Wednesday, 7 January 2026

हनुमान ने श्री राम और लक्ष्मण को अपने कंधे पर बैठाया Sankat Mochan Mahabali Hanuman 363 Penbhakti

[संगीत] प्रभु आपके इस आलिंगन के पश्चात यह प्रतीत हो रहा है कि जैसे मैं समस्त भव बंधनों से मुक्त हो गया हूं मेरा मन मस् तिक मेरा चित एक असीम शांति और अलौकिक आनंद से परिपूर्ण हो गया है प्रभु यही स्थिति होती है कैवल्य की हनुमान हम य सुग्रीव से भेंट करने आए हैं प्रभु महाबली सुग्रीव मेरे भ्राता समान है मेरे परम मित्र हैं वे और मैं उनके मंत्रियों में से एक हू वे वहां रिष्य मुख पर्वत के शिखर पर वास करते [संगीत] हैं मैं शीघ्र ही आपको वहां पर ले चलता हूं प्रभु उस पर्वत के शिखर पर लक्ष्मण हमें शीघ्र ही उस पर्वत शिखर पर चढ़ना होगा क्षमा कर [संगीत] प्रभु ऋषिमुख पर्वत पर चढ़ाई करना अत्यंत कठिन है यदि आपको आपत्ति ना हो तो मैं आप दोनों को अपने कंधों पर बिठाकर वहां ले जा सकता हूं यह कैसे संभव है हनुमान लक्ष्मण भैया जिसके साथ प्रभु श्री राम हो उसके लिए क्या संभव और क्या असंभव [संगीत] जय श्री राम आपकी आज्ञा है [संगीत] प्रभु [संगीत] आइए प्रभु आइए भ्राता [संगीत] लक्ष्मण संकोच मत कीजिए आपकी सेवा करना तो मेरा सौभाग्य होगा अपने इस सेवक को सेवा का अवसर दीजिए [संगीत] प्रभु [संगीत] लक्ष्मण [संगीत] [संगीत] जय श्री राम [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] म [संगीत] खोज के हे त जान की माई राम लखन पंपा सुर आई दुर्गम काज बजरंग संवारा धर लियो भीम रूप आकारा कांधे पे दो भ्रात बिठाई हनुमत यात्रा पूर्ण कराई रघुनंदन हर्षित पुलकिता सेवत राम शिवांश मुदिता ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान [संगीत] महाराज सुग्रीव वो देखिए हनुमान जी आ गए उनके साथ दो तपस्वी भी है और उनके साथ दो धनुर्धारी तपस्वी भी है हनुमान इन धनुर धारियों को यहां क्यों ला रहे हैं ना जाने यह मित्र है या [संगीत] [प्रशंसा] शत्रु [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] ता [संगीत] चलिए प्रभु प्रभु आइए आइए प्रभु भ्राता सुग्रीव यह प्रभु श्री राम है यह इनके अनुज भ्राता लक्ष्मण [संगीत] [संगीत] कौशलाया हैं प्रभु श्री राम यह महाबली सुग्रीव है प्रणाम माना राय दुर्भाग्यवश इनके भ्राता वाली के कारण इन्हें अपने राज पाठ का त्याग करना पड़ा और ऋषिमुख पर्वत पर शरण लेनी पड़ी और यह रिक्षा जामवंत जी हैं हमारे ज सदस्य और मार्गदर्शक प्रणाम रीच राज प्रणाम अवत कुमार मानर राज सुग्रीव जी हम य इसलिए आए हैं कि आप मेरी भार्या सीता को ढूंढने में मेरी सहायता करें राक्षस राज रावण उन्हें अपरत करके अपने विमान में कहीं ले गया विमान से मेरी रक्षा कीजिए ना प्रभु मेरी रक्षा कीजिए रक्षा कीजिए हनुमान को क्या हुआ अकस्मात कहां जा रहे हैं मुझे आपसे सहायता प्राप्त करने का सुझाव महा तपस्विनी माता शबरी ने दिया था श्री राम मैं आपकी भारिया को ढूंढने में आपकी सहायता अवश्य करता किंतु इस समय मैं ऋषिमुख पर्वत की सीमा से बाहर नहीं जा सकता इस सीमा को लांते ही वाली भैया अवश्य मेरा वध कर देंगे वद कर दूंगा मैं उस पीठ पीछे वार करने वाले कायर भाई सुग्रीव का वास्तव में वो मेरा भाई नहीं शत्रु है मात्र शत्रु ऋषि मुख पर्वत पर छिपकर बैठा है वह धूर्त मैं उस संपूर्ण पर्वत को जलाकर ही भस्म कर दूंगा स्वामी जो भी करना हो सोच विचार करके कीजिएगा सुना है उस पर्वत पर हनुमान और सुग्रीव के साथ कुछ और योद्धा भी जुड़ गए हैं कुछ योद्धा तो क्या वह योद्धाओं की पूरी सेना भी ले आए तो महानतम वाली के समक्ष कोई पल भर भी नहीं टिक पाएगा स्वामी आपकी बल और वीरता पर मुझे कोई संदेह नहीं है परंतु नीति हमेशा ही कहती आई आपका शत्रु कितना शक्तिशाली है किस प्रकार वो शक्ति संचय कर रहा है इस पर सदा ही आपकी दृष्टि होनी [संगीत] चाहिए सत्य कह रही हो तुम मैं शीघ्र अपने गुप्त जनों को वहां भेजूंगा मैं भी तो देखूं किसे बुलाया अपनी सहायता के लिए उस कायर ने श्रीराम पत्नी जो की पीड़ा मैं भली भाति समझ सकता हूं क्योंकि मेरी पत्नी को भी बलपूर्वक मुझसे दूर कर दिया गया है प्रभु प्रभु श्री राम यह आभूषण देखिए यह आभूषण कदाचित माता सीता के ही हैं [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] ज [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] हो [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] लक्ष्मण भैया जामवंत जी ने मुझे बताया था कि माता सीता का स्वयंवर बहुत ही भव्य था और विवाह भी बड़ी धूमधाम से हुआ था फिर ऐसा क्या हो गया कि प्रभु श्री राम माता सीता से विलग हो गए हैं और आप लोगों के तन पर यह राजसी वस्त्र के स्थान पर ये तपस्वी के वस्त्र क्यों हनुमान जी हुआ यह कि विवाह के पश्चात हम सब अयोध्या लौट आए तब पिता श्री महाराज दशरथ ने युवराज पद के लिए बड़े भैया श्री राम के राज्याभिषेक की घोषणा करा दी किंतु माता कैकेई चाहती थी युवराज पद भ्राता भरत को मिले पर यह तो अनुचित है प्रभु श्रीराम तो जेष्ठ है और भ्राता भरत कनिष्ठ हां किंतु एक समय पिताश्री ने माता कैकई को दो इच्छित व कभी भी मांगने का वचन दिया था उसी वचन का लाभ उठाया माता कैकेई ने फिर कौन से दो वचन मांगे माता कैकेई ने भ्राता भरत के लिए सिंहासन और भैया राम के लिए 14 वर्ष का [संगीत] वनवास यह तो बड़ा ही कठोर वचन मांग लिए माता कैकई ने हा रघुकुल रीत सदा चली आई प्राण जाए पर वचन ना जाई वचन की बेड़ियों ने विवश कर दिया था पिता श्री को फिर क्या हुआ फिर माता कैकई ने अपने कक्ष में उपस्थित होने के लिए उन्हें संदेश भिजवाया महाराज ऐसे में यदि मैंने मैंने राम को सब कुछ त्याग कर वनवास जाने को कह दिया तो कहीं वो क्रोधित होकर विद्रोह ना कर [संगीत] उठे हो सकता है महाराज हो सकता है कि कि वो मुझ पर आक्रमण भी करते तब तो तुमने अब तक राम को पहचाना ही नहीं मैं ये सब कुछ भी नहीं जानती आपको आपको सतर्क रहना होगा जब राम आए प्रणाम माता आपने मुझे [संगीत] [संगीत] बुलवाया राम मेरे पुत्र यह क्या माता पिताश्री को क्या [संगीत] हुआ पिताश्री राम राम पिताश्री आप कुशल तो है ना ये यह कुशल से है इनकी चिंता तुम मत करो राम मैंने तुम्हें यहां किसी विशेष कारण से [संगीत] बुलाया आदेश कीजिए माता आपकी आज्ञा का पालन होगा युवराज पद के लिए राज्य अभिषेक तुम रा नहीं मेरे पुत्र भरत का [संगीत] होगा और तुम्हें 14 वर्षों के लिए वन में वास करना हो कथनी सहज है और करनी कठिन है ना [प्रशंसा] राम आपकी आज्ञा मुझे स्वीकार है माता माता की इच्छा मेरे लिए सर्वोपरि [संगीत] है महान आत्मा है प्रभु श्रीराम जो उन्होंने माता के अन्याय पूर्ण आदेश को को भी बड़ी सहजता और प्रसन्नता के साथ स्वीकार किया हां माता की इच्छा पूर्ति के लिए उसी क्षण भैया राज सुख को त्यागने के लिए तत्पर हो गए भाभी मां ने भी साथ जाने की ठान ली और मैं मैं तो ठहरा बड़े भैया की परछाई मैं इनके बिना कैसे रह सकता [संगीत] [प्रशंसा] था भैया के लिए यह सब स्वीकार करना अत्यंत कठिन था फिर हम सब अयोध्या से चले [संगीत] गए 13 वर्षों तक हमने वनों में सुख पूर्वक जीवन व्यतीत किया अनेकों ऋषि मुनियों का आशीर्वाद प्राप्त किया किंतु वनवास के अंतिम वर्ष में दुर्भाग्य की काली छाया ने हमारे सुखों को लील लिया काली छाया ने हमारे सुखों को ल लिया काली छाया ने हमारे सुखों को चील लिया मैं हूं सूपनखा [संगीत] मात-पिता की आज्ञा का पालन करना संतान का परम कर्तव्य है

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...