[संगीत] देखो प्रहलाद तुमने जो वेदों में सीखा वह सत्य नहीं है भगवान तो तुम्हारे पिता श्री ही है हां यह तो सत्य है कि पिता पुत्र के लिए भगवान के समान होते हैं किंतु वो मात्र मेरे लिए भगवान सत्य में तो जगत के पिता जो आपके मेरे और सबके भी पिता है वह श्री हरि नारायण ही है वही है ईश्वर अच्छा तो तुम मेरे भी गुरु बनकर मुझे ज्ञान दे रहे हो नहीं नहीं मेरे गुरुदेव तो आप दोनों ही है तो ज्ञान भी हमसे ही लो [संगीत] प्रहलाद जो मैं बोलूं उसे दोहरा सही मंत्र है ओम [संगीत] रणायरा नमः फिर वही त्रुटी मैं क्या करूं गुरुदेव यह तो मेरी जीवा पर स्वत ही आ जाता है यह देखिए ऐसे ओम नारायणाय नमः ओम नारायणाय नमः नारायणाय नम प्रभु मैं तुम्हारे समक्ष हाथ जोड़ता हूं भूल जाओ हने नारायण के नाम को आप गुरुदेव होकर यह कैसे शिक्षा दे रहे हैं अपने शिष्य को अरे हरि का नाम अपनी जीवा पर लाना बंद करो अन्यथा तुम्हारे पिता के को से कोई नहीं बचा पाएगा गुरुजी जब हम आपकी बात नहीं मानते त आप हमें शीघ्र ही डन देते हैं प्रहलाद को भी डन दीजिए ना अरे मूर्ख बुद्धि प्रहलाद राजकुमार है गुरुजी उसे दंड देना तो दूर ऊंचे स्वर में बोल भी नहीं सकते प्रलाद तुम य मंत्र परिवर्तित करोगे या नहीं यह शास्त्र सम्मत मंत्र है गुरुदेव मेरी जीवा पर यही चढ़ा है आप कहे तो मैं श्वास लेना छोड़ [संगीत] दूं किंतु यह हरि नारायण का नाम यह तो मेरी देह में है मेरी नस नस में बसा है यह कभी भी नहीं छूट सकता गुरुदेव भ्राता अमर हां भ्राता शंड क्या करें इसका राजा का पुत्र है दंड भी नहीं दे सकते बल का प्रयोग भी नहीं कर सकते कैसे छुड़ाओ इससे हरि का नाम बोलना हा भ्राता शंड मे तो देह में जैसे अग्नि दहक रही है अब तो ये सरिता के शीतल जल से स्नान करके ही शांत होगी हां भ्राता अमर मेरे भी कर्ण तप रहे हैं मैं भी चलता हूं पुनः स्नान के लिए चलिए आओ भ्राता नहीं गुरुदेव रुकिए रुकिए गुरुदेव यह तो अच्छा नहीं हुआ मेरे दोनों गुरुदेव मुझसे रुष्ट हो गए हे मित्रों अब गुरुजी तो गए कुछ क्रीड़ा हो जाए हां हो जाए कुछ आनंददायक खेल क्या बोलते हो प्रहलाद नहीं मित्रों यह समय बहुमूल्य ज्ञान अर्जन का है क्रीड़ा करके हमें यह समय नष्ट नहीं करना चाहिए ज्ञानार्जन हम तो चले खेल ले चलो [संगीत] मित्रों अच्छा मित्रों तुम्हें ज्ञात है कि किसके सहस्त्र नाम है और कौन कण कण में बसता है नहीं अच्छा तो मैं ही बता देता हूं [संगीत] नारायणा नारायणा हरि दीन दयाला [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] नारायणा नारायणा नारायणा हरि केशव कृपाला [संगीत] नारायणा [संगीत] तुम जग के स्वामी जगपाल हो तुम हो भोर विष्णु तुम रात हो अंता भी तुम अनंता भी तुम निर्बल सबल सबके नाथ हो नारायणा नारायणा हरि माधव मृणा [संगीत] नारायणा दम सहस्त्र रूप अनेक श्री नारायण विष्णु [संगीत] हरि कण कण में तुम्हरा वास है संकट विमोचन [संगीत] पीतांबरी नारायणा नारायणा हरि श्री श्री पाला नारायणा नारायणा नारायणा हरि श्री श्री बाला नारायणा नारायणा नारायणा हरि श्री श्री बाला नारायणा नारायणा नारायणा हरि श्री श्री बाला [संगीत] नारायणा भता शंड हां भ्राता अमर्क ये हम क्या कर रहे थे अपराध हरि का नाम ले रहे थे अरे किसी ने सुन लिया तो सूली पर लटका देगा गुरु शंड गुरु [संगीत] अमर्क सेनापति सली भ्राता मर्क त्रिलोक सम्राट हिरण कश्यप के समक्ष आप दोनों को राजकुमार प्रहलाद के साथ उपस्थित होना है भ्राता शंड सूली पिताश्री के समक्ष किंतु क्यों महाराज के समक्ष वह जानना चाहते हैं राजकुमार ने गुरुकुल में अभी तक क्या क्या सीखा है राज प्रहलाद यहां केवल हरि का नाम ले रहे हैं यदि इन्होंने हरि का नाम महाराज के सामने दोहराया तो हमारी मृत्युदंड निश्चित है गुरुजी पिताश्री ने बुलाया है चलिए ना मुझे मिलना है उनसे शीघ्र चलिए [संगीत] माता दैत्य राज हिरण्य कश्यप को ज्ञात हो गया था कि प्रहलाद जी हरिभक्त है उस समय तक उन्हें ऐसा कुछ भी ज्ञात नहीं था फिर उन्होंने गुरुकुल से प्रहलाद जी को क्यों बुलाया हनुमान पिता चाहे साधारण मनुष्य हो या ब्रह्मांड का राजा अपने पुत्र के प्रति सजक रहना स्वाभाविक है हर पिता यह जानना चाहता है कि उसके पुत्र ने कितनी प्रगति की है यह तो सत्य है माता किंतु प्रल्हाद जी श्री हरिभक्त और दैत्य राज हिरण्य कश्यप घोर हरी विरोधी है प्रहलाद जी तो संकट में भी पड़ सकते थे माता हनुमान संकट तो था किंतु संकट से अनभिज्ञ प्रहलाद उत्साह से भरे हुए थे वे इतने दिनों पश्चात अपने माता-पिता से मिलने जा रहे थे और वे भी अपने पुत्र से भेंट करने के लिए उतावले [संगीत] थे अब तक तो सेनापति को आ जाना चाहिए था हमारे पुत्र प्रहलाद को लेकर अब तक नहीं लौटे वो स्वामी प्रहलाद अभी आता ही होगा धैर्य रखिए धैर्य महारानी का यादू कब से नहीं मैंने उसे किंतु मैं आश्वस्त था जब मैं त्रिलोक में विजय प्राप्त कर रहा था तब अवश्य ही मेरा पुत्र वेदों के ज्ञान में विजय प्राप्त कर रहा होगा पिता [संगीत] श्री प्रहलाद पिता श्री वेद एवं ज्ञान को विजित नहीं किया जाता ज्ञान तो पूजनीय होता है जिससे पवित्र भाव एवं पूर्ण श्रद्धा से ही गहण किया जाता है आओ [संगीत] [संगीत] पुत्र प्रहलाद मेरे [संगीत] [प्रशंसा] पुत्र खेलेगा गोदी में तेरी जब लल्ला जगत तो जियारा भए का पुत्र शिव सव सुंदर पवन जै सवे जग केसरी नंदन कहेगा जग केसरी नंदन [संगीत] कहेगा आयुष्मान भव पुत्र प्रणाम माता श्री आयुष्मान [संगीत] भव [संगीत] बड़े ही ज्ञानवान हो गए हो गुरुकुल में जाकर बड़ी उत्तम शिक्षा दी है तुम्हारे गुरुओं ने [संगीत] तुम्हें माता आपके अंक में रहने का आनंद तो सदा मिला मुझे आज प्रभु कृपा से पिताश्री ने अपने अंक में भर लिया असीम आनंद की प्राप्ति हुई मुझे पुत्र [संगीत] प्रहलाद महारानी का याध प्रहलाद जैसा पुत्र पाकर कोई भी पिता धन्य हो [संगीत] जाए इसकी मधुर वाणी जैसे किसी ने वीणा के तार छेड़ दिए हो मन प्रसन्नता से भर उठा है महारानी आज आप हमारे पुत्र की रुचि के पकवान बनाइए मां हूं इसकी इसकी रुचि के सारे पकवान बनाने की व्यवस्था मैंने पहले से ही कर दी है तो ठीक है जब तक भोजन की व्यवस्था होती है तब तक मेरा महान पुत्र मुझे यह बताएगा कि इसने गुरुकुल में क्या-क्या सीखा अपने गुरुओ शंड और अमर्क से यदि प्रहलाद ने हरि का नाम ले लिया तो अनर्थ हो [संगीत] जाएगा पिताश्री मेरे दोनों ही गुरुदेव महान है उन्होंने मुझे बड़ी ही सहजता से समस्त वेदों का ज्ञान कराया है और इसमें ज्ञान एवं विद्या की देवी माता सरस्वती की भी बड़ी कृपा रही है इसलिए मैं सर्वप्रथम उन्हीं की स्तुति से आरंभ आशा करता हूं कि प्रहलाद अब सरस्वती स्तुति गाएंगे पुनः हरि स्तुति नहीं आज्ञा दे पिता [संगीत] श्री [संगीत] या कुंदेंदु तुषार हार धवला या शुभ्र वस्त्रा वृता या वीणा व दंड मंडित करा या श्वेत पदमा सना या ब्रह्मा चित शंकर प्रवृति भर देव सदा वंदिता सामा पातु सरस्वती भगवती नि शेष जाड [संगीत] पहा उत्तम अति उत्तम देखा महारानी मेरा पुत्र ज्ञान हो या गायन सब में सर्वोत्तम [संगीत] पुत्र मन अभी भरा नहीं है तुमसे बहुत कुछ सुनना चाहते हैं मेरे यह कर्ण अपनी मधुर वाणी में वेदों के सार के बारे में कुछ बताओ जो कुछ भी तुमने सीखा [संगीत] है पिताश्री ज्ञान की पोथया हो या वेदों का सार सब ग्रंथों में यही लिखा है कि मनुष्य को अपने धर्म पथ पर चलते हुए अपने कर्मों का पालन करना चाहिए उत्तम अति उत्तम [संगीत] पुत्र और ऐसा करते हुए वो उन्हें तीनों लोकों के स्वामी श्री हरि विष्णुदेव को श्रद्धा पूर्वक समर्पित करता है श्री हरि विष्णु देव को श्रद्धा पूर्वक समर्पित करता है श्री हरि विष्णु देव को श्रद्धा पूर्वक समर्पित करता है श्री हरि विष्णु देव को श्रद्धा पूर्वक समर्पित करता है तो प्रभु विष्णु देव सदैव उनकी सहायता के लिए प्रस्तुत रहते हैं वही हमारे सारे कष्टों एवं पापों से दिला सकते हैं ये तुम क्या कह रहे हो पुत्र यही तो सत्य है ना पिताश्री उनकी इच्छा के बिना संसार में पत्ता तक नहीं हिलता उनके इंगित मात्र से जीवन दयनी वायु संचारित होती [संगीत] है जो हरि भजन नहीं करता उसका कभी भी कल्याण नहीं होता मैं आपको हरि भजन सुनाऊ अभी सुनाता हूं पिताश्री [संगीत] नारायणा नारायणा हरि दीन दयाला [संगीत] नारायणा [संगीत] नारायणा नारायणा हरि केशव कृपाला [संगीत] नारायणा दाम सहस्त्र रूप अनेक श्री नारायण विष्णु [संगीत] हरि कण कण में तुम्हरा वास है संकट विमोचन [संगीत] [हंसी] पीतांबरी नारायणा नारायणा हरि श्री श्री बाधा [संगीत] नारायणा पिताश्री बस बहुत हुआ उस कपटी विष्णु का यशोगान तो यह शिक्षा द है तुमने मेरे पुत्र को उस कपटी की हरि भक्ति सिखाई जाती है तुम्हारे गुरुकुल में हमने ऐसा तनिक भी नहीं सिखाया है प्रभु पर प्रभु हमने तो राजकुमार जी को हरि भक्ति त्यागने को अनेकों बार समझाया किंतु ये नहीं माने बस सेनापति ले जाओ इन दोनों धुर तों को इन्हे राजद्रोह का दंड मिलेगा रुकिए पिता [संगीत] श्री जो अपराध इन्होने किया ही नहीं है उसके लिए इन्ह दंड मत [संगीत] दीजिए इन्होंने तो मुझे बहुत समझाया कि ईश्वर आप है पुत्र फिर क्यों कर रहे हो छलिया विष्णु का यशोगान पिताश्री इन्होंने कहा था कि तीनों लोगों के स्वामी आप [संगीत] है पूजा आपकी होनी चाहिए उत्तम किंतु मैं यह मानता हूं कि तीनों लोकों के स्वामी श्री हरि नारायण विष्णु श विष्णु ही इस संपूर्ण ब्रह्मांड का अस्तित्व उन्हीं से है वही सर्वप्रथम पूजनीय है किसने सिखाया तुम्हें यह सब पुत्र किसने सिखाया किसने सिखाया किसने सिखाया प्रहलाद नहीं मां यह मुझे किसी ने नहीं [संगीत] सिखाया सत्य तो सूर्य की भाति स्वतः ही प्रकाशित होता है ईश्वर सत्य है चह और उन्हीं की सत्ता दिखाई देती है प्रभु श्री हरि नारायण श्री हरि नारायण श्री हरि नारायण श्री हरि नारायण प्रभु श्र श्री हरि नारायण यत्र तत्र सर्वत्र ईश्वर का वास होता है और कितने ही प्रयासों के पश्चात भी इस सत्य को झूठा प्रमाणित नहीं किया जा [संगीत] सकता
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[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...
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