[संगीत] माता इंद्रदेव के पराजय स्वीकार करने के पश्चात उस दुष्ट असुर हिरण्याक्ष ने उनके प्राण छोड़ दिए हां पुत्र परंतु ऐसा करने के लिए उसने सभी देवताओं को स्वर्ग का त्याग कर उसे रिक्त करने को कहा देवताओं की स्वीकृति के बाद ही उसने देवराज इंद्र को छोड़ा माता फिर सारे देवता स्वर्ग लोक छोड़कर कहां गए वरुण लोक उनकी पराजय के पश्चात वरुण देव ने देवराज इंद्र और सभी अन्य देवताओं को वरुण लोक में आश्रय लेने का आमंत्रण दिया पर इससे हिरण्याक्ष की क्रोध की ज्वाला वरुण देव पर केंद्रित हो गई वह बलपूर्वक वरुण लोक के भीतर प्रवेश कर [संगीत] गया अरुण देव मुझसे पराजित इंद्रदेव को आपने शरण देकर सर्वशक्तिमान नाश को ललकारा है और अब आपको अपने पौरुष का परिचय देने का समय आ गया है समस्त सागरों के तथा कति देवता आइए और मेरे समुख आकर अपने इस कृत के परिणाम को भुगती है अन्यथा आपके इस ममित वरुण लोग को अपनी क्रोधाग्नि से पिघलाकर ध्वस्त कर देगा यह सर्वशक्तिमान [हंसी] हिरण्य देव राजेंद्र को पराजित कर तुमने हम सभी देवताओं पर विजय प्राप्त करनी है इसलिए तुम्हारा मुझसे युद्ध करने का कोई लाभ नहीं होगा रक्ष अर्थात पराजय स्वीकार करते हैं आप सर्वशक्तिमान हिरण्याक्ष से युद्ध किए बिना ही समर्पण कर रहे हैं तुमसे युद्ध करने की क्षमता मुझ में नहीं है परंतु अपनी शक्ति पर इतना दम तुम्हारे लिए उचित नहीं है शक्ति के अखंड रूप से अभी तुम्हारा परिचय नहीं हुआ अच्छा अभी तक तो इन तीनों लों में ऐसा कोई भी योद्धा नहीं मिला है जो सर्वशक्तिमान हिरण्याक्ष की शक्ति का सामना कर सके क्योंकि अभी तक तुम्हें अनंत शक्ति स्वरूप श्री हरि के दर्शन प्राप्त नहीं [संगीत] हुए क्या हुआ श्री हरि का नाम सुनकर तुम्हारे मस्तक पर चिंता की रेखाए छा गई सबको भयभीत करने वाले हिरण्याक्ष तुम स्वयं भयभीत हो गए गुरु शक्तिमान हिरण्याक्ष को कोई भी भयभीत और चिंतित नहीं कर सकता मैं अभी आपके श्री हरि को युद्ध के लिए चुनौती देता हूं कौन है वो शक्तिशाली योद्धा और कहां मिलेंगे वो अवश्य तुम्हारे काल के रूप में वो शीघ्र ही तुम्हें प्रत्यक्ष दर्शन देंगे तीनों लोकों में दुष्कर्म कर तुमने अपने पापों का बोझ बढ़ा लिया है भूदेवी तुम्हारे अत्याचारों से त्रस्त है तुम जैसे पापी के कारण श्री हरि प्रभु नारायण भूदेवी को संतप्त नहीं रहने देंगे मेरी चिंता मत करिए वरुण देव मैं शीघ्र ही आपके श्री हरि को नकर इंद्रदेव और आपके समान उन्हे भी पराजित स्वीकार करने के लिए बाध्य कर [संगीत] दूंगा रो मुझसे सर्वशक्तिमान हिरण्याक्ष मैं माता क्या हिरण्याक्ष को प्रभु विष्णु जी का कुछ भी स्मरण नहीं रहा मेरा अर्थ है वह पूर्व जीवन में बैकुंठ निवास के द्वारपाल थे उन्हें सदा प्रभु विष्णु जी का सानिध्य प्राप्त था नहीं पुत्र जन्म प्राप्त कर जीव लोक में आते ही पूर्व जीवन की समस्त स्मृतियां मिट जाती है साथ रह जाते हैं मात्र उस जीवात्मा के अच्छे और बुरे कर्म जिसका प्रभाव उसके वर्तमान जीवन पर होता है हिरण्याक्ष का यह जीवन उसके पूर्व जन्म की भूल का दंड था और इस जीवन में भी पाप कर्म कर उसका जीवन अपने विनाश की ओर अग्रसर था तो उसने प्रभु श्री हरि से मिलने के लिए क्या किया माता प्रभु श्री विष्णु जी से मिलकर उनसे युद्ध करने के लिए आतुर हिरण्याक्ष ने पृथ्वी के जीवों पर अत्याचार बढ़ा दिए उन्हें भिन्न भिन्न प्रकार से प्रताड़ित करने [प्रशंसा] लगा डरो मुझसे सर्वशक्तिमान रक्ष हूं [संगीत] मैं ओ सहनाववतु सहन भुनक्तु स्यम करवा बहे तेजस्विन वतम मस्तु मा विद विषव सर्वशक्तिमान रक्ष हूं मैं किसी को मत छोड़ना हे श्री हरि श्री हरि हमारी रक्षा कीजिए इन राक्षसों ने हमारा यज्ञ खंडित कर दिया तीनों लोकों में दुष्कर्म कर तुमने अपने पापों का बोझ बढ़ा लिया है भूदेवी तुम्हारे अत्याचारों से त्रस्त हैं तुम जैसे पापी के कारण श्री हरि प्रभु नारायण भूदेवी को संतप्त नहीं रहने देंगे हम मुझे ज्ञात हो गया है कि भूदेवी ही श्री हरि और देवताओं की दुर्बलता है उन पर होने वाले यज्ञ आदि से ही श्री हरि और देवताओं को पुष्टि मिलती है यदि भूदेवी को मैं देवताओं की पहुच से दूर कर दूं तो विवश होकर श्री हरि को मुझसे युद्ध करने आना ही होगा सुनो सब सुनो मैं भूदेवी को ब्रह्मांड सागर की अतल गहराई में लेकर जाऊंगा अंतरिक्ष के अनंत अंतकाल के लदर में धकेल दूंगा फिर कोई कितने भी यत्न करे उन्हे ढूंढ नहीं पाएगा फिर देखते हैं कि तुम्हारे श्री हरि भूदेवी की कैसे रक्षा कर पाते [हंसी] हैं श्री विष्णु नमः श्री विष्णु नमः ओम श्री विष्णु नमः ओम श्री विष्णु नमः ओम श्री विष्णवे नमः ओम श्री विष्णवे नमः भूदेवी आपका ही शरा है प्रभु का ही सहारा है सर्वनाश हो रहा है रक्षा कीजिए प्रभु [संगीत] अंधकार देवी जाओ सदा के लिए अंधकार [संगीत] में हे श्री हरि हे प्रभु नारायण रक्षा कीजिए हे प्रभु रक्षा कीजिए कीजिए प्रभु रक्ष की सर्वशक्तिमान [हंसी] र और कोई है शट में जो मुझसे युद्ध करे जो मेरा सामना कर सके श्री हरि आओ युद्ध करो मुझसे मैं तुम्हें चुनौती देता [संगीत] [संगीत] हूं सर्वनाश हो रहा है रक्षा कीजिए प्रभु प्रभ ही आ रक्षा कीजिए हमारा स कीजिए प्रभु हमें प्राण दान दीजिए प्रभु रक्षा कीजिए हमें प्राण दान दीजिए माता परंतु इतने समय तक जगत के समस्त जीवों को आतंकित करने वाले ऐसे कुटिल पापी हिरण्याक्ष को दंडित करने के लिए प्रभु इतना विलंब क्यों कर रहे थे प्रभु विष्णु जी दया स्वरूप है पुत्र वे पापियों को अपने पापों का प्रायश्चित करने का अवसर प्रदान करते हैं परंतु जब किसी के पापों का घड़ा भर जाए तब प्रभु विष्णु स्वयं पधार कर उसका संघर कर पृथ्वी को उसके आतंक से मुक्त कराते हैं हनुमान समझ गया माता पापी को भी क्षमा प्रार्थना तभी प्रदान हो सकती है जब वह सत्य हृदय से प्रायश्चित करें परंतु रक्ष तो अहंकार में अपना विवेक होकर पाप पर पाप किए जा रहा था माता उसका संहार होना तो आवश्यक था तब प्रभु नारायण ने अवश्य वराह अवतार लिया होगा हां पुत्र हिरण्याक्ष ने भूदेवी को अंतरिक्ष में व्याप्त अंधकार के दलदल में धकेल करर घोर पाप किया था भूदेवी को असहनीय कष्ट पहुंचाया था जब भूदेवी ने अपने दुखों और कष्टों के निवारण के लिए स्वयं प्रभु विष्णु जी की प्रार्थना प्रारंभ की तो असीम वेदना से भरी उनकी पुकार समस्त ब्रह्मांड में गूंज उठी हे प्रभु शीघ्र दर्शन देकर मेरी रक्षा कीजिए मुझ पर और मेरे भीतर संचित जीवन पर घोर संकट छाया है अब आप ही मेरी रक्षा कर सकते हैं प्रभु अन्यथा मैं अपने भीतर निहित जीवन की रक्षा करने में असमर्थ हो जाऊंगी प्रभु प्रभु रक्षा कीजिए हे प्रभु रक्षा कीजिए रावा नाग परं शायने नमः श्रीक संपट दिव्य पादा विष्णवे नमस्ते योग निद्रा योगा भाय च ता सनाय देवाय गोविंदाय नम नम नम शरा कलोल मात्र नमो रदाय पदमनाभ विष्णवे भता सुदाय नमो योग प्रिया शुभांग सुनेत्र माधवा नमो [संगीत] नमः [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] भूदेवी की करुण पुकार प्रभु वराह काले अवतार दुष्ट हिरण्यक्षा के काल भै श्री नारायण जगपाल पापी का जप हो संहार जीवन का हो तब उद्धार अद्भुत लीला तुम्हरी प्रभु जय जय जय श्री बराह [संगीत] विष्णु [संगीत] [संगीत] परंतु माता प्रभु विष्णु जी ने मराहा रूप में ही अवतार क्यों लिया और वह उस ब्रह्मांड सागर में भीषण अंधकार व्याप्त होने के कारण जिसमें कुछ भी दिखाई नहीं देता भूदेवी माता को ढूंढना कैसे संभव करें पुत्र हनुमान प्रभु विष्णु जी की लीला अकारण नहीं होती सघन कीचड़ में विचरण करने वाला वराह दृष्टि का नहीं अपितु गंध का अनुभव करने की अपनी असीम क्षमता से वे जीवन में अपना मार्ग प्रशस्त करते हैं इसीलिए प्रभु विष्णु देव ने भूदेवी को ढूंढने के लिए वराह रूप धारण किया और उनकी सुगंध का पीछा करते हुए वे ब्रह्मांड के अनंत अंधकार के दलदल में प्रविष्ट हुए [संगीत] [संगीत] गुरु पशु स्वयं हरि नहीं तो जो भी हो तुम भूदेवी को ढूंढकर उसकी रक्षा करने के उद्देश्य से अंधकार के अनंत दलदल में प्रवेश करोगे तो सुनो यह कदा भी सफल नहीं होगा अंधकार में लुप्त होकर उसी में विलीन हो [संगीत] [संगीत] जाओगे [संगीत] मुझसे मेरी इच्छा के विरुद्ध चुनौती देने का दु साहस किया दंड दूंगा तुझे सार करूंगा तेरे शरीर का कुरु [संगीत] पशु [संगीत] ली शद भी कुरु पशु अपने बल से भूदेवी को पराजित कर अपने वश में किया है मैंने उसे रुक जा उन्हें कहां ले जा रहा है अन्यथा अपने प्रचंड खड़क से तीव्र आघात करके खंड खंड कर दूंगा तेरे शरीर [संगीत] को तुम्हारा मुझसे बचकर निकल जाना असंभव है तुझे छोडूंगा नहीं सामना करो मेरा युद्ध करो सर्वशक्तिमान योद्धा हिरण्याक्ष से भूदेवी पर सिर्फ मेरा अधिकार है यदि साहस है तो पराजित करो मुझे और ले जाओ उसे अपने [संगीत] साथ रुक जाओ की तरह पलायन कहां कर रहे हो लौटा आओ मुझे मेरी भूदेवी माता प्रभु विष्णु जी ने अपना इतना अपमान क्यों सहा उस दुष्ट हिरण्याक्ष की चुनौती स्वीकार कर उसे उचित उत्तर क्यों नहीं दिया उन्होंने वही किया जो उनका कर्तव्य था पुत्र सर्व प्रथम पीड़ित की सहायता कर उसकी पीड़ा को दूर करना हमारा कर्तव्य होता है उसके उपरांत ही पीड़ा देने वाले को दंडित किया जाता है अर्थात प्रभु का प्रथम उद्देश्य था माता भूदेवी की रक्षा करना उसके पश्चात वह दुराचार नक्ष को दंडित करने वाले थे सृष्टि एवं उसमें समाहित सभी जीवों की रक्षा के लिए भूदेवी को सौरमंडल में उनके उचित स्थान पर पुनः स्थापित करना अत्यंत महत्त्वपूर्ण था पुत्र इसीलिए जगत के पालनहार प्रभु विष्णु जी ने यथा शीघ्र यह कार्य पूर्ण किया भूदेवी जीवन की रक्षा करते आए सदा रमेशा हिरण आक्षा दंडित [संगीत] करने रूप वराह का विष्णु धरे अजर अमर है जीवन यो तक हनुमत श्री अग्रा नत मस्तक हर हर काज करें जीवन हित कप सहाय करवे [संगीत] संकल्पित [संगीत] हां अब मुझसे बचकर कहां जाओगे कायर पशु ऐसा प्रतीत हो रहा है कि तुम मुझसे युद्ध करने के लिए अत्यंत आतुर हो कायर और कुरूप पुकार तुमने जिसका अनेकों बार अपमान किया आज वह तुम्हारे सम्मुख है इच्छा पूर्ण करो अपनी आओ युद्ध करो मुझसे [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] ये ले मेरा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] प्रहार [संगीत] बस इतनी ही शक्ति है तुम में हिरण्य अक्ष इसी शक्ति का दं पूर्ण प्रदर्शन कर तु समस्त जीवन स्वयं को सर्वशक्तिमान होने का टंडोरा पीटते [संगीत] रहे [प्रशंसा] [संगीत] अ ह ले बराह विष्णु अवतारा दुष्ट हिरण्यक्षा सहारा दृष्टि दया भक्तन प रखी है दुष्ट लाए काल बन है पापी का वध कर के प्रभु भय चतुर्भुज पुनः विष्णु कपी इस रूप पे मुग दए भक्ति भाव से भर [संगीत] आए नम सवे तुम स सर्वार्थ वेद नमो हिरण्य गर्भ परमात्मने नमस्ते वासुदेवाय विष्णवे विश्व योन नारायणाय देवाय देवा नाम हित नमोस्तुते चतुर्वर्ण सर्व भूतात्मा भूता कोय नमो नमः नमोस्तुते वराय नमस्ते रूप नमो योगा गमय नम [संगीत] संकर्ष नमोस्तुते वराय नमस्ते मस्य रूपण नमो योगा गमय नम [प्रशंसा] [प्रशंसा] कयते ता हि काशीष अनर्थ हैय अनर्थ हैय किसने किया मेरे अनुज का वध करने का भयंकर अपराध किसने किया दता वो चाहे जो भी हो मैं उसे नष्ट कर दूंगा अस्तित्व मिटा दूंगा मैं उसका तित्व मिटा दूंगा [संगीत] बुरे कर्मों का परिणाम सदैव बुरा ही होता है
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