[संगीत] [संगीत] इससे पहले कि मेरा साहस टूट जाए मेरा ममत्व दुर्बल पड़ जाए आप ले जाइए हनुमान को [संगीत] यहां देवी अंजना समय हमारे जाने का हुआ है हनुमान के जाने का नहीं अब हनुमान अपनी मां के साथ [संगीत] रहेगा अपने परिवार के साथ मैं वैधराज पूर्ण प्रसन्नता के साथ स्वच्छा से आज हनुमान का प्रतिदान हनुमान के परिवार को कर रहा हूं [संगीत] दान हो क्रय हो या शुल्क मां से उसकी संतान को कोई भी विलग नहीं कर सकता और जो ऐसा करता है वो पाप का भागी होता है आप दोनों मेरे जीवन में भगवान की भाति आए मेरे हनुमान की मनोदशा भी ठीक कर द हम सदैव आपके ऋणी रहेंगे आपको शत शत नमन आप दोनों को शत शत नमन [संगीत] पुत्र अपनी माता का ध्यान रखना अपने कर्तव्य निभाना किंतु हमें मत भूल [प्रशंसा] [संगीत] जाना प्रणाम वैद राज जी ओम नमः शिवाय ओम नमः शिवाय ओ नम शिवाय आप दोनों को भूल जाना तो स्वयं को भूल जाने के समान है मैं आपके घर आऊंगा आपकी सेवा करने आपका पुत्र ही तो हूं आयुमान कीर्तिमान [प्रशंसा] भाव चलिए ओ नमो शिवाय नमो नमो नमो [संगीत] [प्रशंसा] नय [संगीत] [संगीत] शनिदेव भयभीत होते होंगे सब आपसे किंतु मैं चंद्रदेव हूं अमृत का संरक्षक मुझे यूं ही नहीं बना दिया गया रक्षक अमृत की सुरक्षा एवं तुम रक्षकों की सजगता में कोई कमी तो नहीं है कदापि नहीं चंद्रदेव आपकी अनुमति के बिना अमृत तो क्या कोई इस कक्ष तक भी नहीं पहुंच [संगीत] सकता और यदि भूल से कोई प्रविष्ट हो भी जाए तो उसकी भी यही दशा होगी और यही नहीं अमृत कलश के चारों ओर प्रवाहित हो रही महा विनाशक विद्युत तरंगे वज्र को भी खंडित कर सकती है काल के वशीभूत होकर ही कोई यहां पर आने की मूर्खता कर सकता है शनिदेव अमृत पूर्णतया सुरक्षित है मेरे संरक्षण में स्वामी आप यहां और मैं आपको कहां-कहां ढूंढ रही थी इस प्रकार तो आप इस कक्ष में कभी नहीं आते हम कहीं भी कभी भी आ जा सकते हैं किंतु स्वामी इस पवित्र स्थल पर आपको इस प्रकार नहीं आना चाहिए था रोहिणी देवी कृपया अब आप मुझे ज्ञान मत दीजिए रुकिए स्वामी स्वामी पिता श्री ने अभिमंत्रित की हुई रत्न जड़ित अंगूठी आपके लिए भेजी है य आपको समस्त बुरे प्रभावों से रक्षित करेगी भविष्य में आपकी गृह दशा पर पड़ने वाले शनिदेव के बुरे प्रभाव को भी य नष्ट करेगी उस शनिदेव का नाम मत लीजिए मेरे समक्ष उस शनि देव की छाया मुझे स्पर्श भी नहीं कर सकती तो क्या हित करेगा सूर्यपुत्र शनिदेव [संगीत] मेरा अब आप भी मुझे ज्ञान देने चली आई [संगीत] [संगीत] चित्रा देखा चित्रा पिताश्री ने सत्य ही कहा था इन पर शनिदेव का प्रभाव है यह अच्छा नहीं हुआ रोहिणी रोहिणी अभी तो चंद्रदेव पर शनिदेव का सिर्फ आंशिक प्रभाव पड़ा है जब पूर्ण शनि दशा पड़ेगी तो स्थिति और भी विकट हो सकती है चंद्रदेव जैसे सौम्य एवं शांति प्रिय देवता का इस प्रकार रावण की ही भाति असुरी य व्यवहार करना तो अनुचित है उन्होंने अपने ससुर महाराज दक्ष द्वारा भेजी गई अंगूठी का भी अपमान कर दिया शनिदेव के प्रभाव से चंद्रदेव का समय प्रतिकूल हो गया था ऐसा समय हर मनुष्य के जीवन में आता है ऐसे प्रतिकूल समय में मनुष्य को विचलित हुए बिना अपने मन मस्तिष्क को शांत रखकर समस्या का समाधान ढूंढना [संगीत] चाहिए [संगीत] मां हनुमान भूख लगी है हां भूक तो लगी है पूजा समाप्त होने दीजिए तब तक मैं प्रतीक्षा कर लूंगा किंतु नानी आप यह तो बताइए मा ये कौन सी पूजा कर रही है तुम्हारी सुरक्षा समृद्धि और सुख के लिए चंद्र दर्शन व्रत का संकल्प कर रही है कह रही थी चंद्रदेव ने उन्हें तुम्हारे दर्शन कराए थे अच्छा चंद्रदेव ने तो मुझे भी मां के दर्शन दिए [संगीत] मां मां चंद्रदेव ने आपके मुझे भी दर्शन करवाए थे किंतु आज तो त्रयोदशी है आप व्रत क्यों रख रही हैं यह व्रत आज से परसों पूर्णमासी तक चलेगा यह विशेष महा पूर्णिमा की रात्रि 108 वर्षों पश्चात आ रही है ऐसा माना जाता है कि महा पूर्णिमा पर चंद्रदेव सारे जगत पर अमृत की वर्षा करते हैं किंतु इस पूर्णमासी पर ग्रह योग के अनुसार चंद्र देव पर शनि देव की दशा आरंभ हो रही है इस व्रत से तुम्हारी सुख और समृद्धि तो हो हो चंद्रदेव को भी पृष्टि प्रदान होगी महारानी जी अब आप अपनी अंजलि आगे [संगीत] कीजिए अब आप चंद्र दर्शन व्रत का संकल्प लीजिए मैं जो कहूंगा आप उसे दोहराए मैं देवी अंजना मैं देवी अंजना चंद्र दर्शन व्रत का संकल्प लेती हूं चंद्र दर्शन व्रत का संकल्प लेती हूं आज त्रयोदशी आज त्रयोदशी कल चतुर्दशी कल चतुर्दशी एवं पूर्णिमा को पूर्णिमा को सारा दिन व्रत रखूंगी सारा दिन व्रत रखूंगी एवं प्रत्येक दिन और प्रत्येक दिन चंद्र दर्शन के पश्चात ही चंद्र दर्शन के पश्चात ही अन्न जल ग्रहण करूंगी अन्न जल का ग्रहण करूंगी मेरा य वत मेरा यह व्रत पूर्णिमा को चंद्र दर्शन के पश्चात ही पूर्ण होगा पूर्णिमा को चंद्र दर्शन के पश्चात पूर्ण होगा ओम चम चंद्राय नमः ओम चम चंद्राय नम सामग्री यहां डाल [संगीत] दीजिए तु मां पूरे दिन ना ही कुछ खाएंगे ना ही जल पिएंगे महारानी [संगीत] जी आपकी संकल्प पूजा विधि संपन्न हो गई है चंद्रदेव आपको और आपके परिवार को सुख और समृद्धि प्रदान करेंगे प्रणाम पुरोहित जी धन्यवाद आप लोग दक्षिणा और भोजन ग्रहण कर कर ही जाइएगा अवश्य मां आपका कल्याण हो युवराज हनुमान हनुमान हनुमान उपवन में चलो फल खाएंगे हां हनुमान बहुत दिनों पश्चात आज क्रीड़ा में आनंद [संगीत] आएगा मां मैं जाऊ भोजन तो कर कर जाओ आप तो मेरी भलाई के लिए सारा दिन व्रत रखेंगी मैं कैसे कुछ खा पाऊंगा मां मुझे भूख नहीं है मैं जाऊं ठीक है जाओ किंतु दूर मत जाना अच्छा [संगीत] मां शीघ्र आज जा ना पुत्र ये हनुमान अरे ये कहां चला गया अभी तो कह रहा था कि भूख लगी है बच्चे हैं मां क्रीड़ा के समय भूख प्यास सब भूल जाते हैं [प्रशंसा] नील यह लो तुम्हारे लिए फल हनुमान तुमने कैसे पिशाच को परास्त किया हां पिशाच तो बड़े भयानक होते हैं बताओ ना क्या हुआ था बातें बाद में करेंगे बहुत दिन हो गए क्रीड़ा का आनंद नहीं लिया आज क्रीड़ा का आनंद लिया जाए किंतु किस क्रीड़ा का आनंद ले हनुमान तो अपनी शक्तियों से हमें परास्त कर देगा हनुमान तुम हमें वचन दो तुम क्रीड़ा में वरदानी शक्तियों का उपयोग नहीं करोगे तो ठीक है मैं वचन देता हूं अच्छा कौन सा खेल खेलेंगे कुछ ज्ञान मुझसे भी ले लो कंदूक प्रहार क्रीड़ा कैसी रहेगी हम बहुत अच्छा रहेगा हम हम तो चले देखो मैं तृतीय तक गिनू और जिसने तृतीय पर ये कंक उठा ली व पहले प्रहार करेगा सावधान प्रथम द्वितीय और तृतीय मैं पकडा मैं पकू इधर देना मैं लूंगा रुको तुमने कंदूक फिर से उठा ली तुम वरदानी शक्ति का उपयोग कर रहे हो नहीं मैं तो दौड़ कर आया तुम ही शीघ्रता से नहीं दौड़ रहे थे तो मैं क्या करूं अच्छा तो तुम किसी और पर प्रहार करो तो मैं भी दौड़ सकूं फिर देखते हैं ये कंदूक पहले तुम उठाते हो या मैं उठाता हूं अच्छा तो ऐसा है संभलो सुशीर हां [संगीत] प्रणाम महाराज पिता श्री हनुमान पिता श्री पुत्र पिता श्री पिता श्री पुत्र [संगीत] हनुमान पिता श्री पिता श्री पुत्र हनुमान पिताश्री [संगीत] पिता श्री राज जी स्वय मुझे यहां ले आए हा पुत्र यह तो बड़ा उपकार है राज जी का जो उन्होने मेरा पुत्र और सुमेरू का राजकुमार लौटा [संगीत] [प्रशंसा] दिया प्रणाम मंत्री [संगीत] जी आप सबको भी प्रणाम प्रणाम योराज प्रणाम मां प्रणाम महारानी जी अंजना क्या तुम्हे ज्ञात नहीं ज्योतिष आचार्य जी ने गणना करते ही बता दिया था कि आपको आपका पुत्र राज भवन में ही मिलेगा आता मैं सीधा राज भवन चला आया तब तो बड़े विद्वान होंगे ज्योतिषाचार्य जी हां [संगीत] पुत्र मंत्री जी जी युवराज हनुमान के आने पर भव्य उत्सव का आयोजन किया जाए सभी गणमान्य नगरवासियों को आमंत्रित किया जाए जोा महाराज पुत्र हनुमान तुम ही बताओ किस प्रकार का उत्सव चाहते हो तुम मित्र हनुमान उत्सव महल के प्रांगण में हो ढोल मंजीर बजे हां सब विभिन्न रंगों के वस्त्र आभूषण धारण कर कर आए अभीर गुलाल उड़े थोड़ा ज्ञान मुझसे भी ले लो हनुमान वहां बहुत सारा मिष्ठान हो विभिन्न पकवान [संगीत] हो आप सब बैठिए मैं आपको भोजन परोस हूं प्रजा की सेवा करना राजा का पदम कर्तव्य है मुझे भी तो आप सबकी सेवा करने का सौभाग्य मिलना चाहिए पिता श्री प्रजा के आनंद से ही राजा का आनंद जुड़ा हुआ होता है पिता श्री हनुमान की इच्छा है कि उत्सव ऐसा हो कि नगर में सारे घर में प्रस नता भर [संगीत] दे प्रत्येक गृह में उत्सव हो मां का व्रत भी है और मां का व्रत तभी पूर्ण होगा जब सारी प्रजा सुखी होगी हनुमान ा के प्रति तुम्हारा यह प्रेम देखकर मुझे अति प्रसन्नता हुई तुम जैसा कहोगे वैसे ही उत्सव का आयोजन होगा बताओ पुत्र क्या इच्छा है तुम्हारी पिताश्री सबका अर्थ यह नहीं कि एक दिवस के लिए सब आए अच्छा भोजन किया कुछ मनोरंजन हुआ और हो गया उत्सव सच्चा उत्सव तो तब होगा जब आप प्रजा के लिए अन्न के भंडार खुलवा दे उन्हें वस्त्र आभूषण आदि वितरित करें पिताश्री प्रजा की प्रसन्नता ही सबसे बड़ा उत्सव होगा पुत्र मैं एक नया हनुमान देख रही हूं तुम्हारी शिक्षा एवं तुम्हारी यात्रा ने तुम्हारे विचारों को परिपक्व बना दिया मुझे गर्व है तुम तुम सत्य कह रही हो अंजना मुझे हनुमान के एक ऐसा भावी राजा दिखाई दे रहा है जिसके राज्य में प्रजा सदैव सुखी [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] रहेगी मंत्री जी जी सभी प्रजा जनों के लिए अन्न के भंडारे खोल दिए जाए वस्त्र आभूषण बटवा जाए और जिनके पास रहने के लिए घर नहीं है उनके घर की व्यवस्था की जाए जो आज्ञा [संगीत] महाराज [संगीत] [संगीत] अनुचर यह अन्य वस्त्र आदि सुमेरू नगर के हर घर में वितरित किया जाए जो निर्धन है या जिन्ह इसकी आवश्यकता है हर घर में आनंद उत्सव होना [संगीत] चाहिए इतने बड़े सुमेरू राज्य में सबको अन वस्त्र पहुंचाने में तो बहुत समय लग जाएगा मंत्री जी मैं भी इस कार्य में सहायता करूंगा आप [संगीत] युवराज मां मुझे दाल चाहिए घर में है ही नहीं दाल तो दूं कहां से हनुमान जैसे युवराज पाके हम तो धन्य हो [संगीत] गए मारुति करते सबकी सहाय मन में भरे महा करुणा अपनी प्रजा का रखते मान महा कृपालु वीर हनुमान सबको मिले द्रव्य और धन हर्षित रहे सकल प्रजा जन सुख दे दाता सुख के धाम जय जय हनुमत बल के धाम ये गाथा महाबली हनुमत की रचक लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली [संगीत] हनुमान
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