Wednesday, 7 January 2026

हनुमान ने रावण और बाली को ऋषि के क्रोध से बचाया Sankat Mochan Mahabali Hanuman 326 Pen Bhakti

[संगीत] मान तुम उनकी रक्षा कर रहे हो जिनका एक मात्र लक्ष्य है तुम्हारा अहित करना दुष्टों पर भी दया दिखावे हनुमत ऋषि चरण न गिर जावे दुर्वासा मुनि क्रोध में आए हनुमत क्षमा की अर्ज लगाए भ्रात की चिंता मन है अधीरा जय हो दया के सागर वीरा कोमल सरस हृदय चित चंदन अंजनि नंदन शत शत वंदन महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान रे शिवर मैंने वाली भैया को अपने बड़े भ्राता समान माना है और उनकी माता को अपनी मां समान फिर कैसे मैं मां और अपने बड़े भ्राता के दुख का कारण बन सकता हूं तुम कोई साधारण बालक नहीं हो सकते कौन हो तुम [संगीत] व [संगीत] भगवान विष्णु के इस राम अवतार के साथ-साथ मेरा अंश इस वानर कूल में उत्तम वानर हनुमान बनकर जन्म [संगीत] लेगा [संगीत] [संगीत] [संगीत] महादेव भोलेनाथ मुझे क्षमा करना प्रभु मैं आपको पहचान नहीं [संगीत] सका यह मैं क्या करने जा रहा था और यह [संगीत] चल तुम धर्म और न्याय पद के सच्चे प्रवर्तक हो हनुमान मेरा आशीर्वाद है रे [संगीत] साथ संसार में तुम सदा धर्म और सत्य की अलग जगाए [संगीत] रखोगे मेरे लाल को संकट से बचा लिया महादेव ने आपको शद शद [संगीत] नमन ठीक है हनुमान तुम्हारी विनती को स्वीकार करते हुए मैं रावण और वाली को दुष्कर्म त्यागने का एक अवसर देता [प्रशंसा] [संगीत] हूं किंतु यद उन्होंने पुनः तुम्हारे विरुद्ध कोई कृत्य किया तो उन्हें दुर्वासा के कोप का सामना करना [संगीत] पड़ेगा मैं वचन देती हूं ऋषिवर मैं किसी भी प्रकार स्वामी को दुष्कर्म का त्याग करने के लिए मना लू स्मरण रहे रावण को जीवन दान हनुमान की विनती से प्राप्त हुआ है अतः भविष्य में हनुमान के इस उपकार का प्रतिफल देना [संगीत] होगा मैं भविष्य में हनुमान को कभी भी इस उपकार का प्रतिफल देने का वचन देवी मंदोदरी का यही वचन भविष्य में बहुत उपयोगी सिद्ध [संगीत] होगा धन्यवाद हनुमा तुम्हारे का मेरे स्वामी शापित होने से बच गए मुझे आज्ञा दीजिए ि प्रणाम [संगीत] ि ऋषिवर आपने वाली भैया को क्षमा करके मुझ पर बहुत बड़ा उपकार किया है आपको कोटि कोटि [संगीत] धन्यवाद आपकी लीला आप ही जाने [संगीत] प्रभु यह क्या मैं हनुमान के ललाट पर क्या देख रहा हूं यह नवग्रहों की स्थिति हनुमान के भविष्य की ओर कुछ विशेष इंगित कर रही [संगीत] है हनुमान मैं श्राप देता हूं कि तुम अपनी सारी बल विद्या भूल जाओगे हनुमान की तो नियत ही है शापित होना माध्यम भले ही वाली और रावण हो या कोई अन्य हनुमान तभी तक बचा रह सकता है जब तक कोई नहीं करता किंतु नियती है तो किसी ना किसी माध्यम से भूल होकर ही रहेगी क्या हुआ ऋषिवर किसी गहन विचार के मंथन में डूबे हुए हैं आप हनुमान मैंने कुछ देखा है तुम्हारे भविष्य [संगीत] में तुम पर कोई बड़ा संकट आने की संभावना है अद तुम्ह सावधान रहना [संगीत] होगा ना जाने मेरे पुत्र हनुमान को कब संकटों से मुक्ति मिलेगी और यह अन्य बालकों की भाती जीवन जी सकेगा ऋषिवर सबसे बड़ी शक्ति मा पिता का आशीर्वाद ही होता है मेरी मां पिताश्री एवं गुरुजनों का आशीर्वाद साथ रहे तो किसी भी संकट से भयभीत होने की कोई आवश्यकता नहीं सत्य है पुत्र किंतु नियत के समक्ष सारे आशीर्वाद समस्त शक्तियां विवश हो जाती हैं अतः सावधान रहना कि तुमसे कोई भूल ना हो उचित है ऋषिवर मैं सावधान रहूंगा कि मुझसे भूल से भी कोई भूल ना हो परंतु ऋषिवर आप कब तक अपनी अंजुली में यह जल रखेंगे हनुमान यह जल श्राप के लिए अभिमंत्रित हो चुका है पुत्र इसे यूं ही कहीं पर भी गिरा नहीं सकते क्योंकि यह जल जहां भी गिरेगा वहां अनिष्ट होगा इसलिए इस जल को किसी निर्जल स्थान पर विसर्जित करना होगा ऋषिवर आपकी आज्ञा हो तो क्या यह आपका कार्य मैं कर सकता हूं ठीक है हनुमान इस कार्य को तुम ही करो [संगीत] अवश्य ऋषिवर प्रणाम कल्याण हो प्रणाम मां प्रणाम पिताश्री [संगीत] यह शाश्वत सत्य है कि जिसका जन्म हुआ है एक दिन उसकी मृत्यु भी निश्चित है किंतु फिर भी मृत्यु कोई नहीं चाहता रावण को भी मृत्यु का भय था इसीलिए हनुमान के जन्म से ही उसने हनुमान को मारने के षड्यंत्र रचने आरंभ कर दिए थे किंतु ऋषि दुर्वासा की चेतावनी के पश्चात रावण यह समझ गया था यदि अब उसने हनुमान के विरुद्ध कुछ किया तो उसे ऋषि दुर्वासा के कोप का सामना करना होगा किंतु उसकी अमर होने की इच्छा अब भी बलवती थी और अमर होने का एक साधन है अमृत की प्राप्ति अतः पत्नी मंदोदरी माता कैकसी एवं पिता विश्रवा के समझाने पर उसने अमृत प्राप्ति के लिए तप करने का निश्चय करके वन की ओर प्रस्थान किया किंतु द्वारकाधीश बाली का क्या हुआ क्या किया उसने महा हठी वाली जब स्थिति की गंभीरता को ना समझकर अपनी हट पर अड़ा रहा तो स्वयं उसकी माता उसे श्राप देने को तत्पर हो उठी किंतु स्वामी मां तो सदैव अपने पुत्र का हित चाहती है फिर वोह कैसे अपने पुत्र को श्राप दे सकती है आपका कथन सत्य है प्रिय किंतु दुष्प वृत्ति वाला मनुष्य जब प्रेम से ना माने तो भय उत्पन्न करके उसे रोकना ही श्रेष करर होता है वही वाली की मां ने भी किया वाली जिन ऋषि दुर्वासा के कोप से सारा जग थरथर कांपता है उन्हीं के कोप से उनके शाप से बचाया है तुम्हें हनुमान ने और तुम उसी हनुमान का अहित करने चले थे बस मा उस मर्कट का अहित नहीं अंत करना है मुझे और वो मैं करूंगा ही बाली यदि तुमने अपना हट नहीं छोड़ा तो मैं तुम्हारी माता स्वयं तुम्हें शाप दे दूं और स्मरण रहे वाली एक मां के शाप के समक्ष कोई भी वरदानी शक्ति कार्य नहीं कर सकती तुम्हारी वरदानी शक्तियां और तुम्हारी अपनी दहिक शक्तियां निष्क्रिय हो जाएंगी मेरे शाप से नीति है जब प्रेम से शांति स्थापित ना हो तो भय दिखाकर शांति स्थापित करनी चाहिए [संगीत] इस नीति का पालन किया वाली की मां ने और परिणाम आशा के अनुकूल ही निकला वाली ने भयभीत होकर हनुमान के अहित करने का हट छोड़ दिया और उधर हनुमान श्राप के लिए अभिमंत्रित जल को लेकर किसी निर्जन स्थान पर निकल [संगीत] पड़े [संगीत] कहां विसर्जित करू इस अभिमंत्रित जल [संगीत] को यहां तो हर और हरियाली है मैं यह जल यहां पर विसर्जित करन वनस्पतियों को नष्ट नहीं कर सकता कहीं और दूर जाता [संगीत] [संगीत] हूं मैं वर्षा हुरी वर्ष भर एक ही स्थान पर रहती हूं अधिक ल डुल नहीं सकती तो क्या यहां से निकलने वाले समस्त जीव नव चर हो या थलचर मेरी जीवा से नहीं बच सकते एक पल में ग्रास बन जाते हैं वो [हंसी] मेरे एक और आखेट अच्छा है सारे प्राणी तो संकट में पड़ जाते होंगे इस राक्षसी के [संगीत] कारण शाप के लिए अभिमंत्रित किया यह जल इस पर डाल दूं तो अनेकों प्राणियों का जीवन बच जाएगा अच्छा तो ये मुझे भी अपना ग्रास बनाना चाहती है मुझे अपना ग्रास बनाने से पूर्व जल तो पी [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] लीजिए यह क्या यह वर्षा हुरी की देह तो छिन्न वि छिन्न हो गई आप आपको बहुत-बहुत धन्यवाद मेरे उद्धार कर्ता मैं चंचला यक्षिणी हूं प्रणाम माता मैं हनुमान हूं सुमेरू का युवराज परंतु आप इस राक्षसी योनि में मुझे आपके विषय में सब ज्ञात है हनुमान विधि का विधान है यह जो जैसे कर्म करता है उसे वैसा ही फल भोगना पड़ता है मैं राक्षसी बनकर अपने पूर्व जन्म के कर्मों का फल भोग रही थी आपने मेरा उद्धार किया है संकट मोचन मैंने तो कुछ नहीं किया है यह तो मेरा कर्तव्य था आपकी विनम्रता आपकी सहजता प्रशंसनीय है हनुमान आपने सदैव सबके संकटों को हरा है संकट मोचन के रूप में संसार सदैव आपको स्मरण करेगा शीघ्र ही आपका मिलन आपके प्रभु से होगा क्या मेरा मिलन मेरे प्रभु [संगीत] से शीघ्र ही आपका मिलन आपके प्रभु से होगा [संगीत] पहुंच गया सुमेरू अब तक तो ऋषिवर भी प्रस्थान कर चुके होंगे आम्र भल अरे वाह इतना परिपक्व बहुत ही मधुर होगा यह बहुत समय से कुछ खाया नहीं आम्र फल को देखकर शुधा जागृत हो गई सबसे पहले इसे ही खाता [संगीत] हूं ओम जय नारायण हरे स्वामी जय दीनानाथ हरे सुरन अरे वाह इतना मधुर भजन सुर नर मुनि सब ध्यावे सकल कल्याण करे ओम जय नारायण [संगीत] हरे ओम जय नारायण हरे स्वामी जय दीनानाथ हरे सुर नर मुनि सब ध्यावे सुर नर मुनि सब ध्यावे सकल कल्याण करे ओम जय नारायण हरे [संगीत] [संगीत] मेघ वर्ण तुम सुंदर पीतांबर राजे स्वामी पीतांबर राजे कमल नयन चतुरानन नयन चतुरानन हाथ चक्र [संगीत] साजे शिव उर में तुम रहते ब्रह्मा प्रकट तुमसे स्मी ब्रह्मा प्रकट तुमसे लक्ष्मी चरण दबाई लक्ष्मी चरण दबाई [संगीत] ओम जय नारायण [संगीत] [संगीत] हरे तुम तारक हो जग के सुमिरन किसे करू स्वामी सुमिरन किसे करूं मैं पूजा का दीपक मैं पूजा का दीपक बनकर नित्य [संगीत] जलो नयन विकल दर्शन को प्रभु दर्शन दे दो प्रभु दर्शन दे दो बसो हृदय के मंदिर बसो हृदय के मंदिर भक्ति सफल कर दो ओम जय नारायण हरे शीघ्र ही आपका मिलन आपके प्रभु से होगा ओम जय नारायण [संगीत] हरे बोलो प्रभु श्री राजा राम की जय बोलो प्रभु श्री राजा राम की [संगीत] जय [संगीत] भगवान विष्णु है ये और यह बालक इन्ह श्री राम कहकर मेरा पर्यास कर रहा [संगीत] है ऋषिवर यह हमारा पुत्र है हनुमान [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] आ आवरण कर दो मेरे प्रभु के भोग का समय हुआ हनुमान ऋषि दुर्वासा ने जो कार्य सौपा था वह तुम पूर्ण कर आए हां पिता श्री और उस अभिमंत्रित की गए जल से एक यक्षण का भी उद्धार कराया चरण मंदन ऋषिवर आयुष्मान चिरंजीवी पुत्र यह ऋषि अंगी रस है हमारे कुल के वरिष्ठ सदस्य हैं यह पिताश्री क्या यह पितामह देव गुरु बृहस्पति से भी वरिष्ठ है हां पुत्र पिता श्री कुल के श्रेष्ठ नहीं भगवान विष्णु के भी महान भक्त है विष्णुदेव की भक्ति ही पिता श्री की पहचान पिता श्री भी जाते हैं अपने पूज्य श्री हरि विष्णु का यह महा तेजस्वी श्री विग्रह सदैव साथ में ही ले जाते हैं हनुमान यह ऋषिवर के पुत्र ऋषि [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] साम्रमठा ऋषि अंगर चतुर्मास प्रवास के लिए यहां पधारे हैं एवं ऋषि सावत पंपास राज्य की सीमा पर अपना जग कल्याणकारी यज्ञ आरंभ करने हेतु आए हैं ऋषिवर आप जैसे परम भक्तों की सेवा करना सौभाग्य होगा हनुमान का आपकी भक्ति का प्रसाद मुझ भक्त हनुमान को भी प्राप्त होगा हनुमान यह जगत देवर्षि नारद और महर्षि भृगु की ही भाती मुझे भी बड़ा विष्णु भक्त मानता है परंतु तुमने मेरे ई सुदर्शन चक्रधारी विष्णु भगवान को अपने बालपन में धनुर्धारी राजा राम कहकर इनका उपहास किया है जो कि उचित नहीं है क्षमा करें शवर मैं प्रभु का उपहास करने की दृश्यता कैसे कर सकता हूं मुझे श्री विग्रह में धनुर्धारी प्रभु राम के दर्शन हुए थे इसीलिए मैंने ऐसा कहा हनुमान वरिष्ठ जनों के साथ ऐसा व्यवहार क्या शिष्टाचार भूल गए हो तुम पिताश्री मैं सत्य कह रहा हूं आपको तो ज्ञात ही है मैं कभी असत्य नहीं कहता विश्वास तो मुझे भी है कि हनुमान कभी मिथ्या नहीं बोलता हां कदाचित हनुमान ने प्रभु विग्रह के भली भाति दर्शन ना किए हो हनुमान पुत्र तुम्हें भ्रम हुआ है श्री विग्रह चक्रधारी भगवान विष्णु का ही [प्रशंसा] है हां हनुमान हो सकता है तुम विग्रह ठीक से ना देख पाए हो पिता श्री मुझे तो धनुर्धारी प्रभु श्री राम के ही दर्शन हुए थे बस हनुमान तुम्ह अभी तुम्हारी भूल का ज्ञात हो जाएगा और तुम भी भली भाति दर्शन कर लेना मेरे सुदर्शन चक्रधारी भगवान विष्णु देव भोग का समय समाप्त हुआ आवरण हटा दे [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] राम [संगीत] राम रा [संगीत] [संगीत] राम [संगीत] राम राम राम श्री राम राम राम राम राम राम राम श्री राम राम राम राम राम राम श्री राम राम राम राम राम राम राम श्री राम सबको अचरज में पहुंचाई विष्णु में ही राम दिखाई हनुमत भक्ति जगत पे भारी चक्रधर भय धनुष के धारी ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महा हनुमान बोलो प्रभु श्री राजा राम की जय प्रभु श्री राम जय हनुमान प्रभु श्री राम जय हनुमान

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