[संगीत] यह क्या हो रहा है यह कैसी विकराल अग्नि प्रकट हो रही है हनुमान की देह [संगीत] से [संगीत] मेरा दिव्यास भी टूट गया ये विराट रूप हनुमान का कहीं जलाकर पूरे प्रेत लोग को भस्म ना कर दे [संगीत] [संगीत] धन्यवाद सभी देवों को जिन्होंने हनुमान को ऐसी दिव्य शक्तियां दी अब मुझे विश्वास हो गया है कि हनुमान पर यहां कोई विपत्ति नहीं आ [संगीत] सकती किंतु पृथ्वी लोक में अंजना कैसे उन तीनों राक्षसों का सामना कर पाएगी मुझे अबला नारी समझने की भूल मत करना सावित्री ने भी यमराज को विवश कर दिया था उसके पति के प्राण वापस करने के [संगीत] लिए मैं भी उसी भूमि की पुत्री [संगीत] हूं अपने पति की देह की रक्षा करने के लिए मैं कुछ भी कर सकती [संगीत] हूं भले ही मेरे प्राण चले जाए कि तू हनुमान के लौटने से पूर्व मेरे स्वामी की देह को कोई स्पर्श नहीं करेगा मेरा हनुमान अपने पिता के प्राण वापस लेकर [संगीत] लौटेगा अबना ना आप सब बचेंगे और ना ही आपका ये प्रेत लोग नहीं नहीं हनुमान ऐसा मत करो नहीं रुक जाओ जिस प्रकार से अग्नि हनुमान के शरीर से प्रचलित हो रही है इससे तो संपूर्ण प्रेत लोक ही बसम हो जाएगा प्रेतराज कुछ कीजिए बचाइए प्रेत लोग [संगीत] को नहीं हनुमान रुक जाइए हनुमान अब आपकी शरण में है [संगीत] हनुमान शरण गही की रक्षा कीजिए हनुमान हम आपको अपना ईश्वर मानते हैं आपके इस प्रती श्वर रूप को हमारा शत शत नमन है प्रते शवर हनुमान को हम सभी प्रेतों का नमन मैं आपको आपके पिता से मिला दूंगा अपने इस दृष्ट के लिए मैं आपसे क्षमा मांगता हूं हमें क्षमा कर दीजिए हम सब क्षमा प्र स्वर्ग द्वार दया द्वार मोक्ष द्वार पावरा वा दस भुज धारी भय हनुमंता प्रेत स्वर अति विकट प्रचंड सकल प्रेत बजरंगी शरणा करें प्रार्थना कह करर चरणा कहीं किसी का हित ना होवे मारुति में विश्वास जो हो हो प्रेतराज दे वचन बता हनुमत भगत ना होगी बाधा गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय बा हनुमान श्वर हनुमान की जय श्वर हनुमान की जय हनुमान ने तो प्रेतो पर विजय पा ही ली उधर अंजना भी विपत्ति के समक्ष अड़क खड़ी हुई है अंजना मत करो यह मूर्खता फेंक दो यह गधा तुम जो यह करने जा रही हो वो उचित नहीं है और तुम जो करने जा रहे हो वो उचित है क्या [संगीत] वास्तविक कुंजर और सुग्रीव यहां पिता श्री [संगीत] मेरा विश्वास सत्य निकला असुर है यह तुम मेरा रूप बदलकर मेरी पुत्री से छल करने आए [संगीत] हो अंजना मैं तुम्ह नहीं [संगीत] छोडूंगा यह तो असुर है हमारा छत ग्रूफ लेकर आए थे प्रेतराज जी मुझे अपने पिता श्री से शीघ्र मिलवा [संगीत] दीजिए [संगीत] [प्रशंसा] पिता [संगीत] श्री पिता श्री क्या हुआ पिताश्री [संगीत] पिताश्री ये क्या हुआ पिताश्री आपको मैं आपको स्पर्श भी नहीं कर पा रहा आप आत्मा के रूप में है पिताश्री चलिए पिताश्री मैं आपको लेने आया हूं मां आपकी प्रतीक्षा में व्याकुल हो रही होंगी हनुमान प्रेत लोक के कठोर नियमों को तोड़ना मेरे वश में भी नहीं है मैं या कोई अन्य प्रेत भले ही आपकी बाधा ना बने फिर भी आप अपने पिता की आत्मा को यहां से नहीं ले जा सकते नहीं मेरे पिता श्री मेरे साथ ही चलेंगे है ना पिता श्री अब यहां कोई बाधा नहीं चलिए आप मेरे साथ आप इस प्रकार क्यों देख रहे हैं मुझे कौन हो तुम पिता श्री मैं आपका पुत्र हनुमान हूं कौन हनुमान मेरा कोई पुत्र नहीं है ना ही मैं कि का पिता हू पिताश्री आप अपने हनुमान को कैसे भूल सकते हैं मां आपके विचो में रो रो कर अपने प्राण त्याग दगी पिताश्री आपका हनुमान भी आपके बिना जीवित नहीं रह पाएगा आप चलिए मेरे साथ मैं आपको लेने आया हूं चलिए ना पिता जीी आत्मा का कोई पुत्र नहीं होता कोई पत्नी नहीं होती मैं मात्र एक आत्मा हूं प्रेत लोक की एक आत्मा आत्मा का किसी से कोई संबंध नहीं [संगीत] होता [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] आ देर खुल गया किंतु उद्देश अवश्य पूर्ण होगा अंजना मैं तुम्ह नहीं छोडूंगा तुम्हारी इच्छा पूर्ण नहीं होगी भाग गए दुष्ट अच्छा हुआ हम समय रहते यहां पहुंच गए पुत्री अंजना पिता [संगीत] श्री पुत्री अंजना तुम ठीक तो हो ना स्वामी एक क्षण के लिए भी विलंब हो जाता तो न जाने यह राक्षस क्या अनत कर बैठते पिता श्री हनुमान काल लोक गया है मेरे स्वामी के प्राण वापस लाने के लिए और मुझे पूर्ण विश्वास है कि वोह अपने पिता को जीवन दान अवश्य [संगीत] दिलाएगा नहीं ऐसा मत कए पिता श्री आप सुमेरू के राजा है मैं आपका पुत्र हनुमान हूं आपका केसरी नंदन अनुमान पहचानिए मुझे पिताश्री आप उसे देख तो सकते हैं किंतु यदि आप उसके निकट गए या वो आपके निकट आया तो स्मरण रखिए आप उससे कोई भी बात नहीं करेंगे यदि आपने उससे बात की तो उसे अभिशप्त होने से कोई नहीं बचा [संगीत] पाएगा पुत्र तुम्हारी भलाई इसी में है कि मैं तुम्हें ना पहचानू प्रेतराज के कथा अनुसार यदि मैंने तुमसे पिता की भाति कोई बात की तो तुम अभिशप्त हो जाओगे हनुमान मैं तुमहे संकट में नहीं डाल सकता उचित यही है कि मैं तुम्हारे साथ अपरिचित की भाति व्यवहार करू जिससे तुम मेरा मह छोड़ दो धिक्कार है तुम राक्षसों की वीरता पर जो उन दु वानरों से परास्त होकर आए हो हम तो सफल होने ही वाले थे काका श्री यदि अंत समय में कुंजर वृक्ष राज आदि ना आ [संगीत] जाते हम तो उन्हें अपनी माया से लने गए थे युद्ध के लिए हम सज्जित होकर नहीं गए थे तो अब हम युद्ध के लिए सज्जित होकर जाएंगे ल से नहीं तो पल से ही सही किंतु उस केसरी का अंतिम संस्कार अवश्य होगा उसने मेरे भाई का हाथ उखाड़ था सस कसर रे भाई और तुम्हारे पिता की मृत्यु के लिए केसरी और उसका पुत्र हनुमान दोनों ही उत्तरदाई है प्रतिशोध लेंगे हम प्रतिशोध केसरी की देह को फस्त कर देंगे हम हनुमान कुछ नहीं कर पाएगा कुछ नहीं कल का सूर्योदय है केसरी के परिवार के जीवन के सूर्यास्त का संदेश लेकर आएगा वास्कर सोर सेना सज्जित करो कल प्रात काल ही हम आक्रमण करेंगे उन पर पिता श्री देखिए हनुमान के अश्रु को इनमें मेरी मां की पीड़ा भी दिखाई देगी बस एक बार मुझे पुत्र कहक पुकार पिता श्री एक बार तराज जी क्या हुआ मेरे पिताश्री को कुछ कहिए ना मुझे क्यों नहीं पहचान पा रहे हैं आप कुछ कीजिए ना प्रेतराज जी रुक जाइए पिताश्री आप हनुमान को इस प्रकार छोड़कर नहीं जा सकते कौन हनुमान किसका पिताश्री [संगीत] रुक जाइए पिताश्री हम ऐसा क्यों कर रहे हैं मुझे छोड़कर कैसे जा सकते हैं पिताश्री मैं विवश पुत्र [संगीत] [प्रशंसा] प्रेतराज जी हनुमान के प्रति पिता श्री निष्ठुर नहीं हो [संगीत] सकते बताइए ना क्या व्यवस्था है इनकी इनकी विवशता यह है कि प्रेत लोक में आकर सभी को अपने संबंधों को बुलाना पड़ता है अन्यथा उनके संबंधी संकट में पड़ सकते हैं शीघ्र लौट जाओ यहां से पुत्र अन्यथा तुम्हारे साथ भी अनर्थ हो सकता है हमारे परिवार की भलाई के लिए तुम्हें वापस जाना ही होगा हनुमान रेना पिता श्री रुक जाइए पिता [संगीत] श्री प्रेतराज जी प्रता श्री वापस क्यों जा रहे हैं इन्ह प्रेत लोक से मुक्त कर दीजिए हनुमान मेरी ओर से आपके पिता मुक्त हो चुके हैं आपके पिता की मुक्ति कालदेव की इच्छा पर निर्भर करती [संगीत] है प्रेतराज ऐसा कैसे कर सकते [संगीत] कालदेव को मेरे पिताश्री को मुक्त करना ही [संगीत] होगा मैं पुनः जाकर उन्हें [संगीत] मनाऊंगा
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti
[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...
-
[संगीत] महाभारत प्रता श्री आपने सु शर्मा को ऐसा वचन क्यों दिया मेरे वचन पालन करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता अनुज तुम क्या समझते हो कि स...
-
महाभारत इच्छा है तुम्हारी बस इसने तो एक ही रट लगा रखी है केशव इसे तो आपको गुरु बनाना है वस इस देश में गुरुजनों की क्या कमी है तुम हमें ह...
-
[संगीत] किंतु मेरे परिवार पर से किस पर संकट आने वाला है ऋषिवर बताइए ना ऋषिवर संकट किस पर होगा यह सोचने के स्थान पर तुम्हें यह सोचना चाहि...
No comments:
Post a Comment