Wednesday, 7 January 2026

हनुमान ने त्रिशिरा के प्रहार से अपने मित्र को बचाया Sankat Mochan Mahabali Hanuman 292 Pen Bhakti

[संगीत] चता तक आ बचाओ मुझे बचाओ हनुमान भैया [संगीत] हनुमान अच्छा वानर बालक इसे मुझसे बचाने का प्रयास कर रहे हो रा को चुनौती दे रहे हो लो बरे इस वार से बचो इसकी ध्वनि तरंग से उत्पन्न हुआ धूल का यह बवंडर तो सीधे इन अंडों की ओर आ रहा है हनुमान को इन अंडों की रक्षा सुनिश्चित करनी होगी फदर वाला बरी पानी तरंगों का वार कभी व्यर्थ नहीं जाता तुम यत्र तत्र कूद कर अपना बचाव करो इस बीच में इस गरुड़ बालक को खाकर अपना भोजन प्रारंभ करता हूं बचाओ भैया हनुमान हनुमान तुम्ह मित्र जिंतक को कोई भी क्षति पहुंचाने नहीं देगा ने तो अपना परिचय दे दिया है अब हनुमान का भी थोड़ा परिचय ले लो आओ मेरे [संगीत] पास सखा धन्यवाद हनुमान भैया सखा मित्र तांत को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दो हां यदि संध्याकाल तक इन अंडो का उपचार नहीं हुआ तो विष का प्रभाव इन अंडों के भीतर चला जाएगा मुझसे मेरा भोजन छीनने का तो साहस किया तुमने वानर [संगीत] बालक षट [संगीत] पक्षियों त्रिश पर वार करने का तो साहस किया तुमने अब तुम सब भूख से व्याकुल त्रिशला को गपित करने का परिणाम भुगतने के लिए तैयार हो जाओ बचे महाराज इससे उलझ कर तो हमारा समय नष्ट हो रहा है मुझे शीघ्र ही कुछ उपाय करके इसे रोकना होगा कोई उपाय नहीं है मेरे पास धिक्कार है मुझे इतना लाचार हूं मैं कि मुझे अपने प्रिय मित्र हनुमान और उसके परिवार के विरुद्ध युद्ध घोषित करने के लिए विवश होना पड़ रहा है राजकुमार सुग्रीव अब हम सुमेरू की सीमा में प्रवेश कर रहे हैं सुमेरू पर आक्रमण करने के लिए आगे कैसे बढूं मैं काका केसरी और प्रिय हनुमान की अनुपस्थिति में अकेली अंजना माता का सामना कैसे जिन्होंने सदैव मुझे अपने पुत्र के समान स्नेह दिया है राजकुमार सुग्रीव महाराज वाली का स्पष्ट आदेश है सूर्यास्त के पूर्व हमें अपनी सेना के साथ सुमेरू पहुंचना है मार्ग में कहीं भी रुकने का समय नहीं है हम महाराज बाली की आज्ञा का उल्लंघन नहीं कर सकते हमें और भी तीव्र गति से आगे बढ़ना होगा एक दिवस का समय देता हूं तुम्हें मेरे आदेश का पालन हो जाना चाहिए अन्यथा मैं तुम्हें भी मृत्यु दे सकता हूं यदि आप उड़ने की उचित प्रशिक्षण पाले तो आप इसी दिव्य पंख के लघु अंश से पूर्ण रूप से उड़ भी सकते हैं खग विद्या के आचार वायु मार्गी ऋषि [संगीत] कुंभज रा ने कहा था इन पर्वतों के मध्य पहुंचकर मुझे चतुरंग पर्वत दिखाई दे जाएगा किंतु उसे पहचानने का कोई विशेष चिन्ह नहीं बताया उसने अब कैसे ज्ञात करूं कि इन पर्वतों में से चतुरंग पर्वत कौन सा [संगीत] [संगीत] है इतना अद्भुत दृश्य ऐसा प्रतीत होता है जैसे पर्वत भूमि से पृथक मेघों के समान आकाश में चलायमान है अवश्य यह असाधारण पर्वत ही चतुरंग पर्वत है जिस पर खग विद्या के आचार्य ऋषि कुंभज का वास है सूर्यास्त होने वाला है मुझे शीघ्रता से उस पर्वत के शिखर तक पहुंचना होगा स्मरण रहे बाले आपको सूर्यस्त होने से पूर्व ही वहां पहुंचना होगा अन्यथा वह दिव्य पंख के इस लघु अंश की दिव्यता समाप्त हो जाएगी मुझे शीघ्र ही विषैली करणी पुष्प को ढूंढना होगा विष के प्रभाव से यह स्याह होते जा रहे हैं यदि और विलंब हो गया तो इन्हें बचाना कठिन होगा [संगीत] सावधान हनुमान भैया यदि यह तरंग हनुमान भैया के शरीर से टकरा गई तो उनका भारी अनिष्ट हो सकता है नहीं हे ईश्वर हनुमान भैया की रक्षा कीजिए हनुमान भैया [संगीत] संभालिए अत्यंत विचित्र बात है इतनी घातक ध्वनि तरंग हनुमान भैया के शरीर से टकरा गई और वो हंस रहे हैं त्रिश की ध्वनि तरंग का ऐसा प्रभाव आज तक किसी पर नहीं हुआ तुम हस लो जितना हंसता है वानर बालक मेरे घातक ध्वनि वार अभी शेष है जिससे मैं शीघ्र ही तुम्हें धराशाई कर दूंगा बंद करो मुझे गुदगुदा हट हो रही है तुम त्रिशला के अन्य ध्वनि तरंगों से तो बच गए वानर बालक पर अब मेरी सबसे भयानक बाहा ध्वनि तरंग के वार से तुम अपना बचाव नहीं कर पाओगे यह तो पुन ध्वनि तरंग मेरी ओर भेज रहा है हनुमान तुम यहां हस परस करने नहीं आए हो सूर्यास्त होने वाला है त्रिशला के इस खेल में और समय व्यर्थ करना उचित नहीं है हनुमान को शीघ्र ही किसी युक्ति से इसे मुक्ति पानी होगी [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] आ आ हनुमान मैया ने अपने शरीर को वज्र स्वरूप देकर त्रिशला की ध्वनि तरंग को लौटा दिया नहीं ये तो गोर अन्याय है मेरी ध्वनि तरंग का वार मुझ पर हो रहा [संगीत] है मुझे धरती में विलीन होकर अपना बचाव करना [संगीत] होगा अब तुम सब सुरक्षित हो [संगीत] [संगीत] हनुमान प्रतीत होता है त्रिशला का अंत हो गया तुम्हारी चतुराई की जितनी सराहना की जाए उतनी कम है कितनी सरलता से तुमने इस मायावी राक्षस का अंत कर दिया महाराज चटा हमें तशिला से तो मुक्ति मिल गई किंतु अभी हमारा एक कार्य शेष [संगीत] है सूर्यदेव अपने विश्राम की र बढ़ चुके हैं सूर्यास्त भी होने वाला है हमें शीघ्र ही वि शैल करने पुष्प को ढूंढना होगा हा [संगीत] [संगीत] हनुमान परंतु हम कहां ढूंढे उस पुष्प को हनुमान भैया आप सब मेरे साथ [संगीत] चलिए यह भूमि में अकस्मात कंपन कैसी [संगीत] [संगीत] ओ हो तो यही है खग विद्या के आचार्य कुंभज ऋषि [प्रशंसा] प्रणाम [संगीत] ऋषिवर कल्याण होवत मैं किस किंदा का महाराज बाली [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] गरुड़ दिव्य पंख के साथ आपके समक्ष आपसे उड़ने की विधि सीखने के लिए प्रस्तुत हूं परंतु तुम दिव्य पंख नहीं अभी तो मात्र उसका लघु अंश लेकर आए हो इसकी सहायता से तुम उड़ने में समर्थ हो पाओगे या नहीं यह तो मुझे भी ज्ञात नहीं परंतु तुम दिव्य पंख नहीं अभी तो मात्र उसका लघु अंश लेकर आए हो इसकी सहायता से तुम उड़ने में समर्थ हो पाओगे या नहीं यह तो मुझे भी ज्ञात नहीं ऋषिवर पक्षियों की भाती उड़ान भरकर आकाश में स्वच्छंद विचरण करने की इच्छा है महानतम वाली की और अपने इस इच्छा की पूर्ति के लिए महानतम वाली कोई भी यत्न करने के लिए तत्पर है आप मुझसे जो भी कराएंगे मैं करूंगा आपको मुंह मांगी गुरु दक्षिणा भी दूंगा परंतु आप मुझे उड़ने में सक्षम बना दीजिए वत्स बाली जो गरुड़ का दिव्य पंख लेकर चतुरंग पर्वत पर मेरे समीप पहुंचेगा उसे उड़ने की विधि सिखाने का प्रयास करना मेरा कर्तव्य है परंतु समय कम है मुझे दिव्य गरुड़ पंख के इस अंश को सूर्यास्त से पूर्व अभिमंत्रित करना होगा अन्यथा इसकी दिव्यता और शक्ति दोनों ही समाप्त हो जाएंगे उस मर्कट को परास्त करने के लिए मुझे किसी भी प्रकार से ड़ने की शक्ति प्राप्त करनी है एक बार मुझे उड़ान भरने का रहस्य ज्ञात हो जाए फिर देखता हूं व मर्कट हनुमान मुझसे अपनी और अपने राज्य की रक्षा कैसे करता है आप लोग चिंता मत कीजिए बस मेरे पीछे आइए ठीक है पीछे आ गए हम तो हिल ही नहीं पा रहे हैं इस राक्षस से अब हम अपना बचाव कैसे करें आप बच कर दिखाओ तुम सब मैंने तुम्ह अपने पाश में जकड़ कर जड़ कर दिया है पक्षियों अब तुम कितना भी प्रयत्न करो तुम मेरी इच्छा के बिना हिल नहीं पाओगे मुझे इस शिशिरा से करोड़ों को मुक्त कराना होगा अन्यथा वो इन्ह अपना आहार बना लेगा तुम्हारे जीवन में अभी कुछ क्षण शेष है इस वानर बालक को मृत्यु के घाट उतारने के बाद मैं शांति पूर्वक तुम्हें अपना भोजन बनाऊंगा यह लो वानर बालक

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