महाराज विनायक ने आपका विश्वास पा लिया भक्त नगरी के राजा है आप आपके अंदर भक्ति भाव है प्रभुत्व का ढूढ करके आपके अंदर विश्वास जगा दिया उन्होंने ताकि समय आने पर आपका संपूर्ण राजपाट आपसे छीन सके वह तो हमसे कुछ नहीं मांगते वह तो बस हमारे भक्ति के भूखे हैं सेवा तो मैं करना चाहता हूं महाराज आप 5 परोस करर उनका स्वागत करना चाहते हैं और वो आपके संपूर्ण राज का भोग ही कर लेना चाहते हैं आप स्वयं सोचिए ना महाराज नार और देवांतक से युद्ध वो करेंगे विजय वो पाएंगे तो प्रजा के मन में विश्वास का भाव किसके लिए उत्पन्न होगा आपके लिए या उनके लिए आप कुछ भी कर ले वो काशी पर अपना अधिकार जमा लेंगे आप कुछ भी ना कर सकेंगे जो मैंने कहा वो सत किंतु उस पर विश्वास अविश्वास करना आपके ऊपर [संगीत] है भैया भाभी मेरा विश्वास कीजिए कदापि आपको पछताना नहीं होगा पछताएंगे महाराज आप बहुत पछताएंगे अब आप स्वयं निर्णय लीजिए कि उसको यहां से विदा करके आप अपना सर्वस्व बचाना चाहते हैं या उसे यहां पर रखकर आप अपना सर्वस्व गवाना चाहते हैं आप अपना सर्वस्व गवाना चाहते हैं आप अपना सर्वस्व गवाना चा भैया मेरा जो कुछ भी है वो सब प्रभु का है मैं तो अपना सब कुछ खोक भी एक बार उनकी सेवा का सुख पाना चाहता [संगीत] हूं मुझे आज उन्हे भोजन परोसने के लिए कुछ अन्न दे दीजिए उसके लिए उसके लिए कुछ भी ले [संगीत] लीजिए उचित है मैं अन्न कोष से एक अनाज लेने दूंगी उसी से अपने प्रभु के लिए जो बनता है वो भोजन बना लो किंतु याद रखना यदि तुम्हारे प्रभु नहीं आए ना तो तुम दोनों यह घर सदा के लिए छोड़ दोगे छोड़ दोगे छोड़ दे [संगीत] चौक क्यों गए तुम्हें तो पूरा विश्वास है ना अपने प्रभु [संगीत] पर तो फिर शंका किस बात की है विश्वास है भी और रहेगा भी भाभी मुझे स्वीकार है मैं वचन देता हूं प्रभु नहीं आए तो यह घर मैं सदा के लिए छोड़कर चला जाऊंगा तो यह घर मैं सदा के लिए छोड़कर चला जाऊंगा तोय घर मैं सदा के लिए छोड़कर चला [संगीत] जाऊंगा यह लो दे और इससे जो चाहे अपने प्रभु के लिए बना लो किंतु अपना वचन स्मरण रखना यदि तुम्हारे प्रभु नहीं आए ना तो तुम और तुम्हारी ये निठली पत्नी मुझे यहां नहीं दिखने [संगीत] चाहि [संगीत] वो यहां पर ना रहे तो ही उचित होगा आपको उसे यहां से जाने के लिए कहना होगा आपकी सुरक्षा उसी में है [संगीत] [प्रशंसा] महाराज तो क्या य स विनायक का यंत्र था कि वो ऐसा क्यों करेंगे और यदि यह सत्य है तो विनायक को यहां से लौटने को कैसे खाऊ स्वामी बस इतना सा चावल इससे भला क्या पकाऊ मैं प्रभु के लिए खीर के लिए दूध और गुड़ तो है ही नहीं केवल गुड़ भी होता तो मैं मीठा भात बना देती प्रभु के लिए किंतु केवल चावल से क्या बनाऊ मैं प्रभु के लिए वही बनाओ जो प्रभु को रुचकर लगता है माड़ भात चावल ही मिले हैं तो इसका अर्थ है प्रभु को माड़ भात खाने की इच्छा हुई वह कुछ और खाना चाहते तो हमें कुछ और मिल [संगीत] जाता इसलिए तुम चिंता मत करो माड़ भाती पका [संगीत] दो उचित है स्वामी [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] आ [संगीत] मेरे विश्वास को जीतकर मुझसे घात तो नहीं करना चाहते विनायक नहीं नहीं मुझे सतर्क रहना [संगीत] चाहिए स्वामी प्रभु के लिए माड़ भात तैयार हो गया है अब तो मात्र उनकी प्रतीक्षा करनी होगी वह आएंगे तो भोजन प्रारंभ [संगीत] होगा विनायक को 5 भोग का भोजन कराकर उनका धन्यवाद कर मैं उन्हें विदा कर [संगीत] दूंगा प्रभु प्रभु शीघ्र [संगीत] आएंगे क्यों क्या हुआ कहां रह गए तुम्हारे प्रभु तुम्हारे प्रभु अभी तक भला आए क्यों नहीं राजा को अपने निर्णय पर अडिग रहना चाहिए कहीं ऐसा तो नहीं आपको विनायक को लौटाने का साहस नहीं हो रहा है साहस तो है ना उनके ना आने के परिणाम भुगतने का यह घर हमेशा के लिए छोड़ने का आपने उसे लौटाने का साहस नहीं किया ना महाराज तो आपको अपना राज पाठ छोड़ने का साहस करना होगा तो आपको अपना राज पाठ छोड़ने का साहस करना होगा आपको अपना राजपाट छोड़ने का साहस करना होगा होगा वही जो प्रभु को स्वीकार होगा किंतु भक्ति भाव से भरा मेरा मन यह जानता है व अवश्य आएंगे उन्होंने बार-बार मुझे स्वयं पर विश्वास रखने को कहा था किंतु यदि इसके पीछे मेरा राज्य छीने का षडयंत्र था उसे मैं कदापि पूर्ण नहीं होने [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] दूंगा यह कैसी भूल हुई मुझसे भजन कर प्रभु का नाम लूंगा तभी तो प्रभु आएंगे [संगीत] प्रभु शीलाल चढयो को लाल बरा सु गौरी हर को साही को महिमा क जाए पर जय देव जय देवव देव जय जय श्रीराज विद्या सुखदाता न्य तुम्हारो दर्शन मेरा ममता जय देव जय देव जय देव जय देवव सिद्धि दासी संकट हो विन विनाश मंगल मरता अधिकारी सूरज प्रकाश ऐसी छवि दे थ मस्त दे शरी जय देव जय देव जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता अन कुमारो दर्शन तेरा मन रमता जय देव जय देव आप कुछ भी कर ले व काशी पर अपना अधिकार जमा लेंगे आप अपना सर्वस्व बचाना चाहते हैं या उसे यहां पर रखकर आप अपना सर्वस्व गवाना चाहते हैं निर्भय निशंक होकर कहूंगा विनायक जी से लटने के [संगीत] लिए मल करता स्वामी श्री मंगल मूर्ति जन जन पूजे होती कामनाती वि हरण सुखदायक देव गणराया पाच बल पाया जो चरणों में आया जय देव जय देव कदंत गज आनन लंबोदर देवा सद्धि सिद्धि प्रमेश्वर जगत करे सेवा मोदक प्रिय विघ्न हरण भूस की सवारी गणनायक की जड़ गड़ करते जय कारी जय देव जय देव [संगीत] रा य नहीं तो [संगीत] क को रो प्रभु तो नहीं कहीं नत भजन करते करते इसके प्राण ना चले जाए गतका जय गणराजा मा [संगीत] देवा [संगीत] प्रहरी विनायक जी कहां है वह तो बाहर गए हैं महाराज उन्होंने बस इतना बताया कि वह किसी परिचित से मिलने जा रहे हैं परिचित यहां काशी में यहां उनका कौन परिचित हो सकता है [संगीत] सब देव हमारे [संगीत] गणराजा स्वामी ओ गजानना प्रभु मेरे प्रभु आ गए आ ग प्रभु आ गए आ गए [संगीत] ओय नम प्रभु [संगीत] य नम जयव जयव जयव [संगीत] मैं कल्पना तो नहीं कर रहा हूं तो नहीं देख रहा में तुम्हारा मेरे प्रति प्रेम सत्य है तुम्हारा प्रेम भरा आमंत्रण सत्य है और मेरा यहां होना भी सत्य है तो फिर इतना प्रेम भरा आमंत्रण भला मैं कैसे स्वीकार ना करता मैं धन्य हो गया प्रभु आपने मेरी पुकार सुन ली मैंने मैंने कहा था ना मेरे प्रभु अंतर्यामी है वो मन के बात सुन लेते हैं मेरे प्रभु आ गए प्रभु प्रभु मैं धन्य हो गया [संगीत] प्रभु जिसके भी मन में बहे भक्ति की [संगीत] धारा प्रभु उसके सपनों को देते [संगीत] आकारा [संगीत] शुक्ल शर्मा भी प्रसाद भक्ति का पाए प्रकट हुए प्रभु दर्श देने को आए जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा माता जाती पार्वती पिता महादेवा प्रिय प्रभु आए हैं उन्हें भोजन नहीं कराओ गी [संगीत] किंतु वो भोजन तो जो भी हम भक्ति भाव से प्रस्तुत करेंगे प्रभु उस भोजन का भोग लगाएंगे चिंता संकोच सब त्याग दो प्रिय मैंने कहा था ना वही भोजन तैयार हुआ है जो प्रभु को खाने का मन था जी स्वामी मैं अभी लेकर आती हूं प्रभु आपके लिए माण भात बनाया है अभी अभी तैयार हुआ है आपको अवश्य आनंद [संगीत] आएगा [संगीत] [संगीत] आ हमने राज भवन में इनके लिए 5 भोग का भोज तैयार किया और यह यहां इस दरिद्र के घर में माण भात खा रहे हैं प्रेम से परोसे माण भात में जो आनंद है वह किसी राज भवन के 5 भोग में भी नहीं यहां आने के पहले हमें कोई सूचना नहीं दी इन्होंने और अब ये हमारा अतिथ का हमारे भोजन का अपमान भी कर रहे हैं क्षमा कीजिए प्रभु हम भोजन के साथ मिष्ठान नहीं बना सके इसमें कैसी चिंता अब तो शीघ्र माता के हाथों के बने अनेकों लड्डू खाने का अवसर मिलने ही वाला है मुझे करना क्या है बस काशी आने का उद्देश्य संपन्न कर माता के पास ही तो लौटना है यह किस उद्देश्य की चर्चा कर रहे हैं क्या है इनके मन में कहीं ज्योतिष जी का कहा सत्य तो नहीं आप कुछ भी कर ले वो काशी पर अपना अधिकार जमा लेंगे आपको क्या लगता है आपको भ्रम है ना कि व आपकी राज्य की रक्षा के लिए यहां पर आए हैं नहीं महाराज बिल्कुल भी नहीं व आपका संपूर्ण राज्य हड़पने के लिए आए हैं यदि ऐसा है तो मैं इनका विशेष सत्कार क्यों करू खाने दो यही साधारण [संगीत] भोजन प्रभु मैं जानता था आप भक्ति भाव के भूखे हैं ना कि राजसी छपन भोग के मैंने अत्यंत साधारण भोजन परोसा पर आपने उसे भी प्रेम से स्वीकार किया प्रभु आपका यह भक्त धन्य हुआ प्रभु धन्य [संगीत] हुआ [प्रशंसा] क्या हुआ आप मेरे भोजन पात्र को इस प्रकार क्यों देख रहे हैं क्षमा कीजिए प्रभु आपको भोग चढ़ाने के बाद अमृत रूपी प्रसाद प्राप्त करने का जो अभ्यास है तो फिर यह लीजिए मेरे हाथों से ही प्रसाद ग्रहण कर [प्रशंसा] [संगीत] लीजिए [संगीत] प्रभु यह माल भात तैयार करने वाली मेरी पत्नी इसे भी प्रसाद मिलना [संगीत] चाहिए [संगीत] प्रभु यह मेरा भतीजा है इसी ने आपके आगमन की सूचना दी थी इसलिए इसे भी प्रसाद का आशीर्वाद देने की कृपा [संगीत] कीजिए हमने इसको इतनी खरी खोटी सुनाई तो हमें तो प्रसाद से वंचित ही रहना होगा भैया भाभी आप कहां जा रहे हैं प्रभु यह मेरे भैया भाभी है मेरे माता-पिता समान यह चावल इन्होंने ही दिया था तो इनको भी प्रसाद देने की कृपा [संगीत] कीजिए [संगीत] हमें क्षमा कर देना भाई हमसे बहुत बड़ी भूल हो गई हम आपकी भक्ति की शक्ति को नहीं समझ पाए निरर्थक समझते रहे उसे क्षमा कर दीजिए देव जी भाभी आप क्षमा क्यों मांग रही है आपने चावल दिया तभी तो प्रभु के लिए भोजन बन पाया आज मैं समझ गया विश्वास से बढ़कर कुछ नहीं सच्चा विश्वास हो तभी भगवान मिलते हैं [संगीत] हां मेरा कार्य संपन्न हुआ अब जो करना है वो त्रिलोका पति देवांतक को करना है अब समय आ गया है भ्राता देवान तक कि उस काशी नरेश को मैं स्वयं जाकर उचित पाठ सिखाऊं तुम भूल रहे हो क्या वहां विनायक है काशी नरेश की रक्षा के लिए प्रणाम माता प्रणाम पिता श्री अर्थात उस तुच्छ बालक के अंत का समय आ गया है पुत्र रांत तुम विनायक का अंत करोगे इतना सब कुछ होने के बाद उसकी शक्ति और दिव्यता का ज्ञान तो हो गया होगा तुम्हें इसीलिए पुत्र विचार करो अहंकार नहीं क्योंकि अहंकार सर्वनाश का कारण बनता है अहंकार नहीं है माता विश्वास है अपनी शक्ति का अपने म का हम दोनों भ्राता सभी प्रकार की शक्तियों के स्वामी हैं तपो शक्ति अस्त्र शक्ति बाहु शक्ति यह सब है हमारे पास फिर वह तुच्छ सा बालक हमें कोई हानि कैसे पहुंचा सकता है आप चिंता और संकोच मत कीजिए नारा तक को जाने दीजिए क्योंकि मेरे महा पराक्रमी भ्राता के आगे वह बालक कदापि नहीं टिक पाएगा वो बालक हमारे भ्राता को लेश मात्र भी हानि नहीं पहुंचा पाएगा भ्राता आप जाइए जाके अंत कीजिए उस काशी नरेश और उसके साथ साथ उसके उस रक्षक बालक का आज्ञा दे माता श्री पिता [संगीत] श्री पुत्र नारा तक और देवांतक की मां के मुख पर ये भय शोभा नहीं देता भय भी तो उन्हें होना चाहिए जो आपके पुत्रों के विरुद्ध खड़े [संगीत] हैं [संगीत] युद्ध का उद्घोष महाराज महाराज सावधान शत्रु ने आक्रमण कर दिया परंतु विनायक जी कहां है [संगीत] [प्रशंसा] स्वामी प्रभु युद्ध बिगुल बज गया अब मुझे आपकी और सेवा का अवसर नहीं मिल सकेगा किंतु यह आवश्यक है काशी के शत्रु नरत और देवं तक का आक्रमण है काशी नरेश को आपकी आवश्यकता होगी तो आपको जाना होगा विनायक जी कहां है स्वामी उन्हें तो आपके साथ होना चाहिए मुझे उन पर पूर्ण विश्वास है वह आपकी रक्षा करेंगे [संगीत] नहीं स्वामी मैं आपको विनायक जी के बिना कहीं नहीं जाने दूंगी चिंता मत करिए महारानी भयंकर असुरों को उनके मृत्यु के मुख में भेजना भली भाति जानता हूं मैं किसी अन्य की सहायता की आवश्यकता नहीं किसी अन्य की सहायता की आवश्यकता [संगीत] नहीं काशी नरेश को अभी मेरी कोई आवश्यकता नहीं और मैं उनके निकट तभी जाऊंगा जब वह भक्ति भाव से मुझे पुकारेंगे तब तक मैं अपने भक्त के पास ही रुकूंगा आप लोगों की भक्ति और सेवा का आनंद [संगीत] लूंगा डर विश्वास के विपरीत होता है जब कोई डर जाता है तो भगवान को यह संदेश देता है कि वह उन पर विश्वास नहीं करता तो क्या इसी कारण प्रभु विनायक काशी नरेश के प्रति इतने कठोर हो गए थे कि वो वो उनकी सहायता करने ही नहीं गए बताइए ना प्रभु बालक विनायक इनके साथ नहीं है अर्थात जीत हमारी ही होगी काशी नरेश कहां है वह बालक जिस पर तुम्हें इतना विश्वास इतना घमंड है जिसके बल पर तुम ने महान देवांतक और नारा तक को चुनौती दी है जरा हमारे सामने ला उसे मुझे अपने बाहुबल पर विश्वास है और तुम पर विजय पाने के लिए मेरी भुजाओ की शक्ति ही पर्याप्त है शुक्ल शर्मा आपको मुझ पर विश्वास है या अपनी भक्ति पर आपके सामने तो मैं अज्ञानी हूं परंतु इतना अवश्य कहूंगा भगवान ही भक्त के भक्ति का आधार है भक्ति रूप में भक्त के हृदय में भगवान का वास होता है यदि भक्त को अपने भक्ति पर विश्वास है तो उसका यही अर्थ है कि उसको अपने भगवान पर अटूट विश्वास है कभी-कभी भक्ति का दंभ करने वाले भक्त भी इस गहराई को समझ नहीं पाते किंतु आपकी भक्ति ने मुझे आपके पास आने के लिए ही नहीं अपितु आपके पास रहने के लिए भी विवश कर दिया है मैं आपसे अति प्रसन्न हूं शुक्ल शर्मा असुरों को हराना तो बाल्यकाल से ही मेरा प्रिय खेल रहा है और आज भी मुझे उसमें आनंद मिलता है तुमको परास्त करके आज भी मुझे आनंद आएगा जिसके लिए मैं अकेला ही पर्याप्त हूं तो ठीक है काशी नरेश अब तुम्ह इस युद्ध में मैंने अकेला नहीं कर दिया तो मेरा नाम भी नारा तक नहीं [प्रशंसा] हा यह असुर तो अत्यंत भयंकर है भयानक लावा है इसके मुंह में पीछे हटने में ही हमारी सुरक्षा है भागो भागो मेरी सेना लौट क्यों रही है काशी नरेश तुमने कहा था ना कि तुम युद्ध में अकेले होंगे तो लो मैंने तुम्हे युद्ध में अकेला कर दिया आओ करो मुझसे युद्ध वो भी अकेले सिं अकेला होता है तब भी सिं ही रहता है रतक और तुम जैसे भेड़ियों का आखेट करता [संगीत] है [संगीत] वार करो तो किसी शक्तिशाली अस्त्र का काशी नरेश इन साधारण बाणों से नारा दक का क्या होगा [संगीत] जब कोई व्यक्ति अपने विवेक के स्थान पर दूसरे के बहका वों में विश्वास करता है तो निश्चय ही अपनी हानि करता है
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