Wednesday, 7 January 2026

हनुमान ने शनिदेव के चोटों पर लगाया तेल का लेप Ishant Mahabali Hanuman Episode 243 Pen Bhakti

[संगीत] [संगीत] आ [संगीत] मैं कितना पापी हूं हनुमान जो मेरे कारण तुम्हारी नन्ही कोमल देह में इतनी चोटे [संगीत] आई शनिदेव आपको भी तो अनेक चोटें आई हैं मैं इसका अधिकारी था हनुमान मुझे तो इससे भी भयानक दंड मिलना चाहिए था शनिदेव आपको ज्ञात है मेरे युद्ध अभ्यास के समय मुझे भी ऐसी ही चोटे लगती थी और तब मेरे पिता श्री मुझे तेल का लेपन करा दिया करते थे तो चोटें ठीक हो जाती थी यदि यहां तेल होता तो मैं अभी आपको तेल लेपन कर देती नारायण [संगीत] नारायण देवी सुना आपने हनुमान ने क्या कहा शीघ्र ही तेल की व्यवस्था कीजिए अवश्य देव [संगीत] श [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] बड़ा ही अद्भुत और मनोरम दृश्य है ये हनुमान स्वयं अपने हाथों से शनिदेव को तेल का लेपन कर [संगीत] [प्रशंसा] रहे नारायण नारायण हनुमान इस प्रकार सेवा कर रहे हैं शनिदेव की जैसे पुत्र अपने पिता की सेवा करता है [प्रशंसा] [प्रशंसा] पुत्र तुम्हे भी चोट आई मुझे दो मैं भी तुम्हारे घव पर तेल का लेपन कर देता [संगीत] [संगीत] ह [संगीत] [प्रशंसा] प्रणाम मंगल [संगीत] देव पुत्र हनुमान तुमने मेरे मंगल ग्रह को भी कालचक्र से बचाया है अतः मैं मंगल देव यह विधान करता हूं कि जो मनुष्य तुम्हारे नाम का मंगलवार के दिन स्मरण करेगा उसके सारे अमंगल टल जाएंगे और उसके साथ सदैव मंगल ही मंगल होगा [संगीत] [संगीत] हनुमान पुत्र आज तुमने मुझे उचित मार्ग दिखाया है मुझे पुनः न्याय के पथ पर चलना सिखाया है मेरे घावों पर तेल का लेपन करके मेरे कष्टों को मिटाया है इसलिए आज से मैं यह विधान करता हूं कि जो भी कोई मंगलवार के दिन तुम्हें तेल चढ़ाकर तुम्हारी पूजा करे और शनिवार के दिन मुझे तेल चढ़ाकर तुम्हारी पूजा करे वह सदैव मेरी कृपा का पात्र रहेगा मैं शनिदेव उसके सारे कष्ट मिटांग मेरी शनि दशा कभी भी उसे प्रभावित नहीं करेगी मैं शनिदेव समस्त देवताओं को साक्षी मानकर यह वचन देता हूं कि मैं हनुमान पर कभी भी शनि दशा का प्रभाव नहीं डालू और जो भी कोई हनुमान की पूजा करेगा वह भी सदैव मेरे प्रभाव से मुक्त रहेगा आप दोनों का बहुत-बहुत आभार जो आप दोनों ने जगत के कल्याण के लिए मुझे इतने हितकारी और दिव्य वरदान [संगीत] दिए शनिदेव अब आप मेरी मां का कल्याण कर दीजिए शनि को दृष्टि का मिला उपाय हनुमत होंगे सबके सहाय हुआ पतन यह महा शनी का करता हानि घमंड सभी का मम को दृष्टि जाए अब टार दिया शनि ने चन यह भारी तेल चढ़ाए जो हनुमन को शनि की दृष्टि छुए नहीं उनको महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान चंद्रदेव को क्षमा करके उन पर से अपनी गोप दृष्टि का प्रभाव हटा दीजिए ताकि वो उदित होकर मेरी मां का व्रत पूर्ण कर सके शनिदेव मैं भी अपनी भूल स्वीकार करता हूं मुझे भी इतना अहंकार नहीं करना चाहिए था मुझे क्षमा करें चंद्रदेव हमारे और आपके अहम के टकराव में इस समस्त सृष्टि को संतप्त होना पड़ा इसके लिए मैं भी आपसे क्षमा मांगता हूं [संगीत] शनिदेव मेरे आलोकित ना होने के कारण हनुमान की मां एवं समस्त सृष्टि कष्ट में है मेरे दोष का निवारण करें जिससे चंद्रोदय हो सके और सबका संताप मिटे चंद्रदेव मैंने तो भले ही आपके प्रति उपज कोप को त्याग दिया है किंतु शनि दशा का दोष ग्रह गोचर के अनुसार चलता है इससे मिटाया नहीं जा सकता यदि इन पर से शनि दशा नहीं हटी तो यह पूर्ण तरह से आलोकित नहीं हो पाएंगे शनिदेव कोई तो उपाय होगा जिससे आपके दोष से मुक्ति पाई जा सके कोई जाप तप व्रत या पूजा पुत्र हनुमान तुम्हारी दिव्यता के समक्ष मेरा भी तेज कम हो गया यदि तुम्हारी दिव्यता का कुछ अंश चंद्रदेव को मिले तो हो सकता है मेरा प्रभाव कम हो जाए शनिदेव मैं मां के लिए कुछ भी करूंगा मैं दूंगा अपना दिव्यांश चंद्रदेव को जिससे कि वह आपके दोष से मुक्त हो पाए हनुमान तुम्ह मैंने दृष्टि ना डालने का वचन भी दिया है अब तुम चंद्रदेव को अपने मस्तक की शोभा बनाओ जिससे मेरी दृष्टि का प्रभाव इन पर भी कभी नहीं पड़ेगा आपने जैसा कहा वैसा ही [संगीत] होगा चंद्रदेव यह लीजिए मेरा [संगीत] दिव्यांश [संगीत] धन्यवाद [संगीत] हनुमान [संगीत] [संगीत] हनुमान तो चंद्रदेव को मस्तक पर धारण कर चंद्रेश्वर हनुमान बन गए चंद्रेश्वर हनुमान की जय चंद्रेश्वर हनुमान की जय चंद्रेश्वर हनुमान की जय चंद्रेश्वर हनुमान की जय चंद्रेश्वर हनुमान की जय चंदेश्वर हनुमान की जय चंद्रेश्वर हनुमान की जय चंद्रेश्वर हनुमान की जय अब तो चंद्रदेव उदित हो ही जाएंगे अब मुझे शीघ्र ही मां का व्रत पूर्ण करने जाना है मैं ही उन्हें जल पिलाकर उनका व्रत पूर्ण कराऊंगा ना जाने अब मां किस स्थिति में होंगी अंजना अंजना अंजना केसरी जी ये देखिए अंजना को क्या हो गया इसका मस्तक भी ठंडा प्रतीत होर ये नहीं आंखें खोलो अंजना अंजना अंजना महारानी जी महारानी [संगीत] जी राम लंकेश जय लंकेश जय लंकेश जय जय लंकेश राहु तुम तो ऐसे जय जयकार कर रहे हो जैसे हमने विश्व विजय कर ली हो अब आपकी विष विजय के ही संकेत है लंकेश अब आप शीघ्र ही होंगे अमर विष विजेता और आपके सेवक समस्त असुर अवध तो क्या महा पूर्णिमा का चंद्र उदित हो गया है होने ही वाला है लंकेश उस वानर ने चंद्रदेव की शनि दशा दूर करा दी है वो चंद्रदेव को लेकर चंद्रलोक के लिए निकल गया है अब शीघ्र ही होगा महा पूर्णिमा का चंद्रोदय काल लंकेश दशानन को कालनेमी का प्रणाम राहु केतु कुछ क्षण में महा पूर्णिमा का चंद्र उदय होने वाला है तीनों लोगों से हमारे समस्त असुर आ ही गए होंगे शीघ्र जाकर हमारी सभा की व्यवस्था करो घोषणा करा दो के उनका सम्राट लंकेश दशानन रावण अमृत पान करके अमर होने वाला है और अमर कर देगा वो समस्त रक्ष बंधुओं को असुरों को रावण है [संगीत] हम मुझे आज्ञा दे [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] शनिदेव [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] ओम जय जय जय कपीश्वर हनुमान ओम जय जय आंजनेय करुणा निधान ओम जय जय केसरी सुत वीर बलवान ओम जय जय जगत संरक्षक ओम जय जय हे पाप भक्षक ओम जय जय शनेश्वर दोष नाशक ओम जय जय जय सर्व कष्ट विनाशक तुम्हरी शरण सदा सुखदायक तुम हो जग के मंगल नायक [संगीत] ओ हनुमान बहुत अभिभूत हुआ शनिदेव रुद्रेश्वर अब तो हनुमान ने भी चंद्रदेव को अपने मस्तक का आभूषण बना लिया [संगीत] है चंद्रदेव आप पर से शनिदेव का कोप अब शांत हो गया है इन्होंने आपको शनि दशा से मुक्त कर दिया है अब आप शीघ्र ही आलोकित होकर मेरी मां का व्रत पूर्ण कराइए नारायण नारायण हा चंद्रदेव देवी अंजना ने अपने पुत्र हनुमान के मंगल के लिए यह निर्जला व्रत रखा है जिससे वह हनुमान के समक्ष ही आपके पूर्ण चंद्रमा रूप के दर्शन एवं पूजन करके संपन्न करेंगे मुझे ज्ञात है देवर्ष किंतु एक सत्य और भी है जो आपको ज्ञात नहीं आप किस सत्य की बात कर रहे हैं देवर्षी अपनी मां को स्वयं के लिए निर्जल व्रत करते हुए देखकर हनुमान ने भी तभी से अंजल का त्याग किया हुआ [संगीत] है हनुमान तुमने इस संसार के लिए अपनी मां के लिए इतने सारे कष्ट सहे किंतु स्वयं के बारे में ना ही हमें कुछ बताया और ना ही कुछ ज्ञात होने दिया तुम जैसा मातृ भक्त ना ही संसार में कभी हुआ है और ना ही कभी होगा तुम्हारी इस मात्र भक्ति को मेरा शत शत नमन है हनुमान हम सबका भी नमन है तुम्हारी मातृ भक्ति को [संगीत] हनुमान शनिदेव मैं तो इस संसार का एक छोटा सा सेवक हूं अपनी मां का पुत्र हूं मैंने तो मात्र अपना सेवक धर्म एवं पुत्र धर्म ही निभाया है और आप सब तो महान देवता है मुझ बालक को को आप आशीर्वाद दीजिए मैं नमन के योग्य नहीं हूं हनुमान पुत्र हम सभी देवताओं के आशीर्वाद तो सदा तुम्हारे साथ हैं किंतु हम सभी देवता नमन तो उस मातृ भक्ति को करते हैं जो मनुष्य को मनुष्य से देवता और भगवान की श्रेणी तक पहुंचाती है हां हनुमान तुम्हारा नी स्वार्थ सेवा भाव एवं अनुपम मातृ भक्ति सदैव नमन के योग्य है तुम जैसा पुत्र जिन माता-पिता का है वे सब भी नमन के योग्य हैं अब जाओ शीघ्र ही अपनी माता के व्रत को पूर्ण कराओ चंद्रदेव मेरी मां का एक एक क्षण कैसा कष्टकारी प्रतीत हो रहा होगा जितना शीघ्र चंद्र उदय होगा उतना ही मेरी मां के लिए अच्छा होगा इसलिए आप मेरी विनती स्वीकार कर लीजिए हां हा हनुमान बोलो क्या कहना चाहते हो चंद्रदेव मैं आपको यहां से तीव्र गति से चंद्रलोक ले जाना चाहता हूं ताकि आप शीघ्र ही व्यवस्था कर पाए चंद्रोदय के लिए उचित है हनुमान मैं तुम्हारे साथ चलने लिए प्रस्तुत हूं आप सबको मेरा नमन मुझे आज्ञा दे प्रणाम आज्ञा दे माता [संगीत] [संगीत] शनिदेव मुझे आज्ञा [संगीत] दीजिए आज्ञा दे [संगीत] देवगढ [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] हे

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