[संगीत] अरे ये उल्का पिंड तो काले धुए से घिरे हुए हैं इनकी गणना करना तो बहुत कठिन होगा फिर भी गणना तो करनी ही [संगीत] होगी यह हुआ 18 कोटि 61 लक्ष 12 सहस्त्र 41 वा उल्का [संगीत] पिंड ओ हो हो ये क्या यह उल का पिन तो एक से दो में विभाजित हो रहा है तो अब यह 18 कोटी 61 लक्ष 12 सहस्त्र 41 नहीं हुए नहीं यह हुए 18 को 61 लक्ष 12 सहस्त्र 42 अरे अरे ये क्या यह तो अन्य उल्का पेन भी एक से दो में विभाजित हो रहे हैं इस प्रकार तो मेरी गणना मिथ्या ही हो जाएगी मुझे और एकाग्रता से इन पर ध्यान केंद्रित करना होगा हर बार एक छोड़कर हर दूसरा उल्का पिंड विभाजित हो रहा है तो यह है इनका क्रम मुझे विभाजित होने वाले और ना विभाजित होने वाले उल्का पिंडों की गणना भिन्न भिन्न रखनी होगी तभी उचित रहेगा 18 कोट 61 लाख 12 सहस्त्र 43 और यह 18 कोट 61 लाख 12 सहस्त्र 45 18 कोटी 61 लक्ष 12 सहस्त्र 46 18 कोट 61 लक्ष 12 सहस्त्र 48 ओ हो यह क्या इनमें से कुछ उल्का पिंड एक से तीन में विभाजित हो रहे [संगीत] हैं सखा सखा अब तुम्हें ही मेरी सहायता करनी होगी जा और अपना पराक्रम दिखाओ जाओ [संगीत] जाओ हां ये ठीक है अब मेरी गणना में त्रुटि नहीं [संगीत] होगी यह रहा 18 को 61 लाख 12 सहस्त्र 49 18 को 61 लाख 12 शस्त्र 50 18 को 61 लाख 12 शस्त्र 52 53 54 18 कोटी 61 लाख 12 शस्त्र बचपन अरे [संगीत] सखा सखा [संगीत] रुको हां सखा कुछ क्षण रुक भी जाओ ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान विषमताओं का हुआ अतिरेक बना सहायक उनका विवेक हनुमत में बुद्धि बल संचित होंगे नहीं कभी पराजित कठिनाई में धीरज धरते हनुमत युक्ति से विचार करते उल्का उं के हैं तीन प्रकार करते गणना उनके अनुसार गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली [संगीत] हनुमान धन्यवाद [संगीत] सखा [संगीत] [संगीत] हनुमान परिक्रमा पूरी करके आ रहा है प्रणाम गुरुदेव गुरुदेव आपने जो बताया था मैंने कार्य पूर्ण कर लिया है अच्छा पूर्ण तो किया किंतु सफलता के साथ हां गुरुदेव पात्र में से एक बूंद भी जल नीचे नहीं गिरा और उल्का पिंडों की गणना भी होती रही अरुणदेव आप प्रतिदिन मेरे सारथी के रूप में मेरे साथ पूरी सृष्टि की परिक्रमा करते मार्ग में जितने भी उल्का पिंड आते हैं उनका आकलन उनकी वास्तविक संख्या का तो ज्ञात है ना आपको आपको हनुमान के उत्तर की सत्यता प्रमाणित करनी होगी हनुमान तुमने जो उल्का पिंडों की गणना की है उनकी संख्या [संगीत] बताओ एक कोटि छह सहस्त्र 33 उल्का नहीं हनुमान तुमने सही प्रकार से गणना नहीं कील का संख्या हनुमत ने सुनाई अरुण देव ने अनुचित बतलाई नहीं होंगे हनुमत असफल कठिन श्रम होता नहीं निष्फल क्षमा कीजिए देव पहले मेरी पूरी बात तो सुनिए मैंने तो अभी आपको पूरी गणना तो बताई ही नहीं है यह तो मात्र वो उलका पिन है जो एक से तीन में विभाजित हुए थे इनके अतिरिक्त दो कोट 4 लक्ष 14 सहस्त्र 334 वोल का पिन थे जो एक में से दो विभाजित हुए थे इस प्रकार कुल मिलाकर 24 कोटी 66 लाख 13 सहस्त्र 636 उरका पिंड थे अरुण देव बताइए क्या हनुमान की गणना ठीक है हे प्रभु मेरी गणना ठीक हो कहीं मुझसे कोई त्रुटी ना हो गई हो [संगीत] हनुमान जो तुमने उल्का पिंडो की गणना की है वो पूर्णत सत्य है प्रत्येक पक्ष का रक्खा ध्यान हनुमत ने किया उचित समाधान इतना भी होता साध्य बुद्धि से पूर्ण होता का ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाब हनुमान वत्स हनुमान तुमने विपरीत परिस्थितियों में एकाग्रता का उच्च स्तर प्राप्त कर लिया प्रणाम गुरुदेव यह सब आपके गुरु ज्ञान के कारण ही संभव हुआ है और इसके लिए आपको [संगीत] नमन प्रणाम सूर्यदेव प्रणाम कीर्ति वान भवा पुत्र हनुमान आप यहां देवराज इद्र की ओर से कोई संदेश है हां सूर्यदेव वरुण देव के अनुरोध पर देवराज ने कल प्रात आपातकालीन देव सभा बुलाई है आपातकालीन सभा किंतु क्यों हनुमान की शिक्षा रोकने के लिए हनुमान की शिक्षा रोकने के लिए [संगीत] अब पुनः व्यवधान मेरी शिक्षा पूर्ण हो भी पाएगी या नहीं मुझे मात्र सात दिवस में शिक्षा पूर्ण करनी है अब कैसे पूर्ण होगी मेरी शिक्षा ऐसा कैसे कर सकता है कोई देव सूर्यदेव मुझे आज्ञा दे प्रणाम गुरुदेव आपके द्वारा ली गई परीक्षा में मैं उत्तीर्ण रहा हूं फिर कोई कैसे मेरी शिक्षा को रोक सकता है चिंतित मत हो मैं कल प्रात सभा में जाकर तुम्हारे पक्ष में बात करूंगा मेरा पूर्ण प्रयास होगा कि कोई तुम्हारी शिक्षा अवरुद्ध ना कर [संगीत] सके संध्या काल हो गया है हनुमान हमारी आज की शिक्षा पूर्ण हुई अब कल प्रातः देव सभा से लौटकर हमारी आगे की शिक्षा आरंभ होगी मुझे स्वयं ज्ञात नहीं पुत्र ये क्या हो रहा है प्रणाम गुरुदेव शिक्षा तो अब अवरुद्ध होकर ही रहेगी उस वानर बालक की राहु ने वरुण देव के ऊपर अपनी छाया का ऐसा प्रभाव डाला है कि उसकी तो मती ही फिर गई है मरण देव स्वयं मेरा कार्य करेंगे वो उस वानर बालक की शिक्षा पूर्ण नहीं होने [हंसी] देंगे राहु प्रसन्न कर दिया तुमने दशानन रावण को अब देखता हूं मैं के वो वानर बालक अपना विशेष कार्य कैसे पूर्ण करेगा जिसके लिए देवर स ने इंगित किया था कालने [संगीत] में विजरा असुर के बारे में कोई सूचना मिली है कि नहीं वो सुमेरो के बालकों को लेकर दंडक वन पहुंचा है कि नहीं वज्रास सुर अभी तक तुमर से दंडक पर नहीं पहुंचा है क्या अभी तक नहीं पहुंचा इतना समय क्यों लग रहा है आ और तुम सब उत्तर दिशा की ओर जाओ अंग बंग अयोध्या जनकपुरी कौशल कक आदि राज्यों से और बालकों का भरण करो और उन्हें दंडक वन में एकत्रित करो उस नारायण के नर तरर को मैं शीघ्रता शीघ्र ढूंढना चाहता हूं जाओ ऐसा ही हो होगा लंकेश जय लंकेश जय [संगीत] लंकेश जतनी ही शीघ्रता से मैं उसे अपने हाथों से मृत्यु दूंगा उतनी ही शीघ्रता से मुझे प्रसन्नता प्राप्त होगी मनुष्य के रूप में जन्म लेकर तू स्वयं नारायण भी मृत्युलोक के उस विधान से बं गए हैं कि जो भी कुक्षी से जन्म लेता है उसकी एक ना एक दिन तो मृत्यु होती ही है और भविष्य में निर्मित होने वाली स्थितियां ऐसी बन रही है कि श्री राम पर रावण के द्वारा घोर संकट की छाया दिखाई दे रही है आपका कथन सत्य है स्वामी श्री राम पर आए हुए संकट से हनुमान ही उन्हे बचा सकते हैं किंतु वरुण देव हनुमान के लिए बाधा उत्पन्न कर रहे हैं वरुण देव को यह समझना चाहिए दे अब यह भी हनुमान की एक परीक्षा है और इस परीक्षा को भी हनुमान को उत्तीर्ण करना [संगीत] होगा मेरी शिक्षा के लिए मां और पिताश्री तो अधीर है ही किंतु जिनके लिए मेरा जन्म हुआ है उनसे मिलने का उद्देश्य कैसे पूर्ण होगा मेरी शिक्षा की पूर्णता के [संगीत] बिना [संगीत] [संगीत] यह हनुमान को क्या [संगीत] हुआ प्रणाम गुरु माता यशस्वी भव [संगीत] पुत्र देव सभा के बारे में सोच रहे हो पुत लेकिन उसकी चिंता तुम मत करो तुम्हारे गुरुदेव सब संभाल [संगीत] लेंगे मैं देख रही तुमने भोजन भी नहीं किया यह लो लड्डू खाओ नहीं मुझे खाने की इच्छा नहीं है यदि मेरे स्थान पर तुम्हारी माता अंजना होती तो क्या फिर भी तुम यही [संगीत] कहते [संगीत] सब ठीक हो जाएगा पु [संगीत] [संगीत] नाना जाने क्या हुआ होगा र सभा में मेरी आगे की शिक्षा होगी भी या नहीं
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