Wednesday, 7 January 2026

हनुमान ने केसरी के प्राणों की रक्षा कैसे की Nirbhay Wadhwa Mahabali Hanuman Episode Pen Bhakti

[संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] आ इतने काले बादल तो मैंने कभी देखे ही [संगीत] नहीं यह बादल सावधान हनुमान यह मात्र काले बादल नहीं है यह किसी काले मन वाले के रचाए गए काले मायावी [संगीत] बादल मायावी बादल इन ब्राह्मण बादलों के प्रयोग से मायावी असुर अपने शत्रुओं को ब्रम में डालकर उनसे छल करते किसी ने अंधकार फैलाने के उद्देश्य से इन मायावी बादलों की रचना की [संगीत] मैं इन मायावी बादलों का अंधकार कभी प्रसारित नहीं होने दूंगा अभी हटाता हूं इन मायावी बादलों [संगीत] को [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [हंसी] लंकेश के आदेश अनुसार मैंने मायावी बादलों से सूर्य को ढक दिया है अब इस भ्रामक सूर्य को देखकर केसरी के जीवन का सूर्य भी अस्त हो जाएगा सूर्य अस्त हो गया है तुम अभी तक नहीं आए अपनी मां को लेकर पुत्र हनुमान किंतु मैं अवश्य आ जाऊंगा तुम लोगों के सी नहीं महाराज ये अनर्थ हो रहा है ऋषिवर आज्ञा दे जिससे कि मैं अपने लोका तरण के संकल्प को पूर्ण कर सकूं ऐसा क्यों प्रतीत हो रहा है जैसे सूर्य आज समय से पूर्व ही अस्त होने को है महाराज केसरी के लोका तरण का अर्थ है सुमेरू का अंत यदि केसरी जैसे बलवान राजा स्वर्ग चले गए तो हनुमान भी नहीं लौटेंगे फिर कौन बचाएगा सुमेरू को इन राक्षसों के आतंक [संगीत] से ऋषिवर मतंग मैं आपके आदेश की प्रतीक्षा कर रहा हूं महाराज केसरी आगे बढ़ी और लो कांतर की प्रक्रिया पूण कीज म की महाराज के रुक [संगीत] जा [प्रशंसा] मराज ऐसा मत कीजिए महाराज केसरी रुक [संगीत] जाइए केसरी जी जैसे राजा के बिना तो अनाथ हो गया है सुमेरू इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा सुमेरू का सारी प्रजा देखती रही और उन्ही के सामने उनके राजा चले गए आज का यह सूर्या सदा के लिए सुमेरू को अंधकार में डुबो गया है [संगीत] महाराज नहीं सूर्य तो अभी अस्त हुआ ही नहीं ये तो बहुत बड़ा अनर्थ हो गया महाराज केसरी ने सूर्यास्त होने के पूर्व ही लोका तरण कर लिया अवश्य ही किसी मायावी ने भम पैदा किया है समय से पहले संध्या होने का केसरी पूण रूप से जल में प्रवेश कर चुके नहीं महाराज [संगीत] केसरी मां आपके सिंदूर की लाली मा तो समाप्त ही हो गई छाई मुख पर चिंता रेखा पुत्र ने मां के भाल को देखा सिंदूर की दमक धूमिल हुई अदृष्टवांठा शंका हुई यह गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान शीघ्र चलो पुत्र कुछ अनर्थ हुआ है मेरा मन बहुत विचलित हो रहा [संगीत] है मां वो देखिए मां ना जाने क्यों सुमेरू के नदी तट पर प्रजा जन एकत्रित है कुछ तो हुआ है पुत्र हे प्रभु रक्षा करना अरे उधर देखो हनुमान आ रहा [संगीत] है हनुमान मित्र हनुमान हनुमान आ हमारे मित्र हनुमान हनुमान [संगीत] क्या हुआ सब यहां एकत्रित क्यों है तुमने बहुत विलम कर दिया हनुमान सब समाप्त हो गया यह क्या कह रही हैं आप सब समाप्त हो गया है पुत्र हनुमान तुम्हारे और तुम्हारी मां के बिछ से महाराज केसरी बहुत व्यतीत हो गए थे स्वर्ग जाकर तुम दोनों से मिलने के लिए उन्होने जलत के माध्यम से लोका कर व देखो पुत महा महाराज केसरी स्वयं को जल में समर्पित कर [संगीत] दिया [संगीत] नहीं नहीं स्वामी मा स्वामी अपने आप को महारानी मनी नहीं मां रुक जाइए मां रुक जाइए [संगीत] वरुण देव महाराज केसरी आपके जल तत्व के माध्यम से होने वाले लोका तरण की क्रिया के अंतिम चरण तक पहुंच गए हैं वही तो देख रहा हूं नारद जी अब तो मुझे भी केसरी जी की देह को विधि के अनुसार जल तत्व में परिवर्तित करने की प्रक्रिया आरंभ करनी [संगीत] [संगीत] होगी [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] हनुमान [संगीत] हनुमान हनुमान सावधानी से पुत्र देखो तुम्हारे जाने से क्या ल [संगीत] आई ड ट [संगीत] [संगीत] पिताश्री की देह तो उस चट्टान से टकराने वाली है नारायण नारायण रुक जाइए वरुण देव हनुमान केसरी को रोकने के लिए जल में उतर गए [संगीत] हैं और केसरी के संकल्प के अनुसार हनुमान ही उनका लोकान रोक सकते हैं उचित कह रहे हैं देवर्ष मैं प्रक्रिया स्थगित कर देता [संगीत] हूं [संगीत] [संगीत] हनुमान ना जाने क्या होने वाला है अ नहीं होगा हमारे हनुमान उसे वरुण देव का आशीर्वाद प्राप्त है हा मां सबके संकट हरने वाला हमारा हनुमान अपने पिता के संकट को अवश्य [संगीत] [संगीत] हारेगा रक्षित करने पिता के प्राण जल में प्रविष्ट हुए हनुमान अचित है केसरी काया शिला घात से उन्हें बचाया हनुमत रखते पुत्र धर्म मान काय अंतरण को दिया विराम पूर्ण किया केसरी संकल्प पत्र भक्ति का कहां विकल्प ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली [संगीत] [संगीत] हनुमान [संगीत] हनुमान क महाराज कुशल हो वो कुछ ना हो हमारे महाराज को स्वामी स्वामी नेत्र खोलिए स्वामी स्वामी देखिए ना आपकी अंजना आ गई है आपका पुत्र हनुमान आ गया नेत्र खोलिए स्वामी देखिए ना ये नेत्र क्यों नहीं खोल रहे हैं [प्रशंसा] आप इस प्रकार हम सबको छोड़कर नहीं जा सकते महाराज केसरी ने संकल्प लिया था यदि उनके पुत्र और पत्नी सूर्यास्त तक नहीं आएंगे तो तो ये स्वयं ही जल में कायण के द्वारा स्वर्ग में जाने के लिए लोका तरण कर किंतु दुर्भाग्य से किसी आसुरी शक्ति ने मायावी मेघों से सूर्य को ढक कर सूर्यास्त का भ्रम उत्पन्न कर दिया जिसके कारण महाराज केसरी समय से पूर्व ही कायांतरण के लिए जल में प्रवेश [संगीत] कर हनुमान पुत्र तुम ही कुछ करो वापस बुलाओ अपने पिता श्री को वे तुम्हारी पुकार अवश्य सुनेंगे पुत्र हनुमान जिस प्रकार तुम मुझे स्वर्ग से वापस ले आए उसी प्रकार इन्ह भी वापस ले आओ यदि ये लौट कर नहीं आए तो मेरे जीने का भी कोई अर्थ नहीं रह जाएगा [संगीत] [संगीत] आ

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...