Thursday, 1 January 2026

महादेव ने हनुमान को क्या आदेश दिया था NirbhayWadhwa Mahabali Hanuman Episode 205 Pen Bhakti

[संगीत] आपको ज्ञात भी है किसी की संतान को मोल लेने का विचार मन में लाना भी पाप का बागी बना देता है मनुष्य को जो ऐसा करता है उसे एक दिन उसका दुष्परिणाम भोगना ही पड़ता है यदि आप कहे तो मैं इसका बोल दे दूंगी क्षमा वैद राज जी क्षमा सत्य कह रहे हैं आप संतान चाहे किसी की भी हो परंतु मनुष्य का मोल लगाना बहुत बड़ा पाप है मेरे मस्तिष्क पर पुत्र मोह का आवरण पड़ गया था कुछ क्षणों के लिए मैं अपने कहे हुए शब्द वापस लेती हूं मुझे आशा है कि एक मां से हुई इस भूल को आप क्षमा [संगीत] करें मां है ना हनुमान की मां भी अपने पुत्र की प्रतीक्षा कर रही [संगीत] होगी प्रणाम ऋषि प्रणाम कल्याण मन में जब भी अंधकार छा जाता तो हमारे आशा की ज्योति मात्र आप ही दिखाई देते [संगीत] हैं देखिए रो रोक मेरा सुना आज हनुमान को पुकार रहा है मेरा हृदय तड़प रहा है मेरे हनुमान की ऋषि मेरे हनुमान को वापस पाने का कोई तो उपाय [संगीत] बताइए शांत हो जाओ शांत हो जाओ शांति तो मुझे तभी मिलेगी जब मुझे मेरा पुत्र मिल जाएगा उसे पाने के लिए मैं कुछ भी करने को तत्पर हूं भले ही इसके लिए मुझे अनिमेश व्रत से भी कठोर त करना पड़े मैं इस विषय में कुछ नहीं कर [संगीत] पाऊंगा ऐसा मत कहिए ऋषि आप तो महायोगी है त्रिकाल दर्श हम तो सब कुछ कर सकते यह देवताओ का का और देव के कार्य में हस्तक्षेप करना तुम्हारे लिए ही नहीं बल्कि हनुमान के लिए हकारी स हो सकता है क्षमा ऋषिमा किंतु मुझे और कुछ नहीं बस अपना पुत्र चाहिए आप बस किसी भी प्रकार मेरे सुने आचल को भर [हंसी] दीजिए पुत्री मैं तुम्हारी समझ सकता किंतु तुम्हें स्मरण होना चाहिए कि तुमने हनुमान को दान में दे दिया है और दान में द हुई वस्तु से अभिलाषा नहीं रखनी चाहिए तुम्हारे लिए यही उचित होगा पुत्रे की हनुमान को वापस पाने के उपाय ढूंढने के स्थान पर हनुमान की कुशलता की कामना कर आगे वही होगा जो जो महादेव की इच्छा [संगीत] यह भी सुमेरू के राजकुमार है वानर नरेश केसरी पुत्र राज जी मेरे प्रेम में पढ़कर मेरी तीनों ही मां अक्सर ऐसी ही भूल कर देती है मां की और से मैं शमा प्रार्थी [संगीत] हूं मां वेदराज जी उचित कह रहे हैं आप तो मात्र मेरे बारे में ही सोच रही [संगीत] थ आप ऐसे कैसे हनुमान को रोक [संगीत] लेंगी नुमान से भी तो पूछिए कि उसकी इच्छा क्या [संगीत] है [संगीत] बोलो मित्र हनुमान तुम्हारी क्या इच्छा [संगीत] है मेरे साथ यहां रुकने की या अपने मां के पास जाने [संगीत] [संगीत] की बोलो हनुमान क्या इच्छा है तुम्हारी मारुती की मां मारुती से बहुत प्रेम करती है मारुति के बिना मां का कहीं मन ही नहीं लगता मां पिता श्री राम राम हमारे पुत्र में जो राम नाम बस गया है उसका इसके साथ क्या संबंध है तुम्हारे पुत्र का जन्म विष्णु अवतार श्री शीराम की सहायता के लिए हुआ है अपार शक्तियां अपार दायित्व लेकर आती है पुत्र तुम्हे इन शक्तियों का सम्मान करना सीखना होगा और तुम्हारी शिक्षा का मूल उद्देश्य है तुम्हारे आराध्य को मिलना मां ने मुझे कर्तव्य निभाने की सीख दी थी और यही कहा था कि मेरी शिक्षा का उद्देश्य है मेरे आराध्य से मिलना यही है मेरा कर्तव्य और हनुमान के कर्तव्य पद से हट जाने से मां को दुख [संगीत] होगा मुझे भी आपसे मिलग होने की बात सोचकर तो हनुमान भी आकुल हो उठा है इसीलिए अब आप ही हनुमान का निर्णय कीजिए आपका निर्णय मुझे स्वीकार होगा जय हनुमान जय रघुवर राम जय हनुमान जय रघुवर राम जय हनुमान जय रघुवर राम प्रभु श्री राम जय हनुमान प्रभु श्री राम जय हनुमान प्रभु श्री राम जय हनुमान प्रभु श्री राम किसी को कुछ कहन राम बिना हनुमान [संगीत] अधूरे आप दोनों के मन देखकर मैं समझ गया कि क्या करना उचित [संगीत] होगा राजकुमार राम अब से हनुमान आपके ही सानंद में रहेंगे मैं जब तक लौट कर नहीं आता तब तक हनुमान यही रुक सकता [संगीत] है [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान मंगल भवन अमंगल हारी उमा सहि जही जपत पुरारी जिसका जिस पर सत्य सनेह मिले उसे वो नहीं संदेह राम प्रभु की सरल कामना शिवजी रखते उनकी गरमा मारुती मनने गया भाव भर राम मुदित हनुवंत को पाकर धा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान [संगीत] हनुमान अपनी के लिए आकुल हो रहे हो चिंता मत करो मैं तुम्हारी माता जी को तुम्हारी कुशलता का संदेश दे [संगीत] दूंगा अब चलने का समय आ गया हमें आगे [संगीत] दीजिए [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] प्रणाम अब तो हनुमान को अपने राम से जी भर के बातें करने का अवसर मिलेगा चलिए ना राम भैया चलिए राम के लिए जाते [संगीत] हैं हे मा ललिता आपसे भी तो कुछ नहीं छुपा है मेरा हृदय तड़पता रहेगा अपने पुत्र के वियोग में फिर भी आपसे एक विनती अवश्य है मेरा पुत्र जहां भी रहे सुख से रहे हर दुख से बचा ना [संगीत] मा राम भैया आज अपने र का दही चरा मेरे हाथों से खाओगे ना दही चिड़ा हां क्यों नहीं खाऊंगा वो तो मुझे बहुत पसंद है राम जी को दही चुड़ा बहुत अच्छा लगता है मैं लेकर आता हूं [प्रशंसा] [संगीत] तेरी उछल कुद य अत्याधिक दिन नहीं चलने दूंगी वार [संगीत] बालक राम जी को प्रसन्न करने का यह अवसर तो गया आज [संगीत] से हनुमान राम भैया इतने दिनों से हम मंदिर भी नहीं गए आज चलते हैं एक साथ भगवान को पुष्प चढ़ाएंगे बड़ा आनंद आएगा पुष्प हनुमान शीघ्र जाकर पुष्प ले आएगा पूजा के [संगीत] लिए [संगीत] [संगीत] आहो भरत भैया तो पहले से ही पुष्प ले आए हैं इस प्रकार तो मुझे राम जी के लिए कुछ करने का अवसर ही नहीं मिलेगा ना ही मैं उनसे कोई बात कर पाऊंगा सब घेरे रहते हैं इन्हे [संगीत] तो हनुमान आओ मित्र तुम भी पुश चढ़ाओ भगवान [संगीत] को राम [संगीत] राम [संगीत] [संगीत] राम राम भैया मैंने आपके लिए कुछ बनाया है आइए दिखाता हूं [संगीत] चलो क्या करूं हनुमान तो अपने राम जी से मिल ही नहीं पा रहा है क्या करूं मैं कुछ तो करना होगा [संगीत] मा यह क्या [संगीत] है यह देखिए राम भैया यह पुष्प सूर्य और स्वास्तिक आपको समर्पित है मैंने और किकवी ने बनाया है आपके लिए [संगीत] बरा अच्छा तो भरत भैया ने बहन किकवी के साथ मिलकर यह पुष्पों से सूर्य एवं स्वस्तिक बनाया है आपको अच्छा लगा ना राम भैया वा बहुत अच्छा लगा [संगीत] भरत बहुत अच्छा [प्रशंसा] लगा राम जी हनुमान को आपसे कुछ कहना है आपके लिए कुछ करना है आप बताइए ना आपको क्या क्या अच्छा लगता है हनुमान हमें सब जत है राम भैया को क्या अच्छा लगता है हां राम भैया मैंने और शत्रुगन ने भी आपके लिए कुछ बनाया है हां राम भैया आइए दिखाते हैं [प्रशंसा] [संगीत] आपको चलिए [संगीत] [प्रशंसा] भैया पुन चले गए मैं कैसे मिलू राम जी से कोई अवसर ही नहीं मिल रहा [संगीत] [संगीत] है हम तुझसे मिलकर ही राम की उदासी दूर हुई है वानर देखती हूं तू कैसे रहता है नर के साथ तुझे शीघ्र ही यहां से विदा करने की व्यवस्था करती [संगीत] हूं राम [संगीत] जी राम जी क्या कर रहे हो हनुमान एक और हो जाओ हम राम भैया को कुछ शेष दिखाने के लिए ले जा रहे हैं जो हमने स्वयं बनाया [संगीत] [संगीत] है सभी ने राम जी को प्रसन्न करने के लिए कुछ ना कुछ बनाया मुझे भी राम जी को प्रसन्न करने के लिए कुछ ना कुछ बनाना ही [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] होगा [संगीत] आ

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