Wednesday, 7 January 2026

हनुमान ने श्री राम को अपने परिवार से कैसे मिलाया Nirbhay Mahabali Hanuman Episode 211 PenBhakti

[संगीत] हनुमान अब शीघ्र ही अयोध्या चलो प्रभु आप हनुमान के कंधे पर आरूढ़ हो जाइए मैं आपको शीघ्र ही अयोध्या पहुंचा दूंगा जय श्री राम [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] मेरे पुत्र कहां हो तुम राम भैया राम भैया क हो आप राम भैया क आप राम मेरे पुत्र राम भैया राम भैया कहां हो आप ना जाने कहां होंगे हमारे राम भैया राम भैया जहां भी होंगे सकुशल होंगे शत्रु गुना भैया सारथी आगे बढ़ो राम राम क्या तुम मुझे सुन पा रहे हो यह तो पिता श्री की पुकार है वह हमें ढूंढ रहे हैं हनुमान शीघ्र ही नीचे चलो जो आया प्रभु [संगीत] जी [संगीत] राम राम भैया राम [संगीत] भया प्रणाम महाराज राम भैया आप ठीक तो है [संगीत] राम [प्रशंसा] तुम ठीक तो हो जी पिता श्री अनुचित किया हनुमान ने इस कृति के लिए हनुमान को अवश्य दंड मिलना [संगीत] चाहिए राम भैया को हमसे दूर ले जाने का साहस भी कैसे कि तुमने हनुमान इसका निर्णय सभा में [संगीत] होगा आज राजसभा में न्याय होगा उस वानर का उसे तो भयानक दंड मिलना चाहिए एक वानर को उसकी पूंछ सबसे अधिक प्रिय होती जीजा श्री से कह के उसकी पूछ काटने का दंड दिलवा उंग उसे राज्यसभा में झवानर प्रणाम गुम प्रणाम गुरुदेव प्रणाम गुरुदेव कल्याण हो अवध राज की चिंता हर कर सकुशल आए हनुमत रघुवर राम को पाकर हर्षित है जन आनंद है रघुकुल नंदन हनुमत बनकर संकट मोचन बस गए राम लला के मन हर पल रखते राम का ध्यान जय रघुनंदन जय हनुमान ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय नंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान महाराज मुझे लगता है कि हनुमान के इस कृत्य का परिणाम और भी भयानक हो सकता था मार्ग में राजकुमार राम पर राक्षसों का आक्रमण हुआ वो तो ईश्वर की कृपा रही कि राजकुमार के प्राण बच गए अन्यथा अनर्थ हो जाता [संगीत] इसीलिए हनुमान को राजकुमार राम के अपहरण का दंड मिलना ही चाहिए किंतु हमें स्मरण रहना चाहिए कि हनुमान अभी एक अबोध बालक है [संगीत] जमा करे गुरुदेव परंतु अपराध का दंड तो बालकों को भी दिया जाता है जिससे उन्हें सीख मिल स और यदि राजकुमार राम को राक्षसों के आक्रमण से क्षति पहुंच तो भी क्या आप यही कहते हनुमान के साथ जो हो रहा है व अनुचित है हमारे राम के प्राण इसने संकट में डाल दिए हनुमान को दंड मिलना ही चाहिए इस कृत में हनुमान का उद्देश्य राम को किसी प्रकार की क्षति पहुंचाना नहीं था यदि राम को किसी प्रकार की क्षति पहुंचती तो अवश्य ही गंभीर अपराध सिद्ध होता क्योंकि राम राज्य के होने वाले युवराज है अतः इस प्रकरण के विषय में न्याय सभा निर्णय [संगीत] लेगी किंतु दंड का निर्धारण करते समय हमें य ध्यान में रखना होगा क्योंकि हनुमान को वैद्यराज ने हमारे संरक्षण में छोड़ा इस आशा से हनुमान को अपने पुत्रों की भाति ही रखेंगे वामदेव जी आप और यह सब अष्ट सचिव अयोध्या के न्याय व्यवस्था के कर्णधार हैं न्याय विशारद है आप सब मैं आपसे निवेदन करता हूं कि इस प्रकरण के विषय में आप अपने विचार प्रकट [संगीत] करें राजन अपराध यदि गंभीर हो तो अपराधी की आयु या उद्देश्य की अपेक्षा अपराध पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए मेरी दृष्टिकोण में हनुमान अपराधी [संगीत] मान्यवर हम वामदेव जी की बात से सहमत है किंतु किसी भी अपराध के पीछ पछे उसका उद्देश्य बहुत महत्त्वपूर्ण होता है हनुमान का उद्देश्य राजकुमार को हानि पहुंचाना नहीं था और इसका प्रमाण है राजकुमार की सकुशल वापसी मैं हनुमान को अपहरण का आरोपी नहीं मानता अपहरण करने वाला अपरत व्यक्ति को वापस लेकर नहीं आता मेरी दृष्टि में हनुमान आरोपी नहीं है मैं भी मान्यवर की बात का समर्थन करता हूं मैं यहां कुमार युद्ध जीत की बात को पुनः कहना चाहता हूं यदि राक्षसों के आक्रमण से राजकुमार को किसी भी तरह की क्षति पहुंचती तो क्या आप सबका विचार यही होता हनुमान के इस कृत्य को अपहरण नहीं कह सकते किंतु अपराध अवश्य हुआ है और अपराधी को दंड मिलना ही चाहिए हनुमान के साथ जो हो रहा है व अनुचित है सभी बालक इस प्रकार की भूल करते हैं जब माता-पिता उन पर अपने नियमों के बंधन थोपते हैं हां दद मैं भी आपकी बात से सहमत हूं किंतु प्रश्न राम के की सुरक्षा का है वो राज्य के होने वाले युवराज [संगीत] है पुत्र राम तुम इस विषय में कुछ कहना चाहते [संगीत] हो गुरुदेव आपकी आज्ञा हो तो आयुष्मान [संगीत] भवा [संगीत] राम [संगीत] राम पिता श्री हनुमान ने मेरा कुछ अहित नहीं किया है ना ही मेरे साथ बल प्रयोग किया है किंतु यह सत्य कि हनुमान इस राज्य के नियमों के विरोध गया है अ न्याय मंडल एवं आपके विधान के द्वारा य हनुमान के लिए दंड का निर्धारण किया जाना चाहिए किंतु मैं यह अवश्य कहना चाहूंगा कि संपूर्ण सत्य को जाने बिना किसी भी प्रकार की राय नहीं बनानी चाहिए जीजा श्रीफ हमारे भांजे राम का हृदय उधार परंतु इस सत्य को भी ध्यान में रखा जाए कि हनुमान ने माया से अपना आकार बढ़ाकर मंथरा और बाकी सभी बालकों को भी भयभीत कर दिया किंतु मामा श्री मैं तनिक भी भयभीत नहीं हुई थी हां हमें तो आनंद आ रहा था भय नहीं [संगीत] [संगीत] लगा महाराज यदि यह सत्य है तो हनुमान यहां इस राज्यसभा में अपना आकार बढ़ा कर दिखाए हनुमान तुम्हें अपनी शक्तियों का उचित प्रयोग करना सीखना होगा और इसके लिए सबसे पहले ध्यान रखना होगा कि अपनी शक्तियों का प्रयोग तभी करना जब सच में उनका प्रयोग करना आवश्यक हो क्या हुआ हनुमान कोई दुविधा है क्या [संगीत] महाराज मां ने मुझे एक सीख दी थी कि यह कारण अपनी शक्तियों का प्रदर्शन ना करूं यह अकारण नहीं है अनुमान यह न्याय सभा में उठाया गया एक प्रश्न कुमार युद्ध जीत में जिस आरोप पर चर्चा हो रही है उसी पर स्थित रहिए उसे किसी अन्य दिशा में मोड़ने का यत्न मत कीजिए जीजा श्री आप इस राज्य के राजा है आपको अपने न्याय से सबको सीख देनी चाहि ताकि ऐसा करने का साहस कोई पुन ना कर सके और य सबके लिए उदाहरण बन जाए महाराज मैं मानता हूं बिना किसी की अनुमति लिए प्रभु जी को यहां से ले जाना अनुचित था इस अपराध के लिए आप मुझे जो दंड देंगे मुझे स्वीकार [संगीत] [प्रशंसा] है हां स्वीकार कर लिया मूर्ख वानर ने अब तो इसे अवश्य दंड मिलेगा हनुमान नियम के अनुसार मैं तुम्हें वही दंड दूंगा जो यदि तुम्हारे स्थान पर मेरा पुत्र होता तो उसे भी [संगीत] देता नियम तो कहता है कि राजकुमार को इस प्रकार ले जाने का दंड बहुत कठोर होना चाहिए किंतु अपराध का उद्देश्य एवं हनुमान की आयु को ध्यान में रख मैं यह आदेश पारित करता हूं कि मेरे अगले आदेश तक हनुमान का महल में प्रवेश वर्जित होगा और हनुमान महल के बाहर अतिथि ग्रह में निवास करेगा [संगीत] [संगीत] महाराज मुझे आपका आदेश स्वीकार [संगीत] है यह तो कोई दंड नहीं हुआ इसे कठोर दंड मिलना चाहिए था चलो अब यह राम से तो दूर रहेगा अब मुझे ही कुछ करना [संगीत] होगा राजकुमारों यह लड्डू आप सबके [संगीत] लिए यह लीजिए राम भैया यह लड्डू आपके [संगीत] लिए तुम लो शत रुकना मेरा अभी मन नहीं [संगीत] है राम भैया क्या हो गया है [संगीत] आपको मैं समझ गया भैया हनुमान को दिए गए दंड के बारे में सोचकर दुखी हैं किंतु राम भैया कोई आपको हमसे दूर ले जाए हमें भी तो अच्छा नहीं लगेगा ना ठीक ही रहा जो हनुमान को दंड मिला अब वो महल में तो नहीं आ पाएगा लक्ष्मण मेरी उदासी देखकर हनुमान अपनी मां के पास लौट कर नहीं गया और मेरे लिए वो अपनी मां पर्यटन से दूर मेरे साथ यहीं [संगीत] रुकता सोचो कितना प्रेम करता होगा वो [संगीत] मुझसे किंतु डंड मिलने के कारण अब वो मुझसे दूर हो गया है क्या बीत रही होगी उसके हृदय पर प्रभु के प्रति मन में अनुराग दूर हुए कैसा ये भाग्य भक्ति का है ये कैसा फल हनुमत होते चिंत विकल भोले भक्त को कैसे भूले भक्त के चित्र नयन में झूले चिंतित हनुमत राम बिना राम व्यथित हनुमान बिना ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान आप सत्य कह रहे हैं राम भैया लक्ष्मण तुम्हारी बाद हनुमान में मुझसे प्रेम करता है इसीलिए मुझसे दूर होने का दुख तुम्हारी तरह हनुमान को भी हो रहा हो [संगीत] जो दुख स्वयं को पीड़ा देता है उस दुख की कामना किसी और के लिए नहीं करनी [संगीत] चाहिए सखा प्रभु जी को बिना किसी की अनुमति लिए इतनी दूर ले जाना अनुचित ही था ना किंतु जो दंड मिला हनुमान को वह तो बहुत ही बड़ा दंड है मेरे प्रभु जी मेरे [संगीत] आराध्य उनसे दूर कर दिया हनुमान को अयोध्या में अपने प्रभु से दूर नहीं अभी तो उनकी सेवा करने आया हूं किंतु इस न के पश्चात मैं अपने प्रभु से कैसे मिल पाऊंगा

No comments:

Post a Comment

ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...