Tuesday, 6 January 2026

हनुमान का मित्र भूषण नाग किस समस्या में फंस गया Sankat Mochan Mahabali Hanuman 281 Pen Bhakti

[संगीत] भूषण चिता अंतक मित्रों भूषण तो यहां नहीं है भूषण हां चलो उस ओ जाकर देखते हैं चलो मित्र [संगीत] भूषण सुमेरू के महाराज केसरी जी पधार रहे हैं सुग्रीव तुम अपने स्थान पर बैठे रहो [संगीत] आइए आइए काका केसरी महाराज वाली की राज सभा में आपका स्वागत है अपने से बड़ों का स्वागत इस प्रकार नहीं किया जाता पुत्र वाली तुम्हारे विवेक पर किसी की कुदृष्टि पड़ गई है तुम अनेक के मार्ग पर अग्रेसर क्यों हुए हो अब और भाषण नहीं बहुत सुन चुका महानतम वाली अपने वृद्ध पिता के भाषण अब और किसी के ज्ञान वचन नहीं सुनने मुझे आप अपने यह ज्ञान वचन अपने पुत्र हनुमान को बाटिए महाराज केसरी जी और वैसे भी आपकी आयु अब ढल चुकी है यह पिता श्री और आप जैसे वृद्धों का नहीं मुझ जैसे नव युवकों का समय है भैया शांत सुगरी महाराज की बात काटने का दुस्साहस मत करो मैत भूषण कहां हो तुम चलो इसे उधर ले चलो मित भूषण भूषण अंधकार में कुछ स्पष्ट नहीं दिखाई दे रहा हनुमान भैया मुझे पुनः कुछ सुनाई [प्रशंसा] दिया हनुमान भैया य आकृति हमारे पीछे कौन है वहा महाराज चटाई हो आप प्रणाम महाराज प्रणाम पिता श्री कल्याण हो हनुमान जिता अंतक मैं तुम्हारा कुशल शेम जानने के लिए विश्राम गृह गया था परंतु तुम दोनों तो यहां हो मैं जानता हूं बाल्यावस्था में विश्राम का कोई महत्व नहीं होता पर फिर भी वह दिनचर्या का सबसे अवश्यक भाग है परंतु तुम्हारा मित्र नाग बालक भूषण कहां है महाराज वह वटवृक्ष से फल लाने गया था परंतु अभी तक लौटा नहीं हम उसे ही ढूंढने निकले हैं चलो अति शीघ्र चलो गुफा समीप है यद हम उस पहुच तो सुरक्षित हो जाए कहां भागते हो भूषण किसी की छाया है छिप जाते हैं चलो करो नाग करुण राज में हनुमान नाग बालक भूषण हमारा अतिथि है तुम चिंता मत करो उसे हमारे राज्य में कोई हानि नहीं होगी महाराज वो स्थान से परिचित है यहां इतनी घनी झाड़िया है कहीं वह मार्ग ना भूल गया हो प्रणाम महाराज हनुमान तां तक मैंने कुछ समय पूर्व ही उस नाग बाला को वहां उस पट वृक्ष के पास देखा था प्रणाम सेनापति चित्र केतु जी वटवृक्ष के समीप वहां तो हम देख चुके हैं किंतु भूषण हमें नहीं मिला सेनापति चित्र केतु कितना सुखद आश्चर्य है कि आप भी यहां आए हैं मुझे तो लगा था कि आप हनुमान से घृणा करते हैं महाराज मेरा हनुमान से कोई व्यक्तिगत द्वेष नहीं है सेनापति के धर्म का निर्वाह करते हुए मुझे राज्य की सुरक्षा के लिए जो उचित लगा मैंने स्पष्ट कहा अब यह हमारा अतिथि है और अतिथि सत्कार करना भी मेरा धर्म है परंतु चित्रकेतु जी हनुमान अपने मित्र भूषण के लिए चिंतित है महाराज मैं दूसरे सैनिकों को उसे उस ओर ढूंढने का आदेश देता हूं और मैं स्वयं यहां ढूंढता हूं कहां चला गया होगा भूषण महाराज मुझे अनुमति दे प्रणाम सैनिकों चारों दिशाओं में फैल जाओ भूषण यहीं कहीं होगा हमें शीघ्र उसे ढूंढ निकालना है जी [संगीत] महाराज प रुक जाओ भूषण [संगीत] उधर [संगीत] सेनापति चित्रकेतु जी मेरी रक्षा कीजिए कुछ नाग बलपूर्वक मुझे अपने साथ ले जाने की चेष्टा कर रहे हैं नाग य उनका इतना साहस तुम चिंता मत करो अब तुम सुरक्षित हो दिखाओ कहां है वो नाग वो उधर [संगीत] दुष्ट एक बालक को नियंत्रण में नहीं रख सकते हो सेनापति चित्रकेतु जी क्या कह रहे हैं पकड़ लो यदि इसे किसी ने देख लिया होता तो सर्वनाश हो जाता क्षमा कीजिए यह अपेक्षा से अधिक बल का प्रयोग कर रहा था इसलिए हम इसे संभाल नहीं पाए अब व्यर्थ समय मत गबाओ इसे लेकर शीघ्र यहां से जाओ सैनिक इसे चारों ओर ढूंढ रहे हैं यदि इसे किसी ने यहां देख लिया तो तुम्हारे साथ-साथ मुझे भी मृत्यु दंड मिलेगा मेघा सुर जी इसे पाकर अवश्य प्रसन्न होंगे उनसे कहना कि चित्रकेतु अपने पुरस्कार की प्रतीक्षा कर रहा है चित्रकेतु जी तो मेगा सूर से मिले हुए हैं महान योद्धा चित्र केतु कब तक उस जटायु के अनुचर बन कर रहोगे तुम्हारे भाग्य में राजा बनना लिखा है फस्टर विकराल हूं मैं मेरी योजना पूर्ण करने में मेरी सहायता करो मैं तुम्हें करुण राज के राज सिंहासन पर स्थित कर दूंगा मुझे करना क्या होगा चित्रकेतु मैं बताता हूं कि तुम्हें करना क्या है नाग बालक यदि तुम अपने पिता पंचन को जीवित चाहते हो तो शांति पूर्वक इन नागों के साथ चले जाओ यह क्या कह रहे हैं कहां है मेरे पिता श्री शांति से हमारे साथ चलोगे हम तुम्हें तुम्हारे पिता से मिलवा देंगे कहां हो तुम मित्र हम तुम्हे ढूंढने आए हैं भ वो वानर हनुमान इधर ही आ रहा है इसे लेकर शीघ्र यहां से जाओ जी कहां चला गया भूषण मित्र जाओ जल्दी कहां हो तुम जी सेनापति [संगीत] जी मित्र भूषन यदि हनुमान मुझे सुरंग का मुख बंद करते देख लेता तो अनर्थ हो जाता मित्र भूषण भूषण सेनापति चित्रकेतु जी आपको भूषण के बारे में कुछ ज्ञात हुआ तुम व्यर्थ चिंता कर रहे हो हनुमान तुम नीड में विश्राम करो मैं उसे तुम्हारे पास अवश्य लेकर आऊंगा ना जाने किस संकट में होगा भूषण जब तक वो मिल नहीं जाता तब तक हम विश्राम नहीं [संगीत] करेंगे मित्र भूषण जो यहां है ही नहीं उसको तुम कैसे ढूंढ पाओगे हनुमान मित्र भूषण कहां हो तुम मित्र भूषण कहां हो तुम हम तुम्ह ढूंढने आए हैं मित्र भूषण तुम कहां हो भैया हनुमान मुझे प्रतीत हो रहा है कि मेरे मित्र का कहीं कुछ अनिष्ट हुआ है चि [संगीत] दंतकथा से ढूंढो भूषण भूषण भूषण महाराज भूषण के बारे में कुछ पता चला हनुमान भूषण नाग है उड़ नहीं सकता वह अवश्य गरुड़ राज्य की सीमा में ही होगा वह इससे बाहर नहीं जा सकता उसे यहां मैं ही लेकर आया था व अवश्य किसी समस्या में होगा हनुमान मेरी तीक्षण दृष्टि से कुछ नहीं छुप सकता मुझे 100 योजन की द दूरी तक देखने का वरदान प्राप्त है मैं अभी आकाश में उड़ता हूं और पता लगाता हूं तुम्हारा मित्र कहां है आपकी यह शक्ति तो अद्भुत एवं करोड़ों के लिए बहुत ही लाभकारी है जटायू जी उन्ह आने में इतना विलंब क्यों हो रहा है देख सर हमारी चिंता बढ़ रही है हम यहां अधिक समय तक नहीं रुक सकते वो जटाय अपनी दृष्टि से 100 योजन की दूरी तक स्पष्ट देख सकता है यदि उसने उठते हुए हमें देख लिया तो हमारी योजना सफल नहीं हो पाए पृथ्वी के गर्भ में जिस स्थान पर हम स्थित है कालने में वहां किसी की दृष्टि नहीं पहुंच सकती इस प्रकार हम नाग उन अत्याचारी गरुड़ से अपना बचाव करते हैं कहां चला गया होगा मेरा मित्र यहां तो कोई चिन्ह भी नहीं है ऐसा अंतरध्यान हो गया कि जैसे निकल गई [संगीत] हो बिस्तर विकराल हूं मैं यह कुटिल नाग और सेनापति चित्रकेतु जी मिले हुए हैं यह तो बहुत बड़ा षड्यंत्र है पिताजी कहां है [संगीत] [संगीत] हनुमान मैंने दूर दूर तक देखा परंतु भूषण मुझे कहीं दिखाई नहीं दिया यदि रात्रि के अंधकार में मैं उसे जाने नहीं देता तो वो इस वक्त मेरे साथ सुरक्षित होता शुब हृदय अंजनी कुमारा सोचत मन दुख दंद अपारा कर्म करे को काहे ऐसा होए अमंगल असग जैसा मंगलमय हनुमंत बिचारे कुशल रहे वह सखा सदार जग की चिंता करें बजरंगी गमती न शवन सुमती संगी ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान कालनेमी अब अपनी चिंता त्याग दो देखो कौन खड़ा है हमारे समक्ष पंच भन का पुत्र [संगीत] पोषण [संगीत] बालक पंचपड़ी तो योजना के अनुसार मित्र कालनेमी ने किया था पिता श्री का अपहरण जटायु जी ने नहीं इन्होंने किया था मैंने उसे अपना बंदी बना रखा है क्या तुम उसे पुनः पाना चाहते हो जी जी मेरे पिताश्री से आपका क्या दश है मुक्त कर दीजिए उन्हें अवश्य अवश्य कर दूंगा मुक्त [संगीत] परंतु नहीं नहीं असंभव मित्र हनुमान के साथ विश्वास का नहीं नहीं मैं ऐसा नहीं कर सकता कैसे पुत्र हो तुम अपने पिता की रक्षा करने के लिए उस हनुमान से विश्वास घात नहीं कर सकते जो स्वयं काल लोक जाकर अपने पिता के प्राण लौटा लाया था यदि तुमने मेरा कहा नहीं माना तो कल अपने पिता का मृत देह देखोगे विषर विकल हूं मैं नहीं नहीं मित्र हनुमान ने मेरे प्राणों की रक्षा की है मैं उनके साथ इतना बड़ा छल कैसे कर सकता हूं आप कोई भी आज्ञा दे मैं वो संपूर्ण करने के लिए प्रस्तुत हूं आश्चर्य है मुझे अपने पिता से अधिक उस वानर के प्रति तुम्हारी निष्ठा देख कर मेरे प्रस्ताव को ठुकरा कर तुमने अपने पिता की मृत्यु को निश्चित कर दिया है कालनेमी जाओ और इसके प्रिय पिता श्री को काल की भेट चढ़ा दो नहीं नहीं नहीं और स्मरण रहे उसके पूर्व उसे अवश्य बताना कि उसके पुत्र ने उसकी सहायता करने से मना कर दिया था नहीं ऐसा मत कीजिए मेरे पिता को मुक्त कर दीजिए उन्हें मत मारिए उन्हें छोड़ [संगीत] दीजिए उठो बालक उठो बुद्धिमता से काम लो बालक मेरे आदेशों का पालन करो और अपने पिता को मुक्त करवा लो [संगीत] जाओ मिस्टर विकराल हूं मैं शत्रुओं का काल हूं मैं कालनेमी यदि यह विधान ना होता कि दिव्य पंख को उसके स्थान से विस्थापित केवल एक कपोत बालक कर सकता है तो मैं मेघसर पंच फन और उसके पुत्र की जीवन लीला को बहुत पहले समाप्त कर चुका होता भूतपूर्व राजा और युवराज कभी भी मेरे सामने चुनौती बनकर खड़े हो सकते [संगीत] हैं मेरे हाथ में दिव्य पंख आते ही कालने में मैं यह कार्य भी पूर्ण कर दूंगा छोड़ दो मुझे छोड़ दो क्यों पकड़ कर लाए हो मुझे दुष्टों छोड़ दो मुझे छोड़ दो मैं गरुड़ के खग विद्या का मंत्र रक्षक आचार्य हूं किसी और जाति के लिए दिव्य पंख को अभिमंत्रित नहीं कर सकता छोड़ दो मुझे यह अन्याय है [संगीत] सेनापति चित्रकेतु इन नागों से मेरी रक्षा करो सेनापति नहीं पुरोहित जी भाभी महाराज चित्र केतु कहिए अब आप इन नागों के साथ जाइए और इनके आदेशों का पालन करिए धिक्कार है तुम्हें राजद्रोही गरुड़ कुल के साथ छल किया है तुमने इसका परिणाम तुम्हें भी भुगतना होगा भूषण कहां हो तु भूषण कहां हो तु [संगीत] भूषण

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

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