[संगीत] मुझे तुम पर गर्भ है पुत्र हनुमान केसरी जी जो पुत्र अपने माता पिता के दायित्व को उनके वचन को पूर्ण करने के लिए प्राण प्रण से प्रयास करें उस पुत्र पर सारा संसार गर्व करता [संगीत] है किंतु मुझे वचन पूर्ण करने में बहुत विलंब हो गया मां मां और अब आप अधिक विलंब मत कीजिए मैं अभी पूजा का धन लाता हूं आप पूजा आरंभ कीजिए अपने व्रत को पूर्ण [संगीत] कीजिए [संगीत] [प्रशंसा] चंद्र पूजन आरंभ करो पुत्री [संगीत] अंजना ओम चंद चंद्राय नमः ओम सोमाय [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] नमः ओम सुधाकरा नमः ओम शश धराय नमः ओम चंग निशि नाथाय नमः [संगीत] मां आप अब तो कुछ खा लीजिए [संगीत] [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] हनुमान तुम्हारे हाथ से भोजन करके तुम्हारी मां के में अनुपम शक्ति आ गई [संगीत] है हां हनुमान तुम्हें देखते ही तुम्हारी मां की चेतना लौट आई [संगीत] थी हनुमान यह तो बताओ कि शनिदेव इतने अधिक क्रोधित थे चंद्रदेव के साथ तो उन्होंने चंद्रदेव को क्षमा कैसे कर दिया मां मैं आपको एक एक बात बताऊंगा किंतु पहले आप यह बताइए आप और क्या सेवन करना चाहेंगी पुत्र हनुमान मेरी भूख प्यास सुख आनंद सब तुमसे ही है पुत्र तुम नेत्रों के समक्ष हो तो मेरा मन यूं ही तृप्त हो जाता [संगीत] है मां [संगीत] माता का सच्चा आनंद पुत्र के स्पर्श और दर्शन में है पुत्र का सुख माता के आंचल में माता और संतान के इस प्रगाढ़ संबंध में ही ईश्वर के दर्शन होते [संगीत] हैं [संगीत] [संगीत] मेरा [संगीत] [हंसी] समय आ चुका है हनुमान तुम अब कुछ नहीं कर पाओगे ये विशाल का है छाया क्या है ये ये तो कोई असुरी माया प्रतीत हो रही है मैं जो हूं तुम्हें शीघ्र ही ज्ञात हो जाएगा ऐसा ही ह्र होगा अब तुम्हारे परिजनों के साथ इसने तो वृक्ष को भी भस्म कर दिया किसकिस को रक्षित करोगे रुक जाओ वही कौन हो तुम क्यों आए हो यहां यह क्या यह तो मुख्य द्वार की ओर बढ़ रही है नहीं तुम उसे छू भी नहीं पाओगे यह क्या इस मायावी शक्ति ने मुझे स्तंभित कर दिया है मैं अपने सान से हिल भी नहीं पा रहा हूं नहीं नहीं नहीं नहीं नहीं [संगीत] नहीं यह स्वप्न यह तो बहुत ही भयानक स्वप्न था हनुमान [संगीत] मा मैं स्तंभित हो गया था स्वप्न में मेरे सामने ही नहीं नहीं क्या हुआ मेरे लाल कोई दु स्वपन देखा था क्या इसीलिए इतने विचलित हो स्वप्न तो मिथ्या है भ्रम है पुत्र और फिर जब ड इच्छा शक्ति हो ना तो मनुष्य परिस्थितियां ही नहीं अपना भविष्य भी बदल देता [संगीत] है हनुमान क्या हुआ मुझे हनुमान का स्वर सुनाई दिया स्वप्न देखा था इसीलिए तनिक विचलित हो उठा [संगीत] है पुत्र हनुमान यह महादेव के चरणों में चढ़ाए हुए पुष्प है इन पुष्पों को अपने शीष के निकट रखकर सोओगे तो तुम्हें दुस्वप्न नहीं [संगीत] आएंगे ये तो अभी भी विचलित दिखाई दे रहा [संगीत] है एक काम करते तुम मेरे अंख में सिर रखकर सो जाओ फिर तुम्हें सुख की निद्रा भी आ जाएगी और पूरे स्वप्न भी नहीं आएंगे [संगीत] नहीं पुत्र हनुमान के साथ मैं सोऊंगा मेरे भय से तुम्हें दु स्वप्न कभी नहीं आएंगे संतान के लिए मां के आंचल से बड़ा कोई अन्य सुख या सुरक्षा नहीं होती स्वामी मैं सोंगी हनुमान के साथ नहीं नहीं पिता का संभल ही पुत्र की सुरक्षा होती है मैं सोंगा पुत्र हनुमान के साथ मैंने कहा ना मैं रहूंगी हनुमान के पास नहीं नहीं नहीं नहीं केसरी के साथ ही सोएंगे केसरी पुत्र मैंने जो कहा वही होगा अच्छा मैंने जो कहा वही होगा मैं सोंगी हनुमान के साथ मा और पिताश्री दोनों आमने सामने देखें क्या होता है चाहे कोई कुछ भी कहे अंजनी पुत्र अंजना माता के साथ ही सोएगा नहीं हमारे साथ सोएगा हमारा पुत्र चाहे कोई कुछ भी कहे मैंने कहा ना अंजनी पुत्र अंजना माता के साथ ही सोएगा मैंने जो कह दिया वही होगा बस मैं जो कह रही हूं वही होगा मेरे पास सोएगा हनुमान मैं कह रहा हूं ना मैं सो उसके साथ मेरे पास मैं सोऊंगा उसके साथ मेरे पास मेरे साथ मेरे साथ नहीं मां ना ही पिता श्री आज केसरी नंदन और अंजने पुत्र हनुमान अपनी मां और पिता श्री दोनों के साथ [संगीत] सोएगा जिसके शीश पर अपने माता-पिता का वरद हस्त हो उसे ना तो कोई बुरे स्वप्न और ना ही कोई असुरी माया सता सकती है मां एक और मां सोएगी और दूसरी और पिता श्री और उनके मध्य उनका नन्हा सा लाडला सा हनुमान [हंसी] [संगीत] सोएगा पुत्र हनुमान ऐसे दुस्वप्न से विचलित होकर शीघ्रता से कार्य नहीं लेना चाहिए स्वयं को हानि पहुंचती है परिस्थिति कितनी भी कठिन हो मन को शांत रखकर उसका सामना करना चाहिए अच्छा पिताश्री बहुत दिन हो गए आपकी गदा का सामना नहीं किया गदा युद्ध अभ्यास हां हां पुत्र अवश्य कल प्रातः हम गदा अभ्यास करेंगे किंतु उसके लिए अभी आपको निंद्रा लेनी होगी हां हनुमान सो जाओ [संगीत] मां माता-पिता हो साथ में तो संतान को भय कैसा हनुमान क्या हुआ पुत्र सो जाओ जब मेरी मां मुझे लोरी सुनाएगी तभी मैं सोऊंगा सो जा केसरी नंदन मेरे आनंद घन मेरे आमोद बन [संगीत] करता नचन यह कहता कंकन माता करती वंदन सोजा केसर [संगीत] नंदन हो शैया बना संत सोते है नारायण तू भी चल सो जा हो केसर नंदन मेरे जीवन धन सोज केसर [संगीत] नंदन सोचा केसरी नंदन मेरे आनंद घन मेरे आमोद [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] वन लगता है मुझे उठने में विल हो [संगीत] गया कदा पिताश्री ने कहा था कि प्रातः काल में हम गदा अभ्यास [प्रशंसा] [संगीत] करेंगे बहुत आनंद आएगा मां आप कहां जा रहे हो पुत्र दो हाथ धोलो पहले कुछ खा लो फिर जाना नहीं मां पहले मैं पिताश्री के साथ गदा अभ्यास करूंगा फिर कुछ करूं वो हाथ तो ो नहीं मां बाद में धो [संगीत] लूंगा मंत्री जी किसी स्वप्न दृष्टा को बुला लीजिए हनुमान ने कल रात को कोई दु स्वपन देखा था जी महाराज पिता [संगीत] श्री पिताश्री तुम रणांगण में चलो मैं अभी आता हूं जी पिताश्री [संगीत] पिताश्री अभी तक नहीं आए प्रणाम युवराज आज जा प्रणा गन में आज युद्ध अभ्यास में बहुत आनंद आने वाला है और आपको ज्ञात है आज मैं पिताश्री से कोई नया रण कौशल [संगीत] सीखू और आप सबको ज्ञात है मेरे पिताश्री को कितनी सारी रण कौशल की नीतिया आती है उन्हीं से तो मैंने सीखकर उन सारे असुरों को परास्त किया [संगीत] था पिताश्री आप वहां खड़े हैं मैं कब से आपकी प्रतीक्षा कर रहा हूं [संगीत] आइए प्रणाम महाराज प्रणाम महाराज कहो पुत्र किस तरह से अभ्यास करना चाहोगे पिताश्री आप अपने गधा [संगीत] लीजिए अच्छा पिताश्री आज आप मेरी गदा लीजिए और अपनी गदा से अभ्यास करने दीजिए मुझे हां पुत्र अवश्य जैसा तुम [संगीत] कहो अब आनंद आएगा पिताश्री अब आरंभ करें हम हम मैं तो कब से सजग खड़ा हूं पुत्र [संगीत] हनुमान दम [संगीत] लगाओ पिताश्री क्या हुआ पिताश्री क्या हुआ कुछ भी नहीं हुआ पुत्र तुम अपने अभ्यास पर ध्यान लगाओ जी पिताश्री और यह मेरा वार संभालो ये लीजिए [संगीत] क्या हुआ कुछ भी नहीं हुआ पुत्र नहीं आप दीजिए [संगीत] ना पिताश्री आपके पैरों में कुछ हुआ तो नहीं कुछ भी नहीं हुआ है पुत्र मेरी गदा लाओ नहीं पिताश्री आप चलिए वहां हनुमान मैंने कहा मुझे कुछ भी नहीं हुआ है पिताश्री मैं कह रहा हूं चलिए विराज वहां हनुमान पिताश्री चलिए ना [संगीत] आप पिता श्री अपने पैर दिखाइए हनुमान कुछ नहीं है ठीक है पुत्र नहीं पिताश्री दिखाइए [संगीत] ये क्या पिताश्री आपके पांव में इतने सारे छाले पड़ गए आपको बहुत पीड़ा हो रही होगी [संगीत] ना हनुमान मां का व्रत तो पूर्ण करवा ही चुका होगा अब तक उसे मेरे समक्ष आ जाना चाहिए था किंतु वो अब तक नहीं आया दंड का भागी है हनुमान नियम है तो यम [संगीत] है
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