग्य हो और मगध के मुकुट पर तुम्हारे शीष का अधिकार सिद्ध है यशस्वी [संगीत] भव छोड़ दिए बंदी सभी किया उन्हें [संगीत] स्वाधीन मीत पांडवों को मिले हुए प्रीत में लीन हुए प्रीत में लीन आभार आभ महाभारत महाभारत महाभारत
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