Monday, 5 January 2026

श्री राम ने हनुमान को सम्मान क्यों दिया था Nirbhay Wadhwa MahabaliHanuman Episode 215 PenBhakti

[संगीत] किंतु व कौन हो सकता है जो हमारे शत्रु की सहायता कर रहा है पिशाच का साथ देकर कि राम और को तो मैं स्वयं सुला कर गई थी यहां से अवश ही मेरे जाने के बाद कोई यहां आया होगा और उसी ने य [संगीत] दुष्कनोइर [संगीत] [संगीत] आश्चर्य है एक छोटे से वानर बालक ने तुम पिशाच की यह दुर्दशा कर डाली वो भी बिना किसी रक्षा सूत्र के और ऐसे शक्तिशाली वानर के बारे में ना तो लंके ने मुझे बताया ना मंथरा ने ना युद्ध जीतने वो वानर हे तो छोटा बालक ही किंतु अद्भुत शक्ति है उसमें फिर तो कुछ करने से पूर्व उस वानर के बारे में जानना आवश्यक है जिससे कि वो पुन हमारे कार्य में बाधा ना उत्पन्न कर सके और उसके लिए मुझे लंकेश रावण के पास जाना ही होगा [संगीत] [संगीत] महाराज मैंने किसी को रक्षा सूत्र तोड़ते हुए तो नहीं देखा [संगीत] किंतु महाराज मैंने रक्षा सूत्र धरती पर प पाया तो स्पष्ट नहीं है कि रक्षा सूत्र तोड़ने का कृत किसने किया सुमन जी जी महाराज इन आसुरी शक्तियो से सुरक्षा करने हेतु हमें सुरक्षा उपायो के ऊपर विचार करना होगा जो आज्ञा महाराज कुमार युद्ध जीत राजकुमार राम की सुरक्षा के लिए आपको और सजग रहना होगा जी मंत्री जी मैं पूर्णतया सजग [संगीत] रहूंगा अयोध्या नरेश महाराज दशरथ की राजकुमार राम की के नंदन हनुमान की नश महाराज दशरथ की राजकुमार राम की जमा की जय जय महाराज आओ मित्र हनुमान मेरे समीप आओ हनुमान की ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान अवधपुरी में जय हनुमत की रामचंद्र के पर भगत की जन मन बोले जय श्री राम कण कण बोले जय हनुमान शेष अवतारी को नहीं सुहाए हर की माया समझ ना आए हर कोई चा है राम की भक्ति राम भगत में पावन [संगीत] मुक्ति मैं तो राम भैया के लिए जो कर सकता हूं वह हनुमान भी नहीं कर सकते अवसर मिलने पर मैं यह प्रमाणित भी कर दूंगा हमसे दूर ले गए थे मेरे राम भैया को केसरी नंदन हनुमान की जय राम हनुमान तुम सब इधर [संगीत] आओ [संगीत] प्रणाम माता [संगीत] ककई तुम सब चलो यहां से भोजन का समय हो गया जो आ माता ककई महारानी ककई भी ना जाने कहां से राम और हनुमान के लिए इनके हृदय में इतना प्रेम उमड़ने लगा मेरी बातों का तो कोई प्रभाव ही नहीं प पड़ता है इन पर हनुमान तुम्हें समझने में मैंने बहुत भूल कर [संगीत] दी हो सके तो मुझे क्षमा कर देना [संगीत] पुत्र माता कह गई बड़े कभी छोटों से क्षमा नहीं मांगते बड़ों को तो आशीर्वाद देना चाहिए आप मेरी मां के समान है और मां तो अपने पुत्रों को जानने में भूल नहीं [संगीत] करती [संगीत] हनुमान तुम बिल्कुल राम जैसे हो संकट मोचन वैसे ही सरल हृदय और वैसे ही सौम्य महाबली हनु मैंने सुना है कि तुम्हें लड्डू बहुत अच्छे लगते हैं तो मैंने स्वयं अपने हाथों से तुम्हारे लिए मोती चूर के लड्डू बनाए हैं अरे वाह मोती चूर के लड्डू व तो मुझे बहुत अच्छे लगते [संगीत] हैं मोती चूर के लड्डू तो लखन भैया को भी बहुत अच्छे लगते हैं नहीं मैं नहीं खाऊंगा मुझे अच्छे नहीं लगते लड्डू लखन माता कैकई ने मोती चूर के लड्डू अपने हाथ से बनाए हैं और प्रिया लखन के बिना राम कैसे खा सकते लड्डू और साथ में खाने का आनंद भी कुछ और होता है जैसी आपकी आज्या राम [संगीत] भैया महाराज दशरथ ने तुम्हे भवन में आने की अनुमति दी है राम के कक्ष में सोने की नहीं इसीलिए यही उचित होगा कि तुम अपने कक्ष में सु जाओ हनुमान कहीं किसी को बता ना दे कि मैं राम के कक्ष में थी मैंने इन्हे रक्षा सूत्र तोड़ते तो नहीं देखा किंतु यह कार्य [संगीत] मंत्रा काकी का हो भी सकता [संगीत] [संगीत] है वानर अवश्य ही तूने कोई माया की है महारानी कई कई पर तू है भी तो बड़ा मायावी [संगीत] हनुमान तुम मेरे स्थान पर बैठ गए राम भैया की दाहिनी और सदैव मैं ही बैठता हूं लखन भैया मुझे क्षमा कर दीजिए मैं जानता नहीं था रुको हनुमान लखन हनुमान हमारे अतिथि हैं और स्वयं से ज्यादा अतिथि को सम्मान देना चाहिए यही अतिथि धर्म की मर्यादा है अब जब हनुमान ने स्थान ग्रहण कर लिया है तो इन्हें यहां से उठाना अतिथि धर्म के विरोध है मैं समझ गया हूं राम [संगीत] भैया अवश्य ही तुम्हारे मस्तिष्क में कुछ मंथन चल रहा है [संगीत] मंथरा मैं यह समझ नहीं पा रही हूं युद्ध जीत उस वानर ने बताया क्यों नहीं कि मैंने ही उसे कक्ष से हटाया था वानर मंद बुद्धि होते हैं अच्छा है उसकी बुद्धि नहीं चली और तुम बच गए किंतु वह मंद बुद्धि वानर कब तक बचा पाएगा राम को पिशाच से प्रणाम राजकुमार युद्ध जीत ककई राज से आपसे कोई मिलने के लिए आया है मेरे लिए भेजो उ जी राजकुमार मैं लंका से आया हूं दशानन लंकेश का संदेश लेकर लंकेश दशानन ने आप दोनों को इसी समय लंका बुलाया है लंकेश रावण ने अवश्य ही हमें दंड देने के लिए बुलाया होगा काकी आप सबने भोजन कर लिया जब पूरा राज परिवार भोजन करेंगे तभी हम भोजन करेंगे [संगीत] राजकुमार [संगीत] क्या हुआ राजकुमार राम आप सब बैठिए मैं आपको भोजन पर दोस्ता हूं यह आप क्या कह रहे हैं राजकुमार हम कैसे यदि आप भोजन ग्रहण नहीं करेंगी तो मैं भी कुछ नहीं खाऊंगा य पहले भी कहा था नहीं राजकुमार आप तो हमारे होने वाले राजा हैं राजा को शासक नहीं सेवक होना चाहिए प्रजा की सेवा करना राजा का प्रथम कर्तव्य [संगीत] है मुझे भी तो आप सबकी सेवा करने का सौभाग्य मिलना [संगीत] चाहिए आप सत्य कह रहे हैं प्रभु प्रजा है तो राजा है प्रजा के बिना राजा कुछ भी नहीं प्रभु मैं भी आपका सहयोग [संगीत] करूंगा कदाचित तुम्हें यह जत नहीं है के प्रसन्न होकर जितना बड़ा पुरस्कार दे सकता है रावण क्रोधित होकर उतना ही भयानक दंड भी दे सकता है रावा मैंने तो हटा दिया था उस वानर को किंतु ना जाने कैसे वो वापस पहुंच गया लंकेश हम पिशाच के लिए वो संकट ही संकट था अयोध्या में एक और यग धूम्र और उस ओर उन सबके हाथों में मंत्र पूरित रक्षा सूत्र बंधे थे और उससे भी बड़ा रक्षक वो वानर था कैसे सफल होते [संगीत] पिशाच आपकी चाकन को भोजन परो सेंगे राम भैया हां राम भैया हम भी आपके साथ इन्हे भोजन [प्रशंसा] परोसें संकोच मत कीजिए इस प्रकार समझिए कि आपका पुत्र आपको भोजन करा रहा है राम राम श्री राम राम राम राम श्री राम राम राम [संगीत] राम आप नीचे मत बैठिए आप मेरा स्थान ग्रहण कीजिए राजकुमार आपकी आज्ञा मानकर हम भोजन के लिए तो मान गए किंतु आप हमें वहां बैठने के लिए मत कहिए वो स्थान आपका [संगीत] है [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] भोजन आरंभ कीजिए [संगीत] प्रभु प्रजा के लिए आपका प्रेम अद्वितीय [संगीत] है स सार सेविका कोई कितना भी बल न हो उसमें कोई ना कोई दुर्बलता अवश्य होती है यदि उस दुर्बलता पर प्रहार किया जाए तो बलवान से बलवान को धरा शही किया जा सकता है और इस वानर बालक की तो केवल एक ही दुर्बलता है उसका राज्य और उसकी मां यह क्या हो रहा है हो क्या रहा है ये राजकुमार अपने हाथों से भोजन परोस रहे है और तुम सब आनंद से भोजन ग्रहण कर रही हो लज्जा नहीं आती हा लज्जा नहीं आती तुम सबको तुम्हारे होने वाले राजा तुम सबकी सेवा कर रहे हैं यह सब तुम सबके कहने प ही कर र है ना राम तो खोले तुम्हारी बातों में आकर तुम सबकी सेवा करने लगे ंट के भागी हो तुम सब यदि सुमेरू पर संकट आ गया तो व वानर बालक एक क्षण भी अयोध्या नहीं रुकेगा समझ गए ना पिशाच तुम्हें क्या करना है समझ गया लंकेश सुमेरू पर आक्रमण उत्तम अति उत्तम एक और उस वानर बा की मां अंजना और एक और उसका मित्र किसकी रक्षा करोगे वानर पालक तुमे रू की या अयोध्या [संगीत] [हंसी] की उत्तम अति उत्तम

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

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