Wednesday, 7 January 2026

हनुमान ने माता के वचन हेतु क्या किया Nirbhay Wadhwa Mahabali Hanuman Episode 233 Pen Bhakti

[संगीत] [संगीत] मां पिता श्री [संगीत] प्रणाम प्रणाम चंद्रदेव देवर्ष नारद ने मुझे बता दिया था कि आप यहां आए हैं पुत्र हनुमान इतना बिल कब से प्रतीक्षा कर रही थी तुम्हारी मां वह चंद्रलोक पर राक्षसों ने अमृत पाने के लिए आक्रमण कर दिया था राक्षसों ने कहीं उन्होंने आप चिंता मत कीजिए चंद्रदेव मैंने उनके आक्रमण को विफल कर [संगीत] दिया अच्छा हुआ हनुमान कि तुम वहां थे तुम्हारा बहुत-बहुत धन्यवाद जब साक्षात चंद्रदेव यहां है तो आपका व्रत भी पूर्ण हो गया होगा ना मां हनुमान मुझे दुख है तुम्हारी माता का व्रत पूर्ण नहीं हो पाया मुझ पर शनिदेव की दृष्टि का आंशिक प्रभाव पड़ चुका है और इसी कारण में सहायता मांगने के समक्ष भी गया हम त्रिदेव पर यदि शनि दशा का योग बनता है तो हम भी नहीं बच [संगीत] सकते देवर्ष नारद के कहने पर मैं यहां सहायता की याचना लेकर आया हूं और देवी अंजना ने मेरी रक्षा का वचन दिया है हनुमान चंद्रदेव हम आपको संपूर्ण सुरक्षा देंगे किंतु ग्रहों की दशा पूर्ण निर्धारित होती है उससे कैसे कोई बच सकता है और शनि दशा भी अपने समय के अनुसार ही प्रभाव डालेगी तो फिर हनुमान या अन्य कोई इसका निवारण कैसे कर सकता है चंद्र प्रतीत होता है कि शनिदेव मेरा पीछा करते हुए यहां भी आ गए यह उन्हीं का स्वर है मेरी शनि दशा तो नियत समय पर आपको ग्रसित करेगी ही और उसके लिए मुझे आपका पीछा करने की आवश्यकता भी नहीं है किंतु आपके अभिमान ने मुझे आपको नियत समय से पूर्व दंडित करने के लिए विवश किया है और आपका दंड यही है कि आप भटकते रहे ब्रह्मांड में यत्र तत्र मैं आपको किसी की भी शरण लेने नहीं दूंगा और यदि किसी ने आपको शरण दी अथवा आपको शरण देने का फ भी किया तो वो भी मेरे कोप का भागी होगा चंद्रदेव यह उचित नहीं हो रहा शनिदेव क्रोध में महाराज केसरी और देवी अंजना को कहीं उनके कोप का भाजन ना बनना पड़े यह कैसी अग्नि लगाई है देवऋषि नारद में कहीं ऐसा ना हो कि इस अग्नि में जलकर सब कुछ भस्म हो जाए हनुमान का परिवार ही नहीं सारा सुमेरू ही कहीं संकट में ना पड़ जाए जो भीर की भात भीतर मत छुप चंद्रदेव बाहर आइए देवर्ष नारद ने कहा था कि मात्र हनुमान ही मुझे बचा सकते हैं मुझे हनुमान से अभयदान दिलवा दीजिए देवी अंजना शनिदेव की दृष्टि से तो स्वयं महादेव भी बच नहीं सके थे देवी अंजना मुझे वचन दिया था आपने देवी अंजना आपको अपने वचन को निभाना होगा मेरी रक्षा करनी होगी आपको मां वचन तो दे दिया किंतु कैसे [प्रशंसा] बाहर आइए देवी अंजना कुछ तो बोलिए कहीं आपका वचन मिथ्या ना हो जाए चंद्रदेव मेरी मां का वचन मिथ्या नहीं होगा मैं आपकी रक्षा करूंगा हां चंद्रदेव हम सब मिलकर अंजना द्वारा आपको दिए गए वचन की रक्षा करेंगे आप चिंता म की चंद्रदेव मैं जाकर शनिदेव से विनती करता हूं रुक जा शनिदेव के पास जाने से पूर्व तुम्हें भी वचन देना होगा स्थिति चाहे कैसी भी तुम मेरी आज्ञा के बिना शनिदेव से युद्ध नहीं कर और ना ही शनिदेव और चंद्रदेव के विवाद में कोई बड़ा निर्णय लोगे मेरी अनुमति के बिना आप जैसा कहेंगे वैसा ही होगा मैं वचन देता हूं ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान अनुपम मात्र भक्त हनुमान मां के वचन हमेशा ध्यान जननी वचन पूर्ति को तत्पर ऐसा पुत्र जगत से ऊपर था महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान [संगीत] हनुमान मैं भी चलता हूं तुम्हारे साथ [संगीत] चंद्रदेव मैं और अधिक प्रतीक्षा नहीं करूंगा अंतिम ससर है आपके समक्ष बाहर आइए प्रणाम चव चंद्रदेव के शरण दाता महाराज केसरी हनुमान चंद्रदेव को मुझे सौंप दीजिए अन्यथा मेरे कोप का भाजन बनने के लिए प्रस्तुत हो जाइए य चेतानी है मेरी आपको ना जाने क्या होने वाला है शनिदेव की चेतावनी का अर्थ है उनका कोप भाजन बनना मेरी चेतावनी की अवहेलना करने का अर्थ जानते हैं आप शनिदेव आपकी अवहेलना तो स्वयं त्रिदेव भी नहीं कर सकते मैं तो सिर्फ मृत्यु लोक का एक साधारण राजा हूं मैं अपने राज धर्म से बंधा हुआ हूं शरणागत की रक्षा करना मेरा धर्म है शनिदेव शनिदेव चंद्रदेव हमारे अतिथि हैं मा ने उनकी रक्षा का वचन दिया है ऐसे कैसे मैं आपको सौंप सकता हूं चंद्र को हनुमान महाराज केसरी आपको ज्ञात होना चाहिए कि न्याय के मार्ग में बाधा डालने वाला भी दंड का भाग ी होता है उचित होगा कि आप मेरे और चंद्रदेव के मध्य ना आए क्योंकि जो भी चंद्रदेव कोई रक्षा करने का प्रयत्न करेगा उसका विनाश होगा विनाश होगा अब स्वयं महादेव भी चंद्रदेव की रक्षा नहीं कर सकते परंतु शनिदेव कोई किंतु परंतु नहीं उचित होगा कि आप चंद्रदेव को मुझे सौप दे अन्यथा परिणाम बहुत भयानक होगा चंद्रदेव की रक्षा का प्रयत्न आपको और आपके पिता को मेरे कोप का भागी बना देगा क्षमा करें शनिदेव शरणागत की रक्षा करना हमारा प्रथम धर्म है और सबसे बड़ा कर्तव्य है धर्म और कर्तव्य निभाते हुए परिणाम की चिंता नहीं की जाती हनुमान [संगीत] हनुमान शरणागत कह देता जही निज अन हित अनुमान ते नर पावर पाप मय ते नहीं बिलो कत हानी यह तो सुमेरू और अंजना के परिवार के लिए संकट उत्पन्न हो गया द्वारिकाधीश चंद्रदेव को शरण देने का अर्थ है शनिदेव के कोप का भाजन बनना यह सत्य है प्रिय किंतु यह भी सत्य है कि इस संसार में शरणागत की रक्षा करना मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म है अतिथि देवो भवा जो आसन्न संकट के भय से शरणागत की रक्षा नहीं करता वह पाप का भागीदारी होता है नहीं हनुमान और महाराज को शनि देव कोप का भाजन कैसे बना सकते हैं अंतिम अवसर दे रहा हूं तुम्हें हनुमान चंद्रदेव को भवन से बाहर निकालो अन्यथा यदि एक बार मेरी दृष्टि उठ गई तो कोई नहीं बचा सकेगा ना तुम्हें और ना ही तुम्हारे पिता को शनिदेव शनिदेव शांत शनिदेव शांत ऐसा मत करिए आप तो न्याय के देवता है और न्याय के अनुसार शरणागत की रक्षा ही सर्वो परी बस देवी अंजना आपका वह शरणागत मेरे दंड का पात्र है शनिदेव मैंने चंद्रदेव का व्रत रखा है और उन्हीं ने स्वयं मुझसे रक्षा का वचन लिया है अब मैं वचन को कैसे तोड़ूं देवी अंजना चंद्रदेव को मेरी दृष्टि से कोई नहीं बचा सकता वज्र के समान कठोर रक्षा कवच भी बन जाए आपका ये वचन फिर भी चंद्रदेव की रक्षा नहीं हो पाएगी देवी अंजना चंद्रदेव तो मेरे कोप के भागी बनेंगे ही किंतु उनकी रक्षा करने के प्रयास का दंड आप ही नहीं ये सारा सुमेरू भोगा भोगा तब आपको आभास होगा कि क्या है शनिदेव के कार्य में हस्तक्षेप करने का दंड भूले अपना धर्म नेशर भीषण विपदा अब सुमेरू पर भारी को विकट दुखदाई जय जय जय हनुमान गोसाई ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाब हनुमान देवी अंजना अब आपका चंद्र पूजन का व्रत भी अपूर्ण रह जाएगा आप ऐसा नहीं कर सकते शनिदेव तुम कुछ नहीं करोगे तुमने मुझे वचन दिया है यदि आपने मेरा कहना नहीं माना तो हनुमान को दिया हुआ मेरा वरदान मैं वापस ले लूंगा मेरा आशीर्वाद है तुम्हें जो भी तुम्हारे नाम का स्मरण करेगा व शनि दशा से हमेशा के लिए मुक्त रहेगा अब एक और आप साहब और आपका यह सुमेरू है और दूसरी र है चंद्रदेव [प्रशंसा] अब निर्णय आपको करना है कि आप किसकी रक्षा करेंगे चंद्रदेव आप जब तक मेरे समक्ष नहीं आते मैं अपने कोप का प्रभाव प्रतिपल आप पर बढ़ाता रहूंगा आपकी रक्षा मुझसे कोई नहीं कर सकता चंद्रदेव कोई नहीं आंधियों से बड़े-बड़े वृक्षों को भी झुकना पड़ता है जो नहीं झुकते वह उखड़ जाते हैं शनिदेव की दृष्टि की आंधी के समक्ष महाराज केसरी और इनका परिवार यदि नहीं झुके तो इन्हें टूटने में समय नहीं लगेगा यह मेरी रक्षा नहीं कर पाएंगे शनिदेव की दृष्टि से यह मुझे सौंप देंगे शनिदेव को [संगीत] [प्रशंसा] व्रत के कारण मां की शक्ति क्षण होती जा रही है यदि आज रात्रि भी चंद्रदेव उधत नहीं हुए तो मां को बहुत कष्ट होगा मुझे चंद्रदेव से उधत होने के लिए विनीति करने ही होगी [संगीत] अब और विलंब नहीं कर सकता [संगीत] मैं प्रणाम प्रणाम चंद्रदेव यह लीजिए महादेव का प्रसाद जब स्वयं महादेव मेरी रक्षा ना कर सके तो यह प्रसाद बचाएगा मुझे शनिदेव की दृष्टि से मुझे तो प्रतीत होता है कि आप सब भी मेरी रक्षा नहीं कर पाएंगे हम पूर्ण प्रयास करें चंद्रदेव प्रयास करने से नहीं हो जाएगी मेरी रक्षा आप सबने वचन दे तो दिया मुझे किंतु वचन निभाने की स्थिति और सामर्थ्य दिख नहीं रहा है मुझे चंद्रदेव हनुमान करेगा अपनी मां के वचन की रक्षा आप निश्चिंत रहे चंद्रदेव मेरी आपसे एक विनती है कि आज की रात्रि को आप चंद्रलोक में आलोकित होकर मेरी मां को दर्शन दीजिए मेरी मां ने कल से अनन जल ग्रहण नहीं किया है मां की शक्ति क्षीण हो जाएगी मैं तब तक आलोकित नहीं हो सकता जब तक मेरी शनि दशा से रक्षा नहीं हो जाती बहुत क्रोधित दिखाई दे रहे हैं शनिदेव मेरा यह क्रोध चंद्रदेव एवं उनको शरण देने वालों को दंडित करने के उपरांत शांत होगा [प्रशंसा] देवराज आप जो कार्य करने के लिए उद्धत है शनिदेव क्या वो न्यायोचित है न्यायोचित है देव गुरु अपराध करने वाला और अपराधी का साथ देने वाला दोनों ही दंड के पात्र होते हैं अपनी न्याय दृष्टि पर पड़े अहंकार के इस आवरण को उतार कर देखिए शनिदेव यह जगत के लिए उचित है या अनुचित शनिदेव अमृत की सुरक्षा का दायित्व है चंद्रदेव पर आपका य क्रोध अनर्थ का कारण बन सकता है बुद्धदेव यदि आप अपने पिता का पक्ष ना ही ले तो ही उचित होगा शनिदेव उचित तो यह होगा कि आप अमृत की सुरक्षा एवं जगत के हित के लिए चंद्रदेव पर अपना कोप कम करें देवी अंजना और उनका परिवार पूर्णत निर्दोष है इसलिए देवी अंजना और उनके परिवार को एवं सुमेरू वासियों को आप अकारण ही दंड ना दे अकारण नहीं कारण है देवराज मेरे न्याय कार्य में विघ्न डालने का दु साहस किया है उ लोग ने अब यदि शीघ्र ही उन्होंने चंद्रदेव को मुझे नहीं सौंपा तो मेरे कोप का भाजन बनना पड़ेगा उन्हे भी किंतु शनिदेव महाराज केसरी या उनके परिवार से आप शत्रुता ना ही करें तो उचित होगा अग्निदेव यद यह बात आप देवी अंजना को समझाएंगे तो उचित होगा उन्होंने कैसे चंद्रदेव को मुझसे रक्षा करने का वचन दे दिया अब ना ही उनका यह वचन पूर्ण होगा और ना ही [संगीत] व्रत और आप सबके लिए भी यह उचित होगा कि आप इस प्रकरण में ना पड़े कहीं मेरे कोप का भाजन आप सबको भी बनना ना पड़ जाए रक्षा करेंगे चंद्रदेव की अब देखना कैसे मैं चंद्रदेव पर अपनी शनि दशा का प्रभाव बढ़ाता हूं चंद्रदेव धीरज रखिए सब ठीक हो जाएगा हनुमान सबके संकट हरता है कैसे रखू धीरज मुझे तो विश्वास हो चला है कि आप सब मुझे शनिदेव को सौप देंगे जब शनिदेव आप सबको सुमेरू पर कुपित होने की चेतावनी दे रहे थे तब आपको अपना वचन स्मरण नहीं रहा तब सबके संकट हरने वाला आपका यह पुत्र क्यों शांत रह गया मैंने ही रोका था उसे चंद्रदेव शनिदेव के कोप के भय से भय जब किसी प्रकार का भय था तो आपने मुझे वचन ही क्यों दिया हम अंजना का दिया हुआ वचन हर परिस्थिति में निभाएंगे चंद्रदेव आप विश्वास कीजिए कैसे विश्वास करूं मैं आप सबको शनिदेव से भय लगता है भूल मेरी ही थी जो मैं यहां पृथ्वी लोक पर सहायता मांगने चला आया वो भी तुच्छ वानर कुल में तु वानर कुल में

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