[संगीत] [संगीत] वाली भैया अब तो आपको ज्ञात हो गया है ना कि मेरी शक्तियों में कितनी वृद्धि हुई है अब आप यह परीक्षा समाप्त कर दीजिए अन्यथा आप थक जाएंगे बिना इसकी शक्ति प्राप्त किए इस मरकटम बाली के लिए भी कठिन है अच्छा अब हनुमान की शक्तियों को जानना चाहते हैं तो इसमें इतना परिश्रम क्यों मैं अभी दिखा देता हूं तेरी शक्तियों का विवरण नहीं मुझे तेरी आधी शक्ति चाहिए मर्कट नारायण नारायण बाली केसरी नंदन हनुमान की आदि शक्ति पाना चाहता है परंतु वो भूल रहा है कि उसको प्राप्त वरदान के अनुसार यह तभी संभव है जब हनुमान शत्रु भाव लेकर वाली के समुख आए परंतु हनुमान तो उसके प्रति प्रेम से ओत प्रोत है परंतु बाली कदापि समझ नहीं पाएगा क्योंकि उसकी बुद्धि को घृणा और क्रोध ने कुंठित कर दिया है इसलिए बाली हनुमान पर वार करता रहेगा और हनुमान के हृदय में व्याप्त सरल प्रेम उनको बाली के वरदान से सुरक्षित रखेगा नारायण नारायण आपके तप पर जाने के पश्चात मुझे देवियों और देवताओं से अनेक वरदान प्राप्त हुए देवी अंजना के पास मारुती को ले जाने के पूर्व हम देवता उसे आशीर्वाद से युक्त करना चाहते हैं अनेक प्रकार के वरदान मुझ में समाहित है मैं अभी आपको दिखाता [संगीत] हूं देखे वाली भैया मैं अपनी इच्छा अनुसार अपनी देह का आकार बदल सकता हूं अभी दिखाता हूं मैं ब्रह्मा तुम्हें वरदान देता हूं तुम इच्छाधारी होग जब जैसा रूप धारण करना चाहोगे तुम कर [संगीत] सकोगे देखा वाली भैया अब यह देखिए हम अरे कहां चला गया [संगीत] मर्कट माली भैया आप मुझे वहां कहां ढूंढ रहे हैं मैं आपके कान के कुंडल के समीप स्थित हूं इतना घटा लिया है मैंने अपनी देह का आकार हनुमान हट जाओ अरे अरे वाली भैया आप क्या कर रहे [संगीत] [संगीत] हैं वाली भैया आपको जत है मैं अपनी श्वास के प्रवाह से बड़े बड़े पर्वत हिला सकता हूं अभी दिखाता [संगीत] हूं क्षमा कीजिएगा वाली भैया मैं तो बस आपको दिखा रहा था कि अच्छा मैं एक और शक्ति का प्रदर्शन करता हूं मैं प्रज्वलित अनी का रूप ले सकता हूं मैं अग्निदेव तुम्हें वरदान देता हूं कि कितनी भी भीषण अग्नि हो उसकी ज्वाला तुम्हें किसी भी प्रकार से हानि नहीं पहुंचाएगी [संगीत] यह मर्कट तो अग्नि का रूप भी धारण कर सकता है सुग्रीव वाली को सचेत कर उसे कपत से सनमार्ग पर लाने में उसकी और उसके समूचे राज्य की भलाई है माता अंजना मुझे तो यह भी भय है कि बाली भैया स्वयं यहां ना आ जाए सुमेरू को अधीन कर का अर्थ है सुमेरू से युद्ध सुमेरू से युद्ध करने का अर्थ है हनुमान और वाली भैया का [संगीत] युद्ध जो वाली भैया के लिए घातक से धो सकता है हां पुत्र सुग्रीव इस बात का भय तो मुझे भी है मैंने मित्र ऋक्ष राज को बाली की सुरक्षा का वचन दिया है वो यहां आ गया तो उसकी रक्षा करना कठिन हो जाएगा किसी प्रकार वाली को सुमेरू और हनुमान से दूर रखना [संगीत] होगा अब यह देखेगा वाली भैया [संगीत] यह मर्कट कहीं इस पर्वत को उठाकर मेरे ऊपर तो नहीं फेंकने वाला मुझे वाली भैया को समझाने का प्रयत्न करना चाहिए परंतु उससे पूर्व मुझे उन्हें हनुमान के समुक आने से रोकना और भी आवश्यक है कोक मेरे लौटने तक तुम यहीं रुकना और ऐसा कोई कार्य मत करना जिससे किष्किंधा और सुमेरू की शांति भंग हो जी अभी कुछ मैं कहूंगा तो महाराज केसरी जी मेरा वध कर देंगे परंतु उचित समय पर मैं महाराज बाली को अवश्य सूचित करूंगा राजकुमार सुग्रीव अपने महाराज के प्रति नहीं महाराज केसरी जी और उनके पुत्र हनुमान के प्रति अधिक निष्ठावान [संगीत] है वाली भैया आपने देखा मैं इन चट्टानों को कितनी भी दूर फेंक सकता हूं परंतु यह तो अभी भी छोटी है इनसे भी बड़ी बड़ी चट्टान उठाकर दिखा सकता हूं परंतु यहां तो कोई भी बड़ी चट्टान नहीं है अन्यथा आपको उठा कर दिखाता यह मर्कट अपनी शक्ति दिखाकर मुझे भयभीत करने का प्रयत्न कर रहा है परंतु इसे ज्ञात नहीं है कि मेरे वरदान से इसकी आधी शक्ति मुझे प्राप्त हो जाएगी और मैं इससे कहीं अधिक बलवान हो जाऊंगा परंतु मुझे यह ज्ञात करना है कि अभी तक ऐसा क्यों नहीं [संगीत] हुआ कितने भोले और निष्कपट है हनुमान बाली के घृणित प्रयोजन का उन्हें लेश मात्र भी अनुमान नहीं है परंतु माधव एक बात समझ में नहीं आई कि फली हनुमान के प्रेम से परिपूर्ण निर्मल पवित्र मन को क्यों नहीं देख पा रहे हैं प्रिय जिस व्यक्ति के हृदय में घृणा और प्रतिशोध के भाव वास करते हैं उसकी दृष्टि कुछ भी अच्छा नहीं देख पाती वह अन्य लोगों में भी अपने प्रति छाया ही देखती है ऐसे व्यक्ति स्वयं के प्रति सुविचार रखने वालों को भी अपमानित और तिरस्कृत करते हैं यदि वाली हनुमान के प्रति शत्रु भाव त्याग दे तो हनुमान उसको आधि क्या अपनी संपूर्ण शक्ति समर्पित कर [प्रशंसा] दे परंतु वाली यह बात समझ नहीं पा रहा है सत्य है घृणा से वशीभूत होकर व्यक्ति धर्म अधर्म अपना पराया और यहां तक कि अपने हित अहित के विषय में भी कुछ समझ नहीं पाता जिसका परिणाम सदैव उस व्यक्ति का विनाश ही होता [संगीत] है [संगीत] [संगीत] मैं अली भैया प्रतीत होता है आप मेरी और परीक्षा लेना चाहते हैं यह देखना चाहते हैं कि मेरी भुजाओं में कितनी शक्ति है यह जानना चाहते हैं ना [संगीत] आप क्यों वाली भैया अब तो आप जान गए ना कि मेरी भुजाओं की शक्ति में कितनी वृद्धि हुई है आनंद आ रहा है ना वाली भैया वाली भैया संभल के वाली भैया आप तो आप संतुष्ट है ना कि आपकी अनुपस्थिति में हनुमान ने समय व्यर्थ नहीं किया अब तो मेरी परीक्षा पूर्ण हुई ना तो हनुमान को अपने गले से तो लगा [संगीत] [संगीत] लीजिए कले लगाइए ना वाली भैया वाली भैया और कितनी परीक्षा लेंगे मेरी सा सा सा सा सा सा सा सा सा सा सा रे सा सा सा [संगीत] वाली भैया हनुमान को तो ज्ञात है कि आप परम शक्तिशाली है यदि हम दोनों की शक्ति मिल जाए तो हम सारे असुरों का विनाश करके हरि भक्तों की सेवा करेंगे मेरी मित्रता स्वीकार कर लीजिए हम दोनों मिलकर उस वानर बालक को परास्त कर सकते हैं हरि भक्तो के पल के साथ हम दोनों सर्व शक्तिशाली बन सकते हैं प्रतीत होता है कि आप मेरी युद्ध कौशल की परीक्षा ले रहे हैं है ना वाली [संगीत] भैया [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] वाली भैया को क्या हो गया है मेरा प्रणाम भी स्वीकार नहीं किया मुझे अपने गले से नहीं लगाया बस निरंतर भाती भाती की परीक्षा ही लिए चले जा रहे हैं क्यों कर रहे है वो ऐसा व्यवहार वाली भैया अरे वाली भैया नीचे उता रही मुझे वाली भैया वाली भैया य आप क्या कर रहे हैं वाली [संगीत] भैया [संगीत] आ [प्रशंसा] इस मर्कट को तो शीला हों के नीचे होना चाहिए था यह यहां कैसे आ [संगीत] गया कायरो के भाती छुप नहीं सामना करो मुझ महानतम ली [संगीत] का मेरी परीक्षा लेते लेते कहां चले गए वाली भैया वाली [संगीत] भैया [संगीत] हनुमान भाली भैया किसका पीछा कर रहे हैं हनुमान [संगीत] हनुमान कहां हो यह तो बड़ी तीव्र गति से मेरे पीछे आ रहे इन्ह यहां पहुंचकर मुझे पकड़ने में अधिक समय नहीं लगेगा मुझे इन्ह भ्रमित करने के लिए कोई और उपाय सोचना होगा न यदि साहस है तो सामने आओ मेरे वीरों की भाती युद्ध करो मुझसे बहुत गर्व है ना तुम्हें अपनी शक्तियों पर तो आओ मुझ महानतम वाली पर अपनी शक्तियों का प्रयोग करो कायरों की भाती छुप नहीं मेरे सामने आकर युद्ध करो मुझसे रुको रुक जाओ कहां चले गए दोनों अभी तो यहीं [संगीत] [संगीत] थे यह गुफा तो बड़ी घुमावदार है इसमें तो कोई भी खो सकता है य इसमें वाली भया लीया थोड़ी देर के लिए भी घूम जाए तो मुझे हनुमान गुण के समो गाने से रोकने का अवसर मिल जाएगा हनुमान हनुमान बाहर [संगीत] निकलो हनुमान हनुमान छुप कर [संगीत] बैठे अवश्य वे दोनों इसी गुफा के भीतर गए होंगे हनुमान अरे सुग्रीव भैया अभी यहां है कहीं आप दोनों मिलकर हनुमान से क्रीड़ा तो नहीं कर रहे हनुमान कहां छुप कर बैठे हो नहीं हनुमान यह कोई क्रीड़ा नहीं है अब तो यह गंभीर बात है पहले हमें बाली ब की दृष्टि से बचकर कहीं छपना होगा फिर मैं तुम्हें सब कुछ गंभीरता से बताऊंगा आ जाओ क्या हुआ सुग्री भैया आप मुझे वाली भैया से क्यों छुपा रहे हैं उन्हें भी आप बुला लीजिए ना हनुमान वाली भैया में बहुत ही परिवर्तन आ चुका है हमें उनसे छुप आवश्यक है हनुमान वाली भैया पुकार रहे हैं उस कुफा के भीतर अवश्य वो किसी संकट में होंगे नहीं नहीं हनुमान तुम उनके पास नहीं जा सकते वाली भैया संकट में नहीं है बल्कि वाली भैया हमारे लिए संकट है आप क्या कह रहे हैं सुग्रीव भैया मेरा विश्वास करो हनुमान जब से वाली भैया तप पूर्ण करके लौटे हैं उनके स्वभाव में परिवर्तन आ गया है मुझे इस घुमावदार गुफा में भटका कर यह मत सोचो कि तुमने बहुत चतुराई का काम किया है कभी ना कभी तो तुम्हे मेरे सामने आना ही होगा त अभी मेरे सामने मैं तुम्हें वाली भैया के बारे में सब कुछ बताऊंगा परंतु यहां नहीं सुमेरू चलकर वहां तुम्हारी आवश्यकता है क्या सुमेरू में मेरी आवश्यकता है वहां सब सकुशल तो है ना इतना अधिक में बताने के लिए समय नहीं है हनुमान बस इतना समझ लो कि तुम्हें वाली भैया से कदा भी नहीं मिलना है और अति शीघ्र सुमेरू पहुंचना है परमान मैं तुम्हारा प्रिय मित्र हूं विश्वास करो मेरा हनुमान और शीघ्र सुमेर के लिए प्रस्थान करो हनुमान हनुमान हनुमान इसके पूर्व वाली भैया यहां आए तुम शीघ्र ही सुमेरू पहुंच जाओ हनुमान जी सुगी भैया पाली भैया में ऐसा क्या परिवर्तन आ गया है और सुग्रीव भैया मुझे बारबार शीघ्र सुमेरू पहुंचने के लिए क्यों कह रहे थे कुछ तो गंभीर बात अवश्य ही है
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti
[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...
-
[संगीत] महाभारत प्रता श्री आपने सु शर्मा को ऐसा वचन क्यों दिया मेरे वचन पालन करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता अनुज तुम क्या समझते हो कि स...
-
महाभारत इच्छा है तुम्हारी बस इसने तो एक ही रट लगा रखी है केशव इसे तो आपको गुरु बनाना है वस इस देश में गुरुजनों की क्या कमी है तुम हमें ह...
-
[संगीत] किंतु मेरे परिवार पर से किस पर संकट आने वाला है ऋषिवर बताइए ना ऋषिवर संकट किस पर होगा यह सोचने के स्थान पर तुम्हें यह सोचना चाहि...
No comments:
Post a Comment