[संगीत] पुत्र हनुमान गुरु यदि श्रेष्ठ हो तो अपने शिष्य को भगवान से भी मिला देता है तुम्हें भी किसी से मिलना है वह समय आने पर तुम्हें स्वतः ही ज्ञात हो जाएगा किंतु हनुमान से पूर्व तो अभी केसरी जी को पूर्णता प्राप्त करने की आवश्यकता केसरी जी आपने राज्य पद त्याग कर अब राजा रहे नहीं राज मुकुट के बिना अधूरे हैं सुमेरू राज्य भी अब राजा के बिना अनाथ है यह क्या कह रहे हैं आप देवगुरु सत्य कह रहा हूं रिक्षा जी केसरी जी कल प्रात पुष्टिकरण यज्ञ के साथ आपका पुन राज्य अभिषेक करना होगा तभी आप सुमेरू के महाराजा कहलाएंगे [संगीत] प्रणाम देव गुरु बृहस्पति आपकी आज्ञा से पुष्टि यज्ञ विधिवत संपूर्ण हो गया है उचित है केसरी जी अब राज्याभिषेक की प्रक्रिया संपन्न कराने के लिए राज मुकुट मंगवाया जाए सेवक राज मुकुट लेकर आओ महाराज केसरी की जय महाराज केसरी की जय महाराज केसरी की जय महाराज केसरी की जय महाराज केसरी की जय महाराज केसरी की जय महाराज केसरी की जय महाराज केसरी की जय महाराज केसरी की जय [संगीत] पिताश्री मैं लेकर आता हूं आपका राज [संगीत] मुकुट यह लीजिए यह अनुचित है [संगीत] हनुमान जिसका कार्य उसी को [संगीत] साझ ध्यान रहे पुत्र जिसको आदेश हो उसी को आदेश का पालन करना चाहिए देवगुरु उचित कह रहे हैं पुत्र जिसे आदेश दिया जाता है यदि वह उसका पालन करने में समर्थ ना हो तो उसकी अनुमति से तुम वो कार्य कर सकते [संगीत] हो राज पुरोहित जी अब राज्य अभिषेक संपन्न कीजिए विराज [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] महाराज ओम अपवित्र पवित्रो वा सर्वम गिवा यमर पुंडरी काम स अंतरम [संगीत] महाराज केसरी की जय महाराज केसरी की जय महाराज केसरी की जय महाराज केसरी की जय महाराज केसरी की जय महाराज केसरी की जय महाराज केसरी की जय मराज केसरी की जय की जय महाराज केसरी की जय महाराज केसरी की जय महाराज केसरी की जय महाराज केसरी की जय [संगीत] चंदनसर नित्यम लक्ष्मी स्ती [प्रशंसा] सर्वदा केसरी जी अब आप पुन राजा हो पूरे सुमेरो का दायित्व अब आपके कंधों पर [संगीत] है परंतु मैं हनुमान की शिक्षा का दायित्व किसे सौंप आप ही किसी उत्तम गुरु का सुझाव दे [संगीत] [प्रशंसा] मुनी संतान के प्रथम गुरु तो माता पिता ही होते और आप दोनों ने यह कर्तव्य भली बात निभाया है किंतु सतगुरु विनम्रता गंभीरता और सांसारिक का पाठ बढ़ाते हुए शिष्य के व्यक्तित्व को संपूर्णता प्रदान करता जिसकी अभी हनुमान को आवश्यकता [संगीत] है आज राज सभा में हुई हनुमान द्वारा भूल इसका प्रमाण है उस भूल के लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूं देव गुरु जी और हां आप जिन गुरुदेव के लिए कहेंगे मैं वहां चला जाऊंगा शिक्षा प्राप्त करने के लिए कौन किसे शिक्षा देगा यह तो पूर्व निर्धारित है किंतु गुरु को ढूंढना भी एक परीक्षा है तो देव गुरु आप ही बताइए कि हनुमान की शिक्षा का कब और कैसे प्रयास आरंभ करना है हनुमान की कुंडली देख के ही ज्ञात हो सकेगा इसके भाग्य में शिक्षा का योग कब से है मैं अभी इसकी कुंडली लेकर आती हूं बल बला बल बल बड़े ही उचित समय पर आया हूं मैं हनुमान की शिक्षा रावण को सूचित करना ही होगा मुझे बल बला बल बल बल बला बल बल लीजिए देव [संगीत] क्या हुआ कोई चिंता का विषय है क्या गुरुदेव चिंता का विषय तो है के जी मान की शिक्षा आरंभ होने का योग कल संध्या तक का ही है यदि शीघ्र ही इनको गुरु ना मिलाय आजीवन बिना गुरु के रह जाए कल संध्या तक कैसे हो पाएगा इतने शीघ्र इसका प्रयास आपको पहले से आराम कर देना [संगीत] चाहिए हनुमान हमारी एक मात्र संतान है से दूर भेजने के विषय में सोचकर ही मन विचलित हो उठता है क्या इसके संस्कारों को अधूरा छोड़ देंगे कभी-कभी अधिक मोह भी संतान के विकास में बाधक बन जाता है देवी अंजना अब अविलंब योग्य गुरु ढूंढ योग्य गुरु ढूंढना अत्यंत कठिन [संगीत] है ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंद धन्य राम जय जय जय महाबली हनुमान आरंभ हो हनुमत की शिक्षा संभव नहीं और प्रतीक्षा देव गुरु ने मार्ग बताया मात पिता को ये समझाया शीघ्र गुरु हो निश्चित अन्य हनुमत रहेंगे अशिक्षित केसरी अब देते ध्यान बिना गुरु नहीं मिलता ज्ञान ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान अब मैं प्रस्थान करता हूं प्रणाम दे प्रणाम देव गुरुजी यह तो बड़ा चिंता का विषय है क्या किया जाए मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा [संगीत] है नारायण नारायण प्रणाम मुनिवर प्रणाम देवर्षी प्रणाम देवर्षी कल्याण क्यों दुविधा में है केसरी जी आपके ही राज्य में ऋषिवर मतंग जैसे ज्ञानी और योगी गुरु हैं फिर क्यों कहीं और जाना आपने अति उत्तम सुझाव दिया है देवऋषि हम कल प्रात ही ऋषि मतंग के आश्रम की ओर प्रस्थान करेंगे ताकि हनुमान की शिक्षा शीघ्र आरंभ हो [संगीत] जाए अब मैं चलता हूं नारायण नारायण प्रणाम प्रणाम [संगीत] [संगीत] आओ पुत्र हनुमान प्रणाम गुरुदेव आयुष्मान भ प्रणाम ऋषिवर प्रणाम ऋषिवर कल्याण ऋषिवर हनुमान की शिक्षा हेतु हम आपके पास आए हैं यदि आप जैसा योग्य गुरु हनुमान को शिक्षा दे मेरा पुत्र धन्य हो [संगीत] जाएगा धन्य तो मैं हो जाऊंगा महाराज केसरी हनुमान जैसा शिष्य पाकर किसी भी गुरु के लिए हनुमान जैसा शिष्य पाना गौरव की बात है तो ऋषिवर क्या आज से ही आप हनुमान को अपना शिष्य स्वीकार कर सकते [संगीत] हैं पुत्र हनुमान निकट आ जैसी आपकी आज्ञा [संगीत] गुरुदेव हनुमान मेरा शिष्य बनने से पूर्व आपको संकल्प लेना होगा और संकल्प लेने के लिए आप अपने दोनों हस्त आगे करो [संगीत] पुत्र [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] ये तो श्री राम के चरण चिन्ह है हनुमान की हस्त [संगीत] में [संगीत] प्रभु के दिव्य चरण चि हनुमान के हस्त पर इनके दर्शन पाकर में धन्य हो गया फिर भला मैं इनका गुरु कैसे बन सकता [संगीत] हूं आपको सत सत नमन है हनुमान ओम हनुमते नमः ओम श्री प्रदाय नमः ओम वायु पुत्रय नमः ओम रुद्राय नमः ओम अनघाय [संगीत] नमः ऋषिवर आपके नेत्रों से तो अश्रु प्रवाहित हो रहे हैं क्या हुआ ऋषिवर महाराज केस मेरे समक्ष एक दुधा आपको हनुमान के लिए किसी अन्य गुरु को रना होगा मैं हनुमान का गुरु नहीं बन सकता [संगीत] क्षमा करें महाराज केसरी मैं इस योग्य नहीं हूं ऋषिवर हम तो बड़ी आशा लेकर आपके पास आए थे क्या दुविधा है बताइए ऋषिवर मेरी दुविधा य महाराज केसरी की हनुमान के हस्त में मुझे प्रभु दर्शन हुए [संगीत] महाराज की कौन किसका मुख्य गुरु होगा विधि द्वारा यह पूर्व निर्धारित होता है आपको हनुमान के लिए पूर्व निर्धारित योग्य गुरु को ही ढूंढना होगा किंतु ऋषिवर हनुमान की कुंडली के अनुसार संध्या काल तक यदि हनुमान के लिए निर्धारित गुरु प्राप्त नहीं हुए तो अनर्थ हो जाएगा आप तो सर्व समर्थ है ऋषिवर यदि आप मना कर देंगे तो इतने अल्प समय में हम हनुमान के लिए योग गुरु कहां से [संगीत] लाएंगे [संगीत] ये ग्रंथ तो वायु की तीव्रता से गिर ही जाएगा राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान ग्रंथ हनुमत हस्त में आया दिव्य आलोका आश्रम में छाया दुर्लभ ज्ञान ग्रंथ में सं चित स्पर्श मात्र से करते अर्जित हनुमत वाणी से हुआ प्रसारित मतंग मत तब हुआ प्रमाणित योग्यता का हो सम्मान श्रेष्ठ गुरु पाए हनुमान [संगीत] नमः प्याय चा वार जनम प्रतर चतर च नम तीर्थ चकल च नम श्या चन [संगीत] च अदभुत हैमा जिस ग्र के जन को क शिष्य वर्षों तक का समय लगा नहीं याद करका ज्ञान मान ग्रंथ को आत्म ग्रहण करते प्राप्त कर लिया महाराज के ऐसे लक्षण बालक को कोई लक्षण गुरु ही सकता है तो ष आपकी दृष्टि में कौन हो सकता है योग गुरु महा ऋषि श्रंग [संगीत] श्रंग महा ऋषि शृंगी हां महाराज महा तपस्वी महर्षि शृंगी व तप में मुझसे श्रेष्ठ है और ज्ञान में भी मुझसे अधिक है वही हनुमान के लिए योग्य गुरु हो सकते हैं उचित है ऋषिवर मैं महा ऋषि श्रृंगी के पास जाऊंगा और उनसे आग्रह करूंगा कि वह मेरे गुरुदेव वरना स्वीकार [संगीत] करें महा ऋषि श्रृंगी मुझे कहां मिलेंगे पुत्र हनुमान उत्तर दिशा की ओर वन के मध्य में उनकी कुटिया स्थित है स्वर्ण कमल वाले सरोवर के निकट तो मुझे उस स्थान के लिए प्रस्थान करने की आज्ञा दे प्रणाम हनुमान तुम अपने उद्देश्य में सफल हो तुम्ह योग्य गुरु की प्राप्ति [संगीत] हो किंतु तुम स्वयं गुरुवर को कैसे ढूंढ पाओगे पुत्र नारायण नारायण प्रणाम देवर्षी प्रणाम देव ऋषि शुभाशीष कल्याण मोह का त्याग कीजिए देवी अंजना और हनुमान को जाने दीजिए योग्य गुरु को ढूंढने के लिए शिष्य को ही श्रम करना होता [संगीत] पुत्र हनुमान स्मरण रहे तुम्हारे पास गुरुदेव को ढूंढने के लिए अल्प समय ही शेष है सूर्यास्त से पूर्व ही तुम्हें गुरुदेव को ढूंढकर उन्हें स्वयं को शिष्य के रूप में ग्रहण करने के लिए मनाना [संगीत] होगा [संगीत] नमो नमो हनुमान को श्र नमो [संगीत] शिवाय
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