अष्टविनायक की अगली कथा सिद्धि टेक के प्रभु सिद्धि विनायक की है सृष्टि के आरंभ के पूर्व उन्होंने मुझे दर्शन देकर सिद्धियां प्रदान की थी मुझे यह बताने की कृपा करें कि मेरे जन्म का उद्देश्य क्या है शीघ्र आपको उसका भी ज्ञान हो जाएगा इसके माध्यम बनेंगे वो जो इस आकाश गंगा के दूसरी ओर आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं और वो भी अपने होने का उद्देश्य आपके माध्यम से ही जानेंगे संसार जिन्हे ब्रह्मदेव के नाम से जानेगा जानेगा हे जन्मदाता हे प्रभु शीघ्र आकर मेरी रक्षा कीजिए हे पालनहार तुरंत आइए मेरी रक्षा के लिए पालनहार तो यह मेरा कर्तव्य है मेरे होने का प्रयोजन है [संगीत] ये दोनों कौन है जो ब्रह्मदेव की ओर बढ़ रहे हैं आओ हमारा भोजन बना रुको तुम ऐसा नहीं कर सकते अच्छा हुआ तुम भी आ गए अब दोनों भ्राता में भोजन बांटना नहीं पड़ेगा और फिर मैं बारबार भिन्न अस्त्रों से उन पर प्रहार करता रहा व आहत हुए किंतु फिर कुशल भी हो गए और धीरे धीरे उन पर वार करना कठिन होता गया [संगीत] देखो कटे हुए शीस उ [हंसी] गई इनका रहस्य क्या है क्या कारण है कि मैं इनका अंत नहीं कर पा रहा [संगीत] लगता है हमारा वक्त करने की शक्ति नहीं जुटा सके हो तुम प्रभु ने कहा था देवी आदि शक्ति के ध्यान से कुंडलिनी के शेष चक्र भी जागृत होने लगते हैं लगता है प्र स्वीकार कर ली तुमने हे देवी आदिशक्ति मुझे पूर्ण रूप से अपनी कुंड जागृत करने में सहायक बनी है और कृपा कर मुझे संकेत दीजिए मैं इन दोनों का अंत कैसे करूं पालनहार क्या कर रहे हैं य रुक क्यों गए अपनी रक्षा क्यों नहीं कर रहे हैं हे देवी जग का पालन करने में इन दुष्टों का संघार करने में मेरी सहायता कीजिए के नारायण के ना मैं महामाया देवी आदि शक्ति की ही स्वरूप हूं मैं आपकी सहायता [संगीत] करूंगी मधु कट महामाया माया भी देती है और उससे मुक्ति भी तुम्हारी भूख मुक्ति से ही मिट सकती है प्रणाम देवी महामाया मेरा मार्ग दर्शन कीजिए मुझे बताइ मैं क्या करू मांगिए समय आने पर उचित वरदान [संगीत] मांगिए और मुक्ति दान से मिलती है इतने साहस से जो तुम दोनों से झुज रहे हैं उन्हे मन चाहा वरदान दे [संगीत] दो तुमने इतने प्रयास किए और हर बार असफल रहे फिर भी पराजे स्वीकार नहीं की इसीलिए हम तुम्हें एक मनचाहा वरदान देना चाहते हैं संकोच मत करो जो मांगना चाहते हो मांगो तो वरदान दो मुझे तुम्हारी मृत्यु मेरे हाथों ही होगी [संगीत] तथा जग शयम पदमनाभम सुरेशम रम गन सदम हमारी मृत्यु तुम्हारे ही हाथों होगी किंतु यहां नहीं इस अनंत स्थान पर नहीं तुम हमारा वद वही कर सकोगे जहां जल नहीं होगा ओम नमो भगवते वासुदेवाय नम ओम नमो भगवते ओ नमो भ ये क्या करने जा रहा [संगीत] है नारायणम कदाम गोविंदम की अब ना तुम अन स्न में हो अनंद सागर में अब तुम मेरे तन पर स्थित हो जहा जल नहीं नारायणाय सुर मनाय नारायणाय [संगीत] सराय [संगीत] ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः ओम नमो भगवते वासुदेवाय [संगीत] नम आप ही महा विश्व के आधार है संसार की उत्पत्ति का बीज आपसे जन्मा है सुंदरता की प्रतीक आपकी इस रचना को पृथ्वी कहा जाएगा सृष्टि इसी पर आधारित होगी यही जीवों की उत्पत्ति होगी आप ही उसे रचें और सृष्टि के रचता ब्रह्मदेव कहलाएंगे मेरे होने का उद्देश्य देकर आपने मुझे कृतार्थ कर दिया पालनहार और इस प्रकार मैं जगत का पालनहार बना और ब्रह्मदेव उसके रचता और उन्होंने सृष्टि को रचा और फिर पृथ्वी पर य सिद्धि टेक पर आपको सि प्रदान करने वाली प्रतिमा को आपने यहां स्थापित [संगीत] किया प्रिय यदि हम पूरी निष्ठा से अपना उचित मार्ग ढूंढे तो भगवान केवल हमारी सहायता ही नहीं करते हमारा मार्ग दर्शन कर हमें जीवन का उद्देश्य भी ज्ञात करवाते हैं और वो भगवान है परम भ्रम जिनका ना आदि है ना अंत वो सर्वोच्च स्थान पर स्थित रहने वाले प्रभु महा गनाधिपति [संगीत] है स्वामी सृष्टि के आरंभ से भी पहले प्रभु ने ही आपको सिद्धियां देकर आपको आपके उद्देश्य से परिचित कराया तो अब भी जिस यात्रा में उन्होंने हमें भेजा है उसे पूर्ण करने में भी वही हमारी सहायता करें [संगीत] प्रभु मुझे आशीर्वाद दीजिए मैं शीघ्र य यात्रा संपन्न करू और मुझे मां कहकर पुकारने वाली मेरे मात्व को पूर्ण कर मेरी ममता का सुख भोगने वा संतान मुझे भी श्र मि किंतु देवी माता पिता का संतान के प्रति बड़ा दायित्व होता है संतान का मार्गदर्शन कर उसे योग्य बनाना इसलिए देवी आपकी मां बनने की लालसा से आरंभ हुई इस यात्रा के अगले चरण में मंदिरों की कथा से संसार को संतान का ध्यान रखने के लिए दो बहुत बड़ी सीख मिलेंगी इसलिए अब आपको अपने अगले गंतव्य बल्लालेश्वर मंदिर की ओर बढ़ना [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] चाहिए चिंता कितनी भी बड़ी हो इस दिव्य और भव्य मंदिर में आने के बाद वह छोटी होकर जीवन से दूर हो जाएगी यहां की ऊर्जा ही ऐसी है इतने साधारण प्रभु की दिव्य आभा तो अनुपम है है ना स्वामी दिव्यता किसी बाहरी आवरण पर निर्भर नहीं करती प्रिय सचमुच सादगी में भी दिव्य है प्रभु यहां तो इनका नाम भी साधारण है [संगीत] बल्लाल बल्लाल और उनके ईश्वर की कथा का संबंध तो एक सफल व्यापारी से था कल्याण [संगीत] अरे थोड़ी शीघ्रता दिखाओ भैया थोड़ी प्रतीक्षा तो करनी होगी भोला दस जी थोड़ा धीरज रखिए आपको आपका सामान अवश्य मिलेगा लीजिए यह लो दाल चावल और गुड़ दे दो कल्याण भैया हम कल्याण जी अरे तोल थोड़ा इधर-उधर होने दोगे या नहीं मेरा नाम कल्याण अवश्य है लेकिन मैं लोगों का कल्याण करने के लिए यहां नहीं बैठा हूं भाई मुझे अपना व्यापार बढ़ाना है ना कि डुबाना है ये [संगीत] लो और कल्याण का व्यापार में सफलता का मंत्र है ना एक मुद्रा अधिक लो ना एक मुद्रा अधिक दो बस इतना धन जोड़कर करोगे क्या कल्याण जी और फिर आखिर है कौन तुम्हारे बाद जो इस धन का लाभ हो गगा और फिर संतान होती तो इस परिश्रम का अर्थ होता ना और फिर धन तो चंचल है आज इसका तो कल उसका और फिर जीवन का वास्तविक धन तो संतान ही है लेकिन संतान को पालने के लिए भी तो धन चाहिए ना भोला दस तो पहले धन कमाया अब ईश्वर की कृपा से संतान भी प्राप्त होगी सत्य कह रहे हो कल्याण जी आशा का त्याग कभी नहीं करना चाहिए फिर चाहे बाल ही क्यों ना पकने [संगीत] लगे अरे इंदू मती तुम या इंदुमती भाभी यहां यदि मुझे ज्ञात होता कि भाभी यहां है तो मैं ऐसे कड़वे बोल कभी ना बोलता आप अपने काम में जितनी निष्ठा और अनु शासन का परिचय देते हैं उतनी भोजन में कहां करते हैं इसीलिए मैं स्वयं ही भोजन ले आई फिर तो अब भोजन के बाद ही व्यापार होगा अब कुछ समय बाद आई लेकिन कल्याण भाई मेरा वो गुड़ तो दे दो भोजन काल के बाद आकर ले जाना भोला दस हैं ठीक है कल्याण भाई चलता हूं मैं और भोला और अन्य किसी की बात का बुरा मत मानना कहने वाले तो कहेंगे मुझे उनकी कोई चिंता नहीं चिंता वो करेंगे जिनको चिंता करने की आवश्यकता है आप क्यों करेंगे सही है मैं क्यों [संगीत] करूं चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं अर्थात अर्थात ये कि ईश्वर सब देखते हैं सबका सुनते हैं उनके घर पर देर है अंधेर नहीं आप अब भी नहीं समझे नहीं स्वामी ईश्वर ने हमारी सुन ली आप पिता बनने वाले हैं और मैं मां मैं मैं पिता बनूंगा सच कह रही हूं ना ब सच मैं मैं बता बनने वाला हूं हां मैं मैं पिता बनूंगा अरे अरे भैया अरे अरे ओ भोला दार अरे कहां जा रहे हो मुंह मीठा नहीं करोगे क्या गुड नहीं लोगे अरे कल्याण भैया भी आपने ही तो मुझे लौटाया था भूल गए क्या अरे वो सब भूल जाओ आओ शीघ्र होता करो आओ आओ जल्दी आओ अच्छा आता हूं भैया आता हूं ये लो ये लो ये गुड लो अरे झोला खोलो ये लो और ये ये चावल भी लो यही चाहते थे ना तुम सुनो ईश्वर के घर में देर है अंधेर नहीं सच्चे मन से मांगो तो सब कुछ मिलता है अरे लो और लोग देख क्या रहे हो लो जोड़ा खोलो और घर जा के भाभी जी से कहना कल्याण भैया ने कहा है तुम्हारे लिए खीर बनाए जाओ जाओ व्यापार का नियम होता है कल्याण भैया ना अधिक दो और ना अधिक लो अभी तो आपने समझाया था मुझे फिर ये अचानक इतना बड़ा बदलाव धन कमाने की लालसा मिट गई है क्या अरे नहीं भाई वो तो और ज्यादा गुना बढ़ गई है मैं बहुत धन कमाऊ बहुत धन कमाऊ क्योंकि जीवन का सबसे बड़ा धन मुझे मिलने वाला है मैं पिता बनने वाला हूं अरे लखन भैया मैं पिता बनने वाला हूं भैया पिता पिता बनने वाला हूं मैं मैं पिता बनने वाला हूं लखन भाई पिता बनने वाला हूं मैं ये ये ये लो सबको खुश करेगा सबका मुह बिठा करेगा ये लो ये लो गुड ल लो आज जी भर के लो लो लो तुम भी लो लो ये चावल अरे संभल कर कल्याण भैया संभल कर अरे अपने आनंद को इतना मत बढ़ाओ कि पूरी दुकान ही लुट जाए अरे लुटे गी नहीं आने वाली संतान के भाग्य से और भी धन बढ़ेगा बहुत बढ़ेगा संतान प्राप्ति का आनंद कुछ ऐसा था कि वो कल्याण जो अधिकता में विश्वास नहीं रखता था अब सबको दोनों हाथों से सब कुछ बांट रहा था वह बड़ी ही समझदारी का परिचय दे रहा था समझदार होने का अहंकार कभी-कभी जीवन का विकार बन जाता है देवी कभी-कभी व्यक्ति बड़ी भूल कर बैठता है और ऐसी ही भूल कल्याण भी करने वाला था अरे कल्याण भैया तुम्हारा झपकी लेने का समय हो गया भैया इससे पहले कि तुम्हारी आंख लगे मुझे मेरा सामान दे दो अभी नहीं लादास अब सूर्यदेव भी सर पर आ गए हैं निद्रा का हो ग और तुम तो जानते हो भोला दस अनुशासन मेरा सबसे बड़ा गुण है तो थोड़ी समय बाद अरे अरे कल्याण भैया उचित है किंतु अनुशासन कहीं बढ़कर शासन ना बन जाए तुम्हारी संतान यह बात समझ पाएगी या नहीं यह तो भविष्य ही बताएगा अरे मेरा पुत्र अनुशासन भी मानेगा और मेरा शासन भी मुझसे भी अधिक सफल होगा वो [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] वाह कल्याण भैया वाह कितना गुणी है तुम्हारा पुत्र वो आया तो जैसे तुम्हारा तो भाग्योदय ही हो गया कितना होनहार और कितना अनुशासित है वो हां भाई ऐसा व्यापारी तो हमने कभी देखा ही नहीं इतने कम आयु में 108 स्थानों पर उसने अपना व्यापार बढ़ा लिया इतना यशस्वी पुत्र पाकर तो आप धन्य हो गए कल्याण भाई आपके पुत्र की तो जितनी प्रशंसा की जाए कम है कल्याण भैया जैसा पिता वैसा ही पुत्र व्यापारी भी अनुशासित भी और धनवान भी वाह कल्याण भैया वाह मित्र कल्याण ये तुम्हारी ही शिक्षा है जिसके कारण चारों दिशाओं में तुम्हारे पुत्र के चर्चे हो रहे हैं भाई वाह बधाई हो बधाई हो मित्र बधाई हो ऐसा यशस्वी पुत्र पाकर तो आप धन्य हो गए कल्याण भैया बधाई हो बधाई हो [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] कितना सुंदर स्वप्न था इसे सत्य भी बनाऊंगा अरे कल्याण भैया तुम्हारी झपकी पूरी हो गई हो तो मेरा सामान दे दो भैया अरे हां हां हां हां ले लो भोला दस आओ आओ आता हूं भैया आता हूं लाओ अब हमारा सामान हमें दे दो क्या हुआ इतने आनंदित क्यों हो भाई अरे क्यों ना आनंदित मेरा पुत्र मुझसे भी बड़ा व्यापारी बनेगा और मैं सुख और समृद्धि में विश्राम ही विश्राम करूंगा स्वामी पेड़ के लगते ही फल की इच्छा कर क्या उचित है उचित और अनुचित का भेद करना तो व्यक्ति पर निर्भर करता है कोई भी कार्य समय आने पर ही शोभा देता है और कल्याण अभी से ही अपने पुत्र को शिक्षा देने और व्यापार सिखाने की तैयारी में जुट गया था देखो इंदुमती क्या लाया हूं मैं व्यापार की कोई सामग्री है क्या अरे नहीं नहीं व्यापार अब सिर्फ दुकान पर यहां पर तो सिर्फ शिक्षा क्या का सामान आएगा गणित शास्त्र भूगोल शास्त्र भाषा शास्त्र स्वामी पिता बनने के समय में आप अपनी शिक्षा की सोच रहे हैं तुम समझी नहीं प्रिय यह पुस्तक मेरे लिए नहीं अपने होने वाले पुत्र के लिए है कम आयु में व्यापार करने के कारण मेरी शिक्षा पूरी नहीं हुई लेकिन मेरा पुत्र बाल अवस्था में गुरुजनों से प्रत्येक विषय सीखेगा अरे तभी तो अपने व्यापार को आगे बढ़ा सकेगा जन्म से पहले ही पुस्तकों का ऐसा पहाड़ लगाएंगे तो वह तो अभी से भयभीत हो जाएगा नहीं नहीं भयभीत कैसे होगा मेरा कल्याण का पुत्र है व तो बड़ी प्रसन्नता से सब सीखेगा वो सब ज्ञान सीखेगा जो एक व्यापारी को [संगीत] चाहिए देखा पुत्र अपने पिताजी को कितने उत्साहित [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] है बधाई हो बधाई पुत्र हुआ है [संगीत] ब अरे कल्याण भैया आज तो ऐसे दान कर रहे हो जैसे कोई साधारण व्यापारी नहीं कोई बहुत बड़े राजा होलास ऐसे ही आभास हो रहा है पुत्र हुआ है व इतना यशस्वी होगा मुझे राजा जैसा सम्मान दिलाएगा पुण्यवान गुणवान ही नहीं प्रतिभाशाली होगा मेरा पुत्र देखना तुम और और इतना बड़ा व्यापारी बनेगा कि सभी राज्यों के प्रत्येक कोने में उसका व्यापार भी होगा और नाम भी नाम तो होगा किंतु उससे पहले उसको देख तो लो उसका नाम भी तो रखना होगा आपको देखो जिसके जन्म से इतना आनंदित हो उसको देखा तक नहीं मैंने अरे आप शांत मत हो जाइए आनंद मनाइए ल बजाइए बधाई [संगीत] हो [संगीत] इंदुमती तुमने मेरे जीवन का सर्वश्रेष्ठ उपहार मेरे पुत्र को मुझे देकर मुझ पर बहुत बड़ा उपकार किया है बहुत धन्यवाद अब इसे शिक्षा देकर इसके और हमारे स्वर्णम भविष्य के लिए इसे तैयार करना मेरा दायित्व है किसी के भी जीवन में बचपन का आनंद अनोखा होता है इसीलिए वह युवा होने पर भी अपना बचपन फिर से जीना चाहता है कल्याण ने अपनी महत्वाकांक्षा के कारण बल्लाल का बचपन ही छीन लिया आयु से अधिक शिक्षा का बोझ उसके कंधे पर डाल दिया जबकि माता-पिता का धर्म और कर्तव्य है कि अपने पुत्र की पसंद का ध्यान रखें किसी भी बच्चे का भविष्य कोई नहीं जानता बल्लाल का भी भविष्य किसी को ज्ञात नहीं [संगीत] था पुत्र बल्लाल उठो उठने का समय हो गया है प्रणाम पिताजी आज से तुम इसी समय पर गुरुकुल जाओगे आज से तुम्हारी शिक्षा आरंभ होगी जो आज्ञा पिता जी चलो स्नान कर [संगीत] लो जल कितना ठंडा है किंतु मैं कुछ कहूंगा तो पिताजी को बुरा [संगीत] लगेगा [संगीत] [प्रशंसा] यह लो पुत्र यह तुम्हारा भोजन है अपने पिता के समान भोजन करना मत भूलना आओ पुत्र मैं तुम्हें गुरुकुल पहुंचा दू नहीं पिताजी मैं स्वयं चला जाऊंगा आपके व्यापार का समय भी व्यर्थ नहीं होगा आप मुझे मार्ग दिखा चुके हैं बस आशीष दीजिए स्वामी आप चिंता मत कीजिए देवी मुझे पूर्ण विश्वास है यह गुरुकुल पहुंचने में कोई भूल नहीं करेगा अरे जाओ पुत विलंब मत [संगीत] [संगीत] करो [संगीत] प [संगीत] रुकिए मैं आपकी सहायता करता हूं तुम तो मात्र एक बालक हो क्या सहायता करोगे तुम मेरे पिताजी कहते हैं कि जो पड़ोस में छुपन छुपाए खेलते हैं वो अभी भी बालक हैं मैं तो बड़ा हो गया हूं देखिए तैयार होकर भोजन लेकर गुरुकुल जा रहा हूं मैं अभी आपकी सहायता करता [संगीत] [संगीत] हूं [संगीत] धन्यवाद पुत्र मेरी सहायता करने के [प्रशंसा] लिए रुकिए श्रीमान [संगीत] सा पुत्र बस इस कीट के लिए रोक दिया तुमने मुझे ऐसे तो ना जाने कितने कीट प्रतिदिन कुलते होंगे मेरे पहिए से कीट छोटा है तो क्या हुआ प्रभु के दिए प्राण भी तो इसमें है तो इसके प्रति भी हमें सचेत रहना चाहिए ना क्योंकि संसार में प्रत्येक जीव का महत्व है मैंने पुस्तकों में यही पढ़ा है इतने ज्ञानी हो और कह रहे हो कि गुरुकुल में आज तुम्हारा प्रथम दिन है हां क्योंकि पढ़ना तो मैंने गुरुकुल जाने से पहले ही सीख लिया [संगीत] था जाओ तुम इस वृक्ष के नीचे सुरक्षित रहोगे [संगीत] अब छलांग मार करर फिर मार्ग पर मत पहुंच जाना नहीं तो कुछ ले जाओगे अपना ध्यान [संगीत] रखना अब क्या हुआ क्यों रोक रहे हो मुझे ओ तुम्हें भूख लगी होगी [संगीत] लो यह खा [संगीत] लो इससे पहले कि तुम मुझे प्यास के कारण रोको मैं तुम्हारे लिए जल ले आता [संगीत] हूं [प्रशंसा] अब अपना ध्यान तुम्हें स्वयं रखना होगा मैं जाता हूं उस दिन बल्लाल ने अनजाने में झिंगुर कीट को दुर्वा और जल दिया किंतु उसे यह ज्ञात नहीं था कि वस्तुत यह दुर्वा और जल उसने प्रभु महा गनाधिपति को अर्पित किया है उसके इस सुकर्म के कारण उसके जीवन में एक महत्त्वपूर्ण घटना घटने वाली [संगीत] थी संतान को अपनी महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति का साधन ना मानकर उनकी रुचि के अनुसार ही शिक्षा दीक्षा करवाना समझदार अभिभावक का कर्तव्य है
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