Tuesday, 6 January 2026

हनुमान जी ने अशोक वाटिका में स्वादिष्ट फल खाये Sankat Mochan Mahabali Hanuman 391 Pen Bhakti

[संगीत] माता इसके पूर्व की मैं यहां से प्रस्थान करूं आप मुझे कोई स्मृति बताइए जिसे जानकर प्रभु निश्चिंत हो सके हां पुत्र अपने स्वामी अपने प्रियतम के साथ बिताए हुए समय की कुछ स्मृतियां है जो मेरे सिवाय मेरे प्रभु श्री राम को ही जत मैं ऐसी एक घटना का वर्णन करती हूं तुम्हे तुम उन्हे यथावत सुना देना मुझे इस दिव्य वानर के बारे में यथाशीघ्र महाराज दशानन को सूचित करना चाहिए आप जैसा कहेंगी मैं वैसा ही प्रभु श्री राम को सुना दूंगा एक बार चित्रकूट के बन में एक उपवन में जब प्रभु मेरी बाह पर अपनी शीष टिका करर गहन निद्रा में मग्न हो [संगीत] गए तो अकस्मात वहां एक काक आया उस काक ने स्वामी की नित्रा में विघ्न उत्पन्न करना आरंभ कर [संगीत] दिया स्वामी को शांति से सोते भी मैं उनकी निद्रा में विघ्न पड़ने नहीं देना चाहती थी मेरी स्थिति का लाभ उठाकर उस दुष्ट आसुरी काख ने अपनी नुकीली चोच से मुझ पर प्रहार कर दिया मेरी स्थिति का लाभ उठाते हुए उस राक्षसी प्रवृत्ति वाले दूत ने बार-बार मुझ पर आघात करता रहा [संगीत] [प्रशंसा] और अंत में उस दुष्ट ने मुझे आघात कर [संगीत] दिया [संगीत] यह क्या सीध तुम्हारी कोमल काय पर आघात करने का दसास किसने [संगीत] किया तो कि दुष्ट का कृत्य है ये ओ ओ [संगीत] ओ लो दुष्ट तुमने मेरी सीता को जो पीड़ा पहुंचाई है उसका दंड [संगीत] भोगो अर्थात माता प्रभु ने काका सुर पर ब्रह्मास्त्र का वार किया हां पुत्र उस काका सुर ने जो पीढ़ा मुझे दी वो प्रभु के लिए असहनीय थी पवन के समान उसके बेक को देखकर स्वामी को को ज्ञात हो गया था कि वो काक रूप में वो देवराज इंद्र का पुत्र जयंती था जो अब अपना बचाव करने के लिए तीव्र गति से उड़कर यहां वहां जा रहा था वो काका सुर बना जैन सबसे सहायता की गुहार लगाता हुआ सभी सब ऋषियों के पास गया परंतु प्रभु काज में हस्तक्षेप करने में सबने असमर्थता जताई और जैन से कहा कि राम के ब्रह्मास्त्र से बचाव संभव नहीं है तो निराश और भयभीत होकर इंद्र पुत्र जयंत रक्षा के लिए अपने पिता के पास स्वर्गलोक मूर्ख जयन तुमने माता सीता की करुणा की परीक्षा लेने का दुस्साहस कर बहुत बड़ा अपराध किया और स्वयं को प्रभु श्री राम के क्रोध का कारण बनाया है अब कोई देवता तो क्या स्वयं प्रभु ब्रह्मा जी भी ब्रह्मास्त्र को नहीं रोक सकते अब प्रभु श्री राम के ब्रह्मास्त्र से श्री राम ही तुम्हारी रक्षा कर सकते [संगीत] हैं क्षमा कीजिए प्रभु क्षमा कीजिए मैं तो अधम मातृ माता सीता की दया और करुणा की परीक्षा लेने के लिए उन्हें निरंतर में कष्ट दे रहा था परंतु उन्होंने उन्होंने मेरा किंचित प्रतिकार नहीं किया आपकी निद्रा में कोई व्यवधान ना आए इसीलिए उन्होंने मुझसे अपना बचाव करने के लिए भी कोई चेष्टा नहीं की परंतु प्रभु मुझे ज्ञात है कि यह मेरी मूर्खता ही थी माता सीता के धैर्य की परीक्षा लेने का दुस्साहस कर मुझसे सत्य में बड़ी भूल हुई है मुझे क्षमा करें प्रभु क्षमा करें तुमने अपना दोष स्वीकार किया [संगीत] जैन मैं इसकी सराहना करता हूं परंतु मैं अपने ब्रह्मास्त्र को रोक नहीं सकता वो व्यर्थ नहीं जा सकता मैंने जो अपराध किया है उसका दंड तो मुझे अवश्य मिलना चाहिए प्रभु मेरे दाहिने नेत्र की दृष्टि सर्वप्रथम आप दोनों पर पड़ी थी जिसके कारण मेरे मन में मूर्खता पूर्ण कु विचार जागृत हुआ हे प्रभु आप कृपा कर अपने ब्रह्मास्त्र को मेरे इसी नेत्र पर केंद्रित कर मुझे दंडित करें परंतु मेरे प्राण म [संगीत] [संगीत] धरिए मैं पुनः क्षमा प्रार्थी हूं प्रभु और आपको विश्वास दिलाता हूं कि भविष्य में मुझसे कभी ऐसी दृष्ट नहीं होगी जयंत तुम अपने कृत्य पर लज्जित हो और तुमने क्षमा याचना भी की है इसलिए मैं तुम्हें वर देता हूं कि तुम अपने एक नेत्र से ही वह सब देख सकोगे जो दोनों नेत्रों वालों की दृष्टि से अदृश्य रहता है तुम सभी पित्रों और अन्य असंतुष्ट आत्माओं के दर्शन करने में सक्षम रहोगे तुम्हे दीर्घ आयु प्राप्त होगी और जो भी अपने पुरखों को सम्मानित करते समय अर्थात पित पक्ष में तुम्हे भोजन देगा उसके पित्र उससे संतुष्ट रहेंगे और शांति प्राप्त [संगीत] करेंगे प्रभु आज्ञा दीजिए अच्छा माता इसीलिए कौओ को पिंड दान दिया जाता है क्योंकि उनकी दृष्टि वह देख सकती है जो अन्य जीवों की दृष्टि से ओझल रहता है हा पु पराक्रम के सिंधु मेरे स्वामी ने मेरे प्रति आसुरी प्रवृति दिखाने वाले एक छोटे और तुच्छ प्राणी पर भी अपना ब्रह्मास्त्र प्रक्षेपित कर दिया था अब यह सीता इसी प्रतीक्षा की अग्नि में जल रही है कि कब मेरे स्वामी आए और मेरा अपहरण करने की सिनित आसुरी प्रवृत्ति प्रदर्शित करने वाले उस दुष्ट राक्षस को उचित दंड देंगे माता मेरे प्रभु पुरुषोत्तम श्रीराम अविलंब यहां आकर इस पापी रावण और पाप कर्म में संलग्न इसके सभी बंधु बांधव और सभी सहयोगियों का भी वध करेंगे और अपने साथ आपको अयोध्या लौटा ले जाएंगे अवश्य लंका को ध्वस्त करने आया है ये कुटिल वानर हमें आगे जाके ध्यान से सुनना चाहिए अरे तुमने देखा नहीं कितना विशाल आकार ले लिया था उसने उसके और समीप जाने का अर्थ है मृत्यु प्रभु को मेरा प्रणाम कहना पुत्र और मेरी ओर से सबका कुशल पूछना मेरे प्रभु श्रीराम को कहना कि उस दुष्ट राक्षस ने मुझे दो माह की अवधि और दी है परंतु मैं इतनी अवधि के लिए भी उनसे दूर नहीं रह सकती मैं उनके वियोग में एक मास अधिक जीवित नहीं रहूंगी हनुमान मेरे नाथ से कहना कि उस अवध के पूर्व यहां आकर मुझे यहां से मुक्त करा कर ले जाए अवश्य माता अब विलं का कोई कारण नहीं मैं आपके इस संदेश के साथ इसी क्षण यहां से प्रस्थान करता हूं इतनी लंबी यात्रा के पश्चात हनुमान को भूख तो लगी होगी कैसी अभागी माता हूं मैं पुत्र तुम्हें भोजन कराने में भी असमर्थ हूं मैं पुत्र कि फि तुम्हें अपनी कठिन यात्रा के लिए ऊर्जा प्राप्त मेरी इच्छा तो हो रही है कि अपने हाथों से स्वादिष्ट व्यंजन पकाकर तुम्हें खिलाऊ परंतु दुर्भाग्य से यह यहां संभव नहीं है माता मैंने तो अल्प समय के लिए ही भोजन का परित्याग किया है जिससे मैं प्रभु श्रीराम का यह कार्य पूर्ण निष्ठा से कर सक परंतु माता आपने भी तो 10 माह से भोजन का एक ग्रास भी ग्रहण नहीं किया है मैंने कुछ नहीं ग्रहण किया है व मेरा प्रण है पुत्र परंतु तुम्हें भोजन करते देख मेरी शुधा भी शांत हो जाती मेरा हृदय तपत हो जाता पुत्र यदि ऐसा है माता तो मैं अभी इसे संभव बना देता हूं इतने मधुर और रसीले फलों से लदे वृक्षों से सज्जित इस वाटिका को देखकर किसका जी नहीं ललचाए माता फिर आपका यह पुत्र तो एक वानर है यदि आपकी आज्ञा हो तो मैं इस वाटिका के फल खाकर अपनी भूख मिटा लेता हूं माता हां हां अवश्य पुत्र परंतु यह मेरा वचन है तुम्हें पु मैं अति शीघ्र अपने हाथों से भोजन पकाकर तुम्हें परोसने का सौभाग्य प्राप्त करूंगी यह तो मेरा परम सौभाग्य होगा माता मैं उस दिन की प्रतीक्षा करूंगा परंतु अब मुझसे रुका नहीं जा रहा है माता वाटिका के फल मेरी प्रतीक्षा जो कर रहे हैं जा पुत्र हनुमान परंतु सतर्क रहना मैं नहीं चाहती कि तुम्हें कोई शति पहुचे माता जिसे आपका और प्रभु श्री राम का स्नेहा शीष प्राप्त हो संपूर्ण लंका भी आ जाए तो भी उसको कोई हानि नहीं पहुंचा सकेगी स्वयं रावण भी नहीं प्रणाम [प्रशंसा] [संगीत] माता [संगीत] अरे य पाती वानर अब अशोक वाटिका के फलों को खाने जा रहा है मुझे जाकर अशोक वाटिका के रक्षकों को सचित करना होगा परंतु उसके पूर्व जाकर सीता से पूछना होगा कि व वानर य पर क्या करने वाला है जाओ जाओ कट दो उसे प्रत करो सीता को पर जो दृश्य मैंने अपने स्वप्न में देखा है उसको स्मरण रखना जो उसे कष्ट देगा उसका शीघ्र अंत होगा अब जाओ उसकी जो इच्छा है पूर्ण कर लो कहीं त्रिजटा का स्वप्न सत्य होना तो प्रारंभ नहीं हो गया हां ये किसे ज्ञात है कि वो वानर यहां पर क्या करने वाला है [संगीत] [संगीत] य अशोक वाटिका हमें सबसे अधिक प्रिय है अब हनुमान भी तो ज्ञात करें कि इस वाटिका में ऐसी क्या विशेषता है कि यह उस दुष्ट रावण को इतनी प्रिय [संगीत] है हो हनुमत अशोक वाटी का [संगीत] बैठे तरु तरु लांघी डार पे बैठ फल खाए वाटी का उजार जो लंकेश को थी अति प्यारी राम सियाराम सियाराम जय हनुमान राम सियाराम सियाराम जय हनुमान ये गाथा महावली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली [संगीत] हनुमान मुर्ख वानर रुक जाओ अरे आप लोग कहां थे बड़ा विलंब हुआ आपको आने में मेरा भोजन तो अब समाप्त होने वाला है अब इतनी देर कर ही दी है तो कुछ समय और प्रतीक्षा करें कुछ और रसीले फल दिखाई दे रहे हैं उनका स्वाद भी तो ले लो मूर्ख वानर तुम्हे जत भी है अज्ञानता वश कहां प्रवेश किए हो नहीं सैनिक जी आप ही बता दीजिए यह दशानन रावण की लंका है उनके फल तोड़कर खाने की उद्दंडता तुम कर रहे हो चलो नीचे आओ नहीं नहीं इतनी शीघ्र नहीं आप भी चख नहीं चलिए मैं ही लेता [संगीत] हूं अरे यह तो सुन ही नहीं रहा [संगीत] है चिंता मत करो वानर जब हम तुम्हें पकड़कर महाराज लंकेश के समक्ष प्रस्तुत करेंगे तब तुम्हारा भोग लगाकर जबा जबा कर खाएंगे पूर्ण आनंद लेकर खाएंगे जैसे तुम उनके फलों को खा रहे हो तब तो मुझे सभी फल चट कर जाने चाहिए उससे मैं और भी स्वादिष्ट हो जाऊंगा बहुत स्वादिष्ट [संगीत] है तुम ऐसे नहीं मानोगे नीचे उतरो नहीं तो हमारे पास और भी उपाय है तुम तो क्या तुम्हारा रावण भी मुझे नीचे नहीं उतार सकता असंभव संभव दशान रावण की अभेद लंका भेद है जिसकी सुरक्षा स्वयं क्रोज एवं लकनी करते हो जिसकी सीमा पर माता चामुंडा के अंश की उपस्थिति हो उसे कैसे कोई भेज सकता है सेनापति प्रहस्त हमें उत्तर दीजिए चूक कहां हुई उस विशाल प्रकाश पंज का रूप धारण करके किसने हमारी लंका में प्रवेश किया है यह ज्ञात करने के लिए मैंने अपने सैनिकों को भेजा है महाराज किंतु आपको सूचित करना मेरा कर्तव्य है महाराज लंकिनी लंका को त्याग कर यहां से प्रस्थान कर चुकी है और हमारे गुप्त चरों के अनुसार क्रंचा का वध एक वानर के हाथों हो चुका [संगीत] है वानर उस उदंड वानर ने हमारी लंका में प्रवेश भी कैसे [संगीत] किया जय श्री राम [संगीत] मैंने अपनी माता को वचन दिया है मैं यहां अपना मन भर फलाहार करूंगा इसलिए जब तक मैं तृप्त नहीं हो जाता मैं तो ऐसे ही खाता रहूंगा और ऐसा करने से मुझे कोई नहीं रोक सकता तुम्हारा लंकेश रावण भी नहीं मारो [संगीत] इसे पकड़ो इसे हां हां आओ आओ मैंने तो तुम सभी को यह मीठे फल खाने के लिए आमंत्रित किया था प्रतीत होता है तुम्हें यह फल नहीं भाते तो लो हनुमान के वार रूपी कटु फलों का स्वाद [संगीत] चखो मां किसी भी परिस्थिति में हो परंतु पुत्र के प्रति उसकी चिंता और स्नेह सदैव समान ही रहते हैं और मां का स्थान कोई नहीं ले सकता

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