Tuesday, 6 January 2026

हनुमान जी को माता सीता का दर्शन मिला Nirbhay Sankat Mochan Mahabali Hanuman 387 Pen Bhakti

[संगीत] इतनी कड़ी सुरक्षा पग पग पर अस्त्र शस्त्र से सुसज्जित राक्षसिस हम अवश्य सीता माता यही कहीं [संगीत] [संगीत] है यदि माता सीता यहीं पर है तो मैं अब भी उनके दर्शन प्राप्त करने में असमर्थ क्यों हूं कैसा मूर्ख वानर हूं मैं मैं इतने समय से यही विचार कर रहा हूं कि मैं माता सीता को ढूंढू मैं उनका पता लगाऊंगा मैं मैं उनको प्रभु श्री राम का संदेश दूंगा मैं यह करूंगा मैं वो करूंगा परंतु इस मैं मैं के विचार में हनुमान तो यह भूल ही गया कि माता की इच्छा के बिना उनके दर्शन प्राप्त करना असंभव है भक्ति में दम और अभिमान का कोई भी स्थान नहीं है हनुमान मुझे माता सीता का ध्यान कर भक्ति भाव से उनके शुभ दर्शन प्राप्त करने की प्रार्थना करनी [संगीत] चाहिए [संगीत] हे माता सीता इस श्री राम सेवक प्रभु के इस तुच्छ दूत को दर्शन देने की कृपा करें ताकि यह सेवक अपने प्रभु के काम आ सके मुझे कोई संकेत देकर अपने समीप बुलाइए माता हनुमान को अपने शुभ दर्शन दीजिए [संगीत] माता [संगीत] [संगीत] हनुमान धन्य हुआ माता आपके अलौकिक दर्शन प्राप्त कर मेरा रोम रोम पुलकित हो गया है माता आपके समान शीलवान और दिव्य आभा से मंडित और कौन हो सकता है माता आपके दर्शन से मेरा व्याकुल हृदय शांत हो गया है माथा निराशा उल्लास में परिवर्तित हो गई है आपके दर्शन के लिए आतुर इस तुच्छ राम भक्त को दर्शन देकर आपने मुझे कृतार्थ कर दिया है माता मेरा जन्म सफल हुआ आपको मेरा शत शत [संगीत] प्रणाम दिव्य प्रकाश पुंज कपी देखी तरु की ओट बैठी बै [संगीत] देही हनुमत डाल बसे एक छोरा मात को देखे भाव वि भोरा सियाराम सियाराम जय हनुमान राम सियाराम सियाराम जय [संगीत] [संगीत] हनुमान आनंद छटा नयनाभिराम मन ही मन बजरंग प्रणाम [संगीत] पवन तन भए धन्य विलोचन खोज ली जानकी संकट मोचन राम सियाराम सियाराम जय हनुमान राम सियाराम सियाराम जय हनुमान ये गाथा महाबली हनुमत की रुच कर लीला राम भगत की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली [संगीत] [संगीत] हनुमान ये क्या माता इस स्थिति में मां मां मा धर्मशील मिथिला नरेश जनक की पुत्री पुण्यात्मा महाराज दशरथ की पुत्र वधु और मेरे आराध्य प्रभु श्री राम की अर्धांगिनी दुख की छाया भी सदैव जिनसे दूर रही हो आज उन्हे विरह की अग्नि में तपते हुए देखने को विवश है मेरे नेत्र नियती की कैसी क्रूर क्रीड़ा है यह उधर जल बिन मछली के भाति प्रभु श्रीराम तड़प रहे [संगीत] हैं और इधर माता सेता प्राण बिन देह के भाति कांति हीन हो गई है [प्रशंसा] [संगीत] मुझे इसी क्षण माता सीता को यह बताना होगा कि उनके स्वामी प्रभु श्री राम ने हनुमान को उनके लिए संदेश देकर यहां भेजा है [संगीत] यह क्या था यहां कोई आसपास है क्या इन राक्षस के समक्ष माता के समक्ष जाना उचित नहीं है मुझे माता के एकाकी होने की प्रतीक्षा करनी [संगीत] [संगीत] होगी यह कौन आ रही है माता सीता के निकट कहीं यह माता को प्रताड़ित ना करें देवी सीता मैं अनला दशानन लंकेश की भ्राता विभीषण की कु प्रणाम मेरी माता को ज्ञात हुआ कि आपने भोजन आदि का त्याग किया हुआ [संगीत] है अत उन्होंने आपके लिए यह शुद्ध एवं स्वच्छ फला आदि भिजवाए हैं कृपया करके इन्ह ग्रहण [संगीत] विभीषण जी की पुत्री अनला कदाचित अपने पिता श्री की ही प्रति छाया है नहीं मुझे कुछ नहीं खाना ऐसा ना कहिए देवी कुछ तो ग्रहण [संगीत] कीजिए ऐसे आप कब तक उपवास करती रहेंगी जब 10 माह से कुछ ग्रहण नहीं किया तो क्यों गहन [संगीत] कर उनकी सहृदयता के लिए उन्हें धन्यवाद कहना इतनी पीड़ा एक और विरह का दुख दूसरी और शुधा 10 माह से भोजन का त्याग सत्य है नारी की सहनशीलता की कोई सीमा नहीं माता आपकी इस तपस्या को नमन है मेरा मुझे मात्र मेरे स्वामी की प्रतीक्षा है भले ही मेरे प्राण मेरी काया क्यों ना जोड़ किंतु तब तक एक रास भी नहीं ग्रहण करूंगी जब तक मेरे स्वामी यहां आकर उस द रावन को उसकी करनी का दंड नहीं देते सीता लंकेश का नाम आदर से ले समझी देवी स ता श्री लंकेश के विरुद्ध कुछ भी कहना आपके लिए हितकर नहीं होगा लंकेश कभी भी किसी भी क्षण यहां आ सकते [संगीत] हैं [संगीत] ये ये कैसी ध्वनियां है प्रसन्नता अपने भाग्य को स्वीकार कर ले सीता सुखी रहोगी सुखी राज करोगी राज तुम्हारे भाग्य का निर्णय करने आ रहे हैं स्वयं दशानन महाराज [संगीत] रावण वो [हंसी] देखो [संगीत] लोह पर स्वर्ण की परत चढ़ा दे ने से लह स्वर्ण नहीं हो जाता तुम्हारी यह भव्यता तुम्हारी दुष्टता को नहीं छिपा सकती राक्षस राज [संगीत] रावण एक पतिव्रता नारी के समक्ष वैभव का प्रदर्शन यह प्रलोभन माता सीता को नहीं डिगा पाएगा मूर्ख [संगीत] रावण ओफ हमसे मुंह मोड़ लिया क्यों यदि रावण ने माता सीता को तनिक भी क्ति पहुंचाने का प्रयास किया तोसे क्यों भयभीत हो रही हो मिथला की राजकुमारी हम तो केवल आपको रानी बनाना चाहते हैं इसमें हमने क्या अपराध किया हां अपराध अपराध तो हुआ है किंतु व अपराध आपके इस मोह लेने वाले रूप से हुआ है अपराध आपके इन खंजन ने नों से हुआ है हे कट कामिनी गजगामिनी अपराध हुआ है तो आपके शीतलता प्रदान इस चंद्र वदन से हुआ है जिसके मोह पाश में बंधा हुआ मैं महाबले महा ऐश्वर्य शाली लंकेश पता ीचा चला आता हूं अपनी मृत्यु की ओर खींचे चले आ रहे हो तुम रावण देखो सुंदरी मैं किस किस को लाया हूं यहां केवल आपकी आपकी सेवा करने के लिए देव कन्याए यक्ष गंधर्व कन्याए यह सब मेरी भाती आपकी दास बनने को व्याकुल रही यहां तक कि पटरानी मंदोदरी भी यदि आप चाहे तो हम इन सब का त्याग भी कर सकते हैं यदि आप चाहे तो बस एक बार [संगीत] हां प्रेम दृष्टि से एक बार तो देख लो किस प्रतापी वेदों का क्या था महाबली रावण का प्रस्ताव विगत 10 माह से निरंतर ठुकराते जा रहे हैं आप और मैं मैं बेचारा [संगीत] बावला दिन रात मात्र आप के विषय के बारे में सोच रहा हूं मेरे असीम प्रेम का इतना अनादर ना करो जनक नंदिनी दुष्ट रावण तुम्हारा सौभाग्य है जो मुझे प्रभु श्रीराम ने अनुमति नहीं दी अन्यथा मैं इसी क्षण तुम्हारे इस पापी मुख से तुम्हारी जिहा निकाल लेता हमारी जीवा हर क्षण आपका ही नाम जपती रहती है हमारे हृदय में झाक कर देखिए इसके हर स्पंदन में एक मात्र आप ही बसी जत रहे य अशोक वाटिका हमें सबसे अधिक प्रिय है किंतु फिर भी आपकी कोमल सुंदरता के योग्य नहीं आपकी सुंदरता तो राज की सुख एवं वैभव प्राप्ति का योग्य है ह क्षण का आनंद उठाइए स्मरण रहे मिथिला की राजकुमारी बीता हुआ समय और जाता हुआ यो वन लट के वापस नहीं आता कोई ज्ञानी इतना पतित कैसे हो सकता है शिष्टता की सारी सीमाएं लांग रहा है यह दुष्ट अरे कैसी दैन्य स्थिति स्थिति बना ली है आपने अपनी क्षीण हुआ श्रृंगार आभूषण विहीन दे मैले हुए वस्त्र पत्थर की शैया अनवरत उपवास क्या मिला आपको यह सब त्याग करके आपको कि सब ऐश्वर्य प्राप्त करा सकता हूं सारे वैभव प्रदान करा सकता हूं जो कुबेर के स्वर्ण कोश में भी नहीं होंगे वो वस्त्र दिला सकता हूं जो इंद्र स्वर्ग में अपनी पति शची को भी ना दे सके समस्त सुख संसार के मैं आपके चरणों में डाल दूंगा विचार करिए वो वनवासी जिसके लिए आप सब त्याग करके यहां बैठी हूं उसने भला आपको दिया ही क्या है वषों का वनवास और यह लंबी प्रतीक्षा बहुत हो गया रावण यदि कुछ और कहा माता सीता या मेरे प्रभु श्री राम के बारे में तो तुम्हारे लिए उचित नहीं होगा भूल जाओ उस असभ्य नर को त्याग दो अपना हठ और मुक्त हो जाओ अपने दुखों से मेरा प्रणय निवेदन स्वीकार कर लो प्रिय और निकाल कर फेंक दो अपने हृदय से साधार नर [संगीत] को श्री राम श्री राम श्रीराम सीते सीते सीते शीख ज्ञात करो वो जानकी कहां है जिसके बिना मैं अरा हूं और हनुमान लंका में रावण की शक्ति और सेना का भेद पता कर मुझे बता श्री राम श्री राम श्रीराम श्री राम श्री राम श्री राम श्री राम श्री राम विकट और विपरीत परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखना चाहिए तभी परिस्थितियां आपके अनुकूल होंगी

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ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

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