Monday, 5 January 2026

श्री राम का अलौकिक रूप हनुमान ने कैसे देखा NirbhayWadhwa Mahabali Hanuman Episode 207 PenBhakti

[संगीत] ये क्या हो गया स्वामी राम को तो यज्ञ में आहुतियां डालने के लिए जाना था किंतु हनुमान राम सुरक्षित तो होंगे ना उन्हें शीघ्र ही ढूंढना होगा कहीं हनुमान के कारण राम पर कोई संकट ना आ जाए राम पर कोई संकट नहीं आएगा हमारे गुप्तचर चारों दिशाओ में नियुक्त किए गए हैं हमें शीघ्र राम की कोई ना कोई सूचना अवश्य प्राप्त होगी महाराज हमारे गुप्त चर ने हनुमान को देख लिया है व राजकुमार को लेकर हिमालय की ओर चले गए हैं सुमित्रा आप ध्यान रखिए यज्ञ में प्रकार की कोई बाधा ना उत्पन्न हो पाए हम शीघ्र आते हैं स्वामी आप चिंता ना करें बड़ी मां कुछ नहीं होगा हमारे राम भैया को यदि हनुमान ने राम भैया के विरुद्ध कुछ भी किया तो उन्हें उसका भयानक परिणाम भुगतना पड़ेगा सत्य को जाने बिना किसी पर भी य आरोप लगा देना सर्वता अनुचित है पुत्र लक्षमण और तुम राम भैया की प्रसन्नता का कारण भी हनुमान ही [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] है [संगीत] [संगीत] अरे वाह कितना मनोरम हेम प्रदेश है हनुमान ान तो तुमने बहुत ही सुंदर चना किंतु वो कहां है जिसे दिखाने के लिए तुम इतने आसर हो रहे थे वो उस ओर है चलिए राम जय राम सियावर राम राम जय राम जय राम राम जय राम सियावर राम राम जय राम राम जी हनुमान की ये तुझ भेट आपको समर्पित है आइए राम जी यहां राजिए आइए श्री राम जय राम जय राम राम श्री राम राम जय राम जय राम राम राम जय राम राम जय राम राम जय राम राम जी मेरे आराध्य यह श्रद्धा सुमन रामालय आपको समर्पित है यहां आपको बैठाकर आपकी पूजा करेगा हनुमान अपनी सेवा से आपको प्रसन्न करेगा हनुमान राम जी मैं अभी आता हूं जय राम जय राम श्री राम जय राम जय राम जय राम राम [संगीत] राम [संगीत] राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम राम श्री राम राम राम राम राम राम राम श्री राम राम राम राम श्री राम राम राम राम श्री राम राम राम राम राम राम राम श राम राम श्री राम श्री जय जय राम राम राम श्री राम राम राम राम राम राम राम श्री राम देखता हूं कौन सी शक्ति रोक रही है मुझ महा पिशाच को अच्छा यह है धुआ यज्ञ धुम रो मंत्र शक्ति यह हमें रोक रही है ब्रह्म की शक्ति बनकर अर्थात यज्ञ आरंभ हो चुका है अयोध्या में सावधान मांस के भूखे भूतों लहू के प्यासे पिशाच यज्ञ मंत्र और धुमर से बचकर रहो यज्ञ स्थल के समीप नहीं जाना अन्यथा भस्म हो जाओगे तो जब तक यज्ञ चलेगा हम भूखे प्यासे यहां ऐसे ही खड़े रहेंगे नहीं यहां प्रवेश करने के लिए हमें या तो यज्ञ को रोकना होगा या ऐसी कोई देर ढूंढनी होगी जो अयोध्या की वासी हो और नकारात्मक प्रवृत्ति की हो स्मरण रखो अशुद्ध और अपवित्र हमारा मित्र शीघ्र चलो सेवकों महावल सामग्री समाप्त होने से पूर्व यह हवन सामग्री भवन पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है विलंब का अर्थ है दंड असमय यज्ञ कभी पूजा और कोई काम तो जैसे है ही नहीं इस राज काज के वही तो कभी यह सामग्री कभी वह सामग्री सत्य कह रहे हो आप मांस के भूखे भूतो लहू के प्यासे पिशाच यह सेवक सकारात्मक है इन् स्पर्श मत करना यह तीन सेवक और सेविका नकारात्मक प्रवृत्ति की है और इनका प्रधान सेवक भी नकारात्मकता से भरा हुआ है हमारी तरह ही है यह निर्दोषों को दंड देने में और उन्हें सताने में आनंद आता है इन्हे इन सबकी देह में प्रविष्ट करके अयोध्या जाएंगे हम यज्ञ और होम पवित्र अग्नि में तिल जवा पंचमेवा शर्करा और धृत आदि जैसी हवन सामग्रियों की आहुतियां यज्ञ मंत्रों के साथ देने से प्रकृति और देवताओं की पुष्टि होती है उन्हें बल प्राप्त होता [संगीत] है जिससे यज्ञ स्थल के आसपास की सभी आसुरी एवं नकारात्मक शक्तियों का नाश हो जा [संगीत] तथा नवीन कार्यों को सफल बनाने के लिए सकारात्मक ऊर्जा प्रबल हो उठती है इस निहती यज्ञ के होने से ही राजकुमार राम युवराज बनने वाले हैं राम राम राम श्री राम राम राम राम राम राम तुमने अपने राम के लिए इतना सब किया व मुझे बहुत अच्छा लगा [संगीत] क्या आपको अच्छा लगा मैं आपके लिए और बहन हनुमान श्री राम श्री राम तुमने जो कुछ भी किया वो उचित नहीं था नहीं आप क्या कह रहे हैं राम जी पिता श्री के बुलाने पर मैं अपने भाइयों के साथ जा रहा कि तुम मुझे वहां से यहां ले आए किंतु वहां आपको ना जाने कितना समय लग जाता तब तक मेरा यह रामालय पिघल जाता तो तुमने मात्र अपने बनाए हुए रामालय को मुझे समर्पित करने के लिए यहां ले आए हां किंतु तुमने यह नहीं सोचा मेरे पिताश्री मेरी प्रतीक्षा कर रहे [संगीत] होंगे मेरे भाई बहन क्या सोच रहे होंगे हनुमान क्या करता अपने राम जी से एकांत में अपने मन की बात करना चाहता था मैं हनुमान मैं तुम्हारा मित्र हूं ना हां अपने भाई बहनों का और माता पिता का पुत्र भी हूं और उनकी प्रजा का राजकुमार भी हां यह तो है राम जी किंतु हनुमान जब परिवार बड़ा हो तो मैं मात्र किसी एक से कैसे प्रेम कर सकता हूं मैं किसी एक का कैसे हो सकता हूं हनुमान किंतु राम जी आप हनुमान के इष्ट है मेरी आराधना मेरे आराध्य के मध्य में कोई आए ऐसा नहीं होना चाहिए तुम तो हट करने लगे हनुमान नहीं राम जी मैं हट नहीं कर रहा [संगीत] हूं [संगीत] विश्वरूपम महा रूपम राम प्रभु जगदीश्वर सृष्टिकर्ता सर्व हरता जगत पालक प्रणाम हम भक्त को देने गीता ज्ञान विश्वरूप प्रकट भगवान परम अमोन महा हितकारी राम की गीता मंगलकारी मुख हो दरश करे हनुमान उनके सुख का क्या अनुमान धन्य राम बजरंगी धन्य ऐसा बड़भागी को अन ये गाधा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान हनुमान सूर्य प्रकाश बांटने में भेदभाव नहीं करता वायु सबके लिए समान रूप से प्रसारित होता है मेघ जब वर्षा करते हैं तो यह नहीं सोचते कि किसी विशेष स्थान पर ही जल बर यह प्रकृति के रूप में ईश्वर का संदेश देते हैं कि सबको समान भाव से देखो स्वात रहित प्रेम हेतु रहित दया आकांक्षा से रहित मित्रता ही भक्ति है हनुमान मैं जितना अपने परिवार का हूं प्रजा का हूं और संसार का हूं कुछ नहीं मैं तुम्हारा भी हूं हनुमान जो भक्ति ईश्वर को संसार के लिए मुक्त ना करके अपने आप को बंधन में डाल दे वो भक्ति हीन होती है भक्ति का अथ स्वयं का कल्याण नहीं सबका कल्याण होता है हनुमान यही बड़पन है मुझे क्षमा करें दशरथ नंदन राम जी मैंने आप पर एकाधिकार समझकर भूल कर दी मुझे क्षमा कर दीजिए किंतु हनुमान का आपसे एक निवेदन है कि आप सदैव इसी रूप में रहे मैं आपको सदैव इसी रूप में देखना चाहता हूं और आपको पूछना भी चाहता हूं आप इस देव रूप में बड़े ही मनमोहक लग रहे हैं हनुमान ऐसी अनुचित प्रार्थना क्यों कर रहे हो इससे मेरी मर्यादा तो भंग होगी मेरे मां के दिए हुए आदेश का उल्लंघन भी होगा मान मुझे मेरी मां ने कहा था कि हमेशा मानव रूप में रहना तुम मुझे दुविधा में मत डालो मैं तुम्हारी यह इच्छा पूर्ण नहीं कर पाऊंगा हनुमान मैं अपने मां को दिए हुए वचन से बध [संगीत] हूं क्या माता कौशल्या को दिया हुआ वचन हां हनुमान जब मेरा जन्म हुआ था उस समय मैंने अपनी मां को वचन दिया था नर रूप में रहने का और अपनी शिशु लीला से उन्हें आनंद रखने [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] का मेरा [संगीत] [संगीत] लाल यह क्या होने लगा य कैसे विचित्र लीला है [संगीत] प्रभु [संगीत] प्रभ नारायण प्रणाम प्रभु यह क्या कर रही हैं आप जननी है आप मेरी मैं आपका पुत्र हूं पुत्र का स्थान मां के चरणों में होता है य समस्त संसार आपकी इच्छा मात्र से संचालित होता है प्रभु आप समस्त माया से परे समस्त गुणों का धाम है आप मुझ पर कृपा करने के लिए प्रकट हुए माता मानव लीला करने और जगत के कल्याण के उद्देश्य से मैंने सूर्यवंशी महाराज इवाक और महा प्रतापी महाराज रघु के कुल में जन्म लिया है मेरे रूप में आपकी और पिता श्री दशरथ की पूर्व जन्म की तपस्या फलित हुई है धन्य भाग मेरे जो आपने मुझ पर य उपकार किया एक जवर इस अनंत कोटि ब्रह्मांड के स्वामी आप मेरे पुत्र के रूप में मानव लीला करने के लिए आई तो मुझे मात का सुख प्रदान कर मैं अपने का पालन पोषण करके अपनी संपूर्ण ममता उस पर लुटा देना चाहती लिए य देवता रूप सए [संगीत] प्रभु नर रूप धारण करके अति प्रिय लगने वाली शिशु लीला कीजिए प्रभु एवं मुझ संपूर्ण नारीत्व का सुख प्रदान करने की कृपा की कृपा नहीं माता आपका निवेदन आदेश है मेरे लिए मैं वचन देता हूं आपको आपने जैसा कहा है वैसा ही [संगीत] होगा मां को दिया हुआ वचन तो सर्वोपरि होता है अब मैं आपको ऐसा करने को कभी भी नहीं कहूंगा जिससे आपकी मां के आदेश का निरादर हो अब तो जब आपकी इच्छा हो तभी आपके मरूप के दर्शन [प्रशंसा] हो हनुमान आपकी दी हुई सीख भी स्मरण रखेगा कि भगवान मात्र एक भक्त के नहीं होते सबके होते हैं तो फिर यह भी सोचो हनुमान आयोध्या में सब मेरे लिए कितने चिंतित होंगे तुमने मुझे यहां लाते समय किसी को कुछ बताया भी [संगीत] नहीं वहां सब मेरी वजह से ही चिंतित होंगे इससे पहले कि उनको और चिंता हो मैं आपको शीघ्र वहां ले चलता [प्रशंसा] [संगीत] हूं ओहो इतने सुंदर फल इन्हें देखकर तो शुदा बढ़ने लगी किंतु रुक तो सकता नहीं अपने राम जी को भी तो शीघ्र ही अयोध्या पहुंचाना [संगीत] है यह फल तो बड़े ही स्वादिष्ट होंगे शुधा तो लग रही है किंतु अयोध्या पोस्ट में विलंब हो [संगीत] जाएगा राम जी आप भी उन फलों को ही देख रहे हैं ना वो फल बहुत ही मीठे और रसीले होंगे आपको भी आपकी सता रही होगी ना बहुत अधिक किंतु अभी हमें शीघ्र आयोध्या पचना हो राम जी हनुमान दुगने वेग से आपको अयोध्या बहुत शीघ्र ही पहुंचा देगा ना नहीं जा सकता ना समय की हानि नहीं होगी राम अब तो हनुमान को भी शुधा सताने लगी है हनुमान काज से राम प्रभु श्री प्रभु श्री राम जय हनुमान [संगीत] राम [संगीत] जी राम जी पके हुए फल नीचे गिरे होंगे मैं अभी आपके लिए फल लेकर आता हूं आप वहां [संगीत] चलिए [संगीत]

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

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