Sunday, 4 January 2026

शुक्राचार्य ने रावण का मार्गदर्शन कैसे किया NirbhayWadhwa MahabaliHanuman Episode 223 PenBhakti

[संगीत] हे प्रभु [संगीत] सोमेश्वर देखिए मेरे सोने आचल [संगीत] को आपने अपने ही प्रसाद पुष्प से इसे भरा था किंतु अब ये रिक्त हो गया [संगीत] है इसे पुनः भर दीजिए [प्रशंसा] प्रभु एक मां की गुहार सुनिए सदैव के लिए नहीं [संगीत] तो एक बार उसे दिखा दीजिए [संगीत] उसे देख लूंगी तो मेरे व्याकुल हृदय को शांति मिल [संगीत] जाएग [संगीत] नम मां की करण पुकार आपको अवश्य ही द्रवित कर देगी [संगीत] सो [संगीत] ओम नमः शिवाय ओ ओम नमः [संगीत] शिवाय [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] स्वामी अहो भाग्य हमारे जो हम ऐसे शुभ अवसर पर आए जब प्रभु राम का युवराज पद के लिए अभिषेक होना है अब देखना यह है कि इस प्रसन्नता के अवसर पर हमें देखकर सब प्रसन्न होते हैं या नहीं क्योंकि हमारे साथ ही हनुमान की विदाई अयोध्या से होना [संगीत] है चलिए देवी [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] ज [संगीत] राजकुमार श्री राम के लिए राज मुकुट लाया [प्रशंसा] [संगीत] जाए राम भले ही हो जाए तुम्हारा अभिषेक किंतु मैं चुप नहीं [संगीत] बैठूंगी [संगीत] राम राम राम श्री राम राम राम राम राम राम राम श्री राम राम राम राम राम राम राम श्री राम राम राम राम राम राम राम श्री राम राम राम श्री राम श्री राम श्री राम श्री राम श्री राम श्री राम श्री राम श्री राम राज पुरोहित अंतिम संस्कार की प्रक्रिया आरंभ करिए प्रचलित करिए अपनी ख किंतु लंकेश आप यह मत कीजिए आपके बिना राज पुरोहित आपको जितना कहा जाए केवल उतना करिए चेता को अग्नि लगाइए [संगीत] लंकेश यह कारों का पाठ कब से सीख गए हो लंकेश सारे संसार को अपने चरणों में झुकाने की शक्ति रखने वाला लंकेश आज निर्बल की तरह आत्म त्याग करने की सोच रहा है तो आप क्या चाहते हैं गुरुदेव उस धर्त नारायण को मैं अपनी मृत्यु का श्रेय दे दूं सारा संसार उसके गुण गाए नहीं गुरु रावण यह कई नहीं होने देगा मेरी मृत्यु से उ छलिया नारायण का अवतार लेना ही व्यर्थ हो जाएगा परहित लंकेश अपने दृष्टिकोण को उलट कर देखो सोचो रावण के कारण स्मरण किया जाएगा उस नारायण के अवतार को रावण नहीं तो नारायण भी नहीं यदि उस नारायण के अवतार को परास कर दिया तो किंतु ऐसा हो क रहा है गुरुदेव शांत लंकेश इसका भी हल है मेरे पास [संगीत] हल रावण युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए जितना महत्व प्रहार करने का है उतना ही महत्व बचाव का भी है यदि युद्ध में शत्रु को नहीं मार पा रहे तो अपने आप को ऐसा बनाओ कि शत्रु भी तुम्हें नहीं मार पाए किंतु ऐसा हो कैसे सकता है गुरुदेव अमरता [संगीत] प्राप्त अमरता स्पष्ट कहिए गुरुदेव अमृता कैसे प्राप्त हो सकती है अमृत पान के द्वारा देवताओं ने समुंद्र मंथन के समय छल से अमृत प्राप्त किया जबकि तुम राक्षसों का भी उस पर उतना ही अधिकार था इसलिए छल या बल से किसी भी तरह अमृत प्राप्त करो किंतु स्मरण रहे अमृत प्राप्त करना उतना सहज नहीं सहज कार्य तो वैसे भी रावण को नहीं भाता गुरुदेव आप केवल मार्गदर्शन करिए गुरुदेव के करना क्या [संगीत] है [संगीत] आ [संगीत] हनुमान आज अंतिम बार मुझे अपने हाथों से लड्डू नहीं खिलाओगे [संगीत] प्रभु अंतिम बार मुझसे कोई भूल हो गई हो तो मुझे क्षमा कर दीजिए मैं तो आपको प्रतिदिन लड्डू खिलाऊंगा जय हनुमान [संगीत] जय श्री राम महा बली हनुमान जय हनुमान जय हनुमान हनुमान ज जय श्री राम बो केसरीन ज श्रीराम जय श्री राम ते राज जी वैराज जी आ गए यह तो ले जाएंगे हनुमान को तो सुनो रावण अमृत म न के पश्चात समस्त देवताओं एवं त्रिदेव ने मिलकर अमृत की सुरक्षा का दायित्व चंद्रदेव को सौंप दिया था क्योंकि चंद्रदेव शीतलता प्रधान देवता है चंद्र [संगीत] देव अमृत का रखवाला वो क्या रखवाली करेगा अमृत की मुझ से उसे तो स्वयं मैंने बंदी बना लिया था इतने उतावले मत हो दशानन पहले पूर्ण सत्य को जान लो चंद्रलोक में किसी अज्ञात स्थान पर कड़ी सुरक्षा में अमृत को रखा गया है जो दिव्य वि वि तरंगों से [संगीत] रक्षित और उन विद्युत तरंगों के बाहर देवीय शक्ति से सज्जित रक्षक उस स्थान की रक्षा कर गुरुदेव कोई रक्षक रक्षा नहीं कर पाएगा अमृत की अमृत अब केवल रावण का होगा केवल रावण का रावण समस्त देवता ही नहीं त्रिदेव भी अमृत की सुरक्षा के लिए चंद्रदेव की सहायता हेतु आगे आ सक राहु की दुर्गति भी इसी कारण हुई यदि अमृत पाना है तो एक कोई बड़ा कारण ढूंढना होगा तुम्हे साम धाम जैसे भी हो अमृत प्राप्ति को लक्ष्य बनाना है तुम आप निश्चिंत रहे गुरुदेव रावण को ज्ञात है कि उसको क्या करना [संगीत] है वानर अब तो तुझे जाना ही होगा यहां से भारत भैया मैं जी आ गए हैं हनुमान भैया को ले जाएंगे क्या ये प्रणाम महाराज दशरथ प्रणाम और आप सबको भी प्रणाम प्रणाम महाराज दशरथ और युवराज राम आप दोनों को बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाए अयोध्या में आपका स्वागत है वैराज हनुमान मेरे समी बा पुत्र [संगीत] हनुमान मेरे सभी बापु वैराज जी आप बड़े ही शुभ अवसर पर आए आज आपको हमारा आदर आतिथ्य स्वीकार करना ही होगा इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद किंतु हम तो रमता जोगी बहता पानी है कहीं रुकते नहीं हम तो केवल यहां हनुमान को लेने आए हनुमान अब तुम्हें हमारे साथ चलना होगा [संगीत] [संगीत] पुत्र [संगीत] ना [संगीत] हेरे बैदरा जी क्या हनुमान कुछ और दिन तक यहां पर नहीं रुक सकता वराज जी कुछ ही दिन तो हुए हैं हनुमान को यहां आए वैराज जी हनुमान ने हम सबके हृदय में स्थान बना लिया य कुछ दिन और यहां रुक जाता तो बहुत अच्छा होता महरानी जी हनुमान के लिए हनुमान की मां मार्ग पर नेत्र टिकाए हुए प्रतीक्षा में व्याकुल हो रही होगी उनका एक एक पल कैसे कट रहा होगा उनके विषय में भी तो कुछ [संगीत] सोचिए हनुमान आप अभी मना कर दो ना जाने से राम भैया आप ही कहिए ना हनुमान को कि ना जाए हां राम भैया आप ही कहिए ना हनुमान भैया को कि ना जाए हनुमान मैं तुम्हारी दुविधा समझ रहा हूं किंतु मैंने तुमसे कहा था ना य सृष्टि परिवर्तनशील है ऋतु परिवर्तन हो रहा है अर्थात प्रकृति को जाने वाली शीत ऋतु का दुख नहीं है आने वाली बसंत की प्रसन्नता है क्योंकि परिवर्तनशील ही सृष्टि का शास्त्र सत्य है जैसे कल तुम कहीं और थे आज यहां हो हो सकता है कल तुम यहां ना हो किसी एक के लिए तुम अन्य सबके प्रति अपने कर्तव्य से मुख नहीं मोड़ सकते [संगीत] हो मैंने कहा था ना कि मैं सता हूं आकांक्षा से रहित मित्रता ही भक्ति है हनुमान मैं जितना अपने परिवार का हूं प्रजा का हूं और संसार का हूं उतना ही मैं तुम्हारा भी हूं हनुमान तुम क्यों मात्र किसी एक के साथ बंधे रहना चाहते हो तुम्ह ही नहीं सबको आपके प्रति अपना कर्तव्य निभाना चाहिए शी राम राम राम राम राम राम राम श प्रभु हनुमान आपसे विलक कैसे हो सकता है हनुमान तुम मुझसे विलक कहां हो रहे हो मैं तो तुम्हारे साथ ही हूं तुम्हारे हृदय में तुम जब जब मुझे ढूंढोगे तुम मुझे अपने हृदय में पाओगे आप सत्य कह रहे हैं प्रभु हां हनुमान मेरा वास है तुम्हारे हृदय में दे दे जीम धम नानाना रे धम धम धना ना ना [प्रशंसा] [संगीत] ना

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...