[संगीत] तुम्हारे जीवन में अभी कुछ क्षण शेष है इस वानर बालक को मृत्यु के घाट उतारने के बाद मैं शांति पूर्वक तुम्हें अपना भोजन बनाऊंगा शिशिरा तुम मुझे इधर पकड़ने आओगे तो मैं कूदकर उधर चला जाऊंगा यह लो वानर बालक मैं वहां नहीं यहां [संगीत] हूं आओ आओ पकड़ो [संगीत] [प्रशंसा] मुझे मैं यहां हूं त्रिश राज जी हा छका दिया वानर परंतु मैं तुझे बचकर जाने नहीं दूंगा अभी पकड़ता हूं हनुमान को इस ससुर को चकमा देने में आनंद आ रहा है परंतु अभी एक क्षण भी गवाना उचित नहीं है सूर्य की किरणें क्षण हो रही है दिन छिपने से पहले ही मुझे इन अंडों का उपचार करना होगा अन्यथा इसको विष रहित करने का मेरा उद्देश्य पूर्ण नहीं हो पाएगा परंतु इस असूर से कैसे छुटकारा पाऊं मुझे देखकर हंस रहे हो वानर बालक यहां वहां कूदना तो तुम वानरों की प्रवृति है कब तक कूदते रहोगे कभी तो मेरे हाथ आओगे आप सत्य कह रहे हैं त्रिराज जी मैं अधिक देर तक आपका सामना नहीं कर पाऊंगा अन्यथा आप अपनी ध्वनि तरंगों से हनुमान को आहत कर देंगे परंतु उस ध्वनि तरंग से आपके सिवा और कोई नहीं बच सकता मैंने आपकी वो घातक ध्वनि तरंग आपकी ओर लौटा दी थी वो आपसे टकराई इसके पश्चात भी आप जीवित है इसके पीछे भी एक रहस्य है जब तक त्रिशला के शरीर का एक भाग धरती में स्थित रहेगा का उसका संघार करना असंभव है इसीलिए मैं अपने शरीर का एक भाग धरती के भीतर रखता हूं त्रिशला स्वयं ही मेरी युक्ति में फस रहा है अर्थात आपका संपूर्ण शरीर धरती के बाहर हो तभी आपका वध हो सकता है और बिना त्रिशर के इच्छा के बिना कोई भी बलपूर्वक उसके शरीर को धरती से बाहर नहीं निकाल सकता इसीलिए मेरी मृत्यु असंभव है असंभव यह अकस्मात हनुमान को क्या हो गया है वो उस दुष्टा असुर से इतनी बातें क्यों कर रहा [संगीत] है अब ज्ञात हुआ इसका वध करने के लिए किसी युक्ति से स्वेच्छा से पृथ्वी से बाहर निकालना होगा इसे पृथ्वी से बाहर निकालने का उपाय भी सूझ गया त्रिशला जी यदि आपको इसे प्राप्त करना है तो थोड़ा ऊंचा उठकर ले लीजिए मैं वचन देता हूं यदि आपने इसे छू लिया तो मैं इन्हें लेने से रोकूंगा नहीं अंडे खाने के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूं [संगीत] [संगीत] अंडे इसे पृथ्वी से पूर्ण रूप से बाहर निकालने के लिए मुझे थोड़ा और ऊपर जाना [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] होगा एक बार पुनः प्रयास कीजिए यदि आपने मुझे छू भी लिया मैं इन अंडों के साथ आपको शीघ्र समर्पण कर दूंगा हनुमान क्या कर रहा है इसके सामने समर्पण करने का अर्थ है हनुमान की मृत्यु तो प्रतीक्षा किस बात की अभी छोकर तुम्हे अपना भोजन बनाता [प्रशंसा] [संगीत] हूं सखा कुछ तो युक्ति लगा रहे हैं हनुमान भैया हां मुझे भी ऐसा ही प्रतीत हो रहा है अरे ये क्या कर रहे हो छोड़ दो छोड़ दो मुझे इसीलिए कहते हैं त्र लालच बुरी बला है तुम हम तीनों को आराम से खाकर अपनी भूख मिटा सकते थे किंतु लोभ वश तुमने वो किया जो तुम्हारे जीवन के लिए घातक है छोड़ दो छोड़ दो मुझे मैं धरती के बाहर अधिक देर तक जीवित नहीं रह पाऊंगा मैं तुम्हें व प्राप्त करा दूंगा जिसके लिए तुम यहां आए हो मैं सत्य कह रहा हूं मेरा विश्वास करो हनुमान इस असुर को कदा भी मत छोड़ना अन्यथा इसका जीवन सुरक्षित होते ही यह पुनः हमारे मार्ग में अवरोध उत्पन्न करेगा हमारे पास अधिक समय नहीं है हनुमान हां हनुमान अब सूर्य कभी भी अस्त हो सकता है इसको छोड़ने का अर्थ है हमारा उद्देश्य कभी भी पूर्ण नहीं होगा त्रिशला तुमने दूसरों को अनेकों कष्ट दिए उनको कितनी पीड़ा हुई होगी इसका पता तो तुम्हें अब चल रहा रहा [संगीत] होगा संध्या होने को है स्वामी अभी तक लौट कर नहीं आए मुझे तो चिंता हो रही है मंत्री जी से पूछती हूं संभव है उनके पास कोई सूचना या समाचार यह सुमेरो की सेना तो नहीं यह तो किष्किंदा की सेना है किंतु किष्किंदा की सेना यहां क्या कर रही है कहीं किष्किंदा ने सुमेरू पर आक्रमण तो नहीं यदि मेरा संदेह सही है और किष्किंदा ने महाराज और पुत्र हनुमान की अनुपस्थिति में सुमेरू पर हमला कर दिया तो मैं क्या [संगीत] करूंगी नहीं हनुमान इन असुरों का स्वभाव होता है छल कपट करना इसे कदापि मत छोड़ हां भैया हनुमान यह तो हमें अपना आहार बनाने वाला था इसका विश्वास किया तो संभव है यह पुन हमारे प्राणों को हरने की चेष्टा करें मैंने तुम्हें क्षमा कर दिया है परंतु मुझे विश्वास है कि तुम भविष्य में किसी को भी नहीं सताओगे इसे मत छोड़ो हनुमान तुम बहुत बड़ी भूल कर रहे हो नहीं हनुमान इसका विश्वास मत करना त्रिशला आपका विश्वास कर मैं आपको मुक्त करता हूं सखा अंजनेय कर मंगल करनी सकल ताप भव पाप हार देव कृपा सुवि मलता कारी क्ण दुख शाप बहु भारी सबको विन सेय मारुती धीरा पल में मिटे कोटि जुग पीरा जुगन जुगन तुमरी प्रभु ताई जय महावीरा जगत गोसाई रुक जाइए आप लोग चिंता मत कीजिए हनुमान आपके साथ है मैं आपका कृतज्ञ हूं अनुमान आपने मुझ पर विश्वास कर मुझे श्राप मुक्त कर दिया मिथ्या बोलना और लोगों का विश्वास तोड़ना यही मेरा स्वभाव था इसीलिए मैं श्रापित हुआ सदियों से इस रूप में भटक कर अन्य जीवों को मैं प्रताड़ित करता रहा परंतु आज आपने मुझ पर विश्वास कर मुझे मोक्ष प्रदान किया है आप धन्य है हनुमान आपका यह उपकार हमेशा मुझ पर रहेगा [संगीत] हनुमान [संगीत] हनुमान तुमने त्रिशला को मोक्ष देकर प्रवाल द्वीप की रक्षा की है प्रवाल द्वीप अचानक इतना हरा भरा हो गया है यह द्वीप पहले जैसा हो गया है तो हमारे लिए विषैली करणी पुष्प को ढूंढना और सरल हो गया है परंतु समय तीव्र गति से निकलता जा रहा है हमें शीघ्र ही अपना कार्य संपन्न करना होगा हां हनुमान भैया सही कह रहे हैं इन अंडों का सहा पड़ता रंग इसका संकेत है कि इन पर विष का प्रभाव बहुत अधिक हो गया है मैं अभी शीघ्र उड़कर विशाली करणी पुष्प ढूंढ कर लाता हूं उसके लिए आपको और श्रम करने की आवश्यकता नहीं है प्र कल्याण [संगीत] हो प्रणाम ऋषिवर कल्याण हो हनुमान तुमने मुझ और संपूर्ण प्रवाल द्वीप को त्रिशला के आतंक से मुक्त किया है इसीलिए यहां की हर वस्तु पर तुम्हारा पूर्ण अधिकार है तुम्हारे यहां आने का अभिप्राय मुझे ज्ञात है इसलिए मैं वि शल्य करणी पुष्प स्वयं लेकर आया हूं जिससे आपके प्रयोजन में और विलंब ना हो धन्यवाद ऋषिवर अब तुम सब शीघ्र ही स्वस्थ हो जाओगे सूर्यास्त होने ही वाला है हमारे पास बहुत ही अल्प समय [संगीत] है [संगीत] ना [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] इनका रंग बदलकर पुनः श्वेत हो रहा है हमारे अंडों पर से विष का प्रभाव समाप्त हो रहा है हनुमान भैया ने असंभव को संभव कर [प्रशंसा] [संगीत] दिखाया मैं यहां सुमेरू को किष्किंदा के अधीन करने आया हूं यदि सुमेरू समर्पण कर दे तो यह कार्य शांतिपूर्वक हो सकता है अन्यथा मुझे बल का प्रयोग करना होगा सुग्रीव हम तुम्हारे बहुत आभारी रहेंगे हनुमान समस्त गरुड़ लोक सदैव तुम्हारा आभारी रहेगा हनुमान तुमने इन अंडों की रक्षा कर हम गरुड़ के भविष्य को बचाया है मैं चाहता हूं कि तुम हमारे साथ गरुड़ राज्य चलो जहां सब गरुड़ वासी तुम्हारा अपने प्रति आभार व्यक्त कर सके [संगीत] हनुमान प्रणाम ऋषिवर कल्याण [संगीत] हो प्रणाम माताओं देवियों आप सबको यहां देखकर मैं चकित हूं मुझे आप सबसे भेट की अपेक्षा नहीं थी महाराज हमें अंडों की चिंता सता रही थी इसलिए हमने निर्णय लिया और आपके पीछे पीछे चली आई चलिए हमारे अंधे सुरक्षित है हनुमान है सुफल अंजनी कुमारा गरुड़ लोक आनंद अपारा सकल मात हर्षित हो रही अति उसाह ममता जल बही हनुमन सुधी आई मैया अचल नेहरु आचल छैया कह जाना निज मा तू समीपा नेह जननी तेर लोक अनूपा हनुमान हम सब जीवन भर आपकी ऋणी रहेंगे एक पुत्र ने अपनी माता के लिए कार्य किया है इसमें ऋण क्या मैंने तो मात्र अपना कर्तव्य निभाया [संगीत] है अंडे फूट रहे हैं हमारे गरुण शिशु बस संसार में आने ही वाले है [संगीत] [संगीत] हो [संगीत] इन माताओं के दर्शन करके मुझे भी अपनी मां के पास जाकर दुलार करवाने की इच्छा हो रही है तुम्हारे पिता महाराज रक्ष और महाराज केसरी जी के बीच घनी मित्रता है भृक्ष राज के परिवार को महाराज केसरी ने अथवा मैंने कभी भी अपने परिवार से पृथक नहीं समझा अनेको बार स्वयं अपने हाथों से तुम्हें भोजन परोसा है मैंने फिर भी तुम ऐसा कर रहे वो भी तब जब स्वयं महाराज केसरी और मेरा पुत्र और तुम्हारा प्रिय मित्र हनुमान यहां उपस्थित नहीं हनुमान मैं अभी मां के पास जाता हूं कुशलता से जाओ पुत्र प्रणाम माताओं प्रणाम प्रणाम महाराज टायू प्रणाम [संगीत] [संगीत] ऋषिवर
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