Wednesday, 7 January 2026

हनुमान ने शनिदेव से विनती क्यों की थी Nirbhay Wadhwa Mahabali Hanuman Episode 237 Pen Bhakti

[संगीत] [संगीत] हनुमान बल पूर्वक मुझे शनिदेव के पास ले जा रहा है उनकी क्रोधाग्नि बहुत भड़की हुई है यदि उन्हें ज्ञात हो गया कि मैंने अमृत रावण को दे दिया है तब तो ना जाने क्या कर बैठेंगे वो अब तो कोई नहीं बचा सकता [संगीत] मुझे हनुमान शीघ्र लेकर आओ चंद्रदेव को मेरे समक्ष मेरे प्रतिशोध की ज्वाला धक रही है चंद्र देव को अपनी क्रोधाग्नि में जलाने के [संगीत] लिए श्री श्री [संगीत] [संगीत] श्री [संगीत] प्रणाम [संगीत] शनिद बहुत अच्छा किया तुमने हनुमान चंद्रदेव को मेरे समक्ष बंदी बनाकर ले आए बहुत भाग रहे थे ये चंद्रदेव अब तुम्हें ज्ञात होगा शनि देव को अपमानित करने का दंड क्या होता है अब पड़ेगा तुम पर मेरी पूर्ण दृष्टि पात का प्रकोप आज भी उधत नहीं हुए चंद्रदेव मुझे शीघ्र ही चंद्र जल लेकर सुमेरू पहुंचना होगा वहां कोई अनर्थ ना हो जाए मुझे और शीघ्रता से चंद्रगी के शिखर की ओर जाना होगा चढ़ाई तो बहुत कठिन है किंतु मैं रुकूंगा नहीं यदि उस चट्टान तक पहुंच गया तो आगे बढ़ सकता हूं दंपति धर्म जगत में पावन सुखदाई मन मोद बढ़ाव जहां युगल मन प्रीत निभाते वहां सदा हम मंगल पाते मन में मान रहे गृहिणी का वह घर मंदिर जगत अनूपा तेरे साथ रखे जो ध्यान दंपति वे समाज के मान ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महावली ह यह तो बहुत गहरी खाई है किंतु अंजना के लिए मैं कुछ भी कर सकता [संगीत] हूं क्षमा करें [संगीत] शनिदेव मैं यहां चंद्र देव को दंड दिलवाने नहीं समझौता करवाने लाया हूं दंड नहीं दंड के पात्र है [संगीत] ये ऐसा मत कहिए शनिदेव आप दोनों नवग्रह मंडल के सामान्य देव है जिससे सृष्टि का संचालन सुचारू रूप से होता है आप दोनों के इस विवाद का प्रभाव पूरे संसार पर हो रहा है इनसे पूछो हनुमान क्या इन्ह संसार की चिंता है इन्होंने मेरा अपमान ही नहीं अप तो संसार के प्रति भी अपराध किया है मां शीघ्र ही स्थिति ठीक नहीं हुई तो मुझे भय है महारानी जी को कुछ हो ना जाए इनकी दशा निरंतर बिगड़ती जा रही है आज चतुर्दशी की रात्रि भी अंधकार में है आज भी प्रतीत हो रहा है कि चंद्रदेव के दर्शन नहीं हो पाएंगे चंद्रदेव के दर्शन हो जाते तो महारानी जी कुछ तो अंजल ग्रहण कर [संगीत] लेती कुछ तो शक्ति मिल जाती चंद्रगी पर्वत से चंद्र जल ही आ जाए कुछ समय के लिए अंजना को शक्ति मिल जाएगी प्रार्थना करो कि केसरी जी शीघ्र ही वो जल लेकर चंद्रगी पर्वत से लौट [संगीत] आए [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] शिखर पर तो पहुंच गए चंद्र जल यहीं कहीं होना चाहिए वहां कोई कुंड दिखाई दे रहा [संगीत] है इस कुंड के जल में ना ही मेरा पति बि दिखाई दे रहा है और ना ही मशाल की अग्नि का यही है चंद्र [प्रशंसा] [संगीत] जल मेरी अंजना के जीवन की रक्षा हो [संगीत] जाएगी जब तक हनुमान का उद्देश्य पूर्ण [प्रशंसा] होगा तब तक यह चंद्र जल अंजना की शक्ति बनाए रखेगा अपने नियत समय पर आलोकित होकर इन्होंने सृष्टि चक्र को बाधित किया है मेरा न्याय कहता है न् तंड अवश्य मिलना चाहिए किंतु शनिदेव क्षमा करना भी तो पूरे संसार में न्याय ही है हनुमान न्याय के देवता को तुम सिखाओ ग कि न्याय क्या होता है बालक हो तुम अपनी मर्यादा में रहो आकार बड़ा कर लेने से कोई बड़ा नहीं हो जाता शनिदेव मैं आपसे छोटा हूं और आप मुझसे बड़े हैं और बड़े ही रहेंगे आप अपना बड़पन दिखाते हुए इस विवाद को समाप्त कर दीजिए नहीं हनुमान एक भूल तुम्हारी माता ने की थी चंद्रदेव को अभय दान देकर अब वही भूल तुम कर रहे हो किंतु हनुमान ना तुम्हारी मां का वचन पूर्ण होगा और ना ही तुम्हारा यह प्रयास चंद्रदेव को मेरे कोप का भाजन बनना ही होगा हनुमान मैंने तुम्हें पहले ही बताया था क्रोधा वेष के कारण शनिदेव विवेक शून्य हो गए हैं न्याय और अन्याय की परिभाषा भूल गए हैं यह मेरे क्रोधा आवेश ने नहीं अभी तो आपके अहंकार ने आपको विवेक शून्य बना दिया था ब घमंड है ना आपको दक्ष प्रजापति के जमाता होने का महादेव के मस्तक पर विराजमान होने का अब देखना कैसे मैं खंड खंड करता हूं आपका यह अहंकार देख रहे हो शनिदेव का उग्र रूप चंद्रदेव कब तक आप भागते रहेंगे कहां जाएंगे आप परि स्थिति का सामना कीजिए मैं हूं आपके साथ हनुमान क्या करोगे तुम शनिदेव ने जो तुमको वरदान दिया है कि उनकी दृष्टि का प्रभाव तुम पर नहीं पड़ेगा उस वरदान का भी मान नहीं रखेंगे वो उन्हें इस समय मात्र प्रतिशोध ही दिखाई दे रहा है और कुछ नहीं हनुमान मैं तुम्हें वरदान देता हूं कि कभी तुम पर मेरी दृष्टि का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा अच्छा तो तुम मेरे दिए गए वरदान के कारण खड़े हो निर्भय होकर मेरे समक्ष शनिदेव वरदान ना होता तो तब भी मैं यही करता मुझे मेरी मां के वचन और व्रत दोनों पूर्ण कराने हैं शनिदेव मेरी मां के जीवन की रक्षा उनके व्रत पूर्ण करने से ही होगी बस यही मेरा उद्देश्य है इतनी कृपा कर दीजिए मुझ पर तुम्हारा उद्देश्य कुछ भी हो हनुमान किंतु मेरा उद्देश्य है चंद्रदेव को तंक करना और मैं अपना उद्देश्य पूर्ण करके [संगीत] रहूंगा विलंब मत करो हनुमान यदि तुम अपने मां के व्रत को पूर्ण करना चाहते हो तो शनिदेव को विवश करो कि वह अपनी दृष्टि का प्रभाव मुझसे हटाए हनुमान अपना वचन निभाओ शनिदेव चंद्रदेव की रक्षा करने का वचन मेरी मां ने दिया था और मैं वह वचन निभाऊंगा मैं करूंगा रक्षा चंद्रदेव की हनुमान मुझे चुनौती दे रहे हो तुम शनिदेव [प्रशंसा] [संगीत] को प्रणाम शनिदेव चंद्रदेव को यहीं छोड़कर चले जाओ हनुमान यदि चंद्रदेव के पक्ष में कोई भी कार्य किया तो उसका दुष्परिणाम भोगने के लिए प्रस्तुत रहना प्रणाम शनिदेव हनुमान यदि चंद्रदेव के पक्ष में कोई भी कार्य किया तो उसका दुष्परिणाम भोगने के लिए प्रस्तुत रहना शनिदेव मैं यहां चंद्रदेव को दंड दिलवाने नहीं समझौता करवाने लाया हूं अनुमान श्री श्र तो अब तुम समझाओ ग मुझे तुम्हारे लिए तो मेरी अन्य शक्तियां ही पर्याप्त है हनुमान तुम पर तो मुझे दृष्टि पात करने की आवश्यकता भी नहीं है अब क्या होगा हनुमान चंद्रदेव मैं आपकी डाल बनकर आपकी रक्षा करूंगा आप मेरे पीछे ही खड़े रहिए लो अब भोगो दन तुम भी [संगीत] शनिदेव चाहे मुझे कुछ भी हो जाए किंतु मैं चंद्रदेव को कोई हानि पहुचने नहीं दूंगा हनुमान यदि वीर हो तो युद्ध करो मुझसे अन्यथा चंद्र देव के सामने से हट जाओ नहीं शनिदेव ही मैं चंद्रदेव के सामने से हटूंगा ना ही मैं आप पर वार करूंगा ना ही तुम युद्ध करोगे ना चंद्रदेव को सोगे चाहते क्या हो तुम शनिदेव आप के पिताजी और मेरे गुरुदेव सूर्यदेव ने मुझे वचन दिया था कि मैं उनके पुत्रों की रक्षा करूंगा इसीलिए मैं आप पर वार नहीं करूंगा तुम्हारे जैसे शिष्य का होना तो गुरु के लिए गौरव की बात है फिर भी यदि तुम गुरु दक्षिणा देना चाहते हो तो दक्षिणा में मात्र मुझे इतना ही चाहिए कि संसार में मेरे पुत्रों की रक्षा का उत्तरदायित्व तुम रा होगा हनुमान ऐसा ही होगा गुरुदेव मैं आपके पुत्रों की रक्षा करूंगा शनिदेव मैं उस वचन से बंधा हुआ हूं परंतु मैं चंद्रदेव को भी कोई हानि पहुंचने नहीं दे सकता तो ठीक है मैं भी देखता हूं कब तक तुम चंद्रदेव की रक्षा कर पाते हो [संगीत] ना ना [संगीत] [संगीत] मां ी

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...