[संगीत] अक्ष कुमार के इस घातक अस्त्र को मैं माता सीता की ओर बढ़ने नहीं दूंगा जय श्री राम [संगीत] यह वानर तो अद्भुत है यदि यह मेरी सेना में होता तो मैं ऐसे अपनी ढाल बना लेता परंतु दुर्भाग्यवश यह हमारा शत्रु है और लंकेश पुत्र होने के कारण इसका वध करना मेरा परम कर्तव्य है अनेक अस्त्र और शस्त्र का ज्ञान है इस तरुण राक्षस को कितनी कुशलता और साहस के साथ युद्ध कर रहा है इसका अतुलित पराक्रम देखकर मुझे इसका वध करने की इच्छा नहीं हो रही किंतु मुझे इसे रोकना ही होगा अन्यथा यह मेरा कार्य पूर्ण नहीं होने देगा और अब मुझे इसे पराजित करने के लिए और भी अधिक प्रभावी स्त्रों का प्रयोग करना ही [संगीत] होगा ये तो विद्युत समान वेग से मेरी ओर ही आ रहा [संगीत] [संगीत] है अब इस पर बज्रवार का प्रहार करता हूं तुम बहुत ही पराक्रमी योद्धा हो अक्ष कुमार परंतु श्री राम भक्त को रोकने का सामर्थ्य तुम में नहीं है मेरे वजों को छिन्न भिन्न कर दिया इसने तो हमें पूरा विश्वास है कि किसी भी क्षण हमारा शूरवीर पुत्र आकर हमें वह सूचना देगा कि उसने विजय प्राप्त की है उस त मान उसकी आयु ही कितनी है अभी एक किशोर के समान ही तो है वो कहीं वह मायावी वानर मेरे पुत्र अक्ष को कोई सति ना पहुंचा दे मेरा हो चलता तू इसी समय छलांग मारकर लंका पहुंच जाता जाने किस स्थिति में होंगे वीर हनुमान कहीं मित्र हनुमान किसी विपदा में तो नहीं फस गए युवराज मित्र हनुमान जिस गति से लंका की ओर गए थे उस गति से तो ने अब तक लौट आना था चिंता मत करो तुम सब मैं हनुमान को भली बाती जानता हूं उसने अपना कार्य तो कर ही लिया [संगीत] होगा किंतु भविष्य का कार्य भी सुगम बनाकर ही लौटेगा वह इसीलिए विलंब हो रहा है उसे यह तो मेरी ओर आ रहा है इसके प्रहार से मुझे बचना होगा बहुत हुई तुम्हारी क्रीड़ा वानर और मुझे यह भी ज हो गया है कि तुम्हारे हृदय में उस बंदी स्त्री के लिए अपार स्नेह और आस्था [संगीत] है और उसी के लिए तो तुम लंका में आए हो किंतु अब मैं उस स्त्री को अपनी ठा बनाकर और तुमसे युद्ध करके तुम्हें परास्त करूंगा असंभव मैं तुम्हें ऐसा नहीं करने दूंगा तुम कितना भी प्रयत्न कर लो मुझे नहीं रोक पाओगे वानर अब देखता हूं कि तुम किसे रोकते हो मुझे या इस खड़क को यदि ये खड़क मुझसे पूर्व अपने लक्ष्य तक पहुंच गया तो उसका अंत होगा यदि तुम इस खड़क को रोकने में सफल हो गए तो मैं स्वयं उस स्त्री के पास पहुंचकर उसे अपनी ढाल बना लूंगा और सर्वप्रथम मैं तुम्हारा अंत करूंगा और फिर उस स्त्री को भी काल का ग्रास बना दूंगा त्रुटि मेरी है मैं ही भूल गया था कि जिसे मैं किशोर समझकर जीवन दान दे रहा था वो है तो एक राक्षस [संगीत] ही [संगीत] अब मुझे रोक कर दिखाओ [संगीत] वानर हनुमान को इसे और इसके खड़क दोनों को ही माता सीता तक पहुंचने से रोकना होगा किस विचार में खोए हो वानर आओ रोको मुझे [संगीत] रोको रुक जाओ दुष्ट और समय नहीं है मेरे पास मुझे इस खड़क को रोकने के लिए अति शीघ्र कुछ करना होगा [संगीत] [संगीत] [संगीत] [संगीत] अत्यंत विचलित है इस मां का हृदय ज्ञात नहीं कि मेरा सुकोमल पुत्र किस अवस्था में होगा कैसे उस महा शक्तिशाली दिव्य वानर से युद्ध कर रहा [संगीत] होगा [संगीत] इतना दुस्साहस भी कैसे किया तुमने अक्ष कुमार माता जानकी को क्षति पहुंचाने का कु विचार भी कैसे आया तुम्हारे मस्तिष्क में यह अक्षम्य कृत्य किया है तुमने राक्षस कुमार माता सीता पर बार कर तुमने मुझे तुम्हारा खात करने पर बाध्य कर दिया है द उ तुम्हारा इतना साहस सर्वप्रथम तो तुम लंका में घुस आए और हमारी सुंदर वाटिका को नष्ट भ्रष्ट कर दिया और अब तुम लंकेश पुत्र अक्ष कुमार को भयभीत करने का प्रयास कर रहे हो अब जब तक मैं तुम्हारा और तुम्हारी इस माता के प्राणों का अंत नहीं कर दूंगा शांत नहीं बैठूंगा तुमने स्वयं अपने काल को आमंत्रित किया है रा श कुमार अब मेरी माता का नहीं तुम्हारा अंत होगा अक्ष कुमार मारी संघरा अक्ष कुमार मारी संघरा अक्ष कुमार मारी संधारा अक्ष कुमार मारी संधारा अक्ष कुमार मारी संधारा संरा अ कुमार म संरा अमार मा संरा अकमार मार संरा अकमार मार [संगीत] संरा [प्रशंसा] [प्रशंसा] अक्ष का कवच पता है क्यों खंडित हो रहा हैय कैसा अशुभ संकेत [प्रशंसा] [संगीत] है [प्रशंसा] [संगीत] [संगीत] [प्रशंसा] आ [प्रशंसा] [संगीत] महाराज हमारे सैनिक राजकुमार अक्ष कुमार के शरीर के इन्हीं अंगों को एकत्रित कर पाए कुछ अंग तो अभी भी नहीं मिले हैं महाराज उस वानर ने बड़ी निर्ममता के साथ इनके शरीर को टुकड़ों टुकड़ों [संगीत] में [संगीत] [संगीत] नहीं नहीं नहीं नहीं मेरा पुत्र मुझे आशंका थी मैंने उसे रोका था परंतु यहां पर तो सब पर युद्ध का उमान छाया था पुत्री मंदोदरी अपने शोक पर नियंत्रण पाओ अपने हृदय के दुख को शांत करो कैसे माता कैसे अपने हृदय को शांत करे ये मां मेरा पुत्र जिसको मैंने इतने स्नेह से पाला था उसे काल ने इतनी निर्दयता से आसा में मुझसे छीन लिया आप ही बताइए माता फिर क्यों ना विलाप करें यह मां सत्य कहती हो पुत्री संभव है जिस स्थिति में आज तुम हो कल वो मेरी स्थिति हो जिसने अपने पुत्र को निसंकोच उसके मरण हेतु दिया हो संभव है कल उसकी मृत्यु अपना दल बल लेकर लंका के द्वार पर उपस्थित हो जाए [संगीत] छीन लिया ना मुझसे मेरे पुत्र को आपने नाथ दे दी ना उसकी आहुति मिल गई अब आपके हदय को शांति कितनी विनती की थी हमने तुमसे मत भेजो अपने पुत्र को उस वानर के पास अपने क्रोध को वश में कर शांति स्थापित करो परंतु तुम अहंकार ने तुम्हारी बुद्धि भ्रष्ट कर दी है रावण अब कहो अब क्या करने जा रहे हो तुम ब्रहस्पति का हमारे गरिष्ठ पुत्र का अंतिम संस्कार की उचित व्यवस्था करो जी महाराज [संगीत] अक्ष कुमार का कोई बाण कहीं माता के निकट तो नहीं पहुंच गया कहीं माता को तो कोई हानि नहीं पहुंची [संगीत] [संगीत] है प्रभु के आशीष से माता पूर्ण सुरक्षित है अक्ष का कोई बाण उन तक नहीं पहुंच [प्रशंसा] [संगीत] सका माता अपने इस पुत्र को आशीर्वाद दीजिए कि मैं अपने उद्देश्य को अति शीघ्र पूर्ण कर अपने प्रभु श्री राम के निकट जा पहुंच और आपकी सूचना दे सकूं [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] अब कोई दुविधा कोई शंका शेष नहीं रही हनुमान के मन में इस बार जब रावण अपने किसी भी योद्धा को भेजेगा तो हनुमान को अपने पूर्ण बल का प्रयोग करना जिससे कि माता सीता को क्षति पहुंचने की कोई संभावना ही ना रहे जय श्री [संगीत] राम के चक्र को तो कोई नहीं रोक सकता गए हुए प्राण वापस नहीं लौटाए जा सकते जो बीत गई सो बात गई नाथ परंतु अपने वर्तमान के कर्मों से हम एक सुखद भविष्य का निर्माण अवश्य कर सकते धैर्य पूर्वक सुविचार कीजिए मेरी विनती स्वीकार कीजिए स्वामी आगे घटने वाली दुखद घटनाओं को रोक लीजिए [संगीत] ना [संगीत] हां पुत्र रावण इस प्रकार अपने हट के कारण अपने परिवार के साथ समूची राक्षस जाति को क्षतिग्रस्त मत होने दो पुत्र अब आगे जो भी करो सोच विचार के पश्चात करो जी हां माते अब जो भी करूंगा सोच विचार करके ही अपनी फूल को सुधार होंगा अर्थात आप देवी सीता को उनके पति के के पास वापस भेजूंगा अवश्य भेजूंगा परंतु उस सीता को नहीं भेजूंगा तो अपने परंपरा क्रमी महाबली पुत्र मेघनाथ को भेजूंगा उस दुष्ट वानर को दंत करने के लिए उस दुष्ट वानर को दंत करने के लिए उस दुष्ट वानर को ंड करने के लिए अहंकार में किए गए भूल से मिले दंड से सचेत होना चाहिए अन्यथा परिणाम और भी भयंकर भुगतना पड़ सकता है
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