[संगीत] राम जी राम जी पके हुए फल नीचे गिरे होंगे मैं अभी आपके लिए फल लेकर आता हूं आप वहां चलिए [संगीत] जय श्री राम महा बली हनुमान राम जी यह स्थान तो बड़ा ही रमणीय है यहां बैठकर फल खाने में तो आनंद ही आनंद है आप यही प्रतीक्षा कीजिए मैं अभी आता हूं का बस है नाम लीला करते हनुमत राम फल देखे से उपजी इच्छा मन में सेवा भाव सदिच्छा नर अवतार महा उपकारी भक्तन के मन को सुख कारी अंतर प्रभु भगत दो महिमा इनकी समझ सका को इतने सारे फल राम जी पहले आप विराज उसके पश्चात बताता [संगीत] हूं [संगीत] जय ल [संगीत] [प्रशंसा] लंकेश महा राक्षस खर जय लंकेश महा मायावी दूषण जय लंकेश तुम दोनों एका एक यहां अवश्य कोई विशेष सूचना लाए महाबली वो सुमेरू का वानर बालक और अयोध्या का बड़ा राजकुमार दोनों अयोध्या की सीमा से बाहर निकल गए हैं हां लंकेश हमने उन दोनों को मनोरमा नदी के किनारे वन में देखा है उत्तम अति उत्तम सर्वोत्तम प्रसन्न कर दिया तुमने रावण का इस सूचना के लिए रावण तुम्हें पुरस्कृत करेगा आज से दंडक वन तुम्हारा जय जय जय लंकेश परंतु इसके लिए तुम्हें एक और कार्य करना होगा तुम भी तो बैठो हनुमान नहीं राम जी हनुमान तुम भूल गए हम दोन मित्र है नहीं नहीं अवश्य मुझे ज्ञात है राम जी मैं यह कह रहा था जब हनुमान को भूख लगती है ना तो हनुमान के पेट में गुड़ गुड़ गुड़ गुड़ होने लगती है तब तो मेरे लिए यह फल भी कम पड़ जाते हैं इसीलिए मैंने सोचा कि यदि आपके लिए यह फल कम पड़ गए और आपकी शुधा शांत नहीं हुई तो आपके पेट की जो ना अयोध्या तक पीछा नहीं छोड़ेगी तो फिर हनुमान चलो हम ये सारे फल खाते हैं जिससे हमारी पेट की गुड़गुर शांत हो जाए अरे मैं राम जी से पहले कैसे खा सकता हूं राम जी यह सब है ना आपके लिए रुकिए राम [संगीत] जी अब क्या हुआ हनुमान ऐसे नहीं कहीं कोई फल मीठा नहीं हुआ यदि किसी में कीड़े आदि हुए तो मैं आपको एक एक फल चुन चुन कर देता [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] हूं ये तो बहुत ही टा है मथुराई का करें अनुमान चकते सारे फल हनुमान झूठे फल प्रभु को है अर्पित प्रभु भी करते भाव समर्पित दोनों का मन भरा चाप से भक्ति और वात्सल्य भाव से दृश्य अमोल अपूर्व महान सृष्टि का इसम ही कल्याण ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान राम जी इन सब में से एक यही रसीला फल बचा है यह लीजिए हनुमान तुम तो सब मुझे ही खिला रहे हो न भी तो कुछ खाओ तुम्ह भी तो शुधा सताने लगी ी आपकी शुधा शांत हो गई तो हनुमान की शुधा स्वतः ही शांत हो जाएगी और वैसे भी आपको खिलाने के पूर्व हनुमान ने इतने सारे फलों को चक तो [संगीत] लिया ये लीजिए राम जी मैं पूर्णत तृप्त हो गया हूं हनुमान अब तुम खाओ हनुमान अब तो हनुमान को भी तृप्ति हो गई है राम जी तो अब चले हनुमान [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] चलिए कोई नहीं जा सकता यहां से अब तुम दोनों यहां से कहीं नहीं जा सकते राम जी मैं जानता हूं रिति यज्ञ के कारण आप युद्ध नहीं कर सकते किंतु आप निश्चिंत रहे हनुमान किसी भी राक्षस को आप तक नहीं पहुंचने देगा टूट पड़ा इन पर [संगीत] [संगीत] आ [हंसी] आ तुम सब फिर आ [संगीत] गए ऐसे यज्ञों में बाधा उत्पन्न करने के लिए आसुरी शक्तियां सदैव प्रयासरत रहती है इसलिए हमें पूर्णत सजग रहना होगा राजकुमार राम के युवराज बनने के लिए इस यज्ञ का निर्विघ्न संपन्न होना अति आवश्यक है मंत्री सुमंत युद्ध जीत महाराज दशरथ की अनुपस्थिति में इस यज्ञ की सुरक्षा का दायित्व आप दोनों पर है यज्ञ सामग्री की पूर्ति और उसकी शुद्धता का भी ध्यान रखना है आपको आप निश्चिंत रहिए गुरुदेव मैंने स्वयं प्रधान सेवक को यज्ञ सामग्री की आपूर्ति और शुद्धता का उत्तरदायित्व सौपा है वे शीघ्र यज्ञ सामग्री लेकर आ [संगीत] जाए हनुमान अच्छा किया जो राम को ले गए तो महाराज दशरथ राम को ढूंढने में व्यस्त रहेंगे यही अवसर है यज्ञ को निष्फल करने का ये क्या होने लगा अरे ये क्या हो रहा है कोई हमारी रक्षा करो हे प्रभु ये क्या हो रहा है प्रभु बचाओ रक्षा करो बचाओ रक्षा करो प्रतीत हो रहा है कुछ विचित्र होने वाला है अवश्य य कोई निशाचर [संगीत] शक्तिया [संगीत] अरे इन्ह क्या हुआ क्या हुआ इन्ह भागो भागो भागो भाग भागो [संगीत] मांस के भूखे भूतों ू के प्यासे पिशाच कौन [प्रशंसा] रोकेगा अब यह दे हमें मिल चुकी है जो अयोध्या में जन्मी है उस दश पुत्र को इस पिशाच से कौन बचाएगा भले ही वो कितना ही महाबली हो महाबली हनुमान तुम्हारा बल हमारा कोई अहित नहीं कर सकता व्यर्थ है हमारे सामने तुम्हारा यह बल क्योंकि हमारा ऐ तो मात्र दशरत पुत्र के हाथों ही हो सकता है और यह अस्त्र शस्त्र नहीं उठा सकता विवश है ये निरत यज्ञ की शपथ के कारण किंतु इसका अर्थ यह मत समझना उस शपथ का लाभ उठाकर राम जी का कुछ भी अहित कर सकते हो बालको हम इतना तो कर ही सकते हैं तुम दोनों अयोध्या ना पहुंचो सखा मेरी सहायता करो मारो और मारो तुम कितना भी प्रहार करोगे हम पर हनुमान तुम मारते मारते कालांत हो जाओगे किंतु हम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा अयोध्या तो हम तुम्हें जाने ही नहीं [हंसी] देंगे चिंता मत करो पुत्र हम तुम्हें ले जाने के लिए आ गए [संगीत] [संगीत] हैं यह भी कुछ नहीं कर पाएंगे शस्त्र नहीं उठा पाएंगे ये हमारे विरुद्ध राम शस उठाओ रक्षा करो अपनी यदि राम जी ने य अस्त्र पकड़ लिया तो यज्ञ में ली गई शपथ भी भांग हो जाएगी कुछ तो करना [संगीत] होगा [संगीत] [संगीत] या तुम सब असुर इस प्रकार नहीं मानोगे अब हनुमान तुम सबको इतनी दूर भेजेगा कि वापस कभी नहीं आ पाओगे रुक जाओ राक्षस रुक जाओ [संगीत] राक्षसों सूर्यवंशी और अयोध्या वासियों ने शस्त्र ना उठाने की शपथ भले ही ली है किंतु अब तुम में से किसी ने भी एक कदम आगे बढ़ने का प्रयास किया मैं ब्रह्म ऋषि वशिष्ठ उसे घोर शराब दे [संगीत] दूंगा और व शराब उस दारुण अवस्था में पहुंचा देगा मृत्यु से भी अति भयानक होगी यदि मेरे श्रब से बचना चाहते हो तो इसी क्षण चले जाओ जाओ [संगीत] धन्यवाद राम जी सारे राक्षस चले गए राम तुम सुरक्षित तो हो जी [संगीत] गुरुदेव राम जी अब मैं आपको शीघ्र ही अयोध्या पहुंचा दूंगा रुक जाओ हनुमान अब तुम राम को नहीं ले जा सकते हनुमान यह महाराज दशरथ का आज्ञा पत्र है उनके आदेश के अनुसार तुमने राजकुमार राम का अपहरण करके राज कार्य और राज परिवार के सम्मान का अनादर किया जिससे स्वयं महाराज दशरत को कष्ट हुआ मुझे क्षमा कर दीजिए यही उचित होगा कि अनुमान महाराज दशरथ का आदेश उचित है या अनुचित इसका निर्णय मैं नहीं कर सकता उचित यही होगा कि तुम भी उनके आदेश का पालन [संगीत] करो राम जी बस मेरी इतनी विनती स्वीकार कर लीजिए कि मैं आपको अयोध्या तक पहुंचा दूं हनुमान तुम्हारा कृत तो इतना गंभीर है कि तुम्हें बंदी बना लेना चाहिए था लेकिन राजकुमार राम की उदासी दूर करके जो उपकार किया तुमने सब पर उसके कारण तुम्हें मुक्त छोड़ा जा रहा है उचित यही होगा कि अब तुम सुमेरू लौट [संगीत] जाओ [प्रशंसा] [संगीत] राम जीन तुम्हारी भावना समझ सकता हूं किंतु तुम गुरुदेव की आज्ञा के विरोध नहीं जा सकते [प्रशंसा] [संगीत] चलिए राम चलता हूं हनुमान अपना ध्यान [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] रखना [संगीत] [संगीत] हो
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti
[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...
-
[संगीत] महाभारत प्रता श्री आपने सु शर्मा को ऐसा वचन क्यों दिया मेरे वचन पालन करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता अनुज तुम क्या समझते हो कि स...
-
महाभारत इच्छा है तुम्हारी बस इसने तो एक ही रट लगा रखी है केशव इसे तो आपको गुरु बनाना है वस इस देश में गुरुजनों की क्या कमी है तुम हमें ह...
-
[संगीत] किंतु मेरे परिवार पर से किस पर संकट आने वाला है ऋषिवर बताइए ना ऋषिवर संकट किस पर होगा यह सोचने के स्थान पर तुम्हें यह सोचना चाहि...
No comments:
Post a Comment