[संगीत] यह क्या अनर्थ हो गया काल चक्र ने तो मंगल ग्रह को भी निकल लिया है और मैं कुछ ना कर सका ये क्या यह काल चक्र तो पृथ्वी लोक को भी अपनी ओर खींच रहा है समझ नहीं आ रहा है मैं क्या करूं कैसे बचाओ मैं सबको य अनायास क्या हो गया वायु विपरीत दिशा में प्रवाहित होती हुई प्रतीत हो रही है यह क्या हो रहा है ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे कोई सब कुछ खींच रहा है य ये क्या जिस शक्ति से ये काल चक्र पृथ्वी को खींच रहा है मंगल ग्रह की ही भाती ये समस्त पृथ्वी को अपने अंदर निघल लेगा यह तो बड़ी ही भयावह स्थिति होती जा रही है ऐसा पहले कभी नहीं हुआ ना जाने क्या होने वाला है अशुभ संकेत है ये अवश्य ही कोई अघ घटने वाला है हे महादेव हनुमान की रक्षा करना मेरा पुत्र हनुमान स कुशल हो मुझे कोई उपाय समझ ही नहीं आ रहा है क्या करूं कैसे बचा सबको कहीं मेरी मां भी नहीं मां तुम ठीक तो हो ना [संगीत] अंजना हनुमान मां मुझे पुकार रही है समाज से पहले होता है नगर और नगर से पहले होता है राज्य किंतु राज्य से भी प्रथम होता है संसार इसीलिए ध्यान रखना मेरे लाल यदि कभी भी एक और माता-पिता और दूसरी ओर संसार संकट में तो तुम्हें संसार के संकट का निवारण करना होगा पृथ्वी संसार की मां होती है और तुम्हें उस मां को पहले बचाना होगा मां मैं अपना कर्तव्य निभाऊंगा आपने ही मुझे सीख दी थी कि परिवार से बड़ा समाज होता है और समाज से बड़ा देश और देश से बड़ा संसार होता है मैं पूरे संसार की रक्षा करूंगा मां [संगीत] हनुमान हनुमान यह क्या किया तुमने काल चक्र तो काल का ग्रास है उसमें क्यों प्रवेश हो गए तुम मुझे दुख है तुम्हारे लिए य के स्थान पर अन्याय का साथ देने वाला विरोधी है मेरा मेरे कोप का भाजन बनना ही होता है जो भी अन्याय का साथ देगा व इस काल चक्र का सामना करेगा अन्याय का साथ देने वालों को समाना पड़ेगा इस काल चक्र में हनुमान की भाति ही सदा सर्वदा के लिए [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] इसकी आकर्षण शक्ति का विरोध मैं अपनी संपूर्ण शक्ति से करूंगा नहीं खींच सकेगा यह कालचक्र [संगीत] मुझे ये क्या संपूर्ण सृष्टि इस ओर आ रही है मुझे इस कालचक्र को अपनी देह का आकार बढ़ा के इस काल चक्र का मुह बंद करना हो तभी सृष्टि की रक्षा हो सकेगी हनुमान कैसे इस खुले हुए काल चक्र के मुख दवार को बंद कर पाएगा काल चक्र तुम कितनी भी शक्ति लगा लो किंतु मुझे नहीं दिका पाओगे हनुमान पुत्र मैं दुखी हूं तुम्हारी स्थिति से किंतु स्मन रहे पुत निरंतर प्रयास करने वालों की कभी पराजय नहीं होती हनुमान तुम अपनी दिव्य वरदानी शक्तियों का अनुचित प्रयोग कर रहे हो हनुमान तुमने इस पृथ्वी लोक को बचा ही [संगीत] लिया प्रतीत होता है भयावह स्थिति सामान्य हो रही है देखना हनुमान भी शीघ्र ही सब कुछ ठीक करके वापस लौट आएगा हनुमान प्रणाम कालदेव हनुमान अब उठ जाओ कालचक्र के मुख द्वार से कालदेव यदि मैं यहां से हट गया तो ये काल चक्र संपूर्ण सृष्टि को निगल लेगा यही प्रवृत्ति है कालचक्र की हनुमान इसे तुम नहीं रोक पाओगे क्षमा करें कालदेव मेरी मां ने मुझे सीख दी थी चाहे परिस्थिति कितनी भी विकट हो उसका दृढ़ता से सामना करना चाहिए मैं अपने प्रयास से पीछे नहीं हटूंगा हनुमान काल चक्र के मुख द्वार को बंद करना किसी के भी वश का कार्य नहीं है यह स्वतः बढ़ता है इसे बंद करने में मैं भी असमर्थ हूं मुझे क्षमा करना [संगीत] पुत्र य क्या यह काल चक्र तो मेरे ही शनि लोक को खींचने लगा है ये क्या यह काल चक्र तो शनि लोक को भी खींच रहा है किंतु मैं ऐसा नहीं होने दूंगा चाहे मुझे अपनी देह का आकार कितना भी बढ़ाना पड़े मुझे मेरे ग्रह की रक्षा करनी होगी रुक जाइए भता शनी शनि लोग के सामने मत जाइएगा भ्राता शनि आपका शनि लोक कालचक्र की आकर्षण परिधि में आ गया है यह काल चक्र की तीव्र आकर्षण शक्ति कभी भी हनुमान को भीतर खींच सकती है और स्वयं आपको भी ता कालदेव शनि हूं मैं सक्षम हूं स्वयं अपने ग्रह की रक्षा करने में आप चिंतित ना हो उसके लिए मुझे किसी हनुमान की आवश्यकता नहीं है मैं स्वयं अपने ग्रह को आपकी आकर्षण परप से अभी बाहर करता हूं यह काल चक्र तो नियंत्रित बढ़ता ही जा रहा है मुझे इसे रोकने के लिए कुछ और करना होगा हनुमान अभी भी समय है हट जाओ वहां से बचा लो स्वयं को अन्यथा य कालचक्र तुम्हे भी लील लेगा भता शनि आप भी हट [संगीत] जाइए हनुमान हट [संगीत] जाओ हनुमान [संगीत] हनुमान ता शनि हट जाइए आप भता शनि ना हनुमान ने मेरी बात मानी ना भ्राता शनिदेव ने अब भुगतना होगा इन दोनों को इसका दुष्परिणाम य यह क्या हो रहा है मेरी दृष्टि से बने यह काल कूप मुझे ही निकल रहे हैं मैं मैं स्वयं को संभाल नहीं पा रहा हूं ये काल चक्र तो बहुत ही शक्तिशाली है सबको अपने अंदर सता ही जा रहा है ना जाने क्या होने वाला है य यह काल चक्र तो आमा ही प्रल जैसी स्थिति बना रहा है यह क्या इसकी आकर्षण शक्ति तो बढ़ती हुई प्रतीत हो रही है नारायण नारायण शनिदेव देख लिया अपने अहंकार और क्रोध का परिणाम आप अपनी ही दृष्टि से निर्मित हुए जिस काल चक्र को देखकर प्रसन्न हो रहे थे कि वो सारे संसार को लीन लेगा उसने आपको भी लीन लिया है दूसरों का बुरा चाहने वालों का बुरा ही होता है जो औरों के लिए खड्डा खोदते हैं व स्वयं ही खड्डे में गिरते [संगीत] हैं काल चक्र की इस बढ़ती हुई भवता को तो अब मात्र कालदेव ही रोक सकते हैं हमें सृष्टि को असमय ही इस प्रकार नष्ट होने से बचाना चाहिए हनुमान और शनिदेव दोनों ही काल चक्र में समा गए हैं हमें श्र ही काल देव के पास जाकर विनीति करनी होगी हनुमान अब इस पूरी सृष्टि को काल चक्र में समाने से ना तो तुम रोक सकते हो और ना ही [संगीत] मैं
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