Wednesday, 7 January 2026

हनुमान ने असुरों को बंदी कैसे बनाया Nirbhay Wadhwa Mahabali Hanuman Episode 232 Pen Bhakti

[संगीत] [संगीत] यह तो बड़ी ही विकट स्थिति हो गई है हनुमान के लिए हम तुम्हें अंतिम अवसर दे रहे हैं वानर चले जाओ यहां से अमृत कलश तो हम लेकर ही जाएंगे यदि तुम हमारे मार्ग में आए तो अपनी मां के दुख का कारण बनोगे तुम मेरी मां ने मुझे सीख दी थी कि परिस्थितियों से भागने के सर पर उन का तटकर सामना करो मैं तुम सबका सामना करूंगा हमारा वद तो केवल नारायण के नर अवतार द्वारा ही संभव है तुम हमें अमृत कलश लेने से नहीं रोक पाओगे वानर बालक नारायण नारायण इस प्रकार कब तक भागते रहेंगे चंद्रदेव प्रणाम देवर्ष कृपया अभी मेरा मार्ग मत रोकिए शनिदेव मेरे पीछे पड़े हैं और मैं उनकी दृष्टि से बचना चाहता हूं किंतु इस प्रकार भागते रहने से बच नहीं पाएंगे आप चंद्रदेव किंतु भागने के अतिरिक्त अन्य और कोई उपाय नहीं है मेरे पास त्रिदेव ने भी सहायता नहीं की मेरी किंतु मैं जानता हूं आपकी सहायता कौन कर सकता है कौन रक्षा कर सकता है आपकी शनि देव की दृष्टि से ें अपनी मृत्यु भी दिखाई नहीं दे रही है वानर रक्ष योधा आक्रमण हनुमान मायावी अस्त्रों ने तो बांध लिया है हनुमान को वानर यह हम मायावी राक्षसों की वरदानी शक्तियों का अस्त्र फांस है इससे कोई नहीं बच सकता यह धीरे-धीरे सिमटकर सुकड़ कर तुम्हारे अस्थि पंजर को टुकड़े टुकड़े कर देगा समझाया था इसे बालक बुद्धि है वो भी वादर की नहीं समझा अब तू फुक देगा ये पास तो बड़ी ही मायावी है ना ही मैं अपनी देह को बड़ी कर पा रहा हूं ना ही छोटी कर पा रहा हूं वत प्रयास करना मूर्खता है बालक यह अंधकार हम राक्षसों को निरंतर बलवान बनाता है जब तक चंद्रमा आलोकित नहीं होता हमारी शक्ति बढ़ती जाएगी अब हम तुम्हारे नेत्र के समक्ष ही य अमृत कलश लेकर जाएंगे और तुम कुछ नहीं कर पाओगे संकट छाया अमृत घट पर अजर अमर होंगे क्या निचर चिंता में पड़ गए देवगन अमृत रक्षा उनकी उलझन रावण के बराय अस सब विकट युद्ध पर उतरे हैं अब अंजनी नंदन रक्षक है जब सफल वहां राक्षस होते कब अब कोई नहीं है हमारे मार्ग में बाधक शनिदेव आपको धन्यवाद आपने चंद्रदेव को यहां से पलायन करने के लिए विवश करके हम राक्षसों का कार्य सुगम किया है अब यह अमृत कलश हमारा है राक्षसों तुम अमृत कलश को अ भी प्राप्त नहीं कर सकोगे अमृत कलश की रक्षा करने वाला दिव्य धूम्र असुरी शक्तियों का नाशक है तुम्हें खंडित खंडित कर देगा वो दिव्य धूम्र जब तुम्हारे दे तो हमारा कोई हित नहीं कर सके तुम्हारा यह दिव्य धूमल हमारा क्या कर लेगा मात्र नारायण का नर अवतार ही हमारा त कर सकता है अरे यह क्या हो [संगीत] गया [संगीत] प्रतीत होता है यह पुनः जीवित हो उठेगा यह तो पुन जीवित हो उठ कहा था ना हमारा कोई हित नहीं कर सकता अमृत कलश तो अब हम लेकर ही जाएंगे मुझे ही कुछ करना होगा मैं राक्षसों को अमृत ले जाने नहीं [संगीत] दूंगा अब होगा अमृत कलश पर असुरों का अधिकार लंकेश अब आप होंगे अमर और सारे असुर भी होंगे अमर तीनों लोक पर होगा असुरों का राज चंद्रमा पर शनि दशा ग्रहण के समान अंधकार से आसुरी शक्तियों में असीम वृद्धि फिर भी अमृत लाने में विलंब क्यों कहीं कोई बाधा उत्पन्न ना हो गई हो हमारे रक्ष योद्धाओं के मार्ग में मैं अभी दूध भेजकर ज्ञात करवाता हूं लंकेश शवास श्री ज्ञात रहे महा पूर्णिमा पर अमृत में उबाल आएगा किंतु उससे पूर्व अमृत रावण के पास होना चाहिए जय लंकेश जय लंकेश जय लंकेश इस अस्क भास बंधन से मुक्त हुए बिना तो मैं रोक ही नहीं पाऊंगा इन असूर को क्या करूं अमृत कलश की रक्षा करने वाला दिव्य धूम्र असुरी शक्तियों का नाशक है आसुरी शक्तियों का नाशक और यह भास बंधन आसुरी है जय लंकेश जय लंकेश जय [संगीत] लके नहीं हनुमान नहीं वो दिव्य धूम्र बहुत शक्तिशाली है तुम्हें हानि पहुच सकती है मूर्ख बालक मेरा अनुकरण करेगा मूर्ख यह बवंडर मृत्यु का बांडर है यह बालक बहुत चतुर है हमें शीघ्र ही अमत प्राप्त करना [संगीत] होगा [प्रशंसा] सखा [संगीत] अब इनकी यह मायावी फास बंधन इन असुर को ही बांधे गी उचित किया तुमने हनुमान अब आपका यह मायावी शस्त्र से बंधा हुआ अस्त्र बंधन आप सभी बंधे रहेंगे इसमें दुष्ट वानर निकालो हमें यहां से निकाल तो दूंगा किंतु इससे नहीं यहां से ही निकाल दूंगा सखा दुष्ट वानर हमें मुक्त कर दो नहीं नहीं वानर बालक हमें मुक्त कर दो नहीं वानर बालक हमें मुक्त कर दो नहीं [संगीत] नहीं महाबली हनुमान की जय महाबली हनुमान की जय महाबली हनुमान की जय महाबली हनुमान की जय महाबली हनुमान की जय महाबली हनुमान की जय माताओं आप उन सब राक्षसों की चिंता मत कीजिए वह सब अपने ही मायावी भास में बन चुके हैं आप अनंत काल तक वह यूं ही आकाश गंगा में भटकते ही रहेंगे हम सब तुम्हारी आभारी है हनुमान हमारा उत्तरदायित्व तुमने निभाया है हां हनुमान इन असुरों से अमृत की रक्षा करके तुमने हमें ही नहीं सारे संसार को संकट से बचाया है तब सत्य ही तुम्हें संकट मोचन कहते हैं हनुमान किंतु माताओं मैं अपनी मां के व्रत पर आए संकट को दूर नहीं कर पाया तुम्हारी मां पर संकट हां माता प्रात काल से उन्होंने कुछ अनन जल ग्रहण नहीं किया है चंद्रदेव के दर्शन और चंद्रदेव के पूजन से ही उनका व्रत पूर्ण होना है और मुझे चंद्रदेव को भी ढूंढना है उनके विषय में तो किसी को कुछ ज्ञात ही नहीं है ना जाने कहां होंगे वो लंकेश की जय हो य बाद में पहले समाचार सुनाओ लंकेश वो वो वो वानर वानर कौन वानर वो सुमेरू वाला हां लंकेश उसने रक्ष योद्धाओं को उन्हीं के अस्त्र फास में बांध कर अंतरिक्ष में फेंक दिया है वानर वानर बालक तेरा तो अंत करना ही होगा रावण स्वयं तेरा अंत करेगा वानर बालक शांत लंकेश शांत विवेक से कार्य लीजिए दैत्य गुरु शुक्राचार्य ने कहा है कि जब तक आपको अमृत की प्राप्ति ना हो जाए आप उस वानर से दूर ही रहिए न अमृत अमृत अमृत पूर्णिमा के पूर्व अमृत रावण के पास होगा अन्यथा चंद्रलोक का विनाश और फिर मेरे मार्ग का कंटक बनने वाला बार बार वो वानर बालक उसका अंत नारायण नारायण प्रणाम देव [संगीत] [प्रशंसा] जी चंद्रदेव सुमेरू में है देवी [संगीत] रोहिनी हनुमान चंद्रदेव स्वयं तुम्हारी माता से मिलने गए हैं सत्य कह रहे हैं देवर्षी वो मेरी मां का व्रत पूर्ण करने हेतु गए हैं नारायण नारायण मैं सब जान गया हूं देवर्षी नारद नहीं उन्हें मेरी मां के पास भेजा है है ना देवर्षी माताओं [संगीत] आप अमृत की सुरक्षा और बढ़ा दीजिए और मुझे आज्ञा दीजिए मुझे भी बहुत भूख लगी है मां ने भी भोजन नहीं किया मैंने भी नहीं किया है प्रणाम प्रणाम [संगीत] देवर्ष नारायण [संगीत] नारायण अंजना क्लां से प्रतीत हो रही हो [प्रशंसा] [संगीत] अंजना प्रातः काल से अब तक ना तुमने अन्न ग्रहण किया है ना जन त्रयोदशी की रात्री इतनी कष्टदायक रही है तो पूर्णिमा तक ना जाने क्या होगा मां मेरे साथ तो आप सब है किंतु हनुमान तो चंद्र लोक गया है उसके साथ तो कोई नहीं अब तक ना हनुमान लौटा है और ना ही चंद्रदेव के दर्शन [संगीत] हुए अंजना वो देखो साक्षात चंद्रदेव [संगीत] प्रणाम च प्रणाम चंद्रदेव आप मैंने तो आपके दर्शन के लिए तीन दिवसीय व्रत का संकल्प लिया था मेरा सौभाग्य है जो प्रथम दिवस ही आप साक्षात उपस्थित हो गए मुझे ज्ञात है देवी आपका यह व्रत महा पूर्णिमा की रात्रि को मेरे दर्शन के पश्चात ही पूर्ण होने वाला है अंजना अब तो तुम चंद्रदेव के साक्षात रूप के दर्शन करके अपने त्रयोदशी व्रत को पूण कर सकती हो हां ये देवी अंजना मैं चंद्रदेव चंद्र ग्रह का अधिष्ठाता हूं किंतु ग्रहों की शांति और प्रसन्नता के लिए जो व्रत रखे जाते हैं उनकी पूर्णता गृह दर्शन से ही होती है देव दर्शन से नहीं आपका वृत भी पूर्ण होगा मेरे पूर्ण ग्रह रूप के दर्शन से तो चंद्रदेव अपने पूर्ण आकृति और तेज के साथ प्रकाशित होकर दर्शन दीजिए की बेड़ियों ने मुझे बांध रखा है केसरी जी केसरी जी देवी अंजना मैं आज की रात्रि पूर्ण आकृति एवं तेज के साथ प्रकाशित होने में असमर्थ हूं किंतु आपको किसने विवश कर दिया चंद्रदेव कोई विपदा आ गई है क्या विपदा तो है केसरी जी किंतु मैं सर्वप्रथम देवी अंजना से एक वचन चाहता हूं देवी अंजना से एक वचन चाहता हूं जिसके लिए स्वयं देवर्ष नारद ने मुझे यहां भेजा है देवर्ष नारद ने हां देवी अंजना नारायण नारायण चंद्रदेव इस समस्त संसार में शनिदेव के कोप से आपकी रक्षा करने में यदि कोई सक्षम है तो वे है इस सारे जगत में संकट हरने वाले संकट मोचन महाबली हनुमान हनुमान परंतु तो मेरे कारण यदि हनुमान को भी अब शनिदेव के कोप का भाजन बनना पड़ा तो यह अनुचित होगा देवताओं के उद्देश्य को पूर्ण करने के लिए तो हनुमान का जन्म हुआ है राम काज करना है उन्हें इसीलिए शनिदेव हनुमान को अपनी दृष्टि का भाजन नहीं बनाएंगे हनुमान ने शनिदेव को लंकेश रावन के बंधन से मुक्त कराकर उपकार भी किया है शनिदेव पर किंतु देवर्षि क्रोध विवेक को हर लेता है और शनिदेव की भी वही दशा है इस समय मुझे बचाने के लिए जो भी आएगा शनिदेव उसको अपना शत्रु समझ लेंगे यदि ऐसा हुआ भी तो हनुमान की रक्षा के लिए स्वयं त्रिदेव भी आगे आ सकते हैं किंतु हनुमान बहुत समय के पश्चात सुमेरू लौटा है हो सकता है हनुमान की मां अंजना हनुमान को आपके साथ जाने की अनुमति ना दे वैसे देवी अंजना बहुत ही भली स्त्री है सदैव सबकी सहायता के लिए तत्पर रहती हैं आपको उन्हें मनाना होगा उनसे अपनी रक्षा का वचन लेना होगा मैं आपको सारी परिस्थिति अभी नहीं बता सकता जब तक आप मुझे सुरक्षा का वचन ना दे दे देवी अंजना चंद्रदेव हनुमान के विहो में जब मेरा हृदय शोक संतप्त था तो आपने द्रवित होकर मुझे हनुमान के दर्शन कराए हनुमान मुझे प्रसन्नता होगी यदि मैं आपके किसी भी प्रकार काम आ सकूं तो कृपया आप मुझे वचन दीजिए कि आप मुझे शरण देंगी और मेरी रक्षा करेंगी चंद्रदेव आप शरणागत बनकर नहीं अतिथि बनकर हमारे साथ रहिए मैं अंजना आपकी रक्षा का वचन देती हूं किसी भी परिस्थिति में मैं अपने वचन से पीछे नहीं हटू हां चंद्रदेव आप निर्भय होकर रहे कैसा भी संकट हो हम सपरिवार आपकी सुरक्षा में उपस्थित हैं यदि आप उचित समझे तो कृपया हमें बताएं कि किस प्रकार की विपदा आई है ऐसी ही विकट परिस्थिति अब चंद्रदेव के समक्ष आ रही है ना जाने कैसे करेंगे वो इस परिस्थिति का सामना शनिदेव की दशा के प्रभ भाव से भोले बाबा यदि संकट में पड़ गए ना जाने चंद्रदेव का क्या होगा मैं आपको सारी परिस्थिति अभी नहीं बता सकता जब तक आप मुझे सुरक्षा का वचन ना दे दे देवी अंजना चंद्रदेव आपकी यह विपदा शनिदेव की दशा तो [संगीत] नहीं [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [संगीत] आ [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] आ

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