[संगीत] [संगीत] बस मां अब और विलाप नहीं आपके आशीर्वाद से मुझे कुछ नहीं [संगीत] [संगीत] होगा [संगीत] सुग्रीव सुग्रीव मां दुर्गा की जीवनदाई शक्ति से युक्त इस प्रसाद को यदि तुम बाली से बचा कर ना लाते तो बड़ा अनर्थ हो जा तुमने ही हनुमान को इस घोर संकट से [संगीत] बचाए हम सदैव तुम्हारे आभारी रहेंगे पुत्र ऐसा मत कहिए महारानी मां [संगीत] हनुमान मेरा मित्र नहीं मेरा भ्राता [संगीत] है और भ्राता के जीवन को बचाने में आभार कैसा यदि मित्र और भाई हो तो तुम्हारे जैसा महाराज हमारे और आपके परिवार के पीढ़ियों से चले आ रहे संबंध को भैया नहीं समझ सके उनकी ओर से मैं आपसे क्षमा प्रार्थी हूं सुग्रीव भैया मित्र होए जो मित्र सुखारी उसकी महिमा जग से न्यारी जेन मित्र दुख होत दुखारी दर्शन उसका पुण्य पजारी ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान सुग्रीव भैया यह क्या आपका देह तो रक्त रंजित है अवश्य ही वाली भैया [संगीत] ने [संगीत] चलो पुत्र मैं तुम्हारे उपचार की व्यवस्था करती हूं चलिए सुग्रीव [संगीत] भैया प्रणाम देवेश्वर मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई और मैं अपने किए पर लज्जित ह मेरा अंश होने के कारण बाली के प्रति मेरे हृदय में पुत्र मोह बढ़ गया और मैं उसे ऐसा वरदान दे बैठा इसके लिए व अपात्र था मुझे ऐसा वरदान दीजिए देवराज जो भी शत्रु मेरे समक्ष युद्ध की मंसा से आए उसकी आधी शक्ति मुझ में समा जाए उसका आधा बल मुझे प्राप्त हो जाए तथास्तु तथास्तु और अब जिसके कारण वो हनुमान के लिए बारबार संकट उत्पन्न कर रहा है प्रभु राम काज के जिस उद्देश्य के लिए हम समस्त देवताओं के अंशों ने इस धरती पर जन्म लिया था बाली उस उद्देश्य से भटक चुका है और उसके इस वर का कारण भी मैं ही हूं प्रभु प्रभु इसके लिए मैं स्वयं को दोषी मानक कोई भी दंड भुगतने के लिए प्रस्तुत यदि आप चाहे तो मुझे देवराज पद से भी वंचित कर दीजिए किंतु बाली को अनर्थ करने से रोक लीजिए प्रभु अब उसे रोकने का सामर्थ्य मुझ में भी नहीं है प्रभु हनुमान के प्रति वाली का द्वेष और भी बढ़ जाएगा जब उसे ज्ञात होगा कि हनुमान सकुशल है हनुमान के मार्ग में बाली एक बहुत बड़ी बाधा है उसे शीघ्र ही रोकना होगा प्रभु देव राजेंद्र मोह का अंधकार विवेक के प्रकाश को हर लेता है वरदान हो दान हो या ज्ञान य सुपात्र को ही प्रदान करना चाहिए आपने पुत्र मुह में पड़कर जो कुछ भी किया है वह अनुचित है किंतु आपके प्रायश्चित भरे वचनों ने आपको क्षमा का पात्र बना दिया धन्यवाद प्रभु किंतु प्रभु मैं हनुमान के लिए चिंतित देवगढ अब समय आ गया है के हनुमान की समस्त सिद्धियां पूर्ण की जाए यही उचित समय है हनुमान को अष्ट सिद्धि धारी हनुमान बनाने [संगीत] हनुमान की सिद्धियों को शाति दीक्षा के द्वारा ही महायोग का ज्ञान देकर पूर्ण किया जा सकता [संगीत] है और हनुमान को यह दीक्षा आपको ही देनी होगी देव राजेंद्र आपकी आज्ञा [संगीत] प्रभु सुग्रीव भैया माने स्वयं अपने हाथों से आपके लिए यह लेप बनाया है इसमें जड़ी बूटियों के साथ ही एक मां की ममता और एक छोटे भाई का स्नेह भी निहित है देखिएगा प्रातः काल तक आप स्वस्थ हो जाएंगे पता नहीं क्यों वाली भैया इस नेह और इस ममता को नहीं समझ पाए [संगीत] पुन किंधा जाकर उन्ह समझाने का प्रयास करूंगा नहीं जाओगे तुम किष्किंधा ना ही तुम जाओगे और ना ही हनुमान प्रणाम किष्किंदा महारानी प्रणाम महारानी जी प्रणाम महारानी जी सुमेरू में आपका स्वागत देखिए आपके पुत्र सुग्रीव ने मेरे पुत्र हनुमान के जीवन को बचाने के लिए अपना जीवन संकट में डाल दिया किंतु मेरे ही उस कुपुत्र वाली ने इन दोनों के प्राण हरने का प्रयास किया इसलिए किष्किंदा जाना किसी के लिए भी सुरक्षित नहीं और यदि वाली को इन दोनों की कुशलता का समाचार मिल गया तो व पुन ही कोई अनर्थ करने का प्रयास अवश्य करेगा तुम दोनों को देखकर मेरे संतप्त हृदय को बड़ी ही शांति मिली अब मैं तुम दोनों को बाली के पास नहीं जाने [संगीत] दू जब तक वाली उचित मार्ग पर नहीं आ जाता तब तक सुग्रीव यही हमारे साथ सुमेरू में रहेगा किंतु इससे वाली का क्रोध और अधिक बढ़ सकता है और सुमेरू पर कोई बड़ा संकट आ सकता है इसलिए मैं सुग्रीव को लेकर कहीं वन में रह नहीं महारानी जी सुग्रीव मेरे पुत्र हनुमान के समान ही है आप और सुग्रीव हमारा परिवार ही है और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए मैं किसी भी संकट का सामना कर सकता हूं किंतु केसरी जी सुग्रीव की सुरक्षा का उत्तर दायित्व मैं लेता हूं मैं वाली के चरणों में अपना राज मुकुट रख दूंगा किंतु सुग्रीव को कुछ नहीं होने दूंगा आप तो जानती ही है कि वानर राजा अपने प्राण त्याग देगा किंतु अपना मुकुट किसी के चरणों में नहीं रखेगा अतः मेरे जीवित रहते सुग्रीव का कोई आयत नहीं कर पाएगा और पिता श्री के वचन की रक्षा करने के लिए हनुमान कोई भी संकट का सामना करने के लिए प्रस्तुत [संगीत] है सुग्रीव भैया के सामने रहते भी वाली भैया उन तक नहीं पहुंच पाएंगे और सुग्रीव भैया की रक्षा करने के लिए मैं अब सुरक्षा चक्र का प्रयोग करूंगा जिसकी सिद्धि का ज्ञान मुझे मेरे गुरुदेव सूर्यदेव से प्राप्त हुआ [संगीत] है हे गुरुदेव सूर्यदेव जिस सुरक्षा की सिद्धि का ज्ञान आपने मुझे दिया था आज मेरे भ्राता श्री सुग्रीव भैया की रक्षा करने के लिए मुझे उसकी आवश्यकता है आप मेरी सहायता [संगीत] करें ओ सूर्याय नमः ओ भास्करा नमः ओ देवा करराय नमः ॐ दिन करराय नमः ओ सूर्याय [संगीत] नमः ओम सूर्याय [संगीत] [संगीत] नमः [संगीत] धन्यवाद [संगीत] सूर्यदेव अब सुग्रीव भैया जब तक य सुरक्षा चक्र की परिधि के भीतर रहेंगे तब तक इन पर कोई संकट नहीं आएगा सुग्रीव भैया की रक्षा करने का उत्तरदायित्व अब हमारा है [संगीत] सुग्रीव भैया आप निश्चिंत होकर विश्राम कीजिए और अब ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वाली को शीघ्र ही सद्बुद्धि दे ताकि इन सब की आवश्यकता ही ना [संगीत] पड़े रात्र द्रोही सुग्रीव उस मर्कट के प्राण बचाकर तुमने पुनः सिद्ध कर दिया कि तुम अपने भाई महानतम वाली के साथ नहीं उस मर्कट के पक्ष में हो हनुमान के प्राण तो बचा लिए तुमने परंतु अब तुम्हारे जीवन की रक्षा महानतम वाली से कोई नहीं कर सकता उस हनुमान से पूर्व तो मैं तुम्हे ही महाराज पाली चौसर के खेल में कौड़ियों को छोड़ना पड़ता है और सुग्रीव तो आपके भाई लगते हैं नहीं शत्रु है वह मेरा शत्रु यदि सिंह को ध से निकालना होता है तो सिंह के सामने पशु को रखना आवश्यक होता [संगीत] है आपके भाई सुग्रीव की उस वानर बालक के लिए प्रेम और मित्रता आपका अस्त्र बन सकता है आप अपने भाई के माध्यम से उस वानर बालक को कहीं भी और कभी भी बुलाकर फसा सकते [संगीत] हैं सुझाव तो अच्छा दिया है आपने लंकेश परंतु मेरे दंड से तुम बच नहीं पाओगे सुग्रीव और महाराज केसरी ने आपकी माता महारानी जी को वचन दिया है कि मैं अपना राज मुकुट भी वाली के चरणों में रख के सुग्रीव की रक्षा करूंगा और हनुमान ने भी अपने पिता के वचन की मर्यादा रखने का प्रण लिया है [संगीत] [संगीत] [संगीत] मां क्या हुआ आप उठ क्यों गई मां सुग्रीव मुझे किसी प्रकार की ध्वनि सुनाई दी थी मां आप रुकिए मैं देखता हूं कक्ष का द्वार भी खुला है कहीं वाली हुआ तो अनर्थ हो जाएगा [संगीत] पाली तुम मुझे हनुमान के द्वारा बनाए गए रक्षा चक्र में अति शीघ्र जाना होगा नहीं वाली मैं तुम्हारे पाव पती उसे छोड़ दो को छोड़ दो ली य भता है तुम्हारा ली भैया छोड़ दीजिए सुग्रीव भैया [संगीत] को [संगीत] तो आ गया मर्कट मेरा परम शत्रु जिसने मेरे भाई को भी मेरा शत्रु बना दिया ये क्या कर रहे हैं वालि भैया छोड़ मुझ वाली ये तुम क्या कर रहे हो अपनों के ही शत्रु हो गए हो तुम वाली वाली भैया छोड़ दीजिए सुग्रीव भैया [संगीत] को वाली भैया मैं कह रहा हूं छोड़ दीजिए सुग्रीव भैया को वाली भैया मुझे आप क्षमा कीजिएगा मुझे विवश होकर ऐसा करना पड़ेगा [प्रशंसा] पाली ऐसा दुस्वप्न [संगीत] भाई ही भाई का शत्रु हो गया है दोनों ही मेरे पुत्र और दोनों ही मेरे प्रिय दोनों में से किसी का भी अहित नहीं चाहती हूं सुग्रीव को वाली से संकट और यदि हनुमान सुग्रीव के प्राण बचाने यहां आएगा तो वाली को संकट मां के लिए तो दोनों ही स्थिति ताई है मैं किसी का भी अहित नहीं देख सकती भले ही वाली मार्ग से भटक गया है हे प्रभु बाली को सनमार्ग दिखाइए ताकि वह हनुमान से शत्रुता छोड़ दे
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