[संगीत] [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] [संगीत] जय श्री राम श्री रामरा [संगीत] शरा [संगीत] राम राम राम जय श राम राम राम मेरा अ भाग्य कि आप दोनों यहां आए सुग्रीव जिसके कारण मुझे ऐसी अनुपम भक्ति का साक्षी बनने और प्रभु श्री राम के अनन्य भक्त हनुमान का सानिध्य प्राप्त करने का अवसर प्राप्त होगा जामवंत जी मेरे संकट के समय में आपका स्नेह पूर्ण आश्रय पाकर मैं धन्य [संगीत] हूं यहां आपको अपनी सुरक्षा की चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं सुग्रीव मैं वाली भैया के हट से परिचित हूं जामवंत जी मुझे ज्ञात है जब तक वे श्राप से सुरक्षित रहकर मेरा वध करने का कोई उपाय नहीं कर लेंगे शांत नहीं बैठेंगे हनुमत राम के भक्त परम राम का आज एक लक्ष धरम राम राम जपे ब्रह्मचारी प्रस्तर पे प्रभु छब दी उकारी सुग्रीव जामवंत आला दिता नैन कपी बरसे पे मुदिता सत मन तुम भजते रघुवीरा जय मारुति जय जय महावीरा गाधा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली [संगीत] हनुमान पिता श्रीमी क्या हुआ देवी अकस्मात आपकी निद्रा क्यों भंग हो गई कुछ नहीं स्वामी मैं ठीक [संगीत] हूं परंतु आपको क्या हुआ है ऐसी कौन सी चिंता है स्वामी जो आपको अर्ध रात्रि के इस वेला में भी विश्राम नहीं करने दे रही मेरा शत्रु मेरे हाथों से बचकर निकल गया और वह एक ऐसे सुरक्षित स्थान पर छिपा बैठा है जहां मेरा प्रवेश करना वर्जित है यह विचार मुझे कचोट रहा है देवी जब तक मैं अपने हाथों से उस विश्वासघाती सुग्रीव का अंत नहीं कर देता मेरा विश्राम करना असंभव है आप व्यर्थ ही स्वयं को यातना दे रहे हैं स्वामी आपके अनुज को तो पहले ही दंड मिल चुका है वे वहां निर्जन वन में अपना दुख भरा जीवन व्यतीत करने पर बाध्य है और आप यहां किष्किंधा के सिंहासन पर आसीन है क्या इतना भी आपको पर्याप्त नहीं स्वामी मेरी विनती सुनिए अपने भ्राता को भूल जाइए क्षमा कर दीजिए उन्हें स्वामी में कोई साधारण अपराध नहीं आपके अपने प्रिय अनुज है भूल जाऊं असंभव क्षमा कर दूं कदापि नहीं महानतम वाली के द्रोही को दंड मिलकर ही रहेगा मेरे साथ विश्वास घात कर उसने मेरे अनुज होने का अधिकार खो दिया है अब वो मात्र परम शत्रु है मेरा स्वामी तन मन धन से आपके हित के प्रति समर्पित आपकी अर्धांगिनी होने के अधिकार से आपसे प्रार्थना करती हूं अपने भ्राता के प्रति इस क्रोध को त्याग दीजिए स्वामी भूल जाइए भूल जाइए अपना क्रोध भाइयों का आपसी द्वेष सदा ही विनाश का कारण बनता है विनाश होगा अवश्य होगा परंतु मेरा नहीं मेरे द्वारा उस भ्रात द्रोही सुग्रीव का विनाश होगा एक बार एक बार उस ऋषिमुख पर्वत पर प्रवेश करने का उपाय मिल जाए [संगीत] मुझे सूझ गया उस दुष्ट कायर सुग्रीव का वध करने का ऐसा उपाय सूझ गया जिससे सांप भी मर जाए और लाठी भी ना [संगीत] टूटे इस रिष्य में पर्वत की सीमा में प्रवेश नहीं कर सकता मैं इसकी भूमि पर अपने पांव नहीं रख सकता परंतु कहां रख सकता हूं यह मुझे ज्ञात हो गया [संगीत] है [संगीत] नहीं हनुमान क्या हुआ भ्राता सुग्रीव को जय श्री राम [संगीत] नहीं हनुमान मेरे पुत्र सुग्रीव पर एक विकराल महासकर छाया है उसे शीघ्र ही तुम्हारी सहायता की आवश्यकता है गुरु सूर्यदेव को दिए हुए वचन को निभाने का समय आ गया [संगीत] हनुमान रक्षा करो [प्रशंसा] हनुमान [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] हनुमान [संगीत] [संगीत] मर कट मुझे छोड़ दो जाने दो [संगीत] मुझे [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] कंधा के दम नरेश वा मैं तुम्ह शप देता हूं यद रि मुख पर्वत के परी में तुम्हारा एक पा भी पड़ा तो तुम्हारा सर खंडित होकर स टुकड़ों में बिखर [संगीत] जाएगा जाने दो मुझे माय गड छोड़ दो मुझे जाने दो मुझे हनुमान छोड़ दो [संगीत] मुझे मुझे छोड़ दो मैंने शीघ्र ही कुछ नहीं किया तो मतंग ऋषि का श्राप पूर्ण रूप से प्रभावी होकर मेरा अंत कर देगा मुझे छोड़ दो हनुमान जाने दो मुझे मुझे इस प्रकार मारकर तुम्हें क्या प्राप्त होगा हनुमान सुनो भविष्य में मैं कभी भी इस पर्वत की ओर नहीं आऊंगा और ना ही सुग्रीव को आहत करने का प्रयत्न करूंगा मुझे जाने दो आप वचन देते हैं हा हा मैं वचन देता हूं इस और आना तो दूर मैं कभी भी इस पर्वत की र नहीं देखूंगा मुझे जाने दो हनुमान [संगीत] नहीं हनुमान छोड़ दो मुझे [संगीत] मेरा हाथ पकड़िए भ्राता सुग्रीव य गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान हनुमत का जिस शीष पे हाथ उसको नाही भय की बात गुरुवर को दत वचन निभाओ वाली से सुग्रीव बचाओ धर दे मस्तक तुम्हरे चरण ले लो कपि सब जग को शरण सब सुख तुम्हरे पाव तली जय जय जय बजरंग [संगीत] बली मित्र हनुमान यदि आज तुम ना होते तो मेरी मृत्यु निश्चित थी हनुमान मैं तुम्हारा आभारी हूं पुनः मेरे जीवन की रक्षा करने के लिए मैं आजीवन तुम्हारा ऋणी रहूंगा हनुमान महाराज सुग्रीव आप निश्चिंत रहिए अब हनुमान के भय से वाली यहां कभी लौट कर नहीं आए भ्राता सुग्रीव मैं सदैव आपके साथ रहूंगा बहुत-बहुत धन्यवाद [संगीत] हनुमान ठीक हो गया मैं पुनः स्वस्थ हो गई मेरी त्वचा उचित समय पर मेरी बुद्धि ने मेरा साथ दिया [संगीत] [संगीत] अन्यथा आज मतंग ऋषि के श्राप ने तुम्हारी रक्षा की है सुग्रीव परंतु महान तम वाली जो चाहता है उसे पूरा करके ही रहता है इसलिए यह कदापि नहीं सोचना सुग्रीव कि वाली इस सफलता को स्वीकार कर शांत बैठा रहेगा मेरी प्रतिहिंसा की अग्नि तुम्हारा भक्षण अवश्य करेगी देखता हूं वो मर्कट कबत तक तुम्हारी रक्षा करता [संगीत] है संकट मोचन ओम भूर्भुवस्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो योन प्रचोदयात ॐ भूर भुव स्व अरे यह पोटली कहां से [संगीत] गिरी मेरी रक्षा कीजिए नाथ प्रभु मेरी रक्षा कीजिए रक्ष कीजिए प्रभु मेरी रक्षा कीजिए उस विमान में अवश्य किसी स्त्री के संकट में होने का संकेत है मुझे शीघ्र जाकर उसकी सहायता करनी चाहिए मेरी रक्षा कीजिए ना प्रभु मेरी रक्षा कीजिए रक्षा कीजिए प्रभु मेरी रक्षा कीजिए उस विमान तक पहुंचने के पूर्व ही मैं तो नीचे खींचा जा रहा हूं मुझे और ऊंची छलांग लगानी [संगीत] होगी [संगीत] अभी तो वह विमान यही था अकस्मात अदृश्य कहां हो गया कठिन हो रहा है आकाश में स्थिर रहना मेरे [संगीत] लिए अवश्य यह पोटली उसी स्त्री की है जो व्याकुल स्वर में अपने स्वामी को पुकार रही [संगीत] थी [संगीत] क्या हुआ जावन जी ऐसा प्रतीत होता है जैसे यह आभूषण माता सीता के हैं माता सीता हां माता सीता प्रभु श्री राम की अर्धांगिनी [संगीत] माता सीता हां हनुमान श्री राम की अर्थांग माता सीता के आभूषण है [संगीत] ये प्रभु मेरी रक्षा [संगीत] कीजिए उनके स् से कि वो किसी भारी विपदा में थी और और और क्या अनुमान और इतने ऊचे उड़ान भरने में मैं असमर्थ उनकी कोई सहायता नहीं कर पाया और उन तक पहुंचने से पूर्व ही व विमान से ल हो गया यदि सच्चे मित्र का साथ हो तो शत्रु कितना भी बलवान हो कोई हानी नहीं पहुंचा सकता
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti
[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...
-
[संगीत] महाभारत प्रता श्री आपने सु शर्मा को ऐसा वचन क्यों दिया मेरे वचन पालन करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता अनुज तुम क्या समझते हो कि स...
-
[संगीत] यहां पूजा हो रही है किंतु प्रसाद कहां [संगीत] है रुक रुक [संगीत] रुक हरि हरि तो लिखा है यहां किंतु हरि भोजन तक कहां पहुंचा रहे...
-
महाभारत इच्छा है तुम्हारी बस इसने तो एक ही रट लगा रखी है केशव इसे तो आपको गुरु बनाना है वस इस देश में गुरुजनों की क्या कमी है तुम हमें ह...
No comments:
Post a Comment