Saturday, 3 January 2026

विश्वकर्मा ने श्री कृष्ण के लिए द्वारका बनाई विश्वकर्मा जयंती विशेष Mahabharat Scene Pen Bhakti

महाभारत क बलराम की जय कृष्ण बादाम की जय कृष्ण बादाम की जय कृष्ण बादाम की जय कृष्ण बादाम की जय कृष्ण बादाम की जयन की जयन की जयन की की क की क की कृष् की कृ की क की कृष् बम की ज यदि कृष्ण और बलराम ठीक समय पर ना गए होते तो मथुरा की पराजय आज निश्चित थी तो मथुरा पर इन दोनों का एक और ऋण चह गया क्षमा चाहता हूं महाराज परंतु मातृभूमि कभी ऋण नहीं होती और यदि कोई यह सोचे कि उसने या उसके परिवार ने मातृभूमि पर कोई उपकार किया है तो य उसकी भूल है मैंने जो किया वही मेरा कर्तव्य था और आज के पश्चात भी मैं जो करूंगा वो केवल अपने कर्तव्य पालन ही के लिए करूंगा विजय के इस क्षण में मैं यह कहना चाहता हूं कि मगध नरेश जरास फिर आक्रमण करेंगे तो इसमें चिंतित होने की क्या आवश्यकता है यदुवंशियों को य मगध नरे से घबराना शोभा नहीं देता मैं बलराम से सहमत हूं महाराज फिर भी हमें कृष्ण की बात तो सुननी ही चाहिए हम यह कैसे भूल सकते हैं कि यह देवकी का आठवां पुत्र है जो मथुरा को ही नहीं बल्कि पूरी ब्रजभूमि को कंस से मुक्त दिलाने के लिए आया है परंतु मथुरा तो कंस से मुक्त हो गई है महाराज तो यह जरासंध क्या है और यह बारबार मथुरा पर आक्रमण क्यों कर रहा है अभी यह युद्ध समाप्त नहीं हुआ है महाराज मैं पिताश्री से सहमत हूं महाराज यदि वह युद्ध अभी समाप्त नहीं हुआ है पिताश्री तो जरास को आने दीजिए इस बार वह युद्ध समाप्त ही कर देते हैं वीर पुरुष को युद्ध के लिए इतना उतावला नहीं होना चाहिए दाऊ बलबीर की तो पहचान ही वह है कि वह आवश्यक और अनावश्यक युद्ध का अंतर समझ सकता है अनावश्यक युद्ध तो केवल अभिमानी करते हैं तो क्या हम मगन नरेश जरास के पास य प्रार्थना लेकर जाए पुत्र कि युद्ध में हमारे हाथों पर आजय तो अवश्य हुई परंतु हम पर दया करो हम लड़ना नहीं चाहते यदि यह कहने से युद्ध टल जाए तो यह कहने में भी क्षति नहीं है पिताश्री यह तुम क्या कह रहे हो वासुदेव कृष्ण क्या हम यदुवंशी उस जरास के आगे घुटने टेक दें नहीं घुटने तो केवल कायर टेकते हैं तो यह मैं कैसे कह सकता हूं अपनी रक्षा के लिए राष्ट्र की रक्षा के लिए लड़ना तो हमारा कर्तव्य है तो तुम कह क्या रहे हो कभी तो दो बोल सीधे बोल लिया करो मेरा प्रस्ताव यह है कि हम यदुवंशियों को मथुरा छोड़ देनी चाहिए हम मथुरा नहीं छोड़ मथुरा हां हां मथुरा नहीं [प्रशंसा] छोड़ेंगे नहीं छोड़ेंगे क्रोध की कटार क्रोधी की बुद्धि को काट सकती है तो कोई ऐसे शस्त्र का उपयोग ही क्यों करे बातें ना बनाओ कृष्ण तुम यही कह रहे हो ना कि जरास से डर कर हम घर भी छोड़ दे और रण भी परंतु इतिहास तो इसे कायरता कहेगा यह कहकर नंदगांव के माखन का अपमान तो मत करो कृष्ण यह कहकर मैं नंदगांव के माखन का अपमान नहीं कर रहा हूं दाऊ उसकी रक्षा कर रहा हूं मगद नरेश की लड़ाई तो मुझसे है ना कि मैंने मामा कंस का वध किया उनकी दो पुत्रियां तो मेरे कारण विधवा हुई हैं तो मगध नरेश के क्रोध की अग्नि में मथुरा क्यों जले हां तो तुम अकेले ही उनके लिए बहुत हो प्रश्न यह नहीं है दाऊ परंतु युद्ध केवल तभी होना चाहिए जब दूसरे सारे मार्ग बंद हो चुके हो परंतु जरास ने कौन सा मार्ग खुला छोड़ा है पुत्र एक मार्ग है पिताश्री मथुरा को युद्ध की अग्नि से बचाने का एक मार्ग अब भी खुला है कौन सा मार्ग खुला है वत्स मथुरा से कहीं और चले जाने का मार्ग महाराज मथुरा में हमारे रहने का युग समाप्त हो गया है नए युग के स्वागत के लिए हमें एक द्वारिका बनानी चाहिए चारों ओर से सुरक्षित द्वारिका ये क्यों नहीं कहते कि रण छोड़ने का प्रस्ताव रख रहे हो यदि तुमने ऐसा किया तो लोग तुम्हें रण छोड़ श्री कहने लगेंगे पुत्र जिस मथुरा जिस व्रजभूमि को स्वयं मैंने कंस के अत्याचारों से मुक्ति दिलाई है उसे मगध नरेश जरास के बदले की भावना से बचाने के लिए मुझे यह भी स्वीकार है कि लोग मुझे रण छोड़ कहे नामों में क्या धरा है नाम तो पुकारने का एक साधन है और बस लोग मुझे चाहे जिस नाम से पुकार परंतु जब मुझे ऐसा लगेगा कि पुकारने वाला मुझे पुकार रहा है तब मैं अवश्य बोलूंगा और रहूंगा मैं वही जो मैं हूं मैं तो फिर भी कहूंगा कि सुदर्शन चक्र निकालो हर गर्दन सुदर्शन चक्र के योग्य नहीं है दाऊ यदुवंशियों को अपने अभिमान से प्यार है तो हम यही रहेंगे और यदि उन्ह अपनी भू से प्यार है तो हमें स्वदेश त्याग करना ही पड़ेगा कहना मेरा कर्तव्य था मैंने कर दिया अब निर्णय लेना महाराज का कर्तव्य है मैं वासुदेव कृष्ण से सहमत हूं मुझे पता था कि सब कृष्ण से ही सहमत हो जाएंगे परंतु इस द्वारिका का निर्माण कौन करेगा इस द्वारिका का निर्माण करेंगे विश्वकर्मा जी [संगीत] मैं महाराज उग्रसेन की ओर से आपका स्वागत करता हूं विश्वकर्मा जी आपने यहां आने का जो कष्ट उठाया उसके लिए मथुरा नगरी सदैव आपकी आभारी रहेगी आप तो मुझे यह बताइए वासुदेव कि आपने मुझे बुलाया क्यों देव शिल्पी को कोई क्यों आमंत्रित करता है महाराज चाहते हैं कि यदुवंशियों के लिए आप सागर से घिरी हुई एक नगरी का निर्माण करें यदि उस नवीन नगरी का नाम द्वारिका होने वाला है तो उसका योजना चित्र मेरे पास है यह [संगीत] [हंसी] देखिए महाराज यो जना चित्र तो अनुपम है क्यों दाऊ निर्णय लेने के पश्चात दाऊ से मत पूछा करो आपकी ये नगरी तो हमें भा गई विश्वकर्मा जी आप अपना कार्य आरंभ करें महाभारत महाभारत महाभारत महाभारत महाभारत i

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