[संगीत] [संगीत] ये क्या हो रहा है [संगीत] पृथ्वी में कंपन हो रहा है समस्त संसार में जैसे हलचल सी मची हुई [संगीत] है परंतु फिर भी प्रतीत हो रहा है जैसे कोई असाधारण सुंदर और महान कार्य हो रहा [संगीत] हो री हां प्रिय यह जो कांड घटित होना आरंभ हुआ है यह सुंदर कांड है सुंदर कांड हां देवेश्वरी सुंदरकांड के नाम से यह जगत विख्यात होगा श्री राम उन सुंदर देवी सीता को ढूंढने के लिए निकल पड़े अतुलित बल के धाम सुंदर हनुमान यह अध्याय है एक असंभव लक्ष्य को पाने की यात्रा पर निकल पड़े कपीश हनुमान की अद्भुत पराक्रम से ओ प्रोत गाथा का जो अंततः उस लक्ष्य को प्राप्त करेंगे अनेकों दुर हो परिस्थितियों पर विजय पाते हुए देवी सीता तक पहुंचेंगे जो साक्षात देवी शक्ति का रूप है जिनसे मिलकर हनुमान आत्म साक्षात्कार के प्रकाश से आलोकित हो उठेंगे इसलिए इस अध्याय को सुंदरकांड की संज्ञा दी गई है श्री राम कथा का यह अध्याय जन साधारण को समस्त कष्टों से मुक्ति दिलाकर जीवन को सरल एवं सुंदर बना देगा श्रीराम का नाम तो वैसे भी कल्याणकारी मंत्र है उनकी गाथा के साथ हनुमान का पराक्रम भी जुड़ जाए तो उसका प्रभाव समस्त विपदा और आपदाओं को समाप्त करने वाला होगा ही हां देवी आने वाले युगों में जब किसी पर कोई विपदा आएगी जैसे किसी का विवाह नहीं हो पा रहा हो कोई संतान हीन हो कोई जीविका के लिए धन का अर्जन नहीं कर पा रहा हो किसी को कोई रोग सता रहा हो किसी के परिवार में कोई अपना कर्म भूलकर भोग विलास में लीन हो या परिवार का मुख्य मदिरा का दास बनकर दुराचारी हो गया हो किसी की संतान रावण की ही भाति दुष्कर्म में लिप्त हो गई हो किसी के बने हुए कार्य बिगड़ रहे हो या किसी को पार कष्टों से मुक्ति नहीं मिल पा रही हो उनके समस्त कष्टों का निवारण करेगा यह सुंदरकांड बहुत ही अद्भुत महिमा है सुंदरकांड की इसके लिए जन साधारण को क्या करना होगा स्वामी सुंदरकांड का पाठ करना होगा सुंदरकांड का पाठ करने वाले उसे सुनने वाले उसे देखने वाले या कोई भी जीव जंतु उस स्थान पर उपस्थित सब कष्टों से मुक्त होकर मोक्ष के अधिकारी हो जाएंगे यही नहीं सुंदरकांड की पुस्तक के समक्ष दो पुष्प चढ़ाकर श्रद्धापूर्वक शीष नवाने वाले भी मोक्ष के अधिकारी होंगे उनके समस्त कष्टों का निवारण हो जाएगा [संगीत] जैसे कपीश हनुमान निकल पड़े श्री राम के कष्टों का निवारण करने के लिए प्रिय अकाल मृत्यु से भी बचाने की शक्ति है सुंदरकांड में इसका पाठ करने और सुनने वाले को मृत्यु के मुख से भी कीचक जीवित निकाल लाएगा यह सुंदरकांड तो अब हनुमान की यात्रा के साथ ही आरंभ होता है यह अद्भुत सुंदर [संगीत] कांड [संगीत] [संगीत] ओम नमः शिवाय [संगीत] ज [संगीत] [संगीत] हो जही गिरि चरण देई [संगीत] हनुमंता चला यु सोगा पाताल [संगीत] तुरंत जिमी अमोघ रघुपति करवाना ही भाति चले हनुमाना सियाराम सियाराम जय हनुमान राम सियाराम सियाराम जय [संगीत] [संगीत] हनुमान तीव्र विलक्षण गति के स्वामी जय बजरंगी अंतर [संगीत] यामी तुमरे उर में राम बसू को नहीं जग में तुम सो राम सियाराम सियाराम जय हनुमान ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान [संगीत] प्रणाम समुद्र देव आपकी यात्रा सफल हो मंगलकारी हो मंगल मूर्ति [संगीत] हनुमान ओ राम काज को चले हनुमान मेघराज दिए रसतो मान चल चर सब कपि दरस [संगीत] किए उदधि भी आशीष दिए राम सियाराम सियाराम जय हनुमान राम सियाराम सियाराम जय हनुमान ये गाथा महाबली हनुमत की रुचि कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय श्री राम जय जय श्रीराम यह अनुपम कार्य हनुमान जी कर सकते थे मेरा हृदय कहता है वे अवश्य ही सफल होंगे हनुमान की ये अद्भुत उड़ान श्री राम के कार्य के लिए की गई सबसे बड़ी सेवा मानी जाएगी हां काका [संगीत] श्री बस अब हनुमान जी के मार्ग में कोई बाधा ना आए कोई भी बाधा कोई भी विघ्न महाबली हनुमान की इस यात्रा को नहीं रोक सकता नल जय श्री [संगीत] राम अब यह विशाल पर्वत आ रहा है मेरे मार्ग में [संगीत] [संगीत] [संगीत] हनुमान जी की शक्ति के समक्ष तो बड़े से बड़े पर्वत भी कंकड़ के समान बिखर के रह जाएंगे चाहे ऐसे कितने ही पर्वत मेरे मार्ग में क्यों ना आ जाए परंतु प्रभु श्री राम के मार्ग में कोई बाधा नहीं आने दूंगा [संगीत] मैं [संगीत] पुनः आ गया यह पर्वत [संगीत] [संगीत] अच्छा तो यह मुझे रोकने का प्रयास कर रहा है तुम्हारी भुजाएं मेरा मार्ग नहीं रोक सकेंगी पर्वतराज [संगीत] शांत हनुमान शांत मैं आपका मार्ग रोक नहीं रहा हूं पवन पुत्र श्री राम भक्त हनुमान मेरा प्रणाम स्वीकार करें मैं शत्रु नहीं सेवक [संगीत] हूं हे श्री राम भक्त हनुमान आज आपके दर्शन पाकर मेरा जीवन धन्य हो गया मेरे व्याकुल नैन सदियों से आपके दर्शन की प्रतीक्षा में तरस रहे थे आज जाकर इन नेत्रों की यह साद पूर्ण हुई हे श्री रामदूत इस दीर्घ यात्रा में कुछ क्षण पर्वत पर विश्राम कर लीजिए आपकी क्लांत हुई देह स्फूर्ति से भर उठेगी हनुमान तब एक नवीन ऊर्जा के साथ पुनः आप श्री राम काज हेतु आगे बढ़ सकते हैं हनुमान राम काज में विश्राम कैसा पर्वतराज प्रभु का कार्य अविलंब पूर्ण करना है मुझे और फिर मैं आप पर विश्राम क्यों करूं मैं तो आपको जानता तक नहीं मैं मैना पर्वत हू हनुमान जी पर्वत राज हिमालय एवं माता मैना का पुत्र आपके पिता श्री पवन देव के बड़े उपकार है मुझ पर मेरे पिता श्री के उपकार वो कैसे यह सदियों पूर्व की घटना है पवन सुत जब पर्वतों के भी पंख हुआ करते थे गिद्धों की भाति आकाश में ऊंचाई तक तीव्र गति से उड़ने की क्षमता हुआ करती थी पर्वतों में उड़ने में मग्न पर्वतों को इस बात का भान तक नहीं होता कि पर्वतों के आसपास और पर्वतों पर रहने वाले प्राणियों को उनके इस प्रकार अकस्मात ही उड़ने से कोई कष्ट भी होता होगा ब गुरुदेव यह अकस्मात क्या होने लगा पर्वतों को मनुष्यों एवं अन्य जीवधारियों के कष्टों की कोई चिंता नहीं थी देवराज इंद्र से प्राणियों की यह दुर्दशा देखी नहीं गई बस बहुत हो गया इन शक्ति के मत में डूबे पर्वतों ने हम देवताओं की पूजा करने वाले मनुष्य हमें यज्ञ के द्वारा हविष्य प्रदान करने वाले ऋषियों एवं निरी प्राणियों पर बहुत अत्याचार कर लिए अब यह सब रोकना ही होगा हा देवराज उचित कह रहे हैं आप पंखों के कारण ही उन्ह उड़ने की शक्ति मिली हुई है जिसका अनुचित लाभ उठाते हुए य कभी भी अकस्मात ही उड़ जाते जिससे प्राणियों को बहुत कष्ट हो रहा है सत्य कहा शनि दे त भी अपना प्रभाव नहीं डाल पाती इन विशाल पर्वतों के उड़ने के कारण मेघ छिटक कर इधर उधर बिखर जाते हैं जिसके कारण कहीं तो बाढ़ आदि आ जाती है तो किसी स्थान पर सूखा और अकाल की स्थिति उत्पन्न हो जाती है [संगीत] हा मनुष्य एवं प्राणियों की क जैसे दिखाई नहीं दे रहे यह अन्याय और नहीं हो होने दूंगा मैं इन पंखों के कारण ही ये पर्वत इतने अभिमानी हो गए अब इन्ह पंख बहीन करना ही [संगीत] होगा फिर क्या हुआ देवराज इंद्र ने क्या किया महाबली इंद्रदेव को रोकना तो किसी के लिए भी संभव नहीं था हनुमान [संगीत] इन पर्वतों को यह भी चिंता नहीं है कि मैं देवराज इंद्र इनके मार्ग के मध्य खड़ा हूं ये बिना रुके स्पर्धा करते हुए आगे ही बढ़ते आ रहे [संगीत] हैं बचाओ बचाओ अरे रक्षा करो कोई बचाओ बस पर्वतो बहुत हो गया तुम्हारा य अत्याचार उड़न शक्ति के मध में चूर पर्वतों तुम जो यह विनाश लीला की क्रीड़ा कर रहे हो इसका दंड तुम्हें अवश्य मिलेगा [संगीत] [संगीत] ब मेरे दंड से नहीं बच सकते तुम पर्वतो किंतु आपके पंख तो अभी भी सुरक्षा आपके पिता श्री वायु देव की उदारता के कारण ही मेरे पंख कटने से बच गए हनुमान रक्षा कीजिए वायु देव रक्षा कीजिए इंद्र देव के प्रकोप से मेरी रक्षा कीजिए वायु देव प्रकट होइए प्रकट होए वायु देव प्रणाम वायु देव पर्वतराज हिमालय पुत्र मेना तुम पर्वतों के अत्याचार और ना हो लिए इंद्रदेव अब तुम पर्वतों को पंख विहीन किए बगैर नहीं रुकेंगे वायदे जब वो क्रोध में आकर मेरी ओर बढ़ रहे थे तो स्पष्ट लक्षित हो रहा था कि वे मुझे मात्र पंख विहीन नहीं करेंगे अपितु आज मेरा वध भी कर डालेंगे इसलिए मैं वहां से भाग निकला वायु देव कोई उपाय कीजिए अब इस संकट की घड़ी में आप ही मेरी सहायता कर सकते हैं वायु देव कुछ उपाय कीजिए वायु देव कुछ उपाय कीजिए शक्तियों का प्रयोग सदैव दूसरों की सहायता एवं कष्ट हरने के लिए करना चाहिए
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