Friday, 2 January 2026

मूषक को गणेश जी से कौनसा आशीष प्राप्त था Nishkarsh Vighnaharta Ganesh Episode 711 Pen Bhakti

[संगीत] मुस्कुरा क्या रहे हो मुर्ख छलिया तुम्हारी भी अभी यही स्थिति होने वाली है मुझे कोई आवश्यकता नहीं है तुम्हारी छलिया और ना ही तुम्हें मेरी मायावी शक्तियों की लौट आओ शक्ति मेरी मेरे पास लौट आओ ये क्या हो रहा है इन अरो ने विश्वास का किया है मेरे साथ भूल हुई है मुझसे बहुत बड़ी भूल हुई है कुरा सुर पर विश्वास करने की बहुत बड़ी भूल हुई है तुम सब विश्वास खाती हो बहुत बड़ी भूल हुई है मुझसे हां मेरी सहायता करो मुझे पीड़ा हो रही है एक कार्य करो ना प्रभु गणेश जी से गणेश जी से विनती करो वो वो वो हमारी अवश्य सहायता करेंगे ऐसे तुम हमारी सहायता करेंगे गणेश [संगीत] भगवान मूषक जी जो अंत तक स्वयं पर विश्वास रखते हैं अपनी विजय की आशा नहीं खोते वही सफल होते हैं प्रभु तो बार-बार अपने शब्दों से मुझे प्रेरणा देते रहे हैं और मैं प्रभु का सेवक उनके प्रत्येक शब्द का मान रखूंगा ओ श्री गणेशाय नमः ओम गण गणपते [संगीत] नमः ओम श्री गणेशाय नमः मुझे आशीष दीजिए प्रभु मैं आपके वचनों को सार्थक कर [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] सकू [संगीत] [संगीत] जय श्री [प्रशंसा] [संगीत] गणेश ये मेरे शल का जंजाल कैसे तोड़ दिया इसने मैं इसे फिर से बांध दंगी आश्चर्य य अचानक से इतनी शक्ति और स्फूर्ति कहां से आ गई दुर्बल मशक में यह क्या हो रहा है इस मशक को क्या हो गया अचानक से अचानक से कुशल योधा में कैसे परिवर्तित हो गया यह कैसे नहीं नहीं नहीं नहीं संकेत नहीं है शुभ तुम्हारे लिए य मित्र मुष अब मेरी भी सहायता करो मुझे बहुत पीड़ा हो रही है मुझे मेरी सहायता करो मित्र ओम श्री गणेशा नम बस मकड़ राक्षसी अब तुम्हारे जाल का जंजाल ना मुझ पर प्रभाव करेगा ना मेरे मित्र छलिया पर अद्भुत मित्र मशक तो अपार शक्ति और अतुलित आत्मबल का स्वामी है वाह धन्यवाद मित्र बहुत-बहुत धन्यवाद तुमने मुझे इन विश्वास घा दियों के जाल से मुक्त करा दिया बहुत-बहुत धन्यवाद मित्र मुक्त ही हुए हो छलिया तू सुरक्षित नहीं देखा मकड़ राक्षसी मेरे रहते मेरे मित्र लिया पर कोई आंच नहीं आ सकती समय चक्र साप के साथ न्याय करता है मकड़ राक्षसी जो दूसरों के लिए खाय खोदता है वह स्वयं उसमें गिर कर मर जाता है लो दुष्टा अब अपने शस्त्र का प्रहार सहन करो ये मेरी जाल का जंजाल क्यों नहीं बन रहा समय नहीं है मुझे भागना [संगीत] चाहिए [संगीत] यह क्या हो रहा है मेरी मेरी सेविका मकर राक्षसी का वद कैसे कर दिया इस मोशक ने कैसे मित्र मशक मैंने कपट किया है [संगीत] नसे सागर तुम्हारे काने में क्या क्या कहा तुम्ह तुम्ह भीतर से तोड़ने का प्रयास किया है मैंने कितना शत्रु व्यवहार किया है मैंने तुम्हारे साथ फिर तुमने मेरी मेरी रक्षा क्यों की नहीं नहीं नहीं लिया नहीं तुम तो मेरे मित्र हो [संगीत] मित्र मेरे सबसे प्रिय मित्र और फिर प्रभु गणेश जी ने हम दोनों को एक साथ एक कार्य करने के लिए भेजा था तो दोनों को ही मेरे साथ युद्ध में भाग लेकर पूर्ण सामर्थ्य से मेरे प्रति अपनी निष्ठा का परिचय देना होगा और जब दो लोग एक सा एक कार्य करने के लिए जाते हैं तो एक दूसरे का ध्यान रखना उनका कर्तव्य होता है यही प्रभु श्री गणेश जी का आदेश भी है इसीलिए तुम्हारी रक्षा करना मेरा कर्तव्य था मैं अपनी भूल समझ चुका हूं तो एक एक कू रहस्य जो इस इस विश्वास का कूरा सुर का है तुम्ह बताना मेरा कर्तव्य है मैं तुम्ह बताता हूं जो वरदान मुझे प्राप्त है उसमें मात्र एक ही स्थिति में मेरी मृत्यु संभव है मेरा व मात्र एक मूषक के द्वारा ही हो सकता है मुझ कासर और तुम चाहते हो कि कि तुम उसका वात कर दो दुष्टता का कपट का अधर्म का यही परिणाम होता है क्रूर सुर अभी भी समय है सुधर जाओ धर्म पथ को स्वीकार करो अन्यथा तुम्हारा भी अंत इतना ही भयंकर होगा गजानन माना कि मेरी मकड़ राक्षसी नहीं बची शेष किंतु मुझे क्षति पहुंचाना आपके नियंत्रण में नहीं है [संगीत] [संगीत] इसका अर्थ है मुझे इस समय प्रभु श्री गणेश जी के साथ होना चाहिए तभी क्रुरा सुर का अंत संभव [संगीत] है [संगीत] मेरे किसी भी प्रहार का इस पर कोई असर क्यों नहीं हो रहा यह तो पुनः सकुशल हो गया है क्यों कर रहे हैं व्यर्थ प्रयास गजानंद मैंने कहा ना आपसे आप कुछ भी कर ले किसी भी अस्त्र का उपयोग कर ले लेकिन मुझे हानि नहीं पहुंचा सकते प्रभु आपको आहत भले ही ना कर सके परंतु मैं तो कर सकता हूं ना नहीं नहीं ये ये मशक यहां कैसे आ गया तो अब मेरा यहां रुकना उचित नहीं है मुझे यहां से अपने महल चले जाना चाहिए प्रभु देर से ही सही किंतु एक मित्र ने मित्र की सच्ची मित्रता को पहचान ही लिया और क्रुरा सुर का भेद उजागर कर दिया मुझे ज्ञात है प्रभु कि वो कहां है चलिए मशक जी जी प्रभु वो यहां तक पहुंचे उससे पूर्व मैं इन ऋषियों से कठोर तप आरंभ करवा देता हूं और इनके इनके तप की शक्ति से मैं अमर हो जाऊंगा हां ऐसा ही करता हूं मैं रुक जाओ रस मशक नहीं छलिया मित्रता की आड़ में तुमने कपट किया है मेरे साथ एक सच्चे मित्र को मुझसे दूर करने का अपराध किया है तुमने इसका दंड तो तुम्हें अवश्य मिलेगा नहीं कुछ भी नहीं करोगे तुम स्तंभित हो जाओगे हो जाओगे जाओ अब सर्वप्रथम मैं तुम्हारा अंत करूंगा उसके पश्चात कुछ और करूंगा दुष्ट नकारे मशक छलिया ये किसकी भास है किसने रोका है [संगीत] [संगीत] मुझे जी अपने मशक पर सवार होकर यहां भी पहुंच गए प्रणाम [संगीत] प्रभ तुमने उचित कहा था कूरा सुर तुम्हारे इस अमर बनने के कपट प्रयोजन में विघ्न हता गणेश जीही विन उत्पन्न कर सकते हैं और देखो व य आही गए है देखो हे तुम सभी बैठ जाओ बैठ जाओ तुम सभी तुम सब यहां मेरे अमृत्य के तप के लिए हो बैठ जाओ जाइए मशक जी अब शेष कार्य तो आपको ही करना है बस स्वयं पर विश्वास रखिएगा सफलता अवश्य प्राप्त होगी तुम आगे नहीं बढ़ो मुझे मुझे कोई क्ति नहीं पहुंचाओ तुम आगे नहीं बढ़ो मुझे कोई क्ति नहीं पहुंचाओ तुम मुझे कोई छती नहीं पहुंचाओ तुम जब कोई तुम्हें कपट मार्ग पर धकेलने का तुम्हें लक्ष्य से परे करने का प्रयास करें तो अपने आराध्य को मन में धारण कर उन्हीं का स्मरण करो फिर कोई बाधा तुम्हें रोक नहीं सकती ओम श्री गणेशाय नमः ओ गण गणपते नमः [संगीत] आगे नहीं बढ़ सकते तुम मुझ पर मुझ पर मार नहीं कर सकते तुम स्वयं पर विश्वास रखिएगा सफलता अवश्य प्राप्त होगी तो मेरी किसी भी किसी भी पुप साहस का प्रभाव नहीं पड़ रहा है य तो ये तो मेरी रही बढ़ता आ रहा है क्या करूं मैं कैसे अपनी रक्षा करूं रुक जाओ रुक जाओ वही रुक जाओ मुझ आगे बढ़ने का और और मुझ पर प्रहार करने का साहस नहीं है तुम में वही रुक जाओ जा रुक जाओ रुक जाओ अब तुम पुसु साहट के गुप्त संवादों के अपने वचनों से अन्य सभी को भटकाने के स्वामी नहीं हो य भी खो दी है [संगीत] तुमने [संगीत] [संगीत] मेरा वत मात्र एक मशक के द्वारा ही हो सकता [संगीत] [संगीत] है [संगीत] प्रभु मैंने बहुत अपराध किए हैं मुझे मेरा प्रायश्चित करने की अनुमति दीजिए और मेरा प्रश्चित सबसे पहले यह होगा कि मैं यहां से रिश गणों को उनके सुरक्षित स्थान तक पंचांगा हे प्रभु अनुमति दीजिए प्रभु हां प्रभु और हमें भी तो लौटना चाहिए आज आपके जन्मदिन का गणेश चतुर्थी का उत्सव जो मनाना है प्रथम पूज्य गणेश जी की जय प्रथम पूज्य गणेश जी की जय प्रथम पूज्य गणेश जी की जय प्रथम पूज्य गणेश जी की जय प्रथम पूज्य गणेश जी की जय प्रथम पूज्य गणेश जी की जय अनुज गणेश गणेश चतुर्थी के इतने पावन अवसर पर घटनाओं का ऐसा घटना चक्र बचेगा यह तो किसी को भी अनुमान नहीं था किंतु अभी भी समय है हमें हमारा उत्सव गणेश आरती के साथ आरंभ करना चाहिए अवश्य देवसेना [संगीत] जी [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] [संगीत] हो अनुज गणेश यह दूसरा वाला सिंहासन तो अब भी रिक्त है तो अब तुम ही घोषणा करो कि इस सिंहासन पर कौन विराजमान होगा भ्राता जो इसके अधिकारी थे और रहेंगे [संगीत] वो है मशक [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] जी उन्होंने ही इस प्रतियोगिता में अपनी भक्ति और शक्ति दोनों का ही परिचय दिया और युद्ध भूमि में शत्रु समान व्यवहार करने वाली छलिया की रक्षा कर उन्होंने अपना कर्तव्य भी निभाया निसंदेह अनुज गणेश मशक जी प्रभु मेरी तो बस एक ही इच्छा है मेरे जीवन का हर क्ण आपके ही काम आए जब भी देखो तो मात्र आपके ही दर्शन हो तथास्तु मूषक जी यह आपका अधिकार है आज से आप ही मेरे सबसे निकट रहेंगे आपको यह स्थान देकर तो मैं आपकी नहीं वरन अपनी मनोकामना पूर्ण कर रहा हूं मूषक [संगीत] जी आपका कोटि कोटि धन्यवाद प्रभु अपने चरणों में अपने संग मुझ जैसे तुच्छ जीव को यह स्थान प्रदान करने के [संगीत] लिए आज के बाद मेरी प्रत्येक पूजा में मूषक जी का भी स्थान होगा जिस प्रकार उन्होंने मेरी पूजा की उसी प्रकार यदि कोई दर्भा मंदार शमी के साथ मेरा पूजन करेगा वह मेरी कृपा प्राप्त करेगा और जो गणेश चतुर्थी के अवसर पर मिट्टी हल्दी या किसी भी अन्य प्राकृतिक वस्तु से बनी मेरी प्रतिमा को अपने गृह में विराजमान करेगा एवं डेढ़ 3 5 सा 9 11 27 या 45 दिन की अवधि तक पूरी श्रद्धा सच्ची निष्ठा और पवित्रता के साथ मेरा सत्कार और मेरी पूजा करेगा उनके गृह में सदा मेरा वास रहेगा प्रथम पूज्य गणेश जी की जय प्रथम पूज्य गणेश जी की जय प्रथम पूज जी की जय वहां एक कोने में क्यों खड़े हो छलिया यहां आओ मेरे [संगीत] सामने आज के इस आनंद उत्सव में विघ्न डालने के लिए मुझे क्षमा कीजिए प्रभु मुझे क्षमा कीजिए प्रभु सुर के कपट पूर्ण वचनों से उसकी फुसफुसाना में ईर्ष घणा और संदेह उत्पन्न हो गया और उसी कपट विधि का प्रयोग मैंने मित्र मूषक पर किया और उसे दुर्बल बना दिया प्रभु मुझे क्षमा कर दीजिए छलिया तुमने अपनी भूल स्वीकार की अपना प्रायश्चित किया इसलिए तुम मेरी क्षमा और कृपा दोनों के ही योग्य हो सदा स्मरण रखो किसी को भी छोटा बनाकर हम कभी बड़े नहीं [संगीत] बनते प्रभु मैं भी क्षमा प्रार्थी हूं मैंने अपने ऊपर उन शब्दों का प्रभाव होने दिया अपने लक्ष्य के प्रति स्थिर नहीं रहा उचित तो यह होता कि मैं उन शब्दों को सुनकर भी अनसुना कर देता हां मूषक जी कोई कुछ भी कहे आपको अयोग्य पुकारे आपके सामर्थ्य पर प्रश्न चिन्ह लगाए तो भी आपको अपना आत्म ब कदापि नहीं खोना चाहिए यदि आप अपने विवेक का प्रयोग करते तो मुझे विश्वास है बड़ी सरलता से इस समस्या का समाधान ढूंढ लेते विजय होते किंतु फिर भी अपने भीतर की शक्ति को दृढ़ बनाकर स्वयम अपनी कठिनाई को दूर किया इस घटना के माध्यम से यही सीख संपूर्ण जगत को भी लेनी चाहिए कि कुछ भी हो जाए अपना आत्मविश्वास कदापि नहीं खोना चाहिए तभी आप अपने लक्ष्य तक पहुच सकते हैं और यह तो आपकी परीक्षा थी जिसमें आप उत्तीर्ण हुए मूषक जी तो अब दुखी होने का कोई कारण नहीं मैं आपको आशीष देता हूं आज के बाद आपके कानों में जो कुछ भी कहा जाएगा वह सीधा मेरे हृदय तक [संगीत] [प्रशंसा] पहुंचेगा [संगीत] यदि ऐसा है तो सर्वप्रथम मैं अपनी इच्छा [संगीत] कहूंगा मेरी यह इच्छा है कि मेरी पुत्री देव सेना का विवाह शीघ्र अति शीघ्र संपन्न यह तो मेरी भी इच्छा है [संगीत] सा [संगीत] [संगीत] आप आप दोनों अपनी इच्छा एक साथ कह सकते [संगीत] [प्रशंसा] हैं देवी देव सेना का मेरे प्रति अप्रतिम समर्पण देखकर विवाह के प्रति मेरा विचार ही परिवर्तित हो गया है अब मैं देवी देव सहा से विवाह करने का इच्छुक प्रभु मैं स्वामी कार्तिकेय से हिवा करने की इच्छुक किंतु मैं नहीं चाहती कि हमारे मध्य कोई अन्य [संगीत] आए यह तो बहुत चिंता का विषय है भ्राता कार्तिकेय का विवाह देवी देवसेना और देवी बल्ली दोनों से ही होगा यही नियति है फिर मैं आपकी यह इच्छा कैसे पूर्ण करूं भाभी मा देव सेना जी क्या हुआ प्रिय अब तो शीघ्र आपके पुत्र आपके निकट कैलाश में होंगे तो फिर आप चिंतित क्यों है स्वामी मुझे पुत्र कार्तिकेय की चिंता हो रही है इतनी कठिनाइयों से उसने पुत्री देव सेना को विवाह के लिए स्वीकार किया था किंतु क्या व बली को भी स्वीकार [संगीत] करेगा [संगीत] चिंता ना ना चिंता नाना रेना रेना चिंता ना अपने आराध्य के प्रति निष्ठा भक्ति और विश्वास रखते हुए कर्तव्य का निर्वहन करने वालों की सदा विजय होती है

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

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