Wednesday, 7 January 2026

हनुमान जी रावण के महल में पहुँचे Nirbhay Sankat Mochan Mahabali Hanuman 384 Pen Bhakti

[संगीत] [संगीत] यहां से तो पूरी लंका को भली भात ही देख सकता हूं [संगीत] मैं किंतु यहां तो दूर दूर तक माता सीता के कहीं उपस्थित होने की कोई संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं लंका जैसी भोग और विलास की नगरी में साधारण वेशभूषा में एक वृक्ष के नीचे उदास और चिंतित बैठी एक महिला दिखी संपाती जी ने बताया था कि माता सीता किसी वृक्ष के नीचे आसीन है मुझे किसी ऐसे भवन या राज को देखना होगा जहां आसपास कोई वृक्ष [संगीत] हो किसी वृक्ष के आसपास नहीं दिखाई दे रही है माता [संगीत] सीता उस ओर कोई वाटिका से दिखाई दे रही है माता सीता उस ओर हो सकती [संगीत] हैं य ध्वज कैसे [संगीत] गिरा स्वामी स्वामी रुकिए स्वामी स्वामी लंका पर संकट के बादल मंडराते हुए स्पष्ट दिखाई दे रहे मुझे किंतु आपको मेरी बात भ्रम लग रही प्रात सेही अब शगन के संकेत मिल रहे मुझे मा देवी चामुंडा के मंदिर में एवं बस बस मंदोदरी बहुत हो गया तुम्हारा अनकल प्रणा मेरे धैर्य की ओर परीक्षा मत लो तुम्हें अब शकुन दिखाई दे रहा है ना ठीक है मैं प्रात काल ही एक सहस्त्र अष्ट बकरों की बली चढ़ देता हूं मन की शांति अब सकन का शमन और बली से देवी चामुंडा भी [संगीत] प्रसन्न [संगीत] [हंसी] माता माता प्रणाम माता प्रणाम प्रभु माता लंका में रावण आपको प्रसन्न करने के लिए सहस्त्र अष्ट पशुओ की फली देने जा रहा है स्वयं को महा ज्ञानी समझने वाला रावण मूर्ख है उसे इतना भी ज्ञान नहीं है कि निरी एवं निर्बल पशुओं की बलि चढ़ाने से कोई भी देवी देवता प्रसन्न नहीं होते हैं देवी देवता तो तब प्रसन्न होते हैं जब भक्त अपने स्वार्थों कामनाओं निरर्थक सांसारिक सुखों और पाप कर्मों का त्याग करने का संकल्प कर सच्चे अर्थों में यही बलि होती है देवी रावण मेरा भक्त है किंतु कभी भी वह भक्ति के मर्म को नहीं जान पाया उसका दुर्भाग्य है कि उसने अनेकों वरदान मुझसे मांगे किंतु कभी भी मुझे अपने हृदय में नहीं बसा पाया हनुमान जैसे भक्त तब नहीं होते हनुमान ने बिना कुछ मांगे ही प्रभु श्री राम को अपने हृदय में बसा लिया हा देवे देखिए किस प्रकार हनुमान बिना रुके बिना अनन जल ग्रहण किए निरंतर अपने प्रभु श्री राम के कार्य को करने में लगे हुए [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] यहां तो कोई नहीं दिखाई दे रहा यहां भी नहीं है माता क्या करूं कहां ढूंढू यहां कुछ राक्षस इत्र दिखाई दे रही हैं अवश्य ही यह राक्षसिस यहां भी नहीं है माता [प्रशंसा] सीता वहां से कुछ स्त्रियों के स्वर आ रहे हैं हो सकता है माता सीता वही हो मुझे उस भवन में जाना होगा आनंद आ यहां तो राक्षस भी है इन सबकी दृष्टि से बचते हुए मुझे उस अंतिम वृक्ष तक पहुंचना होगा देखो कितनी कुरूप है परंतु बनठन कराई है जैसे सर्व सुंदरी हो सुरा और सुंदरी यहां भी नहीं है माता सीता हो सकता है कि इन दुष्ट राक्षसों की भीड़ से बचने के लिए कहीं स्वयं को छुपा के बैठी [संगीत] हो [संगीत] मक्की [संगीत] मदिरा दूषित करेगी यह मदिरा का पात्र तो मेरे ऊपर ही रख रहा [हंसी] है ये हो क्या रहा है यह मदिरा पात्र डगमगा रहा है या मैं डगमगा रहा हूं पकड़ो मधुरा पात्र को संभालो कोई शीघ्र आओ [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] जी यह क्या हो रहा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] है मूर्ख यह क्या किया पूरा मदिरा पात्र गिरा दिया क्षमा मूर्ख तूने मेरी मदिरा गिरा दी मैं तो सबसे सुंदर हूं सबसे सुंदर पूरी लंका [संगीत] [प्रशंसा] में लंका की सबसे सुंदर राक्षसी पर तुमने झूठा भोजन गिराया अी बताती हूं तुम्हे पे हसता है [हंसी] आनंद मेरा मि मेरा मिरा मेरे रा मते पावले हो गए हो [संगीत] क्या प्रणाम प्रणाम [संगीत] लंकेश लंका की सबसे सुंदर राक्षसी की ऐसी दशा करने वाले सबका दंड दीजिए महाराज किसने आरंभ किया यह सब इस मोर को दंडी ने महाराज प्रणाम महाराज लंकेश्वर की जय हो तो यही है लंकेश [संगीत] रावण महाराज दोष मेरा [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] नहीं इसका है [संगीत] महाराज कहीं सबने मुझे देख तो नहीं लिया तो इस तु नर के कारण हुआ है यह सब नर नहीं नहीं महाराज नहीं महाराज नहीं महाराज क्षमा महाराज क्षमा मुझसे भूल हो गई क्षमा बंदी बना दो इसे कारागार में डाल दो मुझसे भूल हो गई महाराज क्षमा करें नहीं महाराज नहीं महाराज नहीं और मेरा आदेश है आगामी भोज के लिए इसके अमीश से ही स्वादिष्ट भोजन बनाया जाएगा दया कीजिए महाराज कारागार में मत डालिए महाराज महाराज दया कीजिए मैं जीवित रहना चाहता हूं महाराज ले जाओ छोड़ दीजिए मेरे कारण आपको कारावास का दंड मिला हनुमान आपको कोई क्षति नहीं पहुंचने देगा तुम सब क्यों रुक गए अब निर्विघ्न अपना उत्सव पूर्ण उत्साह से बनाओ दशानन रावण के राज में कोई भी उत्सव किसी भी व्यवधान के कारण नहीं रुकेगा ंश की जय महाराज मुझे छोड़ दीजिए महाराज मुझे क्षमा कर दीजिए महाराज छोड़ दीजिए महाराज क्षमा कीजिए कारागार कहीं इस दुष्ट रावण ने माता जानकी को भी तो कारागार में बंदी बनाकर नहीं रखा हुआ है क्षमा करें मैंने कुछ नहीं किया मैं जीवित रहना चाहता हूं मुझे कारागार में मत डालिए मुझे कारागार में जाकर देखना होगा लो ले चलो श दुष्ट क्या किया तुमने छोड़ दीजिए मुझे छोड़ दीजिए मुझे कारागार में नहीं जाना यदि उस दुरात्मा रावण ने माता सीता को ऐसे जीर्ण शीर्ण भग्नावशेष में बंदी बनाकर रखा है तो संपूर्ण ब्रह्मांड में उससे बड़ा पापी और कोई नहीं होगा च क् कर दीजिए विलाप करना बंद करो और अपनी मृत्यु की प्रतीक्षा करो चलो सैनिको क्षमा महाराज [संगीत] क्षमा व उस कोने में अनेकों स्त्रियां बंधक हैं संभव है माता सीता भी वही हो हनुमान को शीघ्र वहां जाकर देखना [संगीत] चाहिए मुक्ति दिला इन सभी के नेत्रों में अतुलित वेदना दुख और संताप के चिन्ह तो स्पष्ट है परंतु किसी के भी नेत्रों में प्रभु श्री राम की प्रतीक्षा का कोई भी भाव नहीं है कोई भी आशा या उत्साह नहीं माता सीता इनमें से कोई भी नहीं हो सकती अर्थात माता सीता यहां भी नहीं है हमें आ से मुक्त कीजिए [संगीत] [संगीत] प्रभु माता सीता को ढूंढना हनुमान का परम कर्तव्य है उसे पूर्ण करने के उपरांत हनुमान अवश्य यहां लौटेगा और आप सभी को भी इस पीड़ा से मुक्त [संगीत] करवाएगा जय श्री [संगीत] राम मुझे रत्न जट कपाट वाले उन सभी सुसज्जित कक्षों में देखना होगा संभव है रावण ने माता सीता को उनमें से ही किसी कक्ष में रखा हो परंतु किसी और का ध्यान मेरी ओर आकृष्ट ना हो इसीलिए हनुमान को गुप्त द्वार से भीतर जाना होगा हो भग दशानन कनक प्रसादा हनुमत खोजत जान की माता दुर्ग विशाल के छोर अनंता विचरे कोना कोना हनुमंता राम सियाराम सियाराम जय हनुमान राम सियाराम सियाराम जय हनुमान [संगीत] द्वार सहस्त्र है कक्ष अनेका छान परंतु कपि प्रत्य का हो प्रति प्रयास लगी हाथ निराशा किंतु पवन सुत छोड़ी ना आसा राम सियाराम सियाराम जय हनुमान राम सियाराम सियाराम जय हनुमान ये गाथा महाबली हनुमत की लीलाम भगन की जय जय जय रघुनंदन राम जय जय जय महाबली हनुमान अरे वायु का यह कैसा प्रवाह है जो हनुमान को भी अपने साथ खींचे ले जा रहा है यह तो इस भयंकर राक्षस कुंभकरण के शवास का प्रभाव है मुझे अपना बचाव करना ही [प्रशंसा] होगा परंतु उसके लिए तो मुझे अपना आकार बड़ा करना [संगीत] [संगीत] होगा [संगीत] देखो असुर शिरोमणि कुंभकर्ण की निद्रा में कोई भी व्यवधान उत्पन्न नहीं होना चाहिए अरे उन्हें कहा कुछ ज्ञात होगा हम तो प्रतिदिन यह कार्य करते आए हैं आज तक वह उठे हैं कभी चलो चलो अपना कार्य करो व्यर्थ वार्तालाप में अपना समय मत गवा अब इसके मुख में प्रवेश करने से कैसे अपना बचाव करें हनुमान कार्य के मध्य सफलता के लिए छोटी से छोटी संभावना की भी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए और किसी भी परिस्थिति में आशा नहीं छोड़नी चाहिए

No comments:

Post a Comment

ॐ जय शिव ओंकारा आरती Sawan Special Om Jai Shiv Omkara हर हर महादेव Pen Bhakti

[संगीत] [प्रशंसा] ओम जय शिवा ओंकार स्वामी जय शिवा प्रभु जय शिवा ओमकारा [संगीत] ओम जय शिवा ओंकार [संगीत] [संगीत] हंसते गरुड़ तन हर...