Sunday, 4 January 2026

शुक्राचार्य ने शंखचूड़ को युद्ध के लिए भड़काया Gagan Malik Vighnaharta Ganesh Episode 721 PenBhakti

[संगीत] ओम नमो भगवते वासुदेवाय कृष्णाय नमो नम नम ओम नमो भगवते वासुदेवाय कृष्णाय नमो [संगीत] नम [संगीत] हा [संगीत] देवी यह आप क्या कर रही है एक असुर की आरती उतार रही है असुर नहीं स्वामी जब मैं आपको देखती हूं तो मुझे आप में एक प्रखर बुद्धि संपन्न महा विद्वान दिखाई देते हैं जो बड़ी कुशलता से अपनी प्रजा का नेतृत्व करने में समर्थ है मुझे एक तेजस्वी राजपुत्र दिखाई देते हैं जो अपने तेज का विस्तार कर महानतम राज्य स्थापित कर सकते हैं मुझे अति बलशाली महायोद्धा दिखाई देते हैं जो अपने राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं और मुझे एक अति निष्ठावान पति का पत्नी प्रेम दिखाई देता है ऐसे पति जो अपनी पत्नी के सुख के लिए कुछ भी कर सक सकते [संगीत] [संगीत] हैं इसीलिए ऐसे पति परमेश्वर की पूजा करना अनुचित नहीं पति का परमेश्वर होना तो पत्नी की परमेश्वरी शक्ति से ही संभव है देवी आपकी शक्ति मुझे समर्थ बनाती है मुझे पूर्णता प्रदान करती है मुझे वह सब करने को प्रेरित करती है जो आपने कहा इसलिए मैं भी आपके भीतर वास करने वाली उस परमेश्वरी शक्ति के सामने नतमस्तक होकर उसे प्रणाम करता [संगीत] हूं [संगीत] प्रभु असुर होते हुए भी कितना धर्म निष्ट और सदाचारी है य ऐसा परम श्री कृष्ण का भक्त कहां किसी को कोई हानि पहुंचा सकता है इसलिए देवलोक को इससे कहां कोई संकट है प्रभु आप उचित कह रहे देवराज देवराज व पूर्व जन्म में भी कृष्ण भक्त था और ज में भी है किंतु इस जन्म में तो आप देवताओं के प्रति उसके मन में शत्रुता का भाव ही संभव है और शत्रु शांत भी हो तो भी उसके प्रति असावधानी का परिणाम विनाश ही होता है यह कदापि मत भूलिए ित कह र प्रभु नारायण नारायण प्रभु य शू का आचरण ऐसा ही रहा तो ब्रह्मांड के इतिहास में जन्म लेने वाला शं चूड़ श्रेष्ठतम असुर होगा जिसका जैसा स्वभाव होता है वह समय आने पर अवश्य दिखाई देता है असुर है तो उसका आसुरी स्वभाव भी तो दिखाई देगा किंतु आपका भी स्वभाव है ना देवशी जो कुछ भी हो रहा है उसम अपनी उत्सुकता दिखाने का अपने शब्दों से संकेत पहुंचाने का तो अब आपको भी अपने स्वभाव का परिचय देने का समय आ गया अब जो होने वाला है उसमें आपको भी अपना भाग मिलाना है मुझे प्रभु हां आपको देवशी अब तक आप जो देवी तुलसी के साथ हो रहा था उसी का ध्यान रख रहे थे किंतु अब ध्यान रखना ही नहीं उस इसके आगे भी कुछ करना है और उसके लिए आपको असुर गुरु शुक्राचार्य के पास जाना होगा नारायण नारायण प्रणाम असुर गुरु शुक्राचार्य [संगीत] प्रणाम देवर्ष अकारण तो आप यहां कदापि नहीं आए होंगे तो बताइए आज आपके आने का कारण क्या है नारायण नारायण कारण अकारण ऐसे ही बस ऐसे ही अर्थात देवर्षि प्रशंसा करने आया हूं आपके श्रेष्ठ शिष्य की शिष्य की शंखचूड़ ऐसा श्रेष्ठ ऐसा अद्भुत आचरण करने वाला असुर अनूठा उदाहरण है असुरों में अब देखिए ब्रह्मदेव का वरदान प्राप्त भी किया किंतु अनुचित उपयोग नहीं किया तथास्तु तथास्तु उसकी भक्ति अनुपम है धर्म के प्रति उसकी निष्ठा श्रद्धा अनोखी है असुर साम्राज्य के विस्तार में उसे कोई रुचि नहीं है शंखचूड़ का स्वभाव इतना शांत है कि अन्य असुरों के साथ युद्ध करने में उसे रुचि ही नहीं है युद्ध करे भी क्यों किसी देवता के साथ कोई शत्रुता भी तो नहीं है उसकी यदि ऐसा ही स्वभाव ऐसा ही आचरण रहा संग चूड़ का तो असुर कुल का तो उधार हो जाएगा और फिर आपको तो असुर की चिंता करने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी नारायण अद्भुत [संगीत] [प्रशंसा] नारायण नारायण प्रभु आशा रखता हूं कि मैंने अपना भाग निभा [संगीत] [संगीत] लिया [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] [संगीत] मुझे आप एक प्रखर बुद्धि संपन्न महा विद्वान दिखाई देते हैं जो बड़ी कुशलता से अपनी प्रजा का नेतृत्व करने में समर्थ है मुझे तेजस्वी राजपुत्र दिखाई देते हैं जो अपने तेज का विस्तार कर महानतम राज्य स्थापित कर सकते हैं मुझे अति बलशाली महायोधा दिखाई देते हैं जो अपने राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते [संगीत] [संगीत] पुत्र मेरे विचार से इतना भार पर्याप्त है पिताश्री जो पर्याप्त है उससे आगे बढ़ने वाला ही अपनी शक्ति की सीमा से आगे बढ़ना सीखता है और मेरी भुजाएं तो कहीं अधिक शक्तिशाली [संगीत] है पिताश्री इसमें एक भार चक्र और जोड़ दीजिए ऐसी शक्तिशाली भुजाओं का क्या लाभ जब उन्हें भीख मांगने के लिए ही उठनी हो तुम्हारे बल का क्या लाभ जब असुर को देवताओं से ही जीवन दान मांगना [संगीत] हो प्रणाम असुर गुरु प्रणाम असुर गुरु कायरो से सम्मान की आशा नहीं करता मैं असुर गुरु शुक्राचार्य शंखचूड़ यहां पराक्रम दिखाने से अच्छा है मशको के भाती पृथ्वी के भीतर जाकर छुप जाओ मशको के भाती पृथ्वी के भीतर जाकर छुप जाओ यत्र शस्त्र जिनसे व्यायाम कर तुम अपना मनोरंजन कर रहे हो उन्हें पिघला दो और उन्हें घुंगरू बनाकर अपने पांव में डाल लो अपने पिता श्री को भी पहना दो और देवताओं के संकेतों पर नृत्य कर उनका मनोरंजन करो और देवताओं के संकेतो पर नृत्य कर उनका मनोरंजन करो गुरुदेव ना मुझसे कोई भूल हुई है और ना पिताश्री से तो फिर क्या कारण है आपके इतने क्रोध का इतने कठोर वचनों के कहने का ऐसा क्या कर दिया हमने कुछ किया नहीं यही तो तुम्हारा दोष है असुर हो बलशाली हो पराक्रमी हो वरदान प्राप्त कर चुके हो फिर भी कुछ नहीं किया तुमने ऐसे असुर के अस्तित्व का क्या लाभ तुम्हारे जैसे असुर के होने से ना होना ही अच्छा है तुम्हारे जैसे असुर के होने से ना होना ही अच्छा है इस प्रकार के व्यर्थ जीवन से तो तुम्हारी मृत्यु हुई बस गुरुदेव बस बस गुरुदेव बस बस गुरुदेव बस महाराज दम की पुत्र बध राजपुत्र शं चु की अर्धांग तुलसी का प्रणाम स्वीकार की और यह भी सुनिए इन भुजाओं को आप भिक्षा के लिए उठाने की बात कर रहे हैं स्वामी की की इन भुजाओं में इतना बल है कि वह संसार के सभी योद्धाओं को अपने बल से झुका दे और समस्त सृष्टि की बेड़िया बनकर उन्हें बांध ले जिन्हें आप कायर पुकार रहे हैं वह अपने पराक्रम का परिचय दे तो महानतम से महानतम योद्धा के अस्त्र शस्त्र भी मात्र मनोरंजन की सामग्री बनकर रह [संगीत] जाए जिन पांव में आप घुंघरू बांध गए मनोरंजन के लिए थिरक की बात कर रहे हैं स्वामी के यह पाव जहा पढे व नृत्य का नहीं वा यंत्रों का नहीं किंतु धरती के कंपित होने का नाद गुंज है बस देवी तुलसी बस आपके इन शब्दों से मुझे कोई ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो रही है जानता हूं मैं शंखचूर में अतुलित बल और सामर्थ्य है [संगीत] पुत्र ऐसा ऐसा सामर्थ्य व्यर्थ कर रहा है यह तो क्या इसका जीवन व्यर्थ नहीं है गुरुदेव क्षमा कीजिएगा एक पतिव्रता स्त्री अपनी पति के विरुद्ध एक भी अनुचित शब्द नहीं सुन सकती और यह भी सत्य है कि मेरे पतिव्रत धर्म के समक्ष आपके कहे हुए प्रत्येक शब्द व्यर्थ और निरर्थक हो जाए और जब तक मैं अपने पतिव्रत धर्म पर रह तब तक मेरे पति को कुछ नहीं होगा और जब तक तुम्हारी पत्नी का पतिव्रत अटूट रहेगा तुम्हारे जीवन को कोई हानि नहीं पहुंचा सकता इस प्रकार तुम अमर ही बने रहोगे सत्य ही है मेरा वास्तविक कवच यह दिव्य कृष्ण कवच नहीं मेरी पत्नी है गुरुदेव आपका अपमान करो इसकी तो कल्पना भी नहीं कर सकती किंतु मेरे समक्ष मेरे पति का अपमान मेरे पतिव्रत धर्म का अपमान है जो मेरे लिए असहनीय और आपके लिए अशोभनीय है किंतु आप गुरु है हम सब पर प्रथम आपका अधिकार है हम सब आपके आदेश सुझाव और आशीर्वाद की अभिलाषे है उचित है तो अब मैं गुरु के अधिकार से शंख चूड़ को सुझाव देता कि उन्हें बल का प्रयोग कर असुर राज्य का विस्तार करना चाहिए और मैं उसे आशीष देता हूं कि वह त्रिलोक विजेता बने कि वो त्रिलोक विजेता बने और मैं आदेश देता हूं कि मेरे सुझाव पर चलने में तनिक भी विलंब ना करें यदि आपके क्रोध का यही कारण है तो आप चिंता मत कीजिए गुरुदेव मुझे विश्वास है शंखचूड़ हमें निराश नहीं करेगा उससे आपकी जो अपेक्षा है वही मेरी भी इच्छा है अभी इसका विवाह संपन्न हुआ है इसलिए इसके अभियान में थोड़ा विलंब हुआ है अब और विलंब उचित नहीं मैं भी उचित समय की प्रतीक्षा में ही था और आपके आदेश ने अभी इसी पल को उचित समय बना दिया जब स्वयं ब्रह्मदेव के वरदान की शक्ति पिता का आशीष और मेरी पत्नी के असीम पति व्रत की शक्ति तथा गुरुदेव का मार्गदर्शन मेरे साथ हो तो मेरे विजय अभियान के आरंभ को कौन रोक सकता है मुझे विश्वास है कि अब मेरे त्रिलोक विजयता बनने में कोई बाधक नहीं बन सकता प्रभु देवर्षी नारद आप चिंता मत कीजिए आप जो भी करते हैं सर्वप्रथम उसका प्रभाव ऐसा ही होता है जैसे सब कुछ स्थिर हो जाएगा नारायण नारायण ये क्या कह रहे हैं प्रभु वही कह रहा हूं जो सत्य है देवशी आरंभ कैसा भी हो आप जिस भी कार्य के लिए प्रेरित होते हैं उसके अंत में लोक कल्याण ही निहित होता है आपने जो भी किया है देवी तुलसी उसी के परिणाम स्वरूप तुलसी पौधे के रूप में जन्म [संगीत] लेंगी पुत्र जाओ और अपनी सेना के साथ भूलोक और पाताल लोक पर विजय प्राप्त करो सेना की मुझे कोई आवश्यकता नहीं पिताश्री भूलोक के मानवों और पाताल लोक के दानवों को पराजित करने के लिए मैं अकेला ही पर्याप्त हूं मेरे अतिरिक्त यदि मुझे कुछ चाहिए तो वह आप सबका आशीर्वाद [संगीत] है [संगीत] स्वामी आप कुछ भूल रहे हैं क्या क्या भल रहा हूं [संगीत] देवी य इसे आप अपने साथ ले जाइए इसी से आपका कृष्ण रूप पूर्ण होता [संगीत] है प्रिय मुझे माता-पिता और गुरु का आशीष तो प्राप्त हो गया किंतु मेरी शक्ति का स्रोत आप हैं यदि आप मेरे साथ रहेंगी तो विजय भी मेरे साथ होगी आपके बिना मेरी विजय यात्रा अधूरी है इसलिए मैं चाहता हूं कि आप भी मेरे साथ [संगीत] चलिए [संगीत] ग [संगीत] यह हमारी विजय यात्रा का पहला पड़ाव है यह पहला राज्य है जहां मैं अपना वर्चस्व स्थापित [संगीत] करूंगा आप चिंता मत कीजिए देवी हमें कोई क्षति नहीं पहुंचेगी चिंता तो है मुझे स्वामी किंतु हमारी नहीं स्वामी मेरे विचार से आपको दिव्य अस्त्रों की कोई आवश्यकता नहीं प्रभु श्री परम कृष्ण की कृपा से इन सबके लिए आपकी बंसी ही पर्याप्त है [संगीत] [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] च [संगीत] नारायण नारायण बिना युद्ध के ही विजय प्राप्त कर ली श चूड़ने अदभुत भक्ति की शक्ति व्यक्ति को सबल बनाती है किंतु कुछ मानव रूप में छिपे असुर इस भक्ति का दुरुपयोग करते [संगीत] हैं प्रभु असुर दानव दैत्य राक्षस इन सब में शंखचूड़ ऐसा प्रथम योद्धा होगा जिसने बिना कोई अस्त्र शस्त्र उठाए बिना किसी क्रूरता के बिना किसी का वध किए समस्त विश्व पर विजय प्राप्त करली नारायण नारायण हां देवशी किंतु शंख चूर से अधिक इसका श्रे तो देवी तुलसी को जाता है जिन्होंने नर संघार नहीं होने दिया बांसुरी की धुन से ही इस विजय यात्रा को सफल बना दिया असुर राज शंखचूर जी की असुर शूर जी की असुर जी की जी [संगीत] की स्वागत है मेरे पराक्रमी पुत्र स्वागत है पुत्री तुलसी पुत्र शंखचूड़ तुमने भूलोक और पाताल लोक पर विजय प्राप्त की है किंतु अभी भी विश्व सम्राट बनने में समय है यह राज मेरे अधीन है किंतु अब मैं इसे तुम्हें सपता हूं भूलोक और पाताल लोग अब दोनों मेरे अधीन है तो अब स्वर्ग लोक ही शेष है अब स्वर्ग पर अपना अधिकार स्थापित करने का समय आ गया [संगीत] है अपने इस विजय अभियान से ना केवल असुर जाति बल्कि असुर गुरु शुक्राचार्य का भी मान बढ़ाया है तुमने मेरा आशीष सदा तुम्हारे साथ है और सदा तुम्हारे साथ रहेगा किंतु यह भी सत्य है कि देवताओं को पराजित किए बिना तुम्हारी विजय यात्रा अधूरी [संगीत] [संगीत] है क्या बात है प्रिय आपके मुख पर चिंता की रेखा क्यों है क्या यह आवश्यक है क्या आपको देवताओं को पराजित करना ही होगा मेरा अर्थ है आप जो प्राप्त कर चुके हैं हमें उसी में संतुष्ट होना चाहिए व अपने शत्रु को क्षति पहुंचाने का कोई ना कोई उपाय तो ढूंढ ही लेते हैं प्रिय जब तक स्वर्ग लोक पर विजय नहीं होती मैं त्रिलोक विजेता नहीं बनूंगा और यदि मैं त्रिलोक विजेता नहीं बना तो गुरुदेव शुक्राचार्य के आदेश का पूर्ण पालन नहीं होगा और वह प्रसन्न नहीं होंगे संभव है उनका क्रोध पुनः जागृत हो और वह फिर से मेरा अपमान करें क्या आपको यह अच्छा लगेगा नहीं स्वामी आपका मान मेरा मान है इसलिए यदि प्रश्न आपके सम्मान का है तो एक पतिव्रता नारी होने के नाते मैं आपको कदापि नहीं रोकूंगी आपके विजय की कामना करूंगी विजय तो मेरी ही होगी उसकी चिंता मत करो [संगीत] प्रिय प्रभु श्री परम कृष्ण आप पर कृपा करें आप अपने इस अभियान में सफल हो यही कामना करूंगी मैं न धाना न सावधान देवगण स्वर्ग लोक पर किसी का आक्रमण है [संगीत] य [संगीत] शत्रु शांत भी हो तो भी उसके प्रति असावधानी का परिणाम विनाश ही होता है यह कदापि मत भूलिए कोई ईश्वर जैसे वस्त्र पहन उसका स्वांग करता है तो कोई व्यक्ति के मन मस्तिष्क में ही स्वयं ईश्वर बनकर बैठ जाते हैं शंख चूड़ जैसा असुर ही ईश्वर के प्रति अन्यों की भक्ति का दुरुपयोग कर सकता [संगीत] [संगीत] है [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] देवताओं को अपनी माया में उ करर शंखचूड़ ने उनसे स्वर्ग का सिंहासन तो छीन लिया किंतु नियति जो माया रच रही है उसे तो शंखचूड़ भी नहीं जानता कि विधाता के इस लेख के अनुसार संसार को सदा सदा के लिए एक वरदान प्राप्त होने वाला है प्रेम और अहिंसा से ही जब सारे कार्य सिद्ध किए जा सकते हो तो हिंसा का मार्ग अपनाना बुद्धिमत्ता नहीं

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